रविवार, 12 फ़रवरी 2017

घरेलू उपायों से टांसिल को करें दूर Domestic measures to remove the tonsils


     गले के प्रवेश द्वार के दोनों ओर मांस की एक-एक गांठ होती है| यह बिलकुल लसीका ग्रंथि की तरह होती है| इसी को टांसिल कहते हैं| इस रोग के कारण खाने-पीने में बड़ी तकलीफ होती है| यहां तक की थूक को निगलने में भी कष्ट होता है|गले पर कपड़ा तक सहन नहीं होता| यदि कोई व्यक्ति रोगी को जूठा भोजन-पानी आदि का सेवन कर ले तो उसे भी टांसिल हो सकता है|
   टांसिल गले में होने वाली समस्या है। किसी भी प्रकार का संक्रमण या इन्फेक्शन टांसिल की समस्या का कारण बन सकता है । टांसिल रोग की समस्या वहां ज्यादा पैदा होती है ,जहां का वातावरण शुद्ध नहीं होता ,वायु के द्वारा निरन्तर जहरीले तत्त्व हमारे शरीर के अंदर प्रविष्टि करते है। इस रोग के होने के कई कारण ओर भी हो सकते है जैसे खाने-पीने में लापरवाही, कभी कुछ ज्यादा ठंडे पदार्थ का सेवन कर लेना ।इस रोग के होने के कारण गले में दर्द होना शुरू हो जाता है।


टांसिल (गिल्टियां) का कारण

    टांसिल सूजने या बढ़ने का मुख्य कारण गरिष्ठ पदार्थों जैसे-मैदा, चावल, आलू, मिठाइयां, उरद की दाल, चीनी आदि का अधिक सेवन करना है| अधिक खट्टी चीजें तथा अम्लीय पदार्थ खाने से भी टांसिल बढ़ जाते हैं| इन चीजों में अम्लीयता का अंश अधिक होने से पेट में कब्ज हो जाता है तथा वायु बढ़ जाती है| इससे टांसिल में विषैला विकार उत्पन्न हो जाता है| गले और शरीर में ठंड लगने के कारण भी टांसिल बढ़ जाते हैं| शरीर में खून की अधिकता, मौसम में अचानक परिवर्तन, गरमी-सर्दी का बुखार, दूषित पर्यावरण में निवास तथा बासी भोजन करने के कारण भी टांसिल हो जाता है|
टांसिल (गिल्टियां) की पहचान
    टांसिल बढ़ जाने पर गले में सूजन आ जाती है| गले तथा गलपटों में बार-बार दर्द की लहर दौड़ती है| जीभ पर मैल जम जाती है तथा दुर्गंध भरी श्वास बाहर निकलती है| सिर एवं गरदन में दर्द शुरू हो जाता है| गरदन के दोनों तरफ लसिका ग्रंथियां बढ़ जाती हैं| यदि उन पर उंगली रखी जाए तो दर्द होता है| सांस लेने में भी कठिनाई होती है| सारे शरीर में दर्द, स्वर भंग, व्याकुलता, आलस्य आदि के लक्षण साफ-साफ दिखाई देते हैं| गलपटे सूजते ही ठंड लगती है और बुखार आ जाता है|
* गुनगुने पानी में नींबू का रस डालकर उसमें नमक,शहद डालकर इसके सेवन से टांसिल से राहत पाई जा सकती है।
*बर्फ के कुछ टुकड़े को एक कपड़े में डालकर टॉन्सिल वाली जगह पर रख कर सेंके।
* सिंघाड़े में आयोडीन की प्रचुर मात्रा होती है। इसलिए नियमित रूप से सिंघाड़े खाने से गले को लाभ मिलता है और टान्सिल से मुक्ति।
पान, मुलहठी और लौंग
*पान का पत्ता, आधा चम्मच मुलहठी का चूर्ण, दो लौंग तथा 4-5 दाने पीपरमेंट-इन सबको एक कप पानी में औटाकर काढ़ा बनाकर पिएं|*पीपल के पेड़ के हरे पत्तों का दूध एक चम्मच निकालकर गरम पानी में घोल लें| फिर इस पानी से गरारे करें|
*गरम पानी और शहतूत



*गरम पानी में दो चम्मच शहतूत के पत्तों का रस डालकर गरारे करें|

* गन्ने के जूस के साथ हरड़ का चूर्ण लेकर पीने से गला दर्द और टान्सिल जल्दी ठीक हो जाते हैं।
*गरम पानी में लहसुन को बारीक पीसकर मिला लें और इस पानी से कुछ दिनों तक लगातार गरारे करने से टान्सिल की बीमारी ठीक हो जाएगी।
*रात को सोने से पहले एक गिलास गर्म दूध में थोड़ी सी हल्दी और काली मिर्च पाउडर डालकर इसका सेवन करने से टांसिल से राहत पाई जा सकती है।
*तुलसी और लौंग
तुलसी के चार-पांच पत्ते तथा दो लौंग पानी में डालकर उबालें| फिर छानकर इस पानी में गरारे करें|
पानी, अदरक और हल्दी-
सादे पानी में अदरक का रस तथा पिसी हुई हल्दी डालकर रात को सोते समय सेवन करें|
* पानी में चाय की पत्तियों को उबालकर उसका गरारे करने से भी टान्सिल का रोग ठीक हो जाता है।
* गले में दर्द, सूजन और टान्सिल को दूर करने के लिए गरम पानी में नमक डालकर गरारे करें।
*अनानास के सेवन करने से थोड़े ही दिनों में टान्सिल खत्म हो जाते हैं।
फिटकिरी, माजूफल, शहद और पानी-
लाल फिटकिरी तथा माजूफल - दोनों 10-10 ग्राम लेकर एक कप पानी में उबाल लें| जब पानी आधा कप रह जाए तो छानकर उसमें एक चम्मच शुद्ध शहद डालें| इसे रुई की फुरेरी से टांसिल में लगाएं|

फिटकिरी और अजवायन-



फिटकिरी का चूर्ण तथा अजवायन का चूर्ण - दोनों को पानी में घोलकर गाढ़ा-गाढ़ा लेप गले के बाहर करें|
गरम पानी-
गरम पानी में थोड़ी-सी चायपत्ती डालकर छान लें| फिर इस पानी से दिन में तीन बार गरारे करें|
दालचीनी और शहद-
दालचीनी को पीसकर उसमें थोड़ा शहद मिला लें| फिर इसे टांसिल पर लगाएं| लार नीचे टपका दें|
तुलसी और शहद-
आधा चम्मच तुलसी की मंजरी को शहद में मिलाकर सुबह-शाम चाटने से टांसिल सूख जाते हैं|
* नियमित गाजर का रस पीते रहने से गले का दर्द और टान्सिल खत्म हो जाता है।
गरम पानी और सेंधा नमक-
गरम पानी में दो चुटकी सेंधा नमक डालकर अच्छी तरह मिला लें| फिर उस पानी से दिनभर में तीन-चार बार कुल्ला करें|
* फिटकरी और नमक को गरम पानी में डालकर गरारे करते रहने से टान्सिल ठीक हो जाते हैं।

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