शुक्रवार, 2 दिसंबर 2016

बवासीर के मस्सों के लिए ब्रह्मास्त्र


बाहरी बवासीर में गुदा वाली जगह में मस्सा होता है|इसमें दर्द कम तथा खुजली अधिक होती है |इसमें गुदा वाली जगह में खून आने लगता है |पहले यहाँ पर केवल खून का रिसाव होता है और बाद में यह पिचकारी की तरह खून फैकने लगता है |
* अंदर की बवासीर में मस्से गुदे के अन्दर होते है | कब्ज़ की वजह से मल करते समय जोर लगाने से खून बाहर आ जाता है और अगर मस्से छिल जाए तो दर्द और भी बढ़ जाता है |
*बवासीर के अनेक कारण हो सकते है जैसे:- 

अधिक देर तक एक जगह कुर्सी पर बैठे रहना, 
ज्यादा तेज मिर्च-मसालों का सेवन करना,
 देर तक गाड़ी व बाइक चलाना, 
देर रात तक काम करना, 




मल त्याग करते समय अधिक जोर लगाना आदि |
अपना खान-पान सुधार कर ही इसको सही किया जा सकता है खान-पान में विशेष अधिक तीखा मिर्च मसाले वाला मैदा या मैदे से बने पदार्थ जैसे फ़ास्ट फ़ूड तले हुए पदार्थ न खाये और अधिक मात्रा में पानी पिए सुबह उठकर सेर पर जरूर जाये योगासन प्राणायाम जरूर करें अपने भोजन में फाइबर को ज्यादा स्थान दे
*बवासीर में गौ मूत्र में भिगोई हुई हरड़ बहुत ही लाभदायक है इसके थोड़े दिन के सेवन से ही बवासीर जैसा रोग सही हो जाता है बार-बार होने वाली बवासीर भी सही हो जाती है और बवासीर की मूल जड़ कब्ज पर भी इसका विशेष असर है|यह मस्सों के लिए ब्रमास्त्र है|

|*मूली के रस में नीम की पत्तियों का रस मिलाकर उसको रुई की मदद से गुदा द्वार पर लगाने से बवासीर में आराम मिलता है |
*करेले के बीजों को आवलें के रस में मिलाकर मस्से पर लगाने से मस्सा झड जाता है |
*चाय को पीने के बाद चाय की छानी हुई पतियों से बने पेस्ट को गुदा द्वार पर लगाने से मस्सा झड जाता है
*कपूर तथा नीम की पतियों से बनी टिकिया को गुदा द्वार पर लगाने से भी बवासीर में आराम मिलता है|
नारियल के तेल को गुदा द्वार पर लगाने से भी मस्से ठीक हो जाते है |
*रीठे के फल मे से बीज को निकालकर शेष बचे हुए भाग को लोहे की कढ़ाई में भून लेना है फिर जितनी मात्रा में रीठा लिया है उतनी ही मात्रा में पपड़ियाँकत्था लेना है फिर उसको सूती कपडे से छानकर उसका चूर्ण बना लेना है इस चूर्ण को मक्खन या मलाई के साथ सुबह या शाम खाने से बवासीर में आराम मिलता है |
*हल्दी तथा ग्लिसरीन से बने पेस्ट को मस्सो वाले स्थान पर लगाने से भी आराम मिलता है |



लोकी के रस में हल्दी मिलाकर उसको गुदा द्वार पर लगाने से भी बवासीर में आराम मिलता है |
*नीम की छाल को सिलबट्टे पर पीसने से जो रस निकलता है उसको गुदा द्वार पर लगाना बवासीर में एक रामबाण उपाय माना जाता है ||
*परम्परागत तथा सरल प्रक्रियाएं विफल हो जाए तो कई सारी शल्यचिकित्सा तकनीक भी उपयोग में लाई जा सकती है | लेकिन सभी शल्यचिकित्साओ के उपचारों में कुछ जटिलताए होती है जिसमे रक्त सत्राव, संकरमण, गुदा का सिकुडन तथा मूत्र प्रतिधारण शामिल है |

गुरुवार, 1 दिसंबर 2016

बादाम से ज्यादा असरदार है चना – नहीं जानते होंगे आप चने के ये फायदे


सर्दियों में रोजाना 50 ग्राम चना खाना शरीर के लिए बहुत लाभकारी होता है। आयुर्वेद मे माना गया है कि चना और चने की दाल दोनों के सेवन से शरीर स्वस्थ रहता है। चना खाने से अनेक रोगों की चिकित्सा हो जाती है। इसमें कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, नमी, चिकनाई, रेशे, कैल्शियम, आयरन व विटामिन्स पाए जाते हैं।
चने का गरीबों का बादाम कहा जाता है, क्योंकि ये सस्ता होता है लेकिन इसी सस्ती चीज में बड़ी से बड़ी बीमारियों की लड़ने की क्षमता है। चने के सेवन से सुंदरता बढ़ती है साथ ही दिमाग भी तेज हो जाता है।

* चने को पानी में भिगो दें उसके बाद चना निकालकर पानी को पी जाएं। शहद मिलाकर पीने से किन्हीं भी कारणों से उत्पन्न नपुंसकता समाप्त हो जाती है।



* देसी काले चने 25-30 ग्राम लेकर उनमें 10 ग्राम त्रिफला चूर्ण मिला लें चने को कुछ घंटों के लिए भिगो दें। उसके बाद चने को किसी कपड़े में बांध कर अंकुरित कर लें। सुबह नाश्ते के रूप में इन्हे खूब चबा चबाकर खाएं।
* चने के आटे की की नमक रहित रोटी 40 से 60 दिनों तक खाने से त्वचा संबंधित बीमारियां जैसे-दाद, खाज, खुजली आदि नहीं होती हैं। भुने हुए चने रात में सोते समय चबाकर गर्म दूध पीने से सांस नली के अनेक रोग व कफ दूर हो जाता हैं।
* बुखार में ज्यादा पसीना आए तो भूने चने  को पीसकर अजवायन और वच का चूर्ण मिलाकर मालिश करनी चाहिए।

* मोटापा घटाने के लिए रोजाना नाश्ते में चना लें। अंकुरित चना 3 साल तक खाते रहने से कुष्ट रोग में लाभ होता है। गर्भवती को उल्टी हो तो भुने हुए चने का सत्तू पिलाएं। चना पाचन शक्ति को संतुलित और दिमागी शक्ति को भी बढ़ाता है। चने से खून साफ होता है जिससे त्वचा निखरती है।
* रात को चने की दाल भिगों दें सुबह पीसकर चीनी व पानी मिलाकर पीएं। इससे मानसिक तनाव व उन्माद की स्थिति में राहत मिलती है। 50 ग्राम चने उबालकर मसल लें। यह जल गर्म-गर्म लगभग एक महीने तक सेवन करने से जलोदर रोग दूर हो जाता है।*मूली के रस में नीम की पत्तियों का रस मिलाकर उसको रुई की मदद से गुदा द्वार पर लगाने से बवासीर में आराम मिलता है |



*करेले के बीजों को आवलें के रस में मिलाकर मस्से पर लगाने से मस्सा झड जाता है |
*चाय को पीने के बाद चाय की छानी हुई पतियों से बने पेस्ट को गुदा द्वार पर लगाने से मस्सा झड जाता है
* 25 ग्राम काले चने रात में भिगोकर सुबह खाली पेट सेवन करने से डायबिटीज दूर हो जाती है। यदि समान मात्रा में जौ चने की रोटी भी दोनों समय खाई जाए तो जल्दी फायदा होगा।
* चीनी के बर्तन में रात को चने भिगोकर रख दे। सुबह उठकर खूब चबा-चबाकर खाएं इसके लगातार सेवन करने से वीर्य में बढ़ोतरी होती है व पुरुषों की कमजोरी से जुड़ी समस्याएं खत्म हो जाती हैं। भीगे हुए चने खाकर दूध पीते रहने से वीर्य का पतलापन दूर हो जाता है।
* हिचकी की समस्या ज्यादा परेशान कर रही हो तो चने के पौधे के सूखे पत्तों का धुम्रपान करने से शीत के कारण आने वाली हिचकी तथा आमाशय की बीमारियों में लाभ होता है।
* पीलिया में चने की दाल लगभग 100 ग्राम को दो गिलास जल में भिगोकर उसके बाद दाल पानी में से निकलाकर 100 ग्राम गुड़ मिलाकर 4-5 दिन तक खाएं राहत मिलेगी।
* दस ग्राम चने की भीगी दाल और 10 ग्राम शक्कर दोनों मिलाकर 40 दिनों तक खाने से धातु पुष्ट हो जाती है।

मंगलवार, 29 नवंबर 2016

नारियल तेल के 7 गजब के नायाब फायदे


     लंबे और घने बालों के लिए  जमाने से आप नारियल तेल का इस्तेमाल करते आ रहे हैं तो इसके कई ऐसे फायदे मालूम करते हैं  जो अलग-अलग ढंग से  आपके लिए मददगार हो सकते हैं। 

झुर्रियां दूर भगाए-
नारियल तेल में विटामिन ई का कैपसूल मिलाकर रात में चेहरे पर झुर्रियों वाले हिस्से में लगाएं और सुबह पानी से धो लें। इससे त्वचा मंर कसाव आता है और झुर्रियां कम होती हैं।
भूख शांत करे-
नारियल तेल में बने या तले भोजन के सेवन से लंबे समय तक भूख नहीं लगती हैं। यह मीडियम सैचुरेटेड फैटी एसिड से युक्त है जो लंबे समय तक भूख शांत रखने में मददगार है।
शेविंग क्रीम का विकल्प-
शेविंग के लिए अब शेविंग क्रीम का पैसा बचा -सकते हैं। त्वचा को गीला कर उस पर नारियल तेल लगाएं और उस पर रेज़र चलाएं।
इससे न सिर्फ शेविंग सही तरह से होती है बल्कि रेजर बर्न और ड्राइ स्किन से बचाता है।




माउथवॉश-
बाजार में बिकने वाले माउथवॉश में मौजूद एल्कोहल या फ्लूराइड जैसे रसायन नुकसानदायक हो सकते हैं। ऐसे में आयुर्वेद में नारियल तेल के कुल्ले का बहुत महत्व है। मुंह में नारियल तेल भर इसके कुल्ले करने से बैक्टीरिया दूर रहेंगे।
बाथरूम क्लीनर-
बाथरूम में शावर, नल जैसे उपकरणों को साफ करने के लिए कपड़े में नारियल तेल लगाकर उससे स्क्रब करने से वे चमक उठते हैं।
नैचुरल डियोडोरेंट-
नारियल तेल के इस्तेमाल से आप पसीने की बदबू से दिन भर दूर रह सकते हैं। छह चम्मच नारियल तेल में एक चौथाई कप बेकिंग सोडा मिलाएं, एक चौथाई कप आरारोट व कुछ बूंद यूकोलिपटस या मिंट ऑयल मिलाएं और एक जार में बंद करके रख दें।
डायपर क्रीम-
बच्चों को अधिक देर तक डायपर पहनाने के बाद उनकी त्वचा को रूखा होने से बचाने के लिए इससे सुरक्षित, सस्ता व असरदार- विकल्प भला क्या होगा।
कॉफी में एक चम्मच नारियल तेल
आप कॉफी पीने के बेहद शौकीन हैं तो कॉफी में दूध के बजाय एक चम्मच नारियल तेल और शहद डाल दीजिए। खाली पेट कॉकोनट कॉफी पीने से काफी फायदा होगा। इसके अलावा खाना बनाने के लिए नारियल तेल का इस्तेमाल किया जा सकता है।
नारियल तेल और सेक्स-
अगर सेक्स के दौरान आप लुब्रिकेंट का इस्तेमाल करते हैं तो कैमिकल युक्त लुब्रिकेंट का इस्तेमाल करने से बेहतर नैचुरल नारियल के तेल का इस्तेमाल कर सकते हैं।
त्वचा के लिए फायदेमंद है नारियल का तेल|-
नारियल के तेल में समुद्री नमक और किसी अन्य तेल की कुछ ड्रॉप्स डालकर बॉडी स्क्रब कर सकते हैं। त्वचा को नरम बनाएं रखने के लिए शेविंग या वैक्सिंग के बाद नारियल का तेल लगाना फायदेमंद रहता है। अगर आपके बाल बहुत ज्यादा रूखे हो गए हैं तो बतौर कंडीशनर बालों में नारियल का तेल लगाइए। चेहरे को क्लीन करने और नमी बनाएं रखने के लिए चेहरे पर नारियल का तेल लगाएं। त्वचा में मॉश्चराइजर बरकरार रखने के लिए नारियल के तेल से मालिश करनी चाहिए।
दाग हटाता है नारियल तेल
नारियल के तेल का ये फायदा किसी चमत्कार से कम नहीं हैं। किसी चीज से स्टीकर हटाते हुए उसके बाद लगने वाले पैच और दाग को नारियल के तेल से मिटाया जा सकता है।
कैसे प्रयोग करें नारियल तेल, बाल और त्वचा पर
बालों की कंडीशनिंग करना-




पुराने कपड़े पहनें: लगाते समय नारियल तेल गिर भी सकता है | इसलिए, पुराने कपड़े पहनें या अपने कंधों पर कोई तौलिया रख लें | अपने बाथरूम में बैठकर बालों पर तेल लगाकर कुछ घंटों तक घूम सकते हैं ताकि तेल आपके स्कैल्प में अच्छे से रम जाए।
अपने बालों के लिए कवर चुनें: आप कोई प्लास्टिक कवर, कैप या कोई पुराने कपडे से अपने बालों को ढक सकते हैं | ऐसा कवर चुनें जो काफी देर तक या पूरी रात अपने बालों को बांद सकें।
एक माइक्रोवेव बाउल में 3-5 बड़े चमच्च नारियल तेल के डालें: अपने बालों की लंबाई और मोटाई के हिसाब से तेल लें | अगर आपके लंबे, मोटे बाल है, तो 5; और अगर छोटे, पतले बाल है, तो 3-4 चमच तेल लें |
बगैर छने हुए तेल (unrefined) का उपयोग करें: छने हुए (refined) नारियल तेल में से कुछ ऐसे प्राकृतिक तत्वों को निकाल दिया जाता है, जो आपके बाल और त्वचा स्वस्थ बनाते हैं | अन-रिफाइंड तेल में ये सारे गुण प्राकृतिक तरीके से मौजूद होते हैं

सोमवार, 28 नवंबर 2016

एग्जिमा का घरेलू उपचार..


बॉडी में खुजली, एक्‍जिमा (खाज) होने के अलग - अलग कारण होते हैं। किसी रिसर्च के अनुसार, शरीर में इम्‍यून सिस्‍टम में गड़बड़ी के चलते खुजली हो जाती है तो कोई कहता है कि सरकाप्‍टस नामक परजीवी के कारण खुजली होने लगती है। वजह चाहें जो भी हो लेकिन शरीर में तकलीफ होने से आपकी दिनचर्या पर गंदा असर पड़ता है और आपकी पब्लिक इमेज की धज्जियां उड़ जाती हैं।
एक्जिमा एक प्रकार का चर्म रोग है। त्वचा के उत्तेजक, दीर्घकालीन विकार को एक्जिमा के नाम से जाना जाता है। इस रोग में त्वचा शुष्क हो जाती है और बार-बार खुजली करने का मन करता है क्योंकि त्वचा की ऊपरी सतह पर नमी की कमी हो जाती है, जिसके परिणामस्वरूप त्वचा को कोई सुरक्षा नहीं रहती, और जीवाणुओं और कोशाणुओं के लिए हमला करने और त्वचा के भीतर घुसने के लिए आसान हो जाता है। एक्जिमा के गंभीर मामलों में त्वचा के ग्रसित जगहों से में पस और रक्त का स्राव भी होने लगता है। यह रोग डर्माटाईटिस के नाम से भी जाना जाता है।
मुख्य रूप से यह रोग खून की खराबी के कारण होता है और चिकित्सा न कराने पर तेजी से शरीर में फैलता है। एक्जिमा का रोग अपने रोगियों को उम्र और लिंग के आधार पर नहीं चुनता। एक्जिमा के रोग से ग्रस्त रोगी अन्य विकारों के भी शिकार होते हैं। यह किसी भी उम्र के पुरुष या महिलाओं को प्रभावित कर सकता है। लेकिन कुछ आयुर्वेदिक उपचारों को अपनाकर इस समस्‍या के लक्षणों को कम किया जा सकता है।
दाद (एग्जिमा) होने का कारण-



एग्जिमा कई प्रकार का होता है और इसके कारण भी कई हो सकते हैं | जैसे एलर्जी, वंश परंपरा अथवा किसी प्रकार का तनाव आदि होना |
दाद (एग्जिमा) होने के लक्षण-
मुख्य रूप से यह तीन प्रकार का होता है-
1. बच्चों को होने वाला एक्जीमा-
यह एग्जिमा कुछ महीने के शिशु को भी हो सकता है | पहले मुंह पर दाने से निकलते हैं, फिर शरीर के अन्य भाग भी प्रभावित हो जा-ते हैं | बच्चा बार-बार त्वचा खुजलाता है और परेशान होता है |
2. सम्पर्क में आने से होने वाला एक्जीमा
इसमें यदि किसी वस्तु से एलर्जी है तो उसके सम्पर्क में आने से एग्जिमा अथवा दाद हो सकता है—उदाहरण के लिए बहुत सी औरतों को गहने पहनने से एलर्जी होने के कारण एग्जिमा हो सकता है | कुछ पौधे, फूल या सौंदर्य प्रसाधन सामग्री भी इसका कारण हो सकती है |
3. खुजलीवाला एक्जीमा-
तीसरे प्रकार के एग्जिमा में खुजली से बहुत अधिक बेचैनी होती है | इस प्रकार का एक्जीमा कपड़े धोने के साबुन या डिटर्जेन्ट पाउडर के प्रयोग से प्रायः हो जाता है |
एक्‍जिमा से बचने के लिये कुछ उपचार जैसे, लक्षणों को बिगाड़ने वाले उत्तेजकों से बचें, घावों को कुरेदें नहीं, अधिक समय तक स्नान न करें और देरी तक स्नानघर में न रहें, साबुन का प्रयोग कम से कम करें (बबल स्नान न करें), रोग को ठीक करने के लिये एंटी बायोटिक का प्रयोग किया जाता है।
मगर इसके अलावा भी आप के लिये ये बेहतर रहेगा कि आप कुछ घरेलू उपाय को अपनाकर अपनी एक्‍जिमा (खाज) प्रॉब्‍लम दूर कर लें।
उपचार-
* इस रोग के उपचार के लिए चिकित्सक स्टेराइड क्रीम, लोशन या एण्टीबायटिक दवाएं देते हैं | कीकर (बबूल) और आम के पेड़ की 25-25 ग्राम छाल लेकर एक लीटर पानी में उबालें | इसकी भाप से एग्जिमा प्रभावित स्थान को सेकें | इसके बाद इस भाग पर देसी धी लगा दें |
खीरे का पानी :
खीरे को बारीक स्‍लाइस में काटकर दो घंटे के लिए रख दें। पूरा रस निकल जाने के बाद उसे छान लें और खुजली वाली जगह पर लगा लें। जरूर आराम होगा।
* मकोय का रस पीने और एग्जिमा के स्थान पर इस रस को लगाने से आराम मिलता है |रस की मात्रा 150 से 210 मि.ली. तक रखें |
नींबू :
नींबू हर घर में आराम से मिल जाता है। इसलिए बॉडी में जहां पर भी खुजली हो रही हो उस जगह पर नींबू और गरी का तेल मिलाकर लगा लें। लगाने के तुरंत बाद खुजलाएं नहीं। थोड़ी देर में आराम मिल जाएगा।
आटे का लेप :
गेहूं के आटे का लेप करने से शरीर के सारे चर्म रोग दूर हो जाते हैं और खुजली में आराम मिलता है।
* नीम रक्त विकारों में बहुत ही लाभकारी है | पाव भर सरसों के तेल में नीम की 50 ग्राम के लगभग कोंपलें पकाएं | कोंपले काली होते ही तेल नीचे उतार लें | छानकर बोतल में रखें और दिन में थोड़ा-थोड़ा एग्जिमा प्रभावित स्थान पर लगाएं | नीम की कोंपलों का रस 10 ग्राम की मात्रा में नित्य सेवन करते रहने से भी एक्जीमा ठीक हो जाता है |



देशी घी की मालिश -:
शरीर में अचानक से ज्‍यादा खुजली होने पर तुरंत राहत के लिए आप घरों में इस्‍तेमाल किया जाने वाला देशी घी लगा लें। इससे फटाफट राहत मिलेगी।
एलोविरा जेल का इस्‍तेमाल-:
घर में लगे एलोविरा के पौधे की पत्‍ती को काट लें और उसमें से निकलने वाले जेल को खुजली वाली जगह पर लगा लें। दिन में कम से कम चार से पांच बार ऐसा करने पर आपको आराम मिलेगा। साथ ही ठीक होने तक लगाने पर बाद में कभी खुजली नहीं होगी।
4. तुलसी के पत्तों का रस पीने और लगाते रहने से लाभ होता है
हरड़ -:
हरड़ को बारीक पीस लें। दो चम्‍मच हरड़ को दो गिलास पानी में उबाल कर रख लें। जहां भी खुजली हो, उस पानी को लगा लें कुछ देर में आराम मिल जाएगा।
जैतून का तेल :
खुजली होने पर गुनगुने पानी से नहाएं और तुरन्‍त बाद किसी माश्‍चराइजर या क्रीम का यूज न करते हुए ऑलिव ऑयल यानि जैतून के तेल का इस्‍तेमाल करें। अच्‍छे से हल्‍के - हल्‍के मालिश करने पर खुजली वाली जगह में आराम मिलेगा।
5. तिल और तारेमीरे के तेल की समान मात्रा में दो चम्मच पिसी हुई दाल मिलाएं, जिससे मलहम सा बन जाए | उसमें दवाइयों के काम आने वाला मोम एक चम्मच के लगभग मिला दें | इसमें सरसों के तेल के दीपक से बनाया गया थोड़ा काजल मिलाएं | मलहम तैयार है | इसे दाद, फोड़े-फुन्सियों पर लगाने से लाभ होता है |
*




छाछ
में एक साफ कपड़े का टुकड़ा भिगोकर त्वचा पर जलन, खुजली और बेचैनी वाले स्थान पर रखें | जितनी अधिक देर रख सकें, रखें | फिर उस स्थान को भली प्रकार साफ कर दें |
*. अब यह सिद्ध हो चुका है कि एग्जिमा, दाद आदि लाइनोलिक एसिड की कमी से होता है | इसके लिए सूरजमुखी का तेल लाभदायक होता है | प्रतिदिन दो चम्मच तेल पीएं | रोग में सुधार होने के बाद मात्रा कम कर दें |
चने के आटे में पानी मिलाकर पेस्ट सा बनाकर त्वचा के विकारग्रस्त स्थान पर लगाने से लाभ होता है | चने के आटे का उबटन के रूप में प्रयोग से मेकअप से होने वाला एक्जीमा भी ठीक हो जाता है |
* खुबानी के पत्तों के रस का दाद-खाज पर प्रयोग करना भी लाभदायक है |
एग्जिमा का घरेलू उपचार-
250 ग्राम सरसों का तेल लेकर लोहे की कढ़ाही में गर्म करें । जब तेल खोलने लगे तब उसमें 500ग्राम नीम की पत्ती (नई कोपलें) डाल दें ।कोपलें के काले पड़्ते ही कढ़ाही को नीचे उतारकर ठ्ण्डा कर एक बोतल में भर लें ।
दिन में चार बार एग्जिमा पर लगायें, कुछ दिनों एग्जिमा खत्म हो जायेगा । एक वर्ष लगाते रहें फिर यह रोग दोबारा लौट कर नहीं आयेगा ।
विशेष - इस प्रयोग से एग्जिमा के अतिरिक्त अन्य त्वचा के रोग में भी फायदा पहुँचता है 
परहेज- खटाई, तेज मिर्च मसाले, मादक पदार्थों का सेवन न करें ।

मंगलवार, 22 नवंबर 2016

तेज पत्ते को जलाने के यह फायदे सुनकर आप हैरान रह जायेगे








तेजपत्ते को अक्सर रसोई में भोजन में मसाले के रुप में काम में लिया जाता है। ये भोजन के जायके को बढ़ाने के साथ-साथ उसकी सुगंध को भी दुगुना कर देता है। तेजपत्ते में औषधीय गुणों की मात्रा की अधिकता होती है। इसी के साथ ही इसका उपयोग शरीर को स्वस्थ रखने के लिए भी किया जाता है।
हमारा अच्छा , बुरा व्यवहार हमारे आस पास के वातावरण पर निर्भर करता है – हमारे आस पास की सुगंध – दुर्गन्ध हमारे व्यवहार को प्रभावित करती है | हमारे आस पास की नकारात्मक उर्जा हमारे अच्छे व्यवहार को बुरे व्यवहार की तरफ तब्दील कर देती है |

आज आपको बतायेगे प्राचीन काल से चला आ रहा नकारात्मक वायु के प्रभाव को कम करने वाला नुस्खा | तेज पत्ते को जलाने से आपके व्यवहार में आश्चर्य जनक बदलाव आ जायगा | तेज पत्ते को जलाने से निकलने वाला धुआं आपके आस पास के वातावरण को कुछ इस तरेह से बदल देगा के आपका और आपके आस पास के लोग का व्यवहार खुश मिजाज हो जायेगा | अपने घर में या अपने आप पास की किसी भी जगह पर तेज पत्ते को जलाये और इस का जादू देखें | तेज पत्ते के जलाने के फायदे बस यही पर ही ख़त्म नहीं होते |




तेज पत्ता प्राचीन काल से रोगों को ठीक करने के लिए रामबाण माना जाता है | आप इसको अपने खाने में पका सकते है तथा पानी में उबाल कर पी सकते है |

तेज पत्ते को जलाने के अन्य फायदे –
मिर्गी :- तेज पत्ता anti inflammatory होता है | अगर आप मिर्गी के मरीज हो तो तेज पत्ते का धुआ आपके लिए वरदान है |

काकरोच को दूर भगाने के लिए
:- काकरोच को भगाने के लिए बाजार में बहुत सारे प्रोडक्ट्स पाए जाते है जो के बेहद महंगे और हमारे लिए तथा बचों की सेहत के लिए नुकसान दायक होते है | अगर आप काकरोच से परेशान है तो तेज पत्तो को जला कर अपनी रसोई , गार्डन के कोनो में रखे| और यह आपकी सेहत के लिए बिलकुल भी हानिकारक नहीं है |

गुरुवार, 17 नवंबर 2016

सिर्फ 15 दिन मे बाल झड़ना रोकें इन उपायों से




१. सबसे पहले आप dendruf (रुसी)  का इलाज करें
dendruf को दूर करने के लिए सबसे पहले आप एंटीसेप्टिक की छोटी शीशी खरीदें १००ml या फिर २००ml
एंटीसेप्टिक आप को किसी भी मेडिकल की दुकान पर मिल जायेगे १००ml rs.१३ और २००ml rs.२२ में मिलता है
एंटीसेप्टिक लगते समय ध्यान रखें की आप बालों को गीला बिलकुल न करें बाल एकदम सुखें होने चाहिए
एंटीसेप्टिक बालों में लगाकर १०-१५ मिनट तक हलके-हलके सिर्फ अँगुलियों से मसाज करें
एंटीसेप्टिक से जब आप बालों में मसाज करेंगे तो उसमे हलके-हलके झाग भी उत्पन होंगे
फिर आप साफ जल से बालों को धो लें




२. अब आप शैम्पू का इस्तेमाल करें याद रखें शैम्पू वो हो खरीदें जिसमें ditargent की मात्रा कम हो
कम ditargent वालें शैम्पू कई कंपनी के आतें है कोई भी अच्छी कंपनी का शैम्पू आप खरीद सकतें है
३. शैम्पू को अपने बालों में लगाकर हलके-हलके मसाज जरें ५-१० मिनट तक
४. अब आप एक अच्छे और साफ तोलिये से बालों को अच्छी तरह से सुखाये
५. अब बालों में आप तेल लगायें (याद रहें तेल ज्यादा न लगाये|




५. रात को अभी यही प्रक्रिया  पुनः अपनाएं (एंटीसेप्टिक का इस्तेमाल आपको शुरू में रोजाना करना है बाद में धीरे-धीरे कम करना है|
जब आपके बाल झाड़ना पूरी तरह से रुक जाये और dendruf भी पूरी तरह से ख़त्म हो तये तब आप एंटीसेप्टिक का प्रयोग सप्ताह में १ या २ बार ही करें|
रात को तेल आप ज्यादा लगाये और १०-१५ मिनट तक अच्छी तरह से मालिश करें
रात को आप नारियल तेल से मालिश करें |
इस प्रक्रिया से सिर्फ सात दिनों में यानि एक सप्ताह में आपके बाल पूरी तरह से झड़ने बंद हो जायेगें

रविवार, 13 नवंबर 2016

अलसी का सेवन किस रोग में व कैसे करें?



सुपर फुड अलसी में ओमेगा थ्री व सबसे अधिक फाइबर होता है। यह डब्लयू एच ओ ने इसे सुपर फुड माना है। यह रोगों के उपचार में लाभप्रद है। लेकिन इसका सेवन अलग-अलग बीमारी में अलग-अलग तरह से किया जाता है।
स्वस्थ व्यक्ति को रोज सुबह-शाम एक-एक चम्मच अलसी का पाउडर पानी के साथ ,सब्जी, दाल या सलाद मंे मिलाकर लेना चाहिए । अलसी के पाउडर को ज्यूस, दूध या दही में मिलाकर भी लिया जा सकता है। इसकी मात्रा 30 से 60 ग्राम प्रतिदिन तक ली जा सकती है। 100-500 ग्राम अलसी को मिक्सर में दरदरा पीस कर किसी एयर टाइट डिब्बे में भर कर रख लें। अलसी को अधिक मात्रा मंे पीस कर न रखें, यह पाउडर के रूप में खराब होने लगती है। सात दिन से ज्यादा पुराना पीसा हुआ पाउडर प्रयोग न करें। इसको एक साथ पीसने से तिलहन होने के कारण खराब हो जाता है।
*खाँसी होेने पर अलसी की चाय पीएं। पानी को उबालकर उसमें अलसी पाउडर मिलाकर चाय तैयार करें।एक चम्मच अलसी पावडर को दो कप (360 मिलीलीटर) पानी में तब तक धीमी आँच पर पकाएँ जब तक यह पानी एक कप न रह जाए। थोड़ा ठंडा होने पर शहद, गुड़ या शकर मिलाकर पीएँ। सर्दी, खाँसी, जुकाम, दमा आदि में यह चाय दिन में दो-तीन बार सेवन की जा सकती है। दमा रोगी एक चम्मच अलसी का पाउडर केा आधा गिलास पानी में 12 घंटे तक भिगो दे और उसका सुबह-शाम छानकर सेवन करे तो काफी लाभ होता है। गिलास काँच या चाँदी को होना चाहिए।
*समान मात्रा में अलसी पाउडर, शहद, खोपराचूरा, मिल्क पाउडर व सूखे मेवे मिलाकर नील मधु तैयार करें। कमजोरी में व बच्चों के स्वास्थ्यके लिए नील मधु उपयोगी है।
*डायबीटिज के मरीज को आटा गुन्धते वक्त प्रति व्यक्ति 25 ग्राम अलसी काॅफी ग्राईन्डर में ताजा पीसकर आटे में मिलाकर इसका सेवन करना चाहिए। अलसी मिलाकर रोटियाँ बनाकर खाई जा सकती हैं। अलसी एक जीरो-कार फूड है अर्थात् इसमें कार्बोहाइट्रेट अधिक होता है।शक्कर की मात्रा न्यूनतम है।
*कैंसर रोगियों को ठंडी विधि से निकला तीन चम्मच तेल, छः चम्मच पनीर में मिलाकर उसमें सूखे मेवे मिलाकर देने चाहिए। कैंसर की स्थिति मेें डाॅक्टर बुजविड के आहार-विहार की पालना श्रद्धा भाव से व पूर्णता से करनी चाहिए। कैंसर रोगियों को ठंडी विधि से निकले तेल की मालिश भी करनी चाहिए।
*साफ बीनी हुई और पोंछी हुई अलसी को धीमी आंच पर तिल की तरह भून लें।मुखवास की तरह इसका सेवन करें। इसमें सैंधा नमक भी मिलाया जा सकता है। ज्यादा पुरानी भुनी हुई अलसी प्रयोग में न लें।
बेसन में 25 प्रतिशत अलसी मिलाकर व्यंजन बनाएं। बाटी बनाते वक्त भी उसमें भी अलसी पाउडर 

मिलाया जा सकता है। सब्जी की ग्रेवी में भी अलसी पाउडर का प्रयोग करें।
अलसी सेवन के दौरान खूब पानी पीना चाहिए। इसमें अधिक फाइबर होता है, जो खूब पानी माँगता है।
दमा में दिलाये राहत





बहुत कम लोग यह बात जानते है, लेकिन दमा के रोगियों के लिए भी किसी चमत्कारी औषधि से कम नहीं है| दमा के रोगी एक चम्मच अलसी के पाउडर को आधा गिलास पानी में 12 घंटे तक भिगो दे और फिर इसे सुबह शाम छानकर इसका सेवन करे तो काफी लाभ होता है|
खांसी से दिलाये छुटकारा

यदि ठंड के दिनों में आपको अकसर खांसी रहती है, तो ऐसे में अलसी की चाय का सेवन आपके लिए फायदेमंद होगा| इसके लिए अलसी का पाउडर बनाये| सादा पानी उबाल ले और उसमे अलसी का पाउडर मिलाये| इसका सेवन दिन में 2 से 3 बार करे|
ह्रदय रोग में फायदेमंद
भले ही अलसी के दाने छोटे छोटे हो, लेकिन इससे मिलने वाले फायदे बहुत बड़े है| आपको जानकर शायद आश्चर्य हो लेकिन अलसी का सेवन ह्रदय रोगो में भी फायदेमंद है| अलसी में पाया जाने वाला ओमेगा-3 जलन को कम और हृदय गति को सामान्य करने में मदद करता है| इसका नियमित सेवन करने से कार्डियो वेस्कुलर सिस्टम बेहतर बनता है। कुछ किये गए अध्यनों से पता चला है कि ओमेगा-3 से भरपूर भोजन करने से धमनियां सख्त नहीं पड़ती है। साथ ही यह व्हाइट ब्लड सेल्स को ब्लड वेसल के आंतरिक परत पर चिपका देता है, जिससे धमनियों में प्लैक जमने की संभावना भी कम हो जाती है|
जोड़ो के दर्द कम करे
ठंडी के दिनों में अक्सर वृद्ध लोगो को जोड़ो के दर्द में शिकायत रहती है| अलसी के बीजो का तेल जोड़ों के दर्द में राहत दिलाता है। इसके अलावा अलसी का नियमित सेवन शरीर को ऊर्जा व स्फूर्ति प्रदान करता है। कुछ लोगो के शरीर का वजन इतना ज्यादा होता है की उन्हें हमेशा पैरो में दर्द बना रहता है, लेकिन अलसी के सेवन से
शरीर का भार कम होता है, वसा कम होता है| और यह हमारी खाने की ललक को भी कम करता है।अलसी खून को पतला बनाये रखती है, जिसके चलते शरीर में अच्छा कोलेस्ट्रोल बढ़ता है और खराब कोलेस्ट्रोल कम होता है और ह्रदय स्वस्थ रहता है।
*इसका रोजाना सेवन करने से महिलाओ मे होने वाली रजोनिवृत्ति संबंधी परेशानियों से राहत मिलती है। यह मासिक धर्म के दौरान ऐंठन को कम करके गर्भाशय को स्वस्थ बनाये रखता है।
*अलसी के सेवन से पैरो में रक्त का प्रवाह बढ़ता है, जिससे पेरो के घाव और फोड़े, फुंसी दूर हो जाते है| यहाँ तक की इसके तेल से मसाज करने पर पेरो के नाख़ून मुलायम और सुन्दर बनते है|
*डायबिटीज के रोगी को कम शर्करा व ज्यादा फाइबर खाने की सलाह दी जाती है। अलसी में प्रचुर मात्रा में फाइबर पाया जाता है| जिससे ब्लड शुगर नियंत्रित रहती है और डायबिटीज से शरीर पर होने वाले दुष्प्रभाव कम होते है|
*अलसी का सेवन पेट को साफ रखने में भी प्रभावशाली है। इसलिए स्वस्थ व्यक्ति को रोज सुबह-शाम असली का सेवन जरूर करना चाहिए| आप चाहे तो अलसी के पाउडर को दूध, दही या ज्यूस में मिलाकर भी लिया जा सकता है|
अलसी के सेवन करने के तरीके
लसी से मिलने वाले लाभ तो बहुत है, लेकिन इस से मिलने वाले फायदों के लिए इसका सेवन सही तरीके से करना जरुरी है| यहाँ जानिए इसे किस तरह से लेना चाहिए|

अलसी के सेवन करने के तरीके

अलसी से मिलने वाले लाभ तो बहुत है, लेकिन इस से मिलने वाले फायदों के लिए इसका सेवन सही तरीके से करना जरुरी है| यहाँ जानिए इसे किस तरह से लेना चाहिए|

जो लोग कैंसर के रोगी है उन्हें 3 चम्मच अलसी का तेल पनीर में मिलाकर उसमें सूखे मेवे मिलाकर लेना चाहिए।
स्वस्थ व्यक्ति रोज सुबह-शाम एक-एक चम्मच अलसी का पाउडर पानी के साथ या फिर दाल और सब्जी के साथ ले सकते है|
स्वस्थ व्यक्ति इसकी मात्रा 30 से 60 ग्राम ले सकता है| अलसी को सूखी कढ़ाई में रोस्ट कीजिये और मिक्सी में पीस लीजिये| लेकिन एकदम बारीक मत कीजिये और दरदरे पीसिये| भोजन के बाद इसे सौंफ की तरह खाया जा सकता है|





दमा के रोगी को एक चम्मच अलसी के पाउडर को आधा गिलास पानी में 12 घंटे तक भिगो दे और फिर उसे सुबह – शाम छानकर इसका सेवन करने से लाभ मिलता है|
आप इसे गर्मी या सर्दी दोनों मौसम में खा सकते है| इसमें पाया जाने वाले फाइबर से हमें कई स्वास्थ लाभ पहुँचते है| कभी कभार इसके सेवन से बहुत प्यास लगती है, इसलिए इसका सेवन करते वक्त भरपूर मात्रा में पानी पिये|
जो लोग कैंसर के रोगी है उन्हें 3 चम्मच अलसी का तेल पनीर में मिलाकर उसमें सूखे मेवे मिलाकर लेना चाहिए।
*स्वस्थ व्यक्ति रोज सुबह-शाम एक-एक चम्मच अलसी का पाउडर पानी के साथ या फिर दाल और सब्जी के साथ ले सकते है|
*स्वस्थ व्यक्ति इसकी मात्रा 30 से 60 ग्राम ले सकता है| अलसी को सूखी कढ़ाई में रोस्ट कीजिये और मिक्सी में पीस लीजिये| लेकिन एकदम बारीक मत कीजिये और दरदरे पीसिये| भोजन के बाद इसे सौंफ की तरह खाया जा सकता है|
*दमा के रोगी को एक चम्मच अलसी के पाउडर को आधा गिलास पानी में 12 घंटे तक भिगो दे और फिर उसे सुबह – शाम छानकर इसका सेवन करने से लाभ मिलता है|
तो यह थे  आलसी सेवन के फायदे |आप इसे गर्मी या सर्दी दोनों मौसम में खा सकते है| इसमें पाया जाने वाले फाइबर से हमें कई स्वास्थ लाभ पहुँचाते है| कभी कभार इसके सेवन से बहुत प्यास लगती है, इसलिए इसका सेवन करते वक्त भरपूर मात्रा में पानी पिये|

पेट की सारी बीमारियों का जड़ से इलाज




हमारे पेट का अहम भाग होता है हमारा मलाशय. यदि पेट यानी मलाशय साफ रहेगा तो हमारी बीमारियां भी हमसे कोसो दूर रहेंगी.
पुराने जमाने में वैद्य-हकीम हमेशा अन्य बीमारियों का उपचार बाद में करते थे पहले पेट की बीमारियों को दूर करने के उपचार करते थे.
मलाशय हमारे पाचन तंत्र का महत्त्वपूर्ण हिस्सा है, यह हमारे पेट से उन अपाच्य भोजन को बाहर निकाल देता है जो पचता नहीं है जैसे पानी, नमक, विटामिन और अन्य पोषक तत्व.
इसलिए जब यह ठीक से काम नहीं करता है तब यह विषैले तत्वों से ग्रसित हो जाता है. जो कई सारी परेशानियां पैदा करता है जैसे सिर दर्द, सूजन, कब्ज, गैस, वजन बढ़ना, कम ऊर्जा, थकान और पुरानी बीमारी को उजागर कर देना.|




यह सारी परेशानियां अपाच्य भोजन से होती हैं जो बहुत सारे अन्य रसायनों से तैयार किए जाते हैं, जिनसे आगे चल कर मलाशय में बलगम जमा होने लगता है जो शरीर के लिए बहुत हानिकारक होता है.
इन उपायों से मलाशय को स्वस्थ रख सकते हैं---
सेब का रस : 
सेब का रस मलाशय की सफाई के लिए सबसे अच्छे घरेलू उपचारों में से एक है. सेब के रस का नियमित सेवन मल त्याग को प्रोत्साहित कर विषाक्त पदार्थों को बाहर निकलता है. पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने के साथ ही लीवर को भी बेहतर रखता है. अपने दिन की शुरुआत एक गिलास सेब के रस के साथ करें.
नींबू का रस : 
नींबू के रस में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और विटामिन सी पाचन तंत्र के लिए अच्छा होता है. इसलिए आप मलाशय की सफाई के लिए नींबू का रस ले सकते हैं. एक गिलास गुनगुने पानी में एक नींबू का रस, चुटकी भर समुद्री नमक और थोड़ा सा शहद मिलाकर सुबह खाली पेट लें. इसका सेवन आपको अधिक ऊर्जा, बेहतर मल त्याग और त्वचा को बेहतर बनाने में मदद करता है.
कच्ची सब्जियों का रस : 
यदि आपको मलाशय साफ रखना हो तो दो-तीन दिन भोजन से दूर रहें. ठोस आहार की जगह दिन में कई बार ताजा सब्जियों का जूस लें. सब्जियों के जूस में मौजूद शुगर मल त्याग में सुधार करता है.
इसमें मौजूद विटामिन, खनिज, अमीनो एसिड और एंजाइम आपके शरीर को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं.
फाइबर युक्त आहार : फाइबर मल को नर्म कर मल त्याग में सुधार करता है. रसभरी, नाशपाती और सेब जैसे ताजे फल के साथ मटर और ब्रोकोली जैसी ताजा सब्जियों और अनाज जैसे साबुत अनाज, नट्स, बीन्स और बीज को अपने आहार में शमिल कर फाइबर की उच्च मात्रा पा सकते हैं.
रोज खाएं दही : रोज दही का सेवन मलाशय को स्वस्थ रखने का अच्छा उपाय है. दही आपके शरीर को समर्थक जैविक और अच्छे बैक्टीरिया देता है और बुरे बैक्टीरिया बाहर करता है. दही में मौजूद उच्च मात्रा में कैल्शियम मलाशय की कोशिकाओं का विकास करता है.
अलसी : 
अलसी तेजी से मलाशय को साफ करती है. अलसी पानी को अवशोषित कर विषाक्त पदार्थों और बलगम तेजी से दूर करती है. अलसी मलाशय को साफ करने के साथ ही कैंसर, हृदय रोग और मधुमेह को रोकने में भी मदद करती है




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पानी : 
पानी एक ऐसा आसान उपाय है जिससे आप मलाशय साफ रख सकते हैं तो दिन कम से कम 12 से 15 गिलास पानी पिएं. यह मलाशय को साफ और आपके शरीर को विषैले पदार्थों को बाहर करने में सहायक होता है.
एलोवेरा : एलोवेरा में भरपूर एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं. यह लैक्सटिव के रूप में कार्य भी करता है. एलोवेरा में मौजूद औषधीय गुण मलाशय के स्वास्थ्य में सुधार करता है. एलोवेरा से जैल निकालकर नींबू का रस मिलाकर जूस बना लें. इस जूस को दो तीन घंटे के लिए फ्रिज में रखें. इस जूस को दिन में कई बार पी सकते हैं. इससे आपकी अन्य प्रॉब्लम भी दूर हो सकती हैं.

रविवार, 6 नवंबर 2016

मुंह सूखने की समस्या के अचूक नुस्खे


मुंह में लार बनने की प्रक्रिया कम हो जाने पर ड्राई माउथ यानी मुंह सूखने की समस्या उत्पन्न होती है। जिन लोगों को ये समस्या होती है, उनमें से कम ही इसे जान पाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार हर छठा व्यक्ति इस परेशानी से ग्रस्त है। ड्राई माउथ होने के कई कारण होते हैं। पानी में फ्लोराइड की मात्रा में कमी, बॉडी में पानी की कमी होना, अनियमित दिनचर्या, भूखे रहना, देर रात तक जागना, कई दिनों तक जागना, पौष्टिक खानपान की कमी, ऐसिडिटी आदि के कारण मुंह में लार कम बनती है। अस्थमा के रोगी, जो नियमित पंप लेते हैं, उन्हें भी यह परेशानी हो जाती है। इस समस्या के समाधान के लिए आप कई घरेलू नुस्खे अपना सकते हैं।
नींबू का जूस -मुंह के अंदर सलाइवा का उत्पादन बढ़ा सकता है और ड्राई माउथ की समस्या से राहत दिला सकता है। साथ ही, इसकी एसिडिक प्रवृत्ति आपके मुंह को साफ कर सकती है और बदबू को कम कर सकती है।
एक ग्लास पानी में आधा ग्लास नींबू का रस मिलाएं और थोड़ी सी शहद भी। दिन भर इस पानी के कुछ घूंट पीते रहें। इसके आलावा, आप होममेड लेमोनेड भी पी सकते हैं।
लाल मिर्च-
तेज लाल मिर्च ड्राई माउथ की समस्या के लिए सबसे अच्छा घरेलू उपचार है। ये आपके टेस्ट बड को भी दुरुस्त करता है जिससे आप मीठे, नमकीन, तीखे और कड़वे के बीच बेहतर तरीके से अंतर कर पाते हैं। इसे उंगली पर लगाकर अपनी जीभ पर लगाएं। कुछ देर के लिए जीभ जलेगी लेकिन आपके सलाइवा ग्लैंड्स सक्रिय हो जाएंगे। इसके अलावा इसे अपने सूप और सलाद में डालकर भी खाया जा सकता है।
तरल पदार्थ का अधिक सेवन-
ड्राई माउथ की सबसे बड़ी वजह डीहाईड्रेशन होती है। इसलिए ऐसी समस्या उत्पन्न होने पर सबसे पहले तरल पदार्थों का सेवन बढ़ा दें। इससे आपका शरीर हाईड्रेट होगा। ठीक प्रकार से हाईड्रेशन होने से आपके शरीर के लिए अधिक सलाइवा उत्पन्न करना आसान होगा और ड्राई माउथ की समस्या ठीक हो जाएगी।
सौंफ का फ्लेवर सलाइवा के प्रवाह को प्रोत्साहित करता है और आपको ड्राई माउथ की समस्या से राहत मिलती है। साथ ही, इसका अरोमा फ्लेवर सांस की बदबू से भी छुटकारा दिलाता है। दिन में कई बार सौंफ चबाएं।






एलोवेरा जूस -
ड्राई माउथ की समस्या के लिए एलोवेरा एक बहुत पुराना नुस्खा है। यह मुंह के संवेदनशील ऊतकों की रक्षा करने में भी मदद करता है और टेस्ट बड्स को बढ़ाता है। रोज एक चौथाई कप एलोवेरा जूस पियें। इसके अलावा, आप असली एलोवेरा जेल को रूई की मदद से मुंह के अंदर भी लगा सकते हैं। कुछ मिनट लगाए रखने के बाद ठंडे पानी से मुंह का कुल्ला कर लें।
अदरक -
ड्राई माउथ से राहत पाने के लिए अदरक का सेवन भी किया जा सकता है। सलाइवा बढ़ाने के लिए अदरक को बहुत प्रभावी माना जाता है। इससे आपका मुंह लंबे समय तक ताजा बना रह सकता है। ताजे अदरक के छोटे टुकड़े को धीरे धीरे चबाएं। दिन में दो से तीन बार ऐसा करें। इसके अलावा, दो से तीन अदरक की चाय पियें।
इलायची -
ड्राई माउथ से लड़ने का ये घरेलू व आयुर्वेदिक उपचार है। इलायची चबाने से मुंह में गीलापन आता है और साथ ही सांस की बदबू भी कम होती है। हर बार खाना खाने के बाद या फिर जब भी आपको मुंह सूखा हुआ महसूस हो, एक-दो इलायची चबा लें।

शुक्रवार, 28 अक्तूबर 2016

मस्सों को जड़ से ख़त्म करने के रामबाण आयुर्वेदिक उपचार,




लोग त्वचा की समस्याओं से ग्रसित रहते हैं। इनमे से कुछ समस्याएँ गंभीर होती हैं, और कुछ गौण समझी जाती हैं, और इन गौण समस्याओं में से एक समस्या होती है, मस्से।यह सिर्फ गौण ही नहीं बल्कि आम समस्याओं में गिनी जाती है। मस्से त्वचा पर एक उपज की तरह होते हैं, और सुसाध्य समझे जाते हैं, यानि कि वे कैंसरयुक्त नहीं होते। इसके बावजूद इनसे ग्रसित कई लोग इन्हें निकालने के लिए आतुर रहते हैं, क्योंकि उनके अनुसार मस्से त्वचा पर अच्छे नहीं दिखते। यह बात आप शायद न जानते हों कि मस्से ‘ह्युमन पैपिल्लोमा वाइरस’ के कारण विकसित होते हैं। शारीर पर वेदना रहित,सख्त,उड़द के समान,काली भूरी और उठी हुई जो फुंसी होती है ,उसे संस्कृत में ‘माष’ और आम भाषा में मस्सा कहते है ।




त्वचा पर बेडौल और रुखी सतह का विकास होना, मस्सों के लक्षण होते हैं। मस्से अपने आप विकसित होकर अपने आप ही गायब हो जाते हैं, पर इनमे से कई मस्से अत्याधिक पीड़ादायक होते हैं। यह तेज़ी से फैलते हैं, और इनमे से कई मस्से बरसों तक बने रहते हैं जिनका इलाज कराना ज़रूरी होता है।
बरगद के पेड़ के पत्तों का रस मस्सों के उपचार के लिए बहुत ही असरदार होता है। इस प्रयोग से त्वचा सौम्य हो जाती है और मस्से अपने आप गिर जाते हैं।
एक चम्मच कोथमीर के रस में एक चुटकी हल्दी डालकर सेवन करने से मस्सों से राहत मिलती है।
कच्चे आलू का एक स्लाइस नियमित रूप से दस मिनट तक मस्से पर लगाकर रखने से मस्सों से छुटकारा मिल जायेगा।
केले के छिलके को अंदर की तरफ से मस्से पर रखकर उसे एक पट्टी से बांध लें। और ऐसा दिन में दो बार करें और लगातार करते रहें जब तक कि मस्से ख़तम नहीं हो जाते।




अरंडी का तेल नियमित रूप से मस्सों पर लगायें। इससे मस्से नरम पड़ जायेंगे, और धीरे धीरे गायब हो जायेंगे। अरंडी के तेल के बदले कपूर के तेल का भी प्रयोग कर सकते हैं।
लहसून के एक टुकड़े को पीस लें, लेकिन बहुत महीन नहीं, और इस पीसे हुए लहसून को मस्से पर रखकर पट्टी से बांध लें। इससे भी मस्सों के उपचार में सहायता मिलती है।
एक बूँद ताजे मौसमी का रस मस्से पर लगा दें, और इसे भी पट्टी से बांध लें। ऐसा दिन में लगभग 3 या 4 बार करें। ऐसा करने से मस्से गायब हो जायेंगे।
अम्लाकी को मस्सों पर तब तक मलते रहें जब तक मस्से उस रस को सोख न लें। या अम्लाकी के रस को मस्से पर मल कर पट्टी से बांध लें।
कसीसादी तेल मस्सों पर रखकर पट्टी से बांध लें।मस्सों पर नियमित रूप से प्याज़ मलने से भी मस्से गायब हो जाते हैं।पपीता के क्षीर को मस्सों पर लगाने से भी मस्सों के गायब होने में मदद मिलती है।थूहर का दूध या कार्बोलिक एसिड सावधानीपूर्वक लगाने से मस्से निकल जाते हैं।
शरीर में जितने भी मस्से हो उतनि ही काली मिर्च लेकर शनिवार को दिन में न्योत दे,फिर रविवार को सबेरे ही उन्हें कपडे में बांध कर राह में छोड़ दे ।इस टोटके से भी मस्से नष्ट हो जाते है ।
बंगला, मलबारी, कपूरी, या नागरबेल के पत्ते के डंठल का रस मस्से पर लगाने से मस्से झड़ जाते हैं

शनिवार, 22 अक्तूबर 2016

निर्गुंडी बूटी के फायदे




परिचय : 
इसे निर्गुण्डी (संस्कृत), 
सम्हालू (हिन्दी), 
तिशिन्दा (बंगाली), 
निगड (मराठी), 
नगद (गुजराती),
 नौची (तमिल),
 तेल्लावाविली (तेलुगु), 
अस्लक (अरबी)
तथा वाइटेक्स निगण्डो (लैटिन) कहते हैं।
2. निर्गुण्डी का झाड़ीदार पौधा 8-10 फुट ऊँचा होता है। पत्ते अरहर के पत्तों के समान, एक डंठल पर तीन पत्रक (पत्र की पंखुड़ी), नीचे की सतह पर सफेदी लिये, कभी कटे, तो कभी बिना कटे, 1-5 इन्च लम्बे होते हैं। फूल छोटे, गुच्छेदार, नीलापन लिये तथा फल छोटे और पकने पर काले हो जाते हैं।
3. यह भारत में, विशेषत: बगीचों तथा पर्वतीय स्थानों में मिलती है। यह सर्वसुलभ है।
 इसके दो भेद हैं : 




(क) निर्गुण्डी (नीचे फूलवाली) तथा 
(ख) सिन्दुवार (सफेद फूलवाली)। सिन्दुवार (सम्हालू) का पौधा बड़ा होता है।
रासायनिक संघटन : 
इसके पत्तों में सुगन्धित उड़नशील तेल और राल होती है। फल में रेजिन एसिड, मैलिक एसिड, एल्केलायड तथा रंग-द्रव्य (कलरिंग मैटर) पाये जाते हैं।
निर्गुण्डी के गुण : यह रस में कड़वी, चरपरी, पचने पर कड़वी तथा गुण में हल्की, रूक्ष है। नाड़ी-संस्थान पर इसका मुख्य प्रभाव पड़ता है। यह शोथहर, व्रण (घाव) की शोधक और भरने वाली, केशों के लिए लाभकर, कीटाणु नाशक (एण्टीबायोटिक), कफहर, मूत्रजनक, आर्तवजनक, चर्म के लिए लाभकर, बल्य, रसायन तथा दृष्टि-शक्तिवर्धक है।
निर्गुण्डी के उपयोग-
1. सन्धिशोथ : इसके पत्तों को कपड़े में रखकर ऊपर से मिट्टी लपेटकर अग्रि में पका लें। जब उबल जाय तो निकाल, पीसकर लेप बना लें। सिरशूल, संधिशोथ, आमवात और अंडकोष-शोथ में यह लेप लगाने पर लाभ होता है। फेफड़ों की सूजन या फुफ्फुसावरण (फ्लूरा) में शोथ होने पर भी उपर्युक्त विधि से इसका उपयोग कर सकते हैं।
2. पेडू ( गर्भाशय) की सूजन :
 प्रसूति के बाद ज्वर में निर्गुण्डी का स्वरस पिलायें या पत्तों का शाक खिलायें। इसकी पिट्ठी गर्भाशय (पेडू) पर बाँधने से वहाँ की सूजन दूर होकर संकोचन होता हैं। दूषित रक्त निकलकर गर्भाशय पूर्वस्थिति में आ जाता है।
3. स्नायुक : 
राजस्थान, मालवा आदि में होने वाले स्नायुक (नास या नहरुआ) नामक फोड़े में यह बहुत लाभ करती है। रोगी को निर्गुण्डी का स्वरस पीने के लिए दिया जाय और उसी की पिट्ठी बनाकर फोड़े की जगह पर लेप किया जाय तो स्नायुक में लाभ मिलता है।
निर्गुण्डी से सावधानी : पित्त (गर्म) प्रकृति वाले को इसका विशेष सेवन न कराया जाय।