रविवार, 15 जनवरी 2017

नारी के प्रमुख रोगों के लिए घरेलु उपचार


श्वेत प्रदर नाशक उपचार 
• 1. उपचार  : प्रात: काल बताशे में 5-7 बुँदे बरगद का दूध भरकर खा जाए ,ऊपर से गुनगुना गाय का दूध पी ले, दो सप्ताह में श्वेत प्रदर अवश्य ठीक हो जाता है। सेकड़ो बार आजमाया हुआ है।
• 2. उपचार  : पठानी लोंग ( फूलदार लोंग हो) बीस ग्राम बारीक पीसकर इसकी तीन पुड़ियाँ बना ले। प्रति दिन एक पुड़ियाँ ठन्डे पानी के साथ फांक ले। ऊपर से एक पका केला खा ले।





योनि में खुजली और जलन नाशक प्रयोग :
• 1. उपचार  : फिटकरी के छ : ग्राम चूरन को एक लिटर गरम पानी में मिलाये, जब पानी ठंडा हो जाए तब इससे योनि को अच्छी तरह धोये।
• 2. उपचार  : स्त्री योनि में जलन निवारण हेतु ताज़ा आंवलों का रस निकालकर शक्कर मिश्री मिलाकर पीये, ऐसा लगातार तीन दिन पीये, तीन दिनों में ही सारी जलन निकल जायेगी।
रक्त प्रदर निवारक उपचार  :
• 1. उपाय : हरी घास का रस दस ग्राम प्रात : सायं मिश्री मिलाकर पिलाने से केसा भी भयंकर रक्तप्रदर हो , शांत हो जाता है, लाभ होने तक इस प्रयोग को करे।
रजोधर्म का रुक जाना बीमारी निवारक उपचार  :
• 1. उपचार  : पचास ग्राम प्याज को छीलकर कुछ टुकड़ों में किलो भर पानी में डालकर पकाए। जब यह पानी घट कर 200 ग्राम की मात्रा में पानी अवशेष रहे तो उसमे तीस ग्राम गुड मिलाकर गरम - गरम ही पिला दे। इस प्रकार चंद दिवस पिलाने से चिरकाल का रुका हुआ मासिक धर्म जारी हो जाता है।
• 2. उपचार  : प्याज को छिलकर व कूटकर पचास ग्राम रस ताज़ा निकले और उसको समोष्ण करके रात्रि को सोते समय पिला दिया करे। इससे भी रजोधरम जारी हो जाता है।

शनिवार, 7 जनवरी 2017

करेले के 1 कप जूस में है कई बीमारियो से लड़ने की क्षमता


करेले को इंग्लिश में बिटर गॉर्ड कहते है। यह एक चिकित्सकीय औषधि है जिसका इस्तेमाल बहुत सी दवाइयों में किया जाता है| हालांकि यह टेस्ट में कड़वा होता है और हमारी जुबान को नहीं सुहाता है| लेकिन अगर आप इसके औषधीय गुणों के बारे में जान लेंगे तो इसका सेवन जरूर करेंगे|
करेला खाएं रोग को दूर भगाएं 
करेले में विटामिन्स और एंटी ओक्सिडेन्ट्स मौजूद होते है| रोजाना एक गिलास करेले का जूस पीने से बहुत सी स्वास्थ्य की समस्याएं दूर होती हैं| । इसमें विटामिन A,B और C पाया जाता हैं इसके अलावा करेले में कैरोटीन, पोटैशियम, बीटाकैरोटीन, आइरन, मैग्नीशियम, जिंक और मैगनीज जैसे गुणकारी तत्व भी होते हैं । हमारे शरीर को इन सभी चीजो की बराबर मात्रा में जरुरत होती हैं| करेला रक्त शोधन में भी बहुत आवश्यक हैं। इसके लिए करेले के रस का सेवन किया जाता हैं चाहे तो इसमें काली मिर्च पाउडर और नींबू का रस मिलाकर भी पी सकते है
करेला ब्लड शुगर के लेवल को कम करता है -
 अपने शुगर को नियंत्रित करने के लिए आप तीन दिन तक खाली पेट सुबह करेले का जूस ले सकते हैं| मोमर्सिडीन और चैराटिन जैसे एंटी-हाइपर ग्लेसेमिक तत्वों के कारण करेले का जूस ब्लड शुगर लेवल को मांसपेशियों में संचारित करने में मदद करता है| इसके बीजों में भी पॉलीपेप्टाइड-पी होता है जो कि इन्सुलिन को काम में लेकर मधुमेह रोड़ी  में शुगर लेवल को कम करता है
भूख बढ़ाता है-




 भूख नहीं लगने से शरीर को पूरा पोषण नहीं मिल पाता है जिससे कि स्वास्थ्य से सम्बंधित परेशानियां होती हैं| इसलिए करेले के जूस को रोजाना पीने से पाचन क्रिया सही रहती है जिससे भूख बढ़ती है|
प्रतिरक्षा तंत्र मजबूत करे
जिन लोगो का प्रतिरक्षा तंत्र कमज़ोर है उन्हें करेले के जूस का नियमित रूप से सेवन करना चाहिए| इसमें विटामिन B1, B2, B3, जिंक, मैग्नीशियम पाया जाता है जो शरीर के लिए बहुत आवश्यक तत्व हैं|
अग्नाशय के कैंसर के उपचार में उपयोगी -
 रोजाना एक गिलास करेले का जूस पीने से अग्नाशय का कैंसर पैदा करने वाली कोशिकाएं नष्ट होती हैं| ऐसा इसलिए होता हैं क्यों कि करेले में मौजूद एंटी- कैंसर कॉम्पोनेंट्स अग्नाशय का कैंसर पैदा करने वाली कोशिकाओं में ग्लूकोस का पाचन रोक देते हैं जिससे इन कोशिकाओं की शक्ति ख़त्म हो जाती हैं और ये ख़त्म हो जाती हैं|
पाचन शक्ति बढ़ाये
करेले का जूस कमजोर पाचन तंत्र को सुधारता है और अपच को भी दूर करता है| ऐसा इसलिए होता है क्यों कि यह एसिड के स्त्राव को बढ़ाता है जिससे पाचन शक्ति बढ़ती है| इसलिए अच्छी पाचन क्षमता के लिए सप्ताह में एक बार सुबह करेले का जूस जरूर पिए|
प्राकृतिक रक्त शोधक
करेले का जूस शरीर में खून को साफ़ करता है| यह जहरीले तत्वों को शरीर से बाहर निकालता है और फ्री रेडिकल्स से हुए नुकसान से भी बचाता है| इसलिए ब्लड को साफ़ करने और मुहासों जैसी समस्याओं को दूर करने के लिए एक गिलास करेले का जूस अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में शामिल कर ले।
सोराइसिस के लक्षणों को दूर करता है -
एक कप करेले के जूस में एक चम्मच नींबू का जूस मिला लें इस मिश्रण का खली पेट सेवन करें| 3 से 6 महीनें तक इसका सेवन करने से त्वचा पर सोराइसिस के लक्षण दूर होते हैं| यह आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाता है और सोराइसिस को प्राकृतिक रूप से ठीक करने में मदद करता है|
यह लिवर से विषैले पदार्थों को निकालता है -



रोजाना एक गिलास करेले का जूस पीने से लिवर मजबूत होता है क्यों कि यह पीलिया जैसी बिमारियों को दूर रखता है| साथ ही यह लिवर से जहरीले पदार्थों को निकालता है और पोषण प्रदान करता है जिसे लिवर सही काम करता है और लिवर की बीमारियां दूर रहती हैं|
हैजा के उपचार में लाभदायक
हैजा एक बहुत ही खतरनाक बीमारी है जो किसी भी आयु के व्यक्ति को हो सकती है| करेले का जूस इसमें मदद कर सकता है | इसके लिए दो चम्मच करेले के जूस को बराबर मात्रा में सफ़ेद प्याज के रस के साथ प्रतिदिन स्वस्थ हो जाने तक लिया जाना चाहिए|
यह आँखों की नजर बढ़ाता है
लगातार करेले के जूस का सेवन कर आप विभिन्न दृष्टि दोषों को दूर कर सकते हैं| करेले में बीटा- कैरोटीन और विटामिन ए की अधिकता होती है जिससे दृष्टि ठीक होती है| इसके अलावा इसमें उपस्थित विटामिन सी और एंटी-ऑक्सीडेंट्स, ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से होने वाली नजरों की कमजोरी से बचाता है|
त्वचा के रोगों में फायदेमंद
करेले के रस के सेवन से रक्त साफ होता हैं और त्वचा के रोग ठीक हो जाते है | करेले से पाचन क्रिया ठीक होती हैं इस कारण भी चेहरे पर मुंहासे जैसे रोग नहीं होते | करेला पेट साफ़ करने में भी सहायक होता हैं जिससे चर्म रोग नहीं होते| करेले की पत्तियों में भी विशेष गुण होते हैं आप चाहे तो इसका लैप भी बना के लगा सकते है।

गुरुवार, 5 जनवरी 2017

सर्दी के मौसम मे स्वास्थ्यकारी पदार्थ


   सर्दियों में पारा गिरने के साथ ही साइनाइटिस, खांसी, जुकाम और शरीर में दर्द की समस्याएँ आम होती हैं, पर कुछ बातों का ध्यान रखकर आप आसानी से इनका मुकाबला कर सकते हैं। आयुर्वेदिक तेलों से शरीर की मालिश के अलावा कुछ ऐसी चीजें हैं जिन्हें आहार में शामिल करना सर्दियों को सुकून भरा बना देता है|
दालचीनी : दालचीनी शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है और इससे रक्त शर्करा को नियंत्रित रखने में भी मदद मिलती है। प्रयोग : आधे इंच की दालचीनी स्टिक को पाउडर बना कर उसे 2 कप पानी में मिला लें, आधा होने तक इसे उबालते रहें। इस चाय को आधा चम्मच शहद या बिना कुछ मिलाए पिएँ।
अखरोट : सर्दियाँ अखरोट खाने के लिए सबसे मुफीद मौसम है। इसकी तासीर गर्म होती है, जिससे शरीर को प्राकृतिक रूप से गर्मी मिलती है। प्रयोग- यूं तो सर्दियों में अखरोट की गिरी सीधे ही खाई जा सकती है, अन्यथा इसे पानी में भिगो दें और ऊपर की त्वचा को उतार कर एक अखरोट की गिरी हर रोज खाएं।



च्यवनप्राश : दवा के रूप में कुछ लोग इसे गर्मियों में भी खाते हैं, पर सर्दियाँ इसे खाने के लिए सबसे उपयुक्त मौसम है। इससे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और शरीर स्वस्थ रहता है। प्रयोग- हर रोज एक चम्मच या पैक पर दिए निर्देशानुसार इसका सेवन करें।
कच्ची हल्दी : हल्दी शरीर में रक्त को साफ करने के साथ-साथ तीनों दोषों यानी वात-पित्त-कफ का शमन करती है। इसमें एंटीबैक्टीरियल व एंटीवायरल गुण होते हैं। प्रयोग- दूध में कच्ची हल्दी को कूट कर मिलाएँ और अच्छी तरह गर्म कर लें। इसमें थोड़ा-सा गुड़ मिलाकर बच्चों को पिलाने से ठंड और बुखार दोनों में राहत मिलती है।
तुलसी : तुलसी को जीवन-शक्ति सम्वर्द्धक और सर्वरोग निवारक माना गया है। हृदयरोग और सर्दी-जुकाम दोनों में इसका इस्तेमाल अच्छा रहता है। तुलसी की पत्तियों का सेवन पाचन में भी लाभकारी है। प्रयोग- तुलसी 11 पत्ती, 5 काली मिर्च, 10 ग्राम अदरक को डेढ़ पाव जल में पकाएँ। जब जल आधा पाव शेष बच जाए तो छान कर 2 चम्मच चीनी मिला कर गर्मागर्म चाय की तरह पिएँ। सर्दी, जुकाम, थकान से जुड़ी समस्याएँ दूर हो जाएंगी।
शहद : यह जुकाम और खांसी में काफी राहत पहुँचाता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है, थकावट को दूर करता है। इसमें एंटीबैक्टीरियल व एंटीवायरल गुण भी होते हैं। प्रयोग : अदरक या दालचीनी के रस या काढ़े में मिला कर पिएँ।
अंकुरित मेथी के दाने : इनका सेवन शरीर को गर्मी देता है। चने व दाल की तरह इनके स्प्राउट्स बना लें और उन्हें सलाद व सूप में मिलाएं। प्रयोग : दिन भर में 2 चम्मच मेथी के दानों का सेवन करें।
अलसी : यह भी शरीर के तापमान को बढ़ाने यानी शरीर को गर्मी देने का काम करती है। खासतौर पर वे लोग, जिनके हाथ-पैर ठंडे रहते हैं, उन्हें इसका सेवन करना चाहिए। प्रयोग : 2 चम्मच अलसी को हल्का भून लें और नाश्ते में खाने वाले अनाज में मिला कर खाएं।
अश्वगंधा : ठंड को दूर रखने में यह बेहद असरदार औषधि है। प्रयोग- दिन भर में एक बार एक चम्मच पाउडर को पानी में मिला कर पिएं।
लहसुन : यह एक औषधि है। गर्मियों की तुलना में सर्दियों में इसका सेवन अधिक करें। प्रयोग- सब्जियाँ और सूप में मिला कर लिया जा सकता है।

शनिवार, 31 दिसंबर 2016

लो-ब्लडप्रेशर में कारगर हैं ये उपाय



आजकल की भागदौड़ और तनाव भरी जिंदगी में ब्लडप्रेशर की शिकायत होना आम बात है । चक्कर आना, आंखों में अंधेरा होना, हाथ पैर ठंडे पड़ना, कुछ पल के लिए बेहोशी, लेटने, खड़े होने अौर बैठने में ब्लड प्रेशर के स्तर में बदलाव होना, ये सभी निम्न रक्तचाप के लक्षण हैं। अगर आपको लो-ब्लडप्रेशर की समस्या है, पढ़ें कारगर उपाय -
* तुरंत बैठ जाएं या फिर लेट जाएं।
* अपनी मुट्ठी बांधें, फिर खोलें। ऐसा बार- बार करें।
*अपने पैरों को हिलाते रहें, अर्थात सक्रिय रखें।
तुरंत नमक का पानी पिएं ।
* खजूर को दूध में उबालकर पीने से भी निम्न रक्तचात की समस्या में लाभ होता है। आप खजूर खाकर भी दूध पी सकते हैं।
*टमाटर के रस में थोड़ी-सी काली मिर्च और नमक डालकर पिएं। इससे कुछ ही समय में निम्न रक्तचाप में लाभ होगा।
*लो- ब्लड प्रेशर को सामान्य बनाये रखने में चुकंदर का रस काफी फायदेमंद साबि‍त होता है। प्रतिदिन सुबह-शाम इसका सेवन करने से एक सप्ताह में ब्लड प्रेशर में सुधार होता है।




* इन सभी उपायों के अलावा निम्न रक्तचाप के मरीजों को पोषक तत्वों से भरपूर भोजन करना चाहिए, साथ ही पैदल चलना या फिर व्यायाम करना उनके लिए बेहद लाभदायक सिद्ध होता है।
* अदरक के छोटे-छोटे करके, उनमें नींबू का रस और सेंधा नमक मिलाकर रख दें। अब इसे प्रतिदिन भोजन से पहले थोड़ी-थोड़ी मात्रा में खाते रहें। दिनभर में 3 से 4 बार भी इसका सेवन आप कर सकते हैं। ऐसा करने से रक्तचाप की समस्या कुछ ही दिनों में समाप्त हो जाएगी।
*50 ग्राम देशी चने व 10 ग्राम किशमिश को रात में 100 ग्राम पानी में किसी भी कांच के बर्तन में रख दें। सुबह चनों को किशमिश के साथ अच्छी तरह से चबा-चबाकर खाएं और पानी को पी लें। केवल किशमिश का प्रयोग भी. कर सकते हैं।
* लो-बीपी के कारण अगर चक्कर आने की शिकायत हो, आंवले के रस में शहद मिलाकर खाने से बहुत जल्दी राहत मिलती है ।इसके अलावा आंवले का मुरब्बा भी ब्लडप्रेशर के रोगियों के लिए एक बेहतर विकल्प है।
*दालचीनी के पाउडर को प्रतिदिन गर्म पानी के साथ लेने से भी आपको इस समस्या में लाभ मिल सकता है, इसके लिए सुबह-शाम यह प्रयोग करें।
* गाजर के 200 ग्राम रस में पालक का 50 कम ब्लडप्रेशर में गाजर भी आपके लिए फायदेमंद हो सकती है। इसके लिए लगभग 200 ग्राम गाजर के रस में एक चौथाई पालक का रस मिलकाकर पिएं। यह आपके लिए बेहद लाभदायक सिद्ध.होगा ।

शनिवार, 24 दिसंबर 2016

सांस फूलने(दमा) के लिए प्रभावी घरेलू उपचार


जब किसी व्यक्ति की सूक्ष्म श्वास नलियों में कोई रोग उत्पन्न हो जाता है तो उस व्यक्ति को सांस लेने में परेशानी होने लगती है जिसके कारण उसे खांसी होने लगती है। इस स्थिति को दमा रोग कहते हैं।फेफड़ों से संबंधित प्रणाली को प्रभावित करने वाली स्थितियों के कारण भी सांस की समस्या होती है। वहीं फेफड़ों और ब्रोंकाइल ट्यूब्स में सूजन होना सांस फूलने के आम कारण होते हैं।
अक्‍सर ऐसा होता है कि बिना किसी बीमारी के भी काम करते हुए सांस फूलने लगती है या सीढ़ियां चढ़ने से सांस फूल जाती है। कई लोग सोचते हैं कि मोटे लोगों की सांस जल्दी फूलती है, लेकिन ऐसा नहीं है। कई बार पतले लोगों की सांस भी थोड़ा चलने पर ही फूलने लगती है। दिल्ली जैसे शहर में जहां हर तरह का प्रदूषण है, सांस फूलने की समस्या गंभीर रूप ले चुकी है।कई कारण हैं
सांस फूलना या सांस ठीक से न लेने का अहसास होना एलर्जी, संक्रमण, सूजन, चोट या मेटाबोलिक स्थितियों की वजह से हो सकता है। सांस तब फूलती है जब मस्तिष्क से मिलने वाला संकेत फेफड़ों को सांस की रफ्तार बढ़ाने का निर्देश देता है। फेफड़ों से संबंधित पूरी प्रणाली को प्रभावित करने वाली स्थितियों की वजह से भी सांसों की समस्या आती है। फेफड़ों और ब्रोंकाइल ट्यूब्स में सूजन होना सांस फूलने के आम कारण हैं। इसी तरह सिगरेट पीने या अन्य टाक्सिंस की वजह से श्वसन क्षेत्र (रेस्पिरेट्री ट्रैक) में लगी चोट के कारण भी सांस लेने में दिक्कत आती है। दिल की बीमारियों और खून में ऑक्सीजन का स्तर कम होने से भी सांस फूलती है।
दमा रोग का लक्षण:-
दमा रोग में रोगी को सांस लेने तथा छोड़ने में काफी जोर लगाना पड़ता है। जब फेफड़ों की नलियों (जो वायु का बहाव करती हैं) की छोटी-छोटी तन्तुओं (पेशियों) में अकड़न युक्त संकोचन उत्पन्न होता है तो फेफड़े वायु (श्वास) की पूरी खुराक को अन्दर पचा नहीं पाते हैं। जिसके कारण रोगी व्यक्ति को पूर्ण श्वास खींचे बिना ही श्वास छोड़ देने को मजबूर होना पड़ता है। इस अवस्था को दमा या श्वास रोग कहा जाता है। दमा रोग की स्थिति तब अधिक बिगड़ जाती है जब रोगी को श्वास लेने में बहुत दिक्कत आती है क्योंकि वह सांस के द्वारा जब वायु को अन्दर ले जाता है तो प्राय: प्रश्वास (सांस के अन्दर लेना) में कठिनाई होती है तथा नि:श्वास (सांस को बाहर छोड़ना) लम्बे समय के लिए होती है। दमा रोग से पीड़ित व्यक्ति को सांस लेते समय हल्की-हल्की सीटी बजने की आवाज भी सुनाई पड़ती है।
सांस फूलना या सांस ठीक से न ले पाना
सांस फूलना या सांस ठीक से न ले पाना एलर्जी, संक्रमण, सूजन, चोट या मेटाबोलिक स्थितियों की वजह से हो सकता है। अकसर सांस तब फूलती है जब मस्तिष्क के संकेत फेफड़ों को सांस की रफ्तार बढ़ाने का निर्देश देते हैं। फेफड़ों से संबंधित प्रणाली को प्रभावित करने वाली स्थितियों के कारण भी सांस की समस्या होती है। वहीं फेफड़ों और ब्रोंकाइल ट्यूब्स में सूजन होना सांस फूलने के आम कारण होते हैं। इसी तरह सिगरेट पीने या अन्य टॉक्सिंस के कारण श्वसन क्षेत्र (रेस्पिरेट्री ट्रैक) में लगी चोट की वजह से भी सांस लेने में दिक्कत पैदा हो सकती है। वहीं दिल की बीमारियों या खून में ऑक्सीजन का स्तर कम होने के कारण भी सांस फूलती है।




बदलता मौसम भी है कारण-
एलर्जी से होने वाले अस्थमा (दमा) की वजह से भी सांस फूल जाती है। यह स्थिति जीवन के लिए खतरा भी बन सकती है। बदलता मौसम इसे और बढ़ाता है। फरीदाबाद के सर्वोदय अस्पताल और रिसर्च सेंटर के रेस्पिरेट्री के विभागाध्यक्ष डॉ. दानिश जमाल के अनुसार, ‘वसंत की गुनगुनी धूप की जगह गर्म हवाएं चलने लगी हैं। अधिकांश मरीज मौसमी दमे के शिकार हो जाते हैं। जो इसके मरीज हैं उन्हें इसके अटैक पड़ने लगते हैं। दिल्ली जैसे महानगर में तनाव भी इसकी बड़ी वजह है।’
दमा होता है बड़ा कारण-
श्वास नलिकाएं फेफड़े से हवा को अंदर व बाहर करती हैं। दमा होने पर इन नलिकाओं के अंदर की दीवार में सूजन हो जाती है। यह सूजन नलिकाओं को बेहद संवेदनशील बना देता है और किसी भी संवेदनशील चीज के स्पर्श से यह तीखी प्रतिक्रिया करता है। जब नलिकाएं प्रतिक्रिया करती हैं, तो उनमें संकुचन होता है और फेफड़े में हवा की कम मात्रा जाती है और सांस फूलने लगती है।
जब दमा रोग से पीड़ित रोगी का रोग बहुत अधिक बढ़ जाता है तो उसे दौरा आने की स्थिति उत्पन्न हो जाती है जिससे रोगी को सांस लेने में बहुत अधिक दिक्कत आती है तथा व्यक्ति छटपटाने लगता है। जब दौरा अधिक क्रियाशील होता है तो शरीर में ऑक्सीजन के अभाव के कारण रोगी का चेहरा नीला पड़ जाता है। यह रोग स्त्री-पुरुष दोनों को हो सकता है।
जब दमा रोग से पीड़ित रोगी को दौरा पड़ता है तो उसे सूखी खांसी होती है और ऐंठनदार खांसी होती है। इस रोग से पीड़ि-त रोगी चाहे कितना भी बलगम निकालने के लिए कोशिश करे लेकिन फिर भी बलगम बाहर नहीं निकलता है। दमा रोग प्राकृतिक चिकित्सा से पूरी तरह से ठीक हो सकता है।
यूकेलिप्‍टस तेल-
यदि सांस फूलने की समस्या है को घर में यूकेलिप्‍टस का तेल जरूर रखें। जब कभी सांस फूले तो यूकेलिप्‍टस का तेल सूंघ लें, इसको सूंघने से आपको तुरंत फायदा होगा और समस्या धीरे-धीरे ठीक होने लगेगी।
कॉफी-
अगर आपको अस्थमा का अटैक आया है तो आप तुरंत गरम कॉफी पी सकते हैं। यह श्वांस नलिकाओं में रूकी हुई हवा को तुरंत ही खोल देगी। अगर कॉफी नहीं पी सकते तो कॉफी की महक सूंघने से भी लाभ होता है।
एसिड बनाने वाले पदार्थ न लें
सांस फूलने की समस्या होने पर आहार में कार्बोहाइड्रेट चिकनाई एवं प्रोटीन जैसे एसिड बनाने वाले पदार्थ सीमित मात्रा में लें और ताज़े फल, हरी सब्जियां तथा अंकुरित चने जैसे क्षारीय खाद्य पदार्थों का भरपूर मात्रा में सेवन करें।
दमा रोग होने का कारण:-मनुष्य की श्वास नलिका में धूल तथा ठंड लग जाने के कारण दमा रोग हो सकता है।
धूल के कण, खोपड़ी के खुरण्ड, कुछ पौधों के पुष्परज, अण्डे तथा ऐसे ही बहुत सारे प्रत्यूजनक पदार्थों का भोजन में अधिक सेवन करने के कारण दमा रोग हो सकता है।
मनुष्य के शरीर की पाचन नलियों में जलन उत्पन्न करने वाले पदार्थों का सेवन करने से भी दमा रोग हो सकता है।
*मल-मूत्र के वेग को बार-बार रोकने से दमा रोग हो सकता है।




*धूम्रपान करने वाले व्यक्तियों के साथ रहने या धूम्रपान करने से दमा रोग हो सकता है।
*खांसी, जुकाम तथा नजला रोग अधिक समय तक रहने से दमा रोग हो सकता है।
*नजला रोग होने के समय में संभोग क्रिया करने से दमा रोग हो सकता है।
*भूख से अधिक भोजन खाने से दमा रोग हो सकता है।
*औषधियों का अधिक प्रयोग करने के कारण कफ सूख जाने से दमा रोग हो जाता है।
*खान-पान के गलत तरीके से दमा रोग हो सकता है।
*मानसिक तनाव, क्रोध तथा अधिक भय के कारण भी दमा रोग हो सकता है।
*खून में किसी प्रकार से दोष उत्पन्न हो जाने के कारण भी दमा रोग हो सकता है।
*नशीले पदार्थों का अधिक सेवन करने के कारण दमा रोग हो सकता है।
मिर्च-मसाले, तले-भुने खाद्य पदार्थों तथा गरिष्ठ भोजन करने से दमा रोग हो सकता है।
फेफड़ों में कमजोरी, हृदय में कमजोरी, गुर्दों में कमजोरी, आंतों में कमजोरी तथा स्नायुमण्डल में कमजोरी हो जाने के कारण दमा रोग हो जाता है।
तुलसी का रस
बेहद गुणकारी तुलसी सांस फूलने की समस्या में भी बेहद लाभदायक होती है। तुलसी का रस और शहद चाटने से अस्‍थमा रोगि यों को व सांस फूलने की समस्या वाले लोगों को आराम मिलता है।
शहद
शहद एक बेहद आम घरेलू उपचार है, जो अस्‍थमा के इलाज के लिये भी प्रयोग किया जाता है। अस्‍थमा अटैक आने पर शहद वाले पानी से भाप लेने से पर जल्द ही समस्या से राहत मिलती है। इसके अलावा दिन में तीन बार एक ग्‍लास पानी के साथ शहद मिला कर पीने से बीमारी भी आराम मिलता है। शहद बलगम को भी ठीक करता है, जो अस्‍थमा व सांस की परेशानी पैदा करता है।इससे सांस की बंद नलियां तुरंत ही खुल जाती हैं।
दमा रोग से पीड़ित रोगी के घरेलू  उपचार:-
दमा रोग से पीड़ित रोगी को गर्म बिस्तर पर सोना चाहिए।
दमा रोग से पीड़ित रोगी को अपनी रीढ़ की हड्डी की मालिश करवानी चाहिए तथा इसके साथ-साथ कमर पर गर्म सिंकाई करवानी चाहिए। इसके बाद रोगी को अपनी छाती पर न्यूट्रल लपेट करवाना चाहिए। इस प्रकार से प्रतिदिन उपचार करने से कुछ ही दिनों में दमा रोग ठीक हो जाता है।
दमा रोग से पीड़ित रोगी के लिए कुछ सावधानियां:-
*दमा रोग से पीड़ित रोगी को ध्रूमपान नहीं करना चाहिए क्योंकि ऐसा करने से रोगी की अवस्था और खराब हो सकती है।
*इस रोग से पीड़ित रोगी को भोजन में लेसदार पदार्थ तथा मिर्च-मसालेदार चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए।
*रोगी व्यक्ति को धूल तथा धुंए भरे वातावरण से बचना चाहिए क्योंकि धुल तथा धुंए से यह रोग और भी बढ़ जाता है।
*दमा रोग से पीड़ित रोगी को अपने रोग के होने के कारणों को सबसे पहले दूर करना चाहिए और इसके बाद इस रोग को बढ़ाने वाली चीजों से परहेज करना चहिए। फिर इस रोग का प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार कराना चाहिए।





*इस रोग से पीड़ित रोगी को कभी घबराना नहीं चाहिए क्योंकि ऐसा करने से दौरे की तीव्रता (तेजी) बढ़ सकती है।
*दमा रोग से पीड़ित रोगी का उपचार करने के लिए सबसे पहले रोगी को कम से कम 10 मिनट तक कुर्सी पर बैठाना चाहिए क्योंकि आराम करने से फेफड़े ठंडे हो जाते हैं। इसके बाद रोगी को होंठों से थोड़ी-थोड़ी मात्रा में हवा खींचनी चाहिए और धीरे-धीरे सांस लेनी चाहिए। इस प्रकार से प्रतिदिन उपचार करने से यह रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है।
*दमा रोग से पीड़ित रोगी को धूम्रपान करने वाले व्यक्तियों के साथ नहीं रहना चाहिए तथा धूम्रपान भी नहीं करना चाहिए क्योंकि ऐसा करने से इस रोग का प्रकोप और अधिक बढ़ सकता है।
*दमा रोग से पीड़ित रोगी को अपने पेड़ू पर मिट्टी की पट्टी और उसके बाद गुनगुने जल का एनिमा लेना चाहिए। फिर लगभग 10 मिनट के बाद सुनहरी बोतल का सूर्यतप्त जल लगभग 25 मिलीलीटर की मात्रा में प्रतिदिन पीना चाहिए। इस प्रकार की क्रिया को प्रतिदिन नियमपूर्वक करने से दमा रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है।
*दमा रोग से पीड़ित रोगी को सप्ताह में 2-3 बार सुबह के समय में कुल्ला-दातुन करना चाहिए। इसके बाद लगभग डेढ़ लीटर गुनगुने पानी में 15 ग्राम सेंधानमक मिलाकर धीरे-धीरे पीकर फिर गले में उंगुली डालकर उल्टी कर देनी चाहिए। इससे रोगी को बहुत अधिक लाभ मिलता है।
*1 कप गर्म पानी में शहद डालकर प्रतिदिन दिन में 3 बार पीने से दमा रोग से पीड़ित रोगी को बहुत अधिक लाभ मिलता है।
*दमा रोग से पीड़ित रोगी को रात के समय में जल्दी ही भोजन करके सो जाना चाहिए तथा रात को सोने से पहले गर्म पानी को पीकर सोना चाहिए तथा अजवायन के पानी की भाप लेनी चाहिए। इससे रोगी को बहुत अधिक लाभ मिलता है।
*दमा रोग से पीड़ित रोगी को अपनी छाती पर तथा अपनी रीढ़ की हड्डी पर सरसों के तेल में कपूर डालकर मालिश करनी चाहिए तथा इसके बाद भापस्नान करना चाहिए। ऐसा प्रतिदिन करने से रोगी का रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है।
*दमा रोग को ठीक करने के लिए प्राकृतिक चिकित्सा के अनुसार कई प्रकार के आसन भी हैं जिनको करने से दमा रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है। ये आसन इस प्रकार हैं- योगमुद्रासन, मकरासन, शलभासन, अश्वस्थासन, ताड़ासन, उत्तान कूर्मासन, नाड़ीशोधन, कपालभांति, बिना कुम्भक के प्राणायाम, उड्डीयान बंध, महामुद्रा, श्वास-प्रश्वास, गोमुखासन, मत्स्यासन, उत्तानमन्डूकासन, धनुरासन तथा भुजांगासन आदि।
*दमा रोग से पीड़ित रोगी को भोजन में नमक तथा चीनी का सेवन बंद कर देना चाहिए।
दमा रोग से पीड़ित रोगी को सुबह के समय में रीढ़ की हड्डी को सीधे रखकर खुली और साफ स्वच्छ वायु में 7 से 8 बार गहरी सांस लेनी चाहिए और छोड़नी चाहिए तथा कुछ दूर सुबह के समय में टहलना चाहिए।
*दमा रोग से पीड़ित रोगी को चिंता और मानसिक रोगों से बचना चाहिए क्योंकि ये रोग दमा के दौरे को और तेज कर देते हैं।

*दमा रोग से पीड़ित रोगी को अपने पेट को साफ रखना चाहिए तथा कभी कब्ज नहीं होने देना चाहिए।
*दमा रोग से पीड़ित रोगी को नारियल पानी, सफेद पेठे का रस, पत्ता गोभी का रस, चुकन्दर का रस, अंगूर का रस, दूब घास का रस पीना बहुत अधिक लाभदायक रहता है।
दमा रोग से पीड़ित रोगी यदि मेथी को भिगोकर खायें तथा इसके पानी में थोड़ा सा शहद मिलाकर पिएं तो रोगी को बहुत अधिक लाभ मिलता है।
*दमा रोग से पीड़ित रोगी को कभी भी दूध या दूध से बनी चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए।
*तुलसी तथा अदरक का रस शहद मिलाकर पीने से दमा रोग में बहुत लाभ मिलता है।
दमा रोग से पीड़ित रोगी को 1 चम्मच त्रिफला को नींबू पानी में मिलाकर सेवन करने से दमा रोग बहुत जल्दी ही ठीक हो जाता हैं।
*दमा रोग से पीड़ित रोगी का प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार करने के लिए सबसे पहले रोगी व्यक्ति को प्रतिदिन नींबू तथा शहद को पानी में मिलाकर पीना चाहिए और फिर उपवास रखना चाहिए। इसके बाद 1 सप्ताह तक फलों का रस या हरी सब्जियों का रस तथा सूप पीकर उपवास रखना चाहिए। फिर इसके बाद 2 सप्ताह तक बिना पका हुआ भोजन करना चाहिए। इसके बाद साधारण भोजन करना चाहिए।

    बुधवार, 21 दिसंबर 2016

    पेट फूलने की समस्या को दूर करने के घरेलू उपाय


    जब पेट का व्यास अपने सामान्य आकार से अधिक बढ़ जाये और असहज और तंग महसूस कराये तो यह पेट फूलना कहा जाता है। इसे पेट की सूजन के नाम से भी जाना जाता है। यह बहुत ही सामान्य समस्या गलत खाद्य आदतों या जीवन शैली आदि के कारण हो सकता है।
    पेट फूलने का कारण- 
    आमतौर पर जो देखा गया है वो है गैस बनना जब हम खाना खाते है तो बहुत बार खाने के दौरान बोलने के दौरान वायु पेट में चली जाती है या यो कहें कि हम हवा को निगल लेते हैं. यह हवा डकार द्वारा पेट से बाहर निकल जाती है. और यदि वही हवा आंत में चली जाती है जो अधोवायु के रूप में बाहर निकलती है. जिसे गैस कहते हैं गैस बनने का दूसरा कारण पाचन तंत्र संबंधी दोष है. पाचन के दौरान भोजन में खाए गए खाद्य पदार्थ का उपापचय हानिरहित बैक्टीरिया और एंजाइम द्वारा किया जाता है. जो हमारी आहारनाल में मौजूद होते हैं इसी दौरान कुछ गैस- हाइड्रोजन, कार्बन डाइऑक्साइड और मीथेन भी बनती हैं. कुछ लोगों के पेट में सल्फर गैस भी बनता है जो बदबू पैदा कर सकता है. और वो बदबू वाली गैस पास करते हैं
       पेट फूलने का कारण पर नज़र डालें तो हमारे पास खाद्य पदार्थ की ऐसी कोई सूची नहीं है जिनके कारण ही गैस बनता है. कुछ खाद्य पदार्थों से कुछ लोगों को गैस बन जाता है जबकि कुछ लोगों को उन्ही खाद्य पदार्थों से कोई गैस नहीं बनती है.इसके पीछे कई कारण हो सकते है जैसे सुबह का नाश्ता समय पर न करना, गलत तरीके से खाना और ज्यादा जंक फूड खाने से अंजाने में ही हम ढेर सारी हवा निगल लेते हैं, जिसकी वजह से हमारे पेट में काफी गैस भर जाती है। इस गैस की वजह से हमारा पेट हमेशा फूला हुआ नजर आता है और कमर का आकार भी बड़ा हो जाता है। तो आइये जानते है की इससे छुटकारा कैसे पाया जाये|
    शारीरिक व्यायाम को अपनायें-
    प्रतिदिन शारीरिक व्यायाम को करना शरीर में गतिविधि के द्वारा आपके पेट के पाचन को बढ़ाता है। आठ घंटे के लिये सोना शरीर के स्वास्थ्य की आवश्यकता भी है।




    पोटैशियम आधारित खाद्य-
    पोटैशियम में शरीर में तरलता को संतुलित करने का गुण होता है जो फूलने की समस्या को दूर रखता है। पोटैशियम खाद्यों में शामिल है केला, टमाटर, पालक, आम और नट आदि। ये पोटैशियम आधारित खाद्य शरीर में उपस्थित अतिरिक्त पानी को निकाल देगा जिसके द्वारा आप पेट फूलने से आराम पा सकते हैं।
    *केला फाइबर का बेहतरीन स्त्रोत होता है तथा यह कब्ज़ से जुड़ी गैस एवं पेट के फूलने की समस्या का उपचार करता है। केला पोटैशियम (potassium) से भरपूर होता है जिसकी मदद से हमारे शरीर में द्रव्यों का स्तर नियंत्रित होता है। यह हमें पेट फूलने की समस्या से निजात दिलाता है। आप पेट के फूलने की समस्या को दूर करने के लिए रोज़ाना केले का सेवन कर सकते हैं। आप या तो नाश्ते में केले का सेवन करें, या फिर इन्हें फलों के सलाद या मीठे में शामिल करें।
    मसालेदार खाद्य से बचें-
    मसालेदार खाद्य से बचने की कोशिश करें जो परेशानी या आपके पेट फूलने की समस्या का कारण हो सकता है। अगर किसी व्यक्ति को पेट फूलने की समस्या है तो कुछ मसालेदार खाद्यों से बचें जैसे काली मिर्च, सिरका, मिर्च पाउडर, सरसों, मूली, प्याज, लहसुन।
    अदरक-
    पेट को सपाट बनाये रखने के लिए आधा चम्मच सूखा अदरक पाउडर लें और उसमें एक चुटकी हींग और सेंधा नमक मिलाकर एक कप गर्म पानी में डालकर पी जाये|
    दही-
    दही में बैक्‍टीरिया होता है, जिससे पाचन तंत्र हमेशा ठीक रहता है तथा खाना भी हजम हो जाता है। गर्मियों के दिनों में दही का सेवन करने से गैस की समस्या नहीं होती और पेट नहीं फूलता|
    धनिया-
    पेट फूलने पर हरे धनिया की चाय पीना भी बेहद फायदेमंद है। इससे पेट दर्द ठीक हो जाएगा और गैस भी निकल जाएगी।
    नींबू-




    रोज सुबह गरम पानी में नींबू निचोड़ कर पीने से पेट नहीं फूलता।
    मालिश-
    गैस को बाहर को निकालने के लिये पेड़ू पर जठरांत्र की दिशा में मालिश करें, अपनी उंगलियो से ठीक कूल्हे के पास दबायें।
    कैसे बचें:- 
    पोषक भोजन खाएं, जिसमें चीनी की मात्रा कम हो। ढेर सारा पानी पिएं। नमक का सेवन कम करें। खाने के तुरंत बाद न सोएं।हमारा अच्छा स्वास्थ्य केवल पौष्टिक भोजन खाने पर निर्भर नहीं करता। यह इस पर भी निर्भर करता है कि हमारा शरीर उस भोजन को कितना पचा पाता है। अच्छी सेहत के लिए चुस्त-दुरुस्त पाचन तंत्र का होना जरूरी है। पाचन वह प्रकिया है, जिसके द्वारा शरीर ग्रहण किए गए भोजन और पेय पदार्थ को ऊर्जा में बदलता है। पाचन तंत्र के ठीक काम न करने पर भोजन बिना पचा रह जाता है, जो शरीर की प्रतिरोधक क्षमता पर असर डालता है।
    स्टार्च खाद्य को सीमित मात्रा में लें या बचें-
    पेट फूलने के मुख्य कारण में से एक स्टार्च खाद्य भी है। स्टार्च शामिल खाद्य जैसे नूडल्स, सफेद ब्रेड, पेस्ट्री, केक, पास्ता आदि को सीमित या से बचने की कोशिश करें।
    *अधिकतर लोगों को सेम, गोभी, प्याज, नाशपाती, सेब, आड़ू, दूध और दूध उत्पादों से अधिकांश लोगों को गैस बनती है. असल में वैसे खाद्य पदार्थ जिनमें वसा या प्रोटीन के बजाय कार्बोहाइड्रेट का प्रतिशत ज्यादा होता है, के खाने से ज्यादा गैस बनती है.अक्सर, जैसे ही एक व्यक्ति की उम्र बढती है, कुछ एंजाइमों का उत्पादन कम होने लगता है और कुछ खाद्य पदार्थों से अधिक गैस भी बनने लगता है.
    *पेट फूलने का कारण कई हैं। गैस, बड़ी आंत का कैंसर, हर्निया पेट को फुलाते हैं। ज्यादा वसायुक्त भोजन करने से पेट देर से खाली होता है, जो बेचैनी भी उत्पन्न करता है। कई बार गर्म मौसम और शारीरिक सक्रियता की कमी के कारण भी पेट में तरल रुक जाता है, जो पेट फुलाता है। नमक और कई दवाएं भी तरल पदार्थो को रोक कर रखती हैं, जो पेट को फुलाता है।
    ये उपाय भी असरदार हैं-




    *पीने के लिए ठंडे पानी की जगह हल्के गरम पानी का इस्तेमाल करें।
    *भोजन के पश्चात थोड़ी सी अजवायन के दाने खान से पेट नहीं फूलता।
    *तुलसी की कुछ पत्‍तियों के सेवन से आपको काफी लाभ मिलेगा।
    *सौंफ खाने या इसकी चाय पीने से पेट की गैस एक मिनट में निकल जाती है।
    *कभी भी जल्दी जल्दी खाना न खाए। आराम से और चबा-चबा कर खाएं।
    *जिन लोगों को कब्ज की शिकायत होती है, अक्सर उनका पेट फूला हुआ होता है।
    इस परेशानी से बचने के लिए हेल्दी खाना खाएं।
    *एक कप पुदीने की चाय पीने से पेट दर्द ठीक होता है और गैस निकलती है।
    *अपनी दिनचर्या में व्यायाम को शामिल करें।
    *पेट कम करने के लिए मीठी चीजें, जैसे चॉकलेट, चाय या कॉफी का सेवन कम-से-कम करें।

    रविवार, 18 दिसंबर 2016

    एलोवेरा से बढ़ाएँ ब्रेस्ट साईज़ Aloe vera is effective in increasing breast size


    अच्छी ब्रेस्‍ट पाने की इच्छा महिलाओं को पुरातन काल से रही है, क्‍योंकि किसी भी महिला के चेहरे के बाद उसके ब्रेस्‍ट ही सौंदर्य का गुणगान करते हैं। जीं हां ब्रेस्‍ट उनकी सुंदरता में चार चांद लगाती हैं और पुरूषों के लिए तो ये हमेशा से ही आकर्षण का केंद्र रहे हैं। यदि ब्रेस्‍ट स्‍वस्‍थ और पूरी तरह विकसित हैं, तो यह मान लिया जाता है कि स्‍त्री सुंदर है।

    एलोवेरा के फायदों के बारे में हम भली भांति जानते है बहुत सारी प्रोब्लेम्स को दूर करने के लिए एलोवेरा का प्रयोग किया जाता है लेकिन ज्यादातर लोग एेलोवेरा का इस्तेमाल स्किन की प्रॉबल्म को दूर करने के लिए ही करते है क्योंकि एलोवेरा के साथ सनबर्न और दाग-धब्बें दूर होते है
    लेकिन क्या अापको पता है एलोवेरा केवल ब्यूटी सोलूशन के रूप में ही नही बल्कि इसकी मदद से अाप अपना ब्रैस्ट की ग्रोथ या साइज को भी बढ़ा सकते है। अगर अाप भी अपनी बैस्ट की ग्रोथ को बढ़ाना चाहते है तो एेलोवेरा का उपयोग करें और वो भी बिना किसी साइड इफ़ेक्ट के | 
    पहिले एलोवेरा के फायदे पर बात करते हैं-
    * एलोवेरा के फायदे
    * सर्कुलेशन बढ़ाए




    अगर एलोवेरा जैल को त्‍वचा पर लगाने से ब्‍लड सर्कुलेशन बढ़ता है इसी तरह यह ब्रेस्‍ट को ऑक्‍सीजन पहुंचाने में मदद करता है जिससे बैस्ट की ग्रोथ बढ़ती है।
    * विटामिन्‍स का खजाना
    एलोवेरा में बहुत सारे विटामिन ए, बी, सी और ई के साथ-साथ ढेर सारे मिनरल्‍स पाए जाते है जो ब्रैस्‍ट की शेप को बढाते हैं।
    *.एलोवेरा का जूस
    एलोवेरा का जूस आपको आसानी से किसी भी लोकल स्‍टोर के पास मिल जायेगा। आप चाहे तो अपने घर में भी इसका पौधा लगाकर उसका जूस भी बना सकते हैं। आपको करना बस इतना है कि एलोवेरा को लेकर उसे बीच में से काटकर उसका जैल निकालकर इस्‍तेमाल करना है। आप इसे पानी में मिलाकर पी सकते हैं
    * हार्मोन बैलेंस करे
    एलोवेरा की पत्‍तियों में मौजूद फाइटोएस्‍ट्रोजन शरीर में एस्‍ट्रोजेन की मात्रा बढा कर ब्रैस्‍ट के साइज को बढाने में मदद करता है।
    * अमीनो एसिड
    एलोवेरा में मौजूद अमीनो एसिड शरीर और ब्रैस्‍ट का शेप बढाने में काफी अहम भूमिका निभाते हैं इसलिए रोज एेलोवेरा का जूस पीएं।
    जानते है एलोवेरा के प्रयोग से कैसे आप अपने ब्रेस्ट साइज को बढ़ा सकते है |
    * ब्रेस्‍ट बढ़ाने के लिए एलोवेरा पैक




    ब्रेस्ट साइज को बढ़ाने के लिए एलोवेरा पैक एक कारगर उपाय है एलोवेरा पैक को बनाना भी बहुत ही आसान है एलोवेरा पैक बनाने के लिए आपको एलोवेरा पल्‍प और एक चम्‍मच हल्‍दी की जरूरत होती है। एलोवेरा पैक बनाने के लिए सबसे पहले एलोवेरा पल्‍प को कम से कम सात बार धो लें और अब इसमें एक चम्‍मच हल्‍दी पाउडर मिलाकर बारीक पेस्‍ट बना लें। पेस्‍ट को किसी कॉटन की मदद से निप्‍पल को छोड़कर पूरी ब्रेस्‍ट पर अच्छी तरह से लगा लें और ऊपर से ब्रा पहन लें। इसे 15 मिनट के लिए छोड़ दें। इसके बाद इसे पहले गर्म पानी और बाद में ठन्डे पानी से धो लें। कुछ ही दिनों में आपकी ब्रेस्‍ट टाइट और साइज में बढ़ने लगेगी।
    * एलोवेरा जेल का प्रयोग
    आप ताजे एलोवेरा जेल का प्रयोग करके अपनी ब्रेस्‍ट पर करीब 10 मिनट तक गोलाकार मुद्रा में मालिश करें। इसे 10 मिनट के लिए छोड़ दें और फिर गुनगुने पानी से धो लें। एलोवेरा में एंटीऑक्सीडेंटस पाए जाते हैं, जो फ्री रेडिकल्स के फलस्वरूप तंतुओं को हुए नुकसान को रोकने में सक्षम होते हैं।लोग एेलोवेरा को ऊपरी तौर से लगाते है लेकिन अाप अपनी बैस्ट की ग्रोथ को बढ़ाने के लिए इसका का सेवन भी कर सकते है । इसको खाने से भी लाभ मिलता है।

    शुक्रवार, 16 दिसंबर 2016

    सरसों का तेल और हल्दी से कई रोगों का ईलाज



     सरसों का  तेल और हल्दी जो हमारे घरों में बड़ी आसानी उपलब्ध हो जाती है ,इनका मिश्रण  इतना फायदेमंद होता है कि ये डॉक्टर की दवाइयां से भी ज्यादा फायदेमंद  होता है | खतरनाक से खतरनाक बिमारियों में जैसे कैंसर, हार्ट अटैक या फैलियर, कब्ज, पेट की बीमारियाँ इत्यादि. इसके ऐसे नायाब फायदे हैं किजानकार आप वास्तव में इसका प्रयोग किये बैगर नहीं रहेंगे|इस फार्मूले को बनाना बहुत आसान है| .
    सरसों के तेल और हल्दी के मिश्रण को बनाने की विधि:
    सामग्री – १ चम्मच हल्दी, २ चम्मच सरसों का तेल
    १ चम्मच हल्दी में २ चम्मच सरसों का तेल अच्छी तरह मिक्स कर लें और फिर गुनगुना होने तक गर्म करें. अब ये सेवन के लायक हो गया है इसका तुरंत सेवन करें ठंडा होने से पहले|
    सेवन विधि: खाना खाने के बाद इस मिश्रण को बनाकर इसका सेवन करना चाहिए और इसके १ घंटा बाद तक पानी नहीं पीना है|
    इस मिश्रण के सेवन के फायदे: 
    कब्ज और पेट की समस्या में
    *अक्सर लोग कब्ज और गैस से परेशान रहते हैं। और हम सब जानते है की सभी बीमारियाँ पेट से ही शरू होती है. यानी अगर आपका पेट ठीक है और कब्ज आदि से दूर है तो ९० % स्वस्थ तो आप हो गए समझो. इसीलिए इसके लिए यदि आप तेल और हल्दी से बने मिश्रण का सेवन करते हो तो आपको कब्ज और पेट की कई तरह की बीमारियों से राहत मिल सकती है।
     *
    चेहरे की खूबसूरती बढाकर उसकी चमक और रौनक बढ़ाये – इसके प्रयोग से स्किन इन्फेक्शन से बचा जा सकता है और शारीर में जो नुकसान दायक तत्व होता है जिनके कारन शारीर में फुंसी या दाग धब्बे होते है वो भी नहीं होंगे इसे सेवन से, और अगर फुंसी या दाग धब्बे हो गए है तो बहुत लाभ मिलेगा और आपका चहेरा खुबसूरत और प्यारा हो जायेगा जिससे उसकी चमक और रौनक बढ़ेगी|
    *
    कैंसर जैसे खतरनाक बिमारी का मुंह तोड़ जवाब – इसके अन्दर एंटीओक्सिडेंट इतना ज्यादा पाया जाता है की ये कैंसर की रोकथाम में १००% मदद करता है. इसीलिए कैंसर जैसी खतरनाक बिमारी में भी इसका बहुत फायदा है|
     अस्थमा की बीमारी में
    *वे लोग जो अस्थमा की समस्या से ग्रसित हैं उन्हें तेल और हल्दी के मिश्रण का सेवन करना चाहिए। इससे अस्थमा की बीमारी में बहुत फायदा मिलता है।
    *हार्ट अटैक में रामबाण – हार्ट अटैक का मुख्य कारन होता है नसों में कोलेस्ट्रोल का बढ़ना, और हम सबको पता ही है की ये इतनी गंभीर बिमारी है जो सोचने समझने का समय भी नहीं देती और एक दम से ख़तम कर देती है जिन्दगी को. लेकिन अगर इसका नियमित रूप से सेवन किया जाए तो इसका खतरा आसानी से टाला जा सकता है.
    * बदन दर्द और सूजन से होने वाली समस्या
    यदि आप शरीर के दर्द से परेशान हैं या बदन दर्द से परेशान हैं तो हल्दी और तेल से बने मिश्रण का सेवन करें। एैसा करने से शरीर का दर्द कम होता है। इसके अलावा यह मिश्रण सूजन और दर्द को खत्म कर देता है।

    शुक्रवार, 2 दिसंबर 2016

    बवासीर के मस्सों के लिए ब्रह्मास्त्र


    बाहरी बवासीर में गुदा वाली जगह में मस्सा होता है|इसमें दर्द कम तथा खुजली अधिक होती है |इसमें गुदा वाली जगह में खून आने लगता है |पहले यहाँ पर केवल खून का रिसाव होता है और बाद में यह पिचकारी की तरह खून फैकने लगता है |
    * अंदर की बवासीर में मस्से गुदे के अन्दर होते है | कब्ज़ की वजह से मल करते समय जोर लगाने से खून बाहर आ जाता है और अगर मस्से छिल जाए तो दर्द और भी बढ़ जाता है |
    *बवासीर के अनेक कारण हो सकते है जैसे:- 

    अधिक देर तक एक जगह कुर्सी पर बैठे रहना, 
    ज्यादा तेज मिर्च-मसालों का सेवन करना,
     देर तक गाड़ी व बाइक चलाना, 
    देर रात तक काम करना, 




    मल त्याग करते समय अधिक जोर लगाना आदि |
    अपना खान-पान सुधार कर ही इसको सही किया जा सकता है खान-पान में विशेष अधिक तीखा मिर्च मसाले वाला मैदा या मैदे से बने पदार्थ जैसे फ़ास्ट फ़ूड तले हुए पदार्थ न खाये और अधिक मात्रा में पानी पिए सुबह उठकर सेर पर जरूर जाये योगासन प्राणायाम जरूर करें अपने भोजन में फाइबर को ज्यादा स्थान दे
    *बवासीर में गौ मूत्र में भिगोई हुई हरड़ बहुत ही लाभदायक है इसके थोड़े दिन के सेवन से ही बवासीर जैसा रोग सही हो जाता है बार-बार होने वाली बवासीर भी सही हो जाती है और बवासीर की मूल जड़ कब्ज पर भी इसका विशेष असर है|यह मस्सों के लिए ब्रमास्त्र है|

    |*मूली के रस में नीम की पत्तियों का रस मिलाकर उसको रुई की मदद से गुदा द्वार पर लगाने से बवासीर में आराम मिलता है |
    *करेले के बीजों को आवलें के रस में मिलाकर मस्से पर लगाने से मस्सा झड जाता है |
    *चाय को पीने के बाद चाय की छानी हुई पतियों से बने पेस्ट को गुदा द्वार पर लगाने से मस्सा झड जाता है
    *कपूर तथा नीम की पतियों से बनी टिकिया को गुदा द्वार पर लगाने से भी बवासीर में आराम मिलता है|
    नारियल के तेल को गुदा द्वार पर लगाने से भी मस्से ठीक हो जाते है |
    *रीठे के फल मे से बीज को निकालकर शेष बचे हुए भाग को लोहे की कढ़ाई में भून लेना है फिर जितनी मात्रा में रीठा लिया है उतनी ही मात्रा में पपड़ियाँकत्था लेना है फिर उसको सूती कपडे से छानकर उसका चूर्ण बना लेना है इस चूर्ण को मक्खन या मलाई के साथ सुबह या शाम खाने से बवासीर में आराम मिलता है |
    *हल्दी तथा ग्लिसरीन से बने पेस्ट को मस्सो वाले स्थान पर लगाने से भी आराम मिलता है |



    लोकी के रस में हल्दी मिलाकर उसको गुदा द्वार पर लगाने से भी बवासीर में आराम मिलता है |
    *नीम की छाल को सिलबट्टे पर पीसने से जो रस निकलता है उसको गुदा द्वार पर लगाना बवासीर में एक रामबाण उपाय माना जाता है ||
    *परम्परागत तथा सरल प्रक्रियाएं विफल हो जाए तो कई सारी शल्यचिकित्सा तकनीक भी उपयोग में लाई जा सकती है | लेकिन सभी शल्यचिकित्साओ के उपचारों में कुछ जटिलताए होती है जिसमे रक्त सत्राव, संकरमण, गुदा का सिकुडन तथा मूत्र प्रतिधारण शामिल है |

    गुरुवार, 1 दिसंबर 2016

    बादाम से ज्यादा असरदार है चना – नहीं जानते होंगे आप चने के ये फायदे


    सर्दियों में रोजाना 50 ग्राम चना खाना शरीर के लिए बहुत लाभकारी होता है। आयुर्वेद मे माना गया है कि चना और चने की दाल दोनों के सेवन से शरीर स्वस्थ रहता है। चना खाने से अनेक रोगों की चिकित्सा हो जाती है। इसमें कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, नमी, चिकनाई, रेशे, कैल्शियम, आयरन व विटामिन्स पाए जाते हैं।
    चने का गरीबों का बादाम कहा जाता है, क्योंकि ये सस्ता होता है लेकिन इसी सस्ती चीज में बड़ी से बड़ी बीमारियों की लड़ने की क्षमता है। चने के सेवन से सुंदरता बढ़ती है साथ ही दिमाग भी तेज हो जाता है।

    * चने को पानी में भिगो दें उसके बाद चना निकालकर पानी को पी जाएं। शहद मिलाकर पीने से किन्हीं भी कारणों से उत्पन्न नपुंसकता समाप्त हो जाती है।



    * देसी काले चने 25-30 ग्राम लेकर उनमें 10 ग्राम त्रिफला चूर्ण मिला लें चने को कुछ घंटों के लिए भिगो दें। उसके बाद चने को किसी कपड़े में बांध कर अंकुरित कर लें। सुबह नाश्ते के रूप में इन्हे खूब चबा चबाकर खाएं।
    * चने के आटे की की नमक रहित रोटी 40 से 60 दिनों तक खाने से त्वचा संबंधित बीमारियां जैसे-दाद, खाज, खुजली आदि नहीं होती हैं। भुने हुए चने रात में सोते समय चबाकर गर्म दूध पीने से सांस नली के अनेक रोग व कफ दूर हो जाता हैं।
    * बुखार में ज्यादा पसीना आए तो भूने चने  को पीसकर अजवायन और वच का चूर्ण मिलाकर मालिश करनी चाहिए।

    * मोटापा घटाने के लिए रोजाना नाश्ते में चना लें। अंकुरित चना 3 साल तक खाते रहने से कुष्ट रोग में लाभ होता है। गर्भवती को उल्टी हो तो भुने हुए चने का सत्तू पिलाएं। चना पाचन शक्ति को संतुलित और दिमागी शक्ति को भी बढ़ाता है। चने से खून साफ होता है जिससे त्वचा निखरती है।
    * रात को चने की दाल भिगों दें सुबह पीसकर चीनी व पानी मिलाकर पीएं। इससे मानसिक तनाव व उन्माद की स्थिति में राहत मिलती है। 50 ग्राम चने उबालकर मसल लें। यह जल गर्म-गर्म लगभग एक महीने तक सेवन करने से जलोदर रोग दूर हो जाता है।*मूली के रस में नीम की पत्तियों का रस मिलाकर उसको रुई की मदद से गुदा द्वार पर लगाने से बवासीर में आराम मिलता है |



    *करेले के बीजों को आवलें के रस में मिलाकर मस्से पर लगाने से मस्सा झड जाता है |
    *चाय को पीने के बाद चाय की छानी हुई पतियों से बने पेस्ट को गुदा द्वार पर लगाने से मस्सा झड जाता है
    * 25 ग्राम काले चने रात में भिगोकर सुबह खाली पेट सेवन करने से डायबिटीज दूर हो जाती है। यदि समान मात्रा में जौ चने की रोटी भी दोनों समय खाई जाए तो जल्दी फायदा होगा।
    * चीनी के बर्तन में रात को चने भिगोकर रख दे। सुबह उठकर खूब चबा-चबाकर खाएं इसके लगातार सेवन करने से वीर्य में बढ़ोतरी होती है व पुरुषों की कमजोरी से जुड़ी समस्याएं खत्म हो जाती हैं। भीगे हुए चने खाकर दूध पीते रहने से वीर्य का पतलापन दूर हो जाता है।
    * हिचकी की समस्या ज्यादा परेशान कर रही हो तो चने के पौधे के सूखे पत्तों का धुम्रपान करने से शीत के कारण आने वाली हिचकी तथा आमाशय की बीमारियों में लाभ होता है।
    * पीलिया में चने की दाल लगभग 100 ग्राम को दो गिलास जल में भिगोकर उसके बाद दाल पानी में से निकलाकर 100 ग्राम गुड़ मिलाकर 4-5 दिन तक खाएं राहत मिलेगी।
    * दस ग्राम चने की भीगी दाल और 10 ग्राम शक्कर दोनों मिलाकर 40 दिनों तक खाने से धातु पुष्ट हो जाती है।

    मंगलवार, 29 नवंबर 2016

    नारियल तेल के 7 गजब के नायाब फायदे


         लंबे और घने बालों के लिए  जमाने से आप नारियल तेल का इस्तेमाल करते आ रहे हैं तो इसके कई ऐसे फायदे मालूम करते हैं  जो अलग-अलग ढंग से  आपके लिए मददगार हो सकते हैं। 

    झुर्रियां दूर भगाए-
    नारियल तेल में विटामिन ई का कैपसूल मिलाकर रात में चेहरे पर झुर्रियों वाले हिस्से में लगाएं और सुबह पानी से धो लें। इससे त्वचा मंर कसाव आता है और झुर्रियां कम होती हैं।
    भूख शांत करे-
    नारियल तेल में बने या तले भोजन के सेवन से लंबे समय तक भूख नहीं लगती हैं। यह मीडियम सैचुरेटेड फैटी एसिड से युक्त है जो लंबे समय तक भूख शांत रखने में मददगार है।
    शेविंग क्रीम का विकल्प-
    शेविंग के लिए अब शेविंग क्रीम का पैसा बचा -सकते हैं। त्वचा को गीला कर उस पर नारियल तेल लगाएं और उस पर रेज़र चलाएं।
    इससे न सिर्फ शेविंग सही तरह से होती है बल्कि रेजर बर्न और ड्राइ स्किन से बचाता है।




    माउथवॉश-
    बाजार में बिकने वाले माउथवॉश में मौजूद एल्कोहल या फ्लूराइड जैसे रसायन नुकसानदायक हो सकते हैं। ऐसे में आयुर्वेद में नारियल तेल के कुल्ले का बहुत महत्व है। मुंह में नारियल तेल भर इसके कुल्ले करने से बैक्टीरिया दूर रहेंगे।
    बाथरूम क्लीनर-
    बाथरूम में शावर, नल जैसे उपकरणों को साफ करने के लिए कपड़े में नारियल तेल लगाकर उससे स्क्रब करने से वे चमक उठते हैं।
    नैचुरल डियोडोरेंट-
    नारियल तेल के इस्तेमाल से आप पसीने की बदबू से दिन भर दूर रह सकते हैं। छह चम्मच नारियल तेल में एक चौथाई कप बेकिंग सोडा मिलाएं, एक चौथाई कप आरारोट व कुछ बूंद यूकोलिपटस या मिंट ऑयल मिलाएं और एक जार में बंद करके रख दें।
    डायपर क्रीम-
    बच्चों को अधिक देर तक डायपर पहनाने के बाद उनकी त्वचा को रूखा होने से बचाने के लिए इससे सुरक्षित, सस्ता व असरदार- विकल्प भला क्या होगा।
    कॉफी में एक चम्मच नारियल तेल
    आप कॉफी पीने के बेहद शौकीन हैं तो कॉफी में दूध के बजाय एक चम्मच नारियल तेल और शहद डाल दीजिए। खाली पेट कॉकोनट कॉफी पीने से काफी फायदा होगा। इसके अलावा खाना बनाने के लिए नारियल तेल का इस्तेमाल किया जा सकता है।
    नारियल तेल और सेक्स-
    अगर सेक्स के दौरान आप लुब्रिकेंट का इस्तेमाल करते हैं तो कैमिकल युक्त लुब्रिकेंट का इस्तेमाल करने से बेहतर नैचुरल नारियल के तेल का इस्तेमाल कर सकते हैं।
    त्वचा के लिए फायदेमंद है नारियल का तेल|-
    नारियल के तेल में समुद्री नमक और किसी अन्य तेल की कुछ ड्रॉप्स डालकर बॉडी स्क्रब कर सकते हैं। त्वचा को नरम बनाएं रखने के लिए शेविंग या वैक्सिंग के बाद नारियल का तेल लगाना फायदेमंद रहता है। अगर आपके बाल बहुत ज्यादा रूखे हो गए हैं तो बतौर कंडीशनर बालों में नारियल का तेल लगाइए। चेहरे को क्लीन करने और नमी बनाएं रखने के लिए चेहरे पर नारियल का तेल लगाएं। त्वचा में मॉश्चराइजर बरकरार रखने के लिए नारियल के तेल से मालिश करनी चाहिए।
    दाग हटाता है नारियल तेल
    नारियल के तेल का ये फायदा किसी चमत्कार से कम नहीं हैं। किसी चीज से स्टीकर हटाते हुए उसके बाद लगने वाले पैच और दाग को नारियल के तेल से मिटाया जा सकता है।
    कैसे प्रयोग करें नारियल तेल, बाल और त्वचा पर
    बालों की कंडीशनिंग करना-




    पुराने कपड़े पहनें: लगाते समय नारियल तेल गिर भी सकता है | इसलिए, पुराने कपड़े पहनें या अपने कंधों पर कोई तौलिया रख लें | अपने बाथरूम में बैठकर बालों पर तेल लगाकर कुछ घंटों तक घूम सकते हैं ताकि तेल आपके स्कैल्प में अच्छे से रम जाए।
    अपने बालों के लिए कवर चुनें: आप कोई प्लास्टिक कवर, कैप या कोई पुराने कपडे से अपने बालों को ढक सकते हैं | ऐसा कवर चुनें जो काफी देर तक या पूरी रात अपने बालों को बांद सकें।
    एक माइक्रोवेव बाउल में 3-5 बड़े चमच्च नारियल तेल के डालें: अपने बालों की लंबाई और मोटाई के हिसाब से तेल लें | अगर आपके लंबे, मोटे बाल है, तो 5; और अगर छोटे, पतले बाल है, तो 3-4 चमच तेल लें |
    बगैर छने हुए तेल (unrefined) का उपयोग करें: छने हुए (refined) नारियल तेल में से कुछ ऐसे प्राकृतिक तत्वों को निकाल दिया जाता है, जो आपके बाल और त्वचा स्वस्थ बनाते हैं | अन-रिफाइंड तेल में ये सारे गुण प्राकृतिक तरीके से मौजूद होते हैं