रविवार, 25 जून 2017

दमा अस्थमा रोग मे उपयोगी योग आसन



    अस्थमा फेफड़े की एक बीमारी है जिसमें गला और छाती ज्यादा संवेदनशील रहते है| बदलते मौसम में अस्थमा के रोगियों की परेशानी बड़ जाती है| अस्थमा का मरीज धूल, धुँआ या अधिक सर्द वातावरण सहन नहीं कर पाते है| जहाँ ज्यादा ऑक्सीजन नहीं होती है वहां रहने में उन्हें तकलीफ होती है, साथ ही साँस लेने में परेशानी भी बनी रहती है|
   अस्थमा का कोई भी परमानेंट इलाज नहीं है| सामान्य दवाओं के इस्तेमाल से इसे नियंत्रित किया जा सकता है| योग विशेषज्ञ योगासन और व्यायाम के जरिये इसके संभव उपचार का दावा करते है| अपने नियमित भोजन में लहसुन, अदरक, तुलसी, हल्दी, कालीमिर्च, शहद और गर्म सूप को शामिल करें| कब्ज से बचें और अपने वजन को नियंत्रित रखें|
   


योगाचार्य बालकृष्ण के अनुसार, इस बीमारी का इलाज किसी एक थेरेपी से संभव नहीं है और रोगी को कई तरह की थेरेपी लेनी पड़ती है| उन्होंने कहा, अस्थमा के रोगियों को कार्बनिक भोजन का इस्तेमाल करना चाहिये, साथ ही योग थेरेपी तथा प्राकृतिक चिकित्सा के सिद्धांतो का पालन करना चाहिए|

उन्होंने कहा सांस लेने में परेशानी, खांसी, छाती में भारीपन, पेट फूलना, जुकाम, कमजोरी तथा शरीर में थकान होना इसके सामान्य लक्षण है
   अस्थमा के इलाज में योग आसन सबसे अधिक लाभदायक है| प्रायाणाम में शुरुवात में अनुलोम – विलोम का अभ्यास करें और फिर इसके बाद किसी योग चिकित्सक की मदद से कपालभाति का अभ्यास करें| आइये जानते है Yoga for Asthma को करने की विधि और लाभ –
अनुलोम विलोम

   इस आसन को करने के लिए एक शांत स्थान पर सामान्य अवस्था में बैठ जाये, उसके बाद अपने दायें हाथ के अंगूठे से दायें हाथ की नाक के छिद्र को बंद करें| अब बायें नाक के छिद्र से साँस को अंदर की ओर लें और उसे अंगूठे के बगल वाली उंगलियो से बंद करें, अब दायी नाक से अंगूठा हटाकर साँस को छोड़िये| ऐसा चार से पांच बार करें| यह प्रक्रिया आप दोनों नाक से बराबर करें|
  यह आसन दिमाग शांत करता है, अनिद्रा से बचाता है, आँखों की रौशनी बढ़ाता है, मस्तिष्क सम्बंधित समस्या से मुक्ति दिलाता है|
कपालभाति

   शांत वातावरण में आराम से बैठ जाये तथा साँस को अंदर करे और छोड़े, साँस लेते समय पेट को धक्का देते हुए साँस अंदर ले| इस आसन को प्रतिदिन करने से, वजन कम होता है, पेट की चर्बी कम होती है| चेहरे की झुर्रियां और आँखों के निचे का कालापन दूर होता है तथा चेहरे की चमक बढ़ती है| स्मरण शक्ति बढ़ती है और नकारात्मक तत्व दूर होते है|
मत्स्यासन

   पद्मासन की स्थिति में बैठ जाये फिर पीछे झुककर लेट जाइये| दोनों हाथों को आपस में बांधकर सिर के पीछे रखे अथवा पीठ के हिस्से को ऊपर उठाकर गर्दन के हिस्से को मोड़कर सिर को जमीन से लगाये|


दोनों पेरो के अंगूठो को हाथो से पकड़े और कोहनियो को जमीन से टिका कर रखें| इसे 1 से 5 मिनट तक करे फिर सामान्य अवस्था में आ जाएं| यह आसन पेट के रोग, मधुमेह, थाइराइड और पाचन प्रणाली के लिए बहुत ही फायदेमंद है|

भुजंगासन

   इस आसन को करने के लिए समतल जमीन पर पेट के बल लेट जाइये| दोनों हाथ कंधो के बराबर रखें तथा दोनों कोहनियो को शरीर के सामानांतर रखें| धीरे धीरे साँस अंदर भरकर, पहले मस्तक फिर छाती और फिर पेट को ऊपर की और उठाएं, नाभि को जमीं से लगा रहने दें| अब हाथों का सहारा लेकर शरीर को ऊपर उठाते हुए, कमर के पीछे की और खींचे| दोनों भुजाओ पर एकसमान भार रखें|
  इस आसन को करने से कंधे, कमर, पीठ और रीड की हड्डी के दर्द में आराम मिलता है| अस्थमा और श्वास सम्बंधित बीमारियो के लिए यह बहुत अधिक लाभदायक है|
शवासन

शवासन का अर्थ है मुर्दे के समान इसलिए इस आसन को शवासन कहा जाता है| इस आसन को करने के लिए पीठ के बल लेटकर दोनों पेरो में ज्यादा से ज्यादा अंतर रखते है| पैरों के पंजे बाहर और एड़िया अंदर की और रखते है| दोनों हाथो को शरीर से लगभग 6 इंच की दुरी पर तथा उंगलिया मुड़ी और गार्डन सीधी रहती है| साथ ही आँखों को बंद रखना चाहिए|
   


इस आसन को करने से शरीर के सभी आंतरिक अंगो का तनाव कम होता है, मन शांत रहता है, उच्च रक्तचाप और अनिद्रा की शिकायत दूर होती है साथ ही रक्त का प्रवाह सुचारू रूप से होता है|

चिकित्सकों के अनुसार, अस्थमा के मरीजों को कुछ सावधानिया भी रखनी चाहिए जैसे धूम्रपान ना करें, अगर कोई कर रहा हो तो उनसे दूर रहे, ठन्डे पेय पदार्थो से बचें, साँस फूलने लगे या थकान होने लगे ऐसे काम ना करें| समय समय पर चिकित्सको की राय लेते रहें|
एक टिप्पणी भेजें