शुक्रवार, 3 मार्च 2017

थूहर,नागफनी के गुण और औषधीय उपयोग


                                                               थूहर का पौधा 

                                                           नागफनी का पौधा 
     सम्पूर्ण भारत में सूखे स्थलों में पायी जाने वाली इस वनस्पति को अपने रेचक (परगेटिव) गुणों के कारण जाना जाता हैI इस वनस्पति में कमाल का दूध पाया जाता है,जो स्निग्ध ,उष्ण वीर्य ,हल्का ,त्वक रोगों एवं पेट के कब्ज को दूर करने वाले गुणों से युक्त होता है |
   नागफनी को संस्कृत भाषा में वज्रकंटका कहा जाता है . इसका कारण शायद यह है कि इसके कांटे बहुत मजबूत होते हैं . पहले समय में इसी का काँटा तोडकर कर्णछेदन कर दिया जाता था .इसके Antiseptic होने के कारण न तो कान पकता था और न ही उसमें पस पड़ती थी . कर्णछेदन से hydrocele की समस्या भी नहीं होती। नागफनी फल का हिस्सा flavonoids, टैनिन, और पेक्टिन से भरा हुआ होता है नागफनी के रूप में इसके अलावा संरचना में यह जस्ता, तांबा, पोटेशियम, आयरन, मैग्नीशियम, कैल्शियम, फास्फोरस, मोलिब्डेनम और कोबाल्ट शामिल है ।
*इसके दो पत्तों को केवल आग पर गर्म कर थोड़ा हाथों से मसल कर रस निकालकर थोड़ा सा काला नमक मिलाकर पीयें और देखें खांसी में कितना आराम मिलता है I



*नागफनी, स्वाद में कड़वी और स्वाभाव में बहुत उष्ण होती है। यह पेट के अफारे को दूर करने वाली, पाचक, मूत्रल, विरेचक होती है।औषधीय प्रयोग के लिए इसके पूरे पौधे को प्रयोग किया जाता है। कान के सर्द में इसकी १-२ बूँद टपकाने से लाभ होता है। कुक्कर खांसी, में इसके फल को भुन कर खाने से लाभ होता है। इसके फल से बना शरबत पिने से पित्त विकार सही होता है।
नागफनी (prickly pear) के औषधीय गुण -
*निमोनिया
पौधे के छोटे-छोटे टुकड़ों काट, उबाल कर, जो एक्सट्रेक्ट मिलाता है उसे एक दिन में दो बार 2 मिलीलीटर की मात्रा में, पांच दिनों के लिए दिया जाता है।
*सूजन, गठिया, Hydrocele
पौधे का तना लें और कांटा निकाल दें। इसे बीच से फाड़ कर हल्दी और सरसों का तेल डाल कर गर्म करें और प्रभावित जगह पर बाँध लें।
*IBS, कोलाइटिस, प्रोस्टेट ग्रंथि की सूजन
फूल का प्रयोग किया जाता है।
*इसकी पत्तियों को वासा (अडूसे) क़ी पत्तियों के साथ पीसकर छोटी -छोटी गोलियां बनाकर एक से दो गोली दिन में दो से तीन बार चूसने से भी खांसी में आराम मिलता है I
*कब्ज
बताशे/ चीनी/मिश्री पर लेटेक्स से केवल कुछ बूंदें डाल कर लें।इसमें विरेचन की भी क्षमता है . पेट साफ़ न होता हो तो इसके ताज़े दूध की 1-2 बूँद बताशे में डालकर खा लें ; ऊपर से पानी पी लें .
*इसका दूध आँख में नहीं गिरना चाहिए . यह अंधापन ला सकता है .
*आँखों की लाली ठीक करनी हो तो इसके बड़े पत्ते के कांटे साफ करके उसको बीच में से फाड़ लें . गूदे वाले हिस्से को कपडे पर रखकर आँख पर बाँधने से आँख की लाली ठीक हो जाती है .



*श्वास या कफ के रोग हैं तो एक भाग इसका रस और तीन भाग अदरक का रस मिलाकर लें .
*इसके पंचाग के टुकड़े सुखाकर , मिटटी की हंडिया में बंद करके फूंकें . जलने के बाद हंडिया में राख रह जाएगी । इसे नागफनी का क्षार कहा जाता है । इसकी 1-2 ग्राम राख शहद के साथ चाटने से या गर्म पानी के साथ लेने से हृदय रोग व सांस फूलने की बीमारी ठीक होती है ,घबराहट दूर होती है । इससे मूत्र रोगों में भी लाभ मिलता है . श्वास रोगों में भी फायदा होता है
*नागफनी सूजन, कब्ज, निमोनिया, गर्भनिरोधक और कई अन्य रोगों के उपचार में प्रयोग किया जाता है।
*इसे आंतरिक और बाह्य दोनों तरह से इस्तेमाल किया जाता है। किसी भी मामले में, इसे प्रयोग करने से पहले कांटों को हटा देना बहुत ही आवश्यक है।
*अगर सूजन है , जोड़ों का दर्द है , गुम चोट के कारण चल नहीं पाते हैं तो , पत्ते को बीच में काटकर गूदे वाले हिस्से पर हल्दी और सरसों का तेल लगाकर गर्म करकर बांधें . 4-6 घंटे में ही सूजन उतर जायेगी .
*Hydrocele की समस्या में इसी को लंगोटी में बांधें .
*कान में परेशानी हो तो इक्का पत्ता गर्म करके दो-दो बूँद रस डालें .
*इसके लाल और पीले रंग के फूल होते हैं . फूल के नीचे के फल को गर्म करके या उबालकर खाया जा सकता है . यह फल स्वादिष्ट होता है ।यह पित्तनाशक और ज्वरनाशक होता है .
*अगर दमा की बीमारी ठीक करनी है तो इसके फल को टुकड़े कर के , सुखाकर ,उसका काढ़ा पीयें . इस काढ़े से साधारण खांसी भी ठीक होती है ।
*ऐसा माना जाता है की अगर इसके पत्तों के 2 से 5 ग्राम तक रस का सेवन प्रतिदिन किया जाए तो कैंसर को रोका जा सकता है



*थूहर (स्नूही),अर्क (मदार ),करंज एवं चमेली की पत्तियों को गोमूत्र के साथ किसी भी प्रकार के घाव में लेप करने से घाव भर जाते हैं I

*यदि कान में दर्द हो रहा हो तो केवल इसके रस को गर्म कर कानों में दो -दो बूँद डालने मात्र से कानों का दर्द दूर होता है 
*स्नूही (थूहर ) के दूध में हल्दी का पाउडर मिलाकर एक लेप जैसा बना लें और इसे अर्श (पाइल्स ) के मस्सों पर लगा दे|मस्से समाप्त हो जायेंगे ..I
*लीवर , spleen बढ़ने पर , कम भूख लगने पर या ascites होने पर इसके 4-5 ग्राम रस में 10 ग्राम गोमूत्र , सौंठ और काली मिर्च मिलाएं . इसे नियमित रूप से लेते रहने से ये सभी बीमारियाँ ठीक होती हैं .
*सामान्य सूजन हो ,सूजन से दर्द हो uric acid बढ़ा हुआ हो , या arthritis की बीमारी हो . इन सब के लिए नागफनी की 3-4 ग्राम जड़ + 1gm मेथी +1 gm अजवायन +1gm सौंठ लेकर इनका काढ़ा बना लें और पीयें .
*इसका औषधीय प्रयोग केवल और केवल आयुर्वेदिक चिकित्सक के निर्देशन में हो I
एक टिप्पणी भेजें