सोमवार, 6 मार्च 2017

बेल पत्र के औषधीय प्रयोग



   भगवान शिवजी की को अर्पित किया जाने वाला बेलपत्र, सिर्फ पूजा मात्र का ही एक साधन नहीं है, बल्कि आपके स्वास्थ्य के लिए भी यह बेहद फायदेमंद है। बेलपत्र का आयुर्वेदिक महत्व। बेल का भारतीय संस्कृति में बहुत महत्त्व हैं, ये एक धार्मिक पेड़ भी है और इसका आयुर्वेदिक महत्व भी बहुत ज़्यादा हैं। ये अनेक रोगो में गुणकारी हैं। आइये जाने इसके फायदे —
  * हृदय रोगियों के लिए भी बेलपत्र का प्रयोग बेहद फायदेमंद है। बेलपत्र का काढ़ा बनाकर पीने से हृदय मजबूत होता है और हार्ट अटैक का खतरा कम होता है। श्वास रोगियों के लिए भी यह अमृत के समान है। इन पत्तियों का रस पीने से श्वास रोग में काफी लाभ होता है।
* शरीर में गर्मी बढ़ने पर या मुंह में गर्मी के कारण यदि छाले हो जाएं, तो बेल की पत्तियों को मुंह में रखकर चबाने से लाभ मिलता है और छाले समाप्त हो जाते हैं

बेल पत्र के सेवन से शरीर में आहार के पोषक तत्व अधिकाधिक रूप से अवशोषित होने लगते है |
*मन एकाग्र रहता है और ध्यान केन्द्रित करने में सहायता मिलती है |
* इसके सेवन से शारीरिक वृद्धि होती है |
* इसके पत्तों का काढा पीने से ह्रदय मज़बूत होता है |
* बारिश के दिनों में अक्सर आँख आ जाती है यानी कंजक्टिवाईटीस हो जाता है . बेल पत्रों का रस आँखों में डालने से ; लेप करने से लाभ होता है |
* इसके पत्तों के १० ग्राम रस में १ ग्रा. काली मिर्च और १ ग्रा. सेंधा नमक मिला कर सुबह दोपहर और शाम में लेने से अजीर्ण में लाभ होता है |



*बुखार होने पर बेल की पत्तियों के काढ़े का सेवन लाभप्रद है। यदि मधुमक्खी, बर्र अथवा ततैया के काटने पर जलन होती है। ऐसी स्थिति में काटे गए स्थान पर बेलपत्र का रस लगाने से राहत मिलती है।

* बवासीर आजकल एक आम बीमारी हो गई है। खूनी बवासीर तो बहुत ही तकलीफ देने वाला रोग है। बेल की जड़ का गूदा पीसकर बराबर मात्रा में मिश्री मिलाकर उसका चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को सुबह शाम ठंडे पानी के साथ लें। यदि पीड़ा अधिक है तो दिन में तीन बार लें। इससे बवासीर में फौरन लाभ मिलता है।यदि किसी कारण से बेल की जड़ उपलब्ध न हो सके तो कच्चे बेलफल का गूदा, सौंफ और सौंठ मिलाकर उसका काढ़ा बना कर सेवन करना भी लाभदायक होगा। यह प्रयोग एक सप्ताह तक करें।
*बेल पत्र , धनिया और सौंफ सामान मात्रा में ले कर कूटकर चूर्ण बना ले , शाम को १० -२० ग्रा. चूर्ण को १०० ग्रा. पानी में भिगो कर रखे , सुबह छानकर पिए | सुबह भिगोकर शाम को ले, इससे प्रमेह और प्रदर में लाभ होता है | 
*यह आंत में कीड़े को नष्ट करने में मदद करता है, और पाचन विकार के लिए एक अच्छा उपाय है। ट्रंक और बेल के पेड़ की शाखाओं 'Feronia गम' नामक गोंद जैसा पदार्थ होते हैं। यह आमतौर पर डायरिया और पेचिश के इलाज के लिए प्रयोग किये जाता है। बरसात के मौसम में होने वाले सर्दी , खांसी और बुखार के लिए बेल पत्र के रस में शहद मिलाकर ले |
*बेल के पत्तें पीसकर गुड मिलाकर गोलियां बनाकर रखे. इसे लेने से विषम ज्वर में लाभ होता है |
स्कर्वी की रोकथाम-
विटामिन सी (Ascorbic Acid) की कमी से स्कर्वी रोग होता है। बेल फल विटामिन सी से भरपूर होता है, तो यह आपको स्कर्वी रोग से बचाता है। विटामिन सी के उच्च स्तर में होने के कारण यह माइक्रोबियल और वायरल संक्रमण से रक्षा करके की लोगों की सुरक्षा, प्रतिरक्षा प्रणाली की ताकत और शक्ति बढ़ाता है।
* बरसात में अक्सर सर्दी, जुकाम और बुखार की समस्याएं अधिक होती हैं। ऐसे में बेलपत्रके रस में शहद मिलाकर पीना फायदेमंद है। वहीं विषम ज्वर हो जाने पर इसके पेस्ट की गोलियां बनाकर गुड़ के साथ खाई जाती हैं।
मधुमेह के रोगियों के लिए फायदेमंद-
'Feronia गम', ट्रंक और बेल के पेड़ की शाखाओं में प्रचुर मात्रा में होता है। यह मधुमेह रोगियों में counteracts और खून में शर्करा का प्रवाह, स्राव, और संतुलन को मैनेज करने में मदद करता है।



* पेट या आंतों में कीड़े होना या फिर बच्चें में दस्त लगने की समस्या हो, बेलपत्र का रस पिलाने से काफी फायदा होता है और यह समस्याएं समाप्त हो जाती हैं।मा या अस्थमा के लिए बेल पत्तों का काढा लाभकारी है|

हृदय को रखता है स्वस्थ-
बेल में बीटा कैरोटीन की अच्छी मात्रा पायी जाती है। बेल में थिअमिने और राइबोफ्लेविन होते हैं, जो हृदय टॉनिक के रूप में काम करते हैं। हार्ट को बूस्ट करते हैं और स्वस्थ रखते हैं।
रक्त क्लींज़र-
गर्म पानी और चीनी के साथ मिश्रित बेल फल का रस रक्त शुद्धि और शरीर से विषाक्त पदार्थों को हटाने का काम करता है। यह विषाक्त पदार्थों को कम करके जिगर और गुर्दे, पर तनाव कम कर देता है।
*सूखे हुए बेल पत्र धुप के साथ जलाने से वातावरण शुद्ध होता है|
फीडिंग-
बेल का रस माताओं द्वारा सूखा अदरक पाउडर और गुड़ के साथ सेवन किया जा सकता है। यह शिशुओं के लिए और अधिक दूध का उत्पादन करने में मदद करता है।



* एक चम्मच रस पिलाने से बच्चों के दस्त तुरंत रुक जाते है |

*त्वचा के लाल चकत्ते की रोकथाम-बेलपत्र के रस 30ml रस के साथ जीरा मिलाकर पीना चाहिए। इससे पित्ती के साथ साथ त्वचा के लाल पीले चकत्ते और खुजली द्वारा बने चकत्ते ठीक हो जाते हैं।
*संधिवात में बेल पत्र गर्म कर बाँधने से लाभ मिलता है |
कैंसर-
कैंसर रोकने के लिए या स्तन कैंसर का इलाज करने के लिए नियमित रूप से बेल के रस का सेवन करना चाहिए।
*महिलाओं में अधिक मासिक स्त्राव और श्वेत प्रदर के लिए और पुरुषों में धातुस्त्राव हो रोकने के लिए बेल पत्र और जीरा पीसकर दूध के साथ पीना चाहिए|
*बेल फल का पके फल के रूप में या रस-रूप में सेवन किया जा सकता है। पका हुआ बेल फल मीठा होता है और यह स्वादिष्ट पेय बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। पका हुआ फल चीनी या शहद के साथ कस्टर्ड के रूप में सेवन किया जाता है। कच्चे बेल फल का स्वाद खट्टा होता है। बेल फलों के पेड़ की पत्तियों का प्रयोग सलाद और चटनी बनाने के लिए प्रयोग किया जाता है।
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