बुधवार, 24 मई 2017

नेत्र के पलकों की सूजन ( ब्लेफराइटिस ) रोग के कारण,लक्षण ,उपचार


  

 ब्लेफराइटिस आंखों की एक बीमारी है, जिसमें पलकों में सूजन आ जाती है। पलकों में सूजन आने का कारण हमारी त्वचा व पलकों के ऑयल ग्लैंड के ब्लॉकेज में पाए जाने वाले बैक्टीरिया और एलर्जी होती है। ब्लेफराइटिस को नज़रअंदाज किया तो आईलैशेज़ कम हो सकते हैं।
ब्लेफराइटिस होने पर पलकें लाल हो जाती हैं, उनमें सूजन आ जाती है, खुजली होने लगती है और आईलैश पर पपड़ी-सी पड़ जाती है। साथ ही आंखें सूख जाती हैं। आंखों के सूखने का प्रमुख कारण आईलिड के ऑयल ग्लैंड का काम न करना होता है।

कारण-
ब्लेफराइटिस होने के कई कारण हैं। इनके कारणों की पहचान इस संक्रमण के प्रकार एक्यूट या क्रॉनिक के आधार पर की जाती है। एक्यूट ब्लेफराइटिस अल्सरेटिव और नॉन अल्सरेटिव दो तरह के होते हैं।
अल्सरेटिव एक्यूट ब्लेफराइटिस सामान्य तौर पर बैक्टीरियल इंफेक्शन के कारण होता है। यह संक्रमण आमतौर पर स्टेफाइलोकोक्कल एवं मेराक्जेला बैक्टीरिया के कारण होता है। वहीं हर्पीस सिम्पलेक्स और वेरिसेल्ला जोस्टर वायरस का संक्रमण भी ब्लेफराइटिस का आसाधारण कारण है।
नॉन अल्सरेटिव एक्यूट ब्लेफराइटिस होने का सामान्य कारण एलर्जिक रिएक्शन होता है। इस तरह के रिएक्शन होने पर एटॉपिक ब्लेफरो डर्मेटाइटिस, सीजनल एलर्जिक ब्लेफरो कंजंक्टिवाइटिस और डर्मेटो ब्लेफरो कंजंक्टिवाइटिस नामक संक्रमण हो जाता है।
ब्लेफराइटिस की  पहचान- 
आंखों की जांच व मरीज की हिस्ट्री पता की जाती है कि उसे कब, किस तरह के आंखों का संक्रमण हुआ था। उसके बाद आंखों की बाहर से जांच की जाती है। इसमें लिड स्ट्रक्चर, स्किन टेक्श्चर और आइलैश अपीयरेंस की जांच की जाती है। आईलिड के किनारे, आइलैशेज के बेस और मेल्बोमियन ग्लैंड ओपनिंग की माइक्रोस्कोप द्वारा जांच की जाती है। आंसू की क्वालिटी और मात्रा की भी जांच की जाती है।
लक्षण :ऐसा महसूस होना कि आंखों में कुछ चला गया है। आंखों में जलन होना। आंखों से पानी आना। आंखों या पलकों का लाल होना और उनका सूज जाना। आंखों का सूखना, स्पष्ट दिखाई न देना, आईलैशेज पर पपड़ी जम जाना और उसका कड़ा हो जाना। पलकें झपकने पर आंखों में भारीपन महसूस होना। इस तरह के लक्षण प्रायः सुबह नींद से उठने के बाद ज्यादा परेशान करते हैं।
रोग के प्रकार :



आईलिड के किनारों की दिखावट यानी अपीयरेंस के आधार पर ब्लेफराइटिस के प्रकार का निर्धारण किया जाता है। इंटीरियर ब्लेफराइटिस आईलिड के बाहरी किनारों पर जहां आईलैशेज जुड़े होते हैं, को प्रभावित करता है। पोस्टीरियर ब्लेफराइटिस आईलिड के ऑयल ग्लैंड, जो आंखों की तरलता बनाए रखने के लिए ऑयल का सीक्रिशन करती हैं, की कार्यप्रणाली में बाधा डालता है। इस संक्रमण से आंखों की तरलता खत्म हो जाती है और वे सूख जाती हैं। इस प्रकार का संक्रमण बैक्टीरिया के पनपने के लिए अनुकूल होता है। इसके अलावा मुंहासे और बालों में रूसी भी बैक्टीरिया के पनपने के लिए जिम्मेदार होती हैं। यह संभव है कि एकसाथ ही हमारी आंखें एंटीरियर और पोस्टीरियर दोनों प्रकार के ब्लेफराइटिस से संक्रमित हो जाएं। लेकिन दोनों प्रकार के संक्रमण की गंभीरता में फर्क हो सकता है।

ब्लेफराइटिस के उपचार-
ब्लेफराइटिस के उपचार के लिए एंटी-माइक्रो बायल्स का इस्तेमाल किया जाता है और पलकों की साफ-सफाई का पूरा ख्याल रखना जाता है। एरिथ्रोमाइसिन, एजिथ्रोमाइसिन, क्लोरैमफेनिकॉल और टेट्रासाइक्लिन आदि एंटीबायोटिक्स आई ड्रॉप के तौर पर आंखों में डाला जाता है। बिना डॉक्टर की सलाह के दवा नहीं लेनी चाहिए।
सही इलाज न होने पर यह गंभीर रूप धारण कर लेता है। इसके कारण पलकों के किनारे असमान हो जाते हैं। ऐसा अल्सर के कारण घाव से होता है। इतना ही नहीं, इस बीमारी को नजरअंदाज करने से ट्राइकिएसिस भी हो सकता है। क्रॉनिक ब्लेफराइटिस के कारण आईलैशेज भी कम हो जाते हैं। ब्लेफराइटिस से बचने के लिए पलकों की साफ-सफाई का पूरा ध्यान रखना चाहिए और गंदे हाथों से आंखों को छूने या उसे रगड़ने से बचना चाहिए। *इस बीमारी के उपचार में डॉक्टरी सलाह के साथ ही खुद के द्वारा आंखों की देखभाल बहुत महत्वपूर्ण होती है। जिन लोगों की पलकों में सूजन है, उन्हें उपचार के दौरान काॅस्मेटिक जैसे मस्कारा सहित आंखों के दूसरे मेकअप से बचना चाहिए।




*सूजी हुई आँखों को ठीक करने के लिए ग्रीन टी एवं ब्लैक टी काफी फायदेमंद हैं। चाय में मौजूद कैफीन रक्त वाहिकाओं को दबाता है जिसकी वजह से आँखों के नीचे से सूजन कम होती है। गरम पानी में अपनी पसंद के 2 टी बैग्स कुछ देर तक डुबोकर रखें और फिर निकाल लें। इसे ठंडा होने के लिए छोड़ दें और फिर अपनी आँखों पर लगाएं। इससे आँखों की जलन एवं आँखें लाल होने जैसी समस्याओं से भी छुटकारा मिलता है।ग्रीन टी में प्राकृतिक आयुर्वेदिक गुण होते हैं। आँखों को ठीक करने का यह काफी कारगर एवं तेज़ उपाय है। दोनों आँखों पर टी बैग रखकर 10-15 मिनट तक छोड़ दें। इससे काफी फायदा मिलेगा।
*आँखों पर खीरे का प्रयोग काफी प्रचलित एवं असरदार पद्दति है। खीरा त्वचा को आराम देता है और अगर खीरा तुरंत फ्रिज से निकाला हुआ हो तो इसका असर और भी ज़्यादा होता है। इसके प्रयोग से त्वचा की सूजन कम होती है और चेहरा आकर्षक लगता है। खीरे में मौजूद एस्ट्रिंजेंट के गुण रक्त वाहिकाओं को संकुचित करते हैं और सूजन दूर करते हैं। खीरे का ठंडा अहसास ना सिर्फ त्वचा को सुकून देता है बल्कि दिमाग भी तरोताज़ा रखता है। इसमें जलन से रक्षा करने वाले गुण भी होते हैं जो आपकी आँखों को फूलने से बचाते हैं।
फ्रिज में रखा हुआ अंडे का सफ़ेद भाग भी आँखों के लिए काफी अच्छा सिद्ध होता है। अंडे से त्वचा में कसावट आती है। अंडे के सफ़ेद भाग को पीसकर एक ब्रश की मदद से आँखों के नीचे लगाएं एवं 15-20 मिनट के लिए छोड़ दें। इसके बाद आँखें ठन्डे पानी से धो लें।
*फ्रिज में मौजूद टी बैग्स भी आँखों के लिए काफी फायदेमंद होते हैं। दो टी बैग लें और उन्हें ठन्डे पानी में डुबोकर कुछ देर तक फ्रिज में रखें। अब इन्हें निकालकर 25-30 मिनट तक आँखों पर रखें और अच्छे परिणाम के लिए आँखें ठन्डे पानी से धो लें।1 गिलास गरम पानी में नमक मिलाएं और कॉटन पैड्स की सहायता से आँखों पर लगाएं। कुछ देर इसी तरह रखने पर कमाल के नतीजे सामने आएँगे। आप आँखों की सूजन / पफी आइज़ कम करने के लिए ठन्डे पानी में डुबोये हुए कॉटन बॉल्स में विटामिन E का तेल मिलाकर आँखों पर लगाकर रख सकते हैं।

सावधानी-
सोडियम की अत्याधिक मात्रा से आपकी आँखों में सूजन आती है। अतः तीखे एवं मसालेदार खाने से परहेज करें। खाने में नमक कम करें एवं तले हुए खाने से दूर रहें।
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