किडनी की खराबी की केस रिपोर्ट सहित चिकित्सा

                                        


किडनी शरीर के महत्वपूर्ण अंगों में से एक है। किडनी रक्त में मौजूद पानी और व्यर्थ पदार्थो को अलग करने का काम करता है। इसके अलावा शरीर में रसायन पदार्थों का संतुलन, हॉर्मोन्स छोड़ना, रक्तचाप नियंत्रित करने में भी सहायता प्रदान करता है। यह लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण में भी सहायता करता है। इसका एक और कार्य है विटामिन-डी का निर्माण करना, जो शरीर की हड्डियों को स्वस्थ और मजबूत बनाता है।
लगातार दूषित पदार्थ ,दूषित जल पीने और नेफ़्रोंस के टूटने से किडनी के रोग उत्पन्न होते|इसके कारण किडनी शरीर से व्यर्थ पदार्थो को निकालने में असमर्थ हो जाते हैं। बदलती लाइफस्टाइल व काम के बढ़ते दबाव के कारण लोगों में जंकफूड व फास्ट फूड का सेवन ज्यादा करने लगे हैं। इसी वजह से लोगों की खाने की प्लेट से स्वस्थ व पौष्टिक आहार गायब होते जा रहें हैं। किडनी के रोगों को दूर करने के लिए कुछ प्राकृतिक उपायों की मदद लेना बहुत फायदेमंद साबित हो सकता है। ऐसे ही कुछ खास उपाय लेकर आए हैं हम आपके लिए।

विटामिन

कुछ खास तरह के विटामिन के सेवन से किडनी को स्वस्थ व मजबूत बनाया जा सकता है। यूं तो विटामिन पूरे शरीर के लिए फायदेमंद होते हैं लेकिन कुछ खास तरह के विटामिन का सेवन किडनी को स्वस्थ रखने के लिए किया जाता है। विटामिन डी के सेवन से किडनी के रोगों के लक्षणों को कम किया जा सकता है। अगर आप हर रोज विटामिन बी6 का सेवन करें तो किडनी स्टोन की समस्या से बच सकते हैं या आप इस समस्या से ग्रस्त हैं तो बिना किसी डर इस विटामिन का सेवन कर सकते हैं। कुछ ही दिनों स्टोन की समस्या अपने आप खत्म हो जाएगी। इसके अलावा विटामिन सी के सेवन से किडनी को क्षतिग्रस्त होने से बचाया जा सकता है।


बेकिंग सोडा

ब्रिटिश शोधर्कर्ताओं के मुताबिक किडनी के रोगों से बचने के लिए सोडियम बाइकार्बोनेट का सेवन फायदेमंद होता है। इसके सेवन से किडनी के रोगों की गति को कम किया जा सकता है। बेकिंग सोडा की मदद से रक्त में होने वाली एसिडिटी की समस्या खत्म हो जाती है जो कि किडनी की समस्याओं के मुख्य कारणों में से एक है।

एप्पल साइडर विनेगर

इसका प्रयोग कई शारीरिक जरूरतों के लिए किया जाता है। इसके अलावा किडनी संबंधी समस्याओं के बारे में भी काफी कारगर साबित होता है। इसमें मौजूद एंटी बैक्टीरियल तत्व शरीर को बैक्टीरियल इंफेक्शन से बचाते हैं जिसमें किडनी भी शामिल है। एप्पल साइडर विनेगर प्रयोग से किडनी में मौजूद स्टोन धीरे-धीरे अपने आप खत्म हो जाता है। इसमें मूत्रवर्धक तत्व होते हैं जो किडनी से व्यर्थ पदार्थों को बाहर निकालते हैं और किडनी को स्वस्थ रखते हैं।

सब्जियों का रस

किडनी की समस्या होने पर गाजर, खीरा, पत्तागोभी तथा लौकी के रस पीना चाहिए। इससे किडनी के रोगों से उबरने में मदद मिलती है और किडनी स्वस्थ रहती है। इसके अलावा तरबूज तथा आलू का रस भी गुर्दे के रोग को ठीक करने के लिए सही होता है इसलिए पीड़ित रोगी को इसके रस का सेवन सुबह शाम करना चाहिए।

मुनक्का का पानी

व्यक्ति को रात के समय में सोते वक्त कुछ मुनक्का को पानी में भिगोने के लिए रखना चाहिए तथा सुबह के समय में मुनक्का पानी से निकाल कर, इस पानी को पीना चाहिए। ऐसा कुछ दिनों तक लगातार करने से गुर्दे का रोग जल्दी ही ठीक हो जाता है।

पानी ज्यादा पीएं

गुर्दे के रोगों से बचने के लिए थोड़ी-थोड़ी देर में पानी पीते रहें। इससे किडनी में मौजूद व्यर्थ पदार्थ यूरीन के जरिए बाहर निकल जाएगें और आप किडनी के रोगों से बचे रहेंगे। चाहें तों पानी में नींबू के रस को निचोड़ कर भी पी सकते हैं इससे शरीर को विटामिन सी व पानी दोनों साथ मिलेगा।

नमक की मात्रा कम लें

किडनी की समस्या से ग्रस्त लोगों को अपने आहार पर खास ध्यान देना चाहिए। खाने में नमक व प्रोटीन की मात्रा कम रखनी चाहिए जिससे किडनी पर कम दबाव पड़ता है। इसके अलावा फासफोरस और पौटेशियम युक्त आहार से भी दूर ही रहना चाहिए।


विशिष्ट परामर्श-

किडनी फेल रोगी के बढे हुए क्रिएटनिन के लेविल को नीचे लाने और गुर्दे की क्षमता  बढ़ाने  में हर्बल औषधि सर्वाधिक सफल होती हैं| इस हेतु वैध्य दामोदर से 98267-95656 पर संपर्क किया जा सकता है| दुर्लभ जड़ी-बूटियों से निर्मित यह औषधि कितनी आश्चर्यजनक रूप से फलदायी है ,इसकी कुछ केस रिपोर्ट पाठकों की सेवा मे प्रस्तुत कर रहा हूँ -







इस औषधि के चमत्कारिक प्रभाव की एक लेटेस्ट  केस रिपोर्ट प्रस्तुत है-

रोगी का नाम -     राजेन्द्र द्विवेदी  
पता-मुन्नालाल मिल्स स्टोर ,नगर निगम के सामने वेंकेट रोड रीवा मध्यप्रदेश 
इलाज से पूर्व की जांच रिपोर्ट -
जांच रिपोर्ट  दिनांक- 2/9/2017 
ब्लड यूरिया-   181.9/ mg/dl
S.Creatinine -  10.9mg/dl






हर्बल औषधि प्रारंभ करने के 12 दिन बाद 
जांच रिपोर्ट  दिनांक - 14/9/2017 
ब्लड यूरिया -     31mg/dl
S.Creatinine  1.6mg/dl








जांच रिपोर्ट -
 दिनांक -22/9/2017
 हेमोग्लोबिन-  12.4 ग्राम 
blood urea - 30 mg/dl 

सीरम क्रिएटिनिन- 1.0 mg/dl
Conclusion- All  investigations normal 




 केस रिपोर्ट 2-

रोगी का नाम - Awdhesh 

निवासी - कानपुर 

ईलाज से पूर्व की रिपोर्ट






दिनांक - 26/4/2016

Urea- 55.14   mg/dl

creatinine-13.5   mg/dl 


यह हर्बल औषधि प्रयोग करने के 23 दिन बाद 17/5/2016 की सोनोग्राफी  रिपोर्ट  यूरिया और क्रेयटिनिन  नार्मल -




creatinine 1.34 
mg/dl

urea 22  mg/dl


















किडनी फेल (गुर्दे खराब) की हर्बल औषधि 

प्रोस्टेट ग्रंथि बढ्ने से मूत्र बाधा की हर्बल औषधि 

सिर्फ आपरेशन नहीं ,पथरी की 100% सफल हर्बल औषधि 

आर्थराइटिस(संधिवात)के घरेलू ,आयुर्वेदिक उपचार



शीतकाल मे बढ़ाएँ सेक्स पावर



    आजकल युवा लोगों में सबसे बड़ी चिंता शीघ्रपतन को लेकर रहती है जाहिर है की नवविवाहित पुरषों में ये अधिक होती है अगर वो इन 10 घरेलू नुस्खों में से एक या दो को भी अपनी पाचन शक्ति के अनुसार अपना लेते है तो उनके जीवन में बहार आ जाएगी इन नुस्खों के इस्तेमाल में 2 या 3 बातो का विशेष ध्यान रखे एक तो कब्ज न रहने दे और कोई भी नुस्खा अपनाए तो अपनी पाचन शक्ति के अनुसार और सबसे बड़ी बात खान-पान का पूरा ध्यान रखे खट्टे व् मिर्च वाले भोजन न करें अनारदाना तो मनुष्य को नपुंसकता की और लेकर जाता है।
सेक्स पावर बढ़ाने के नुस्खे -
*सफेद मूसली का चूर्ण एक-एक चम्मच सुबह-शाम फांक कर ऊपर से एक गिलास मिश्री मिला दूध पी ले यह प्रयोग 12 महीने करें यह प्रयोग करने से शरीर कभी भी कमजोर  नहीं होगा और बल वीर्य बढ़ेगा और यौन शक्ति बनी रहेगी|
*आधा सेर दूध में चार छुहारे डाल कर उबाले जब खूब अच्छी तरह दूध उबलने लगे तो इसमें केसर की 5 -6 पंखुड़िया और 4 चम्मच मिश्री डाल दीजिये जब दूध उबालकर आधा रह जाये तो इस दूध को सोने से पहले घूंट-घूंट कर के पी जाये यह बहुत ही पोष्टिक प्रयोग है और शीतकाल में करने योग्य है|
मुलहठी का चूर्ण एक चम्मच (6 ग्राम ) और एक छोटा चम्मच देसी घी और दो चम्मच शहद मिलाकर चाट ले इसके बाद एक गिलास दूध में आधा चम्मच सौंठ और एक चम्मच मिश्री डालकर उबालकर थोड़ा ठंडा करके पिए यह प्रयोग शरीर की सभी धा-तुओं को बेहद पुष्ट कर देगा| इस प्रयोग को हर रोज सोने से पहले या सहवास के बाद करना चाहिए
*इमली के बीज चार दिन तक पानी में घोलकर रखे इसके बाद इनका छिलका हटाकर इसकी गिरी के दोगुने वजन के बराबर दो वर्ष पुराण गुड लेकर मिला ले अभी इनको पीसकर बराबर कर ले अभी इसकी छोटे बेर जितनी गोलिया बना ले और छाया में सुखा लीजिए सहवास करने से दो घंटे पहले पानी के साथ निगल ले यह धातु पोष्टिक नुस्खा है|
*असगंद और बिधारा दोनों को अलग-अलग कुट पिसकर महीन चूर्ण बना कर बराबर मात्रा में मिला लीजिए हर रोज सुबह एक चम्मच चूर्ण थोड़े से घी में मिलाकर चाट ले और ऊपर से मिश्री मिला दूध पी ले हर सर्दियों में यह प्रयोग 3 -4 महीने के लिए करें और इसके साथ नारियल तेल या नारायण तेल की मालिश शरीर पर करें फिर देखे इस नुस्खे का चमत्कार|
 *उड़द की दाल पिसवाले इसे शुद्ध देसी घी में सेंककर कांच के बर्तन में भरकर रख ले एक-एक चम्मच यह दाल थोड़े से घी में मिलाकर सुबह व रात को सोते समय खाकर ऊपर से मिश्री मिला दूध पी ले इससे धातु ,बल ,वीर्य स्तंभन  बढ़ेगी| अगर उड़द न पचा सके तो एक समय ही ले|

बालों के झड़ने और गंजेपन के रामबाण उपचार 

कोंच के बीज 250 ग्राम ,ताल मखाना 100 ग्राम और मिश्री 350 ग्राम इन सबको अलग-अलग पीसकर चूर्ण कर ले और मिलाकर शीशी में भर ले सुबह-शाम इस चूर्ण को एक-एक चम्मच मिश्री वाले दूध के साथ पिए
*सफेद या लाल प्याज का रस ,शहद,अदरक का रस ,देसी घी 6 -6 मिलाकर नित्य चाटे एक महीने के सेवन से नपुंसक भी शक्तिशाली हो जाता है नित्य करने से सेक्स पावर बहुत बढ़ जाती है|
*सूखे सिंघाड़े पिसवा लीजिए इसके आटे का हलवा बनाकर सुबह नाश्ते में अपनी पाचन शक्ति के अनुसार खूब चबा-चबा कर खाये यह शरीर को पुष्ट और शक्तिशाली बनाता है नवविवाहित नोजवानो के लिए यह बहुत ही उपयोगी है इससे धातु पुष्ट  होकर शरीर बलिष्ठ होता है|
*शकरकंदी का हलवा देसी घी में बनाकर हर रोज नाश्ते में खाये इसके गुण सिंघाड़े के आटे के हलवे के बराबर है हर रोज खाने वाला व्यक्ति कभी भी शीघ्र पतन का शिकार नहीं होता|

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हाथ पैर सुन्न होने के घरेलू हर्बल इलाज


अक्सर जब आप कभी एक ही अवस्था में बैठे रह जाते हैं तो आपके हाथ और पैर सुन्नं पड़ जाते हैं, जिसके कारण आपको कभी कोई भी चीज़ को छूने का एहसास मालूम नहीं पड़ता है। यही नहीं, इसके अलावा आपको प्रभावित स्थान पर दर्द, कमजोरी या ऐठन भी महसूस होती होगी। 
 इसके कई कारण हो सकते हैं जैसे लगातार हाथों और पैरों पर प्रेशर, किसी ठंडी चीज को बहुत देर तक छूते रहना, तंत्रिका चोट, बहुत अधिक थकान, धूम्रपान, मधुमेह, विटामिन या मैग्नीशियम की कमी आदि। अगर यह समस्या कुछ मिनटों तक रहती है तो परेशानी की बात नहीं है, लेकिन अगर यही कई- कई घंटों तक बनी रहे तो आपको डाक्टर के पास जाने की आवश्यकता है।  हाथ -पैर का सुन्न हो जाना बड़ा ही कष्टदायक होता है क्योंकि ऐसे में फिर आपका कहीं मन नहीं लगता। पर आप चाहें तो इस समस्या को घरेलू उपचार से ठीक कर सकते हैं।
गर्म पानी का सेंक-
सबसे पहले प्रभावित जगह पर गर्म पानी की बोतल से सेंक रखें। इससे वहां की ब्लड सप्लाई बढ़ जाएगी। इससे मासपेशियां और नसें रिलेक्स होंगी। एक साफ कपड़े को गर्म पानी में 5 मिनट के लिए भिगोएं और फिर उससे प्रभावित जगह को सेंकें। आप चाहें तो गर्म पानी से स्नान भी कर सकती हैं।
मसाज सबसे अच्छा ऑप्शन-



हाथ या पैर में सुन्‍नपन आने पर मसाज इस समस्‍या से निपटने का सबसे आसान और सरल तरीका है। यह ब्‍लड सर्कुलेशन को बढ़ाता है, जिससे सुन्नता में कमी आती है। इसके अलावा यह मसल्‍स और नसों को प्रोत्‍साहित कर, समग्र कामकाज में सुधार करता है। अपने हाथों में गर्म जैतून, नारियल या सरसों के तेल लेकर इसे सुन्न हिस्‍से में लगाकर 5 मिनट के लिए सर्कुलर मोशन में अपनी उंगलियों से मसाज करें। जरूरत पड़ने पर इस उपाय को दोहराये।
ऑक्सीजन में सुधार करें एक्सरसाइज-
व्यायाम करने से शरीर में ब्लड र्स्कुलेशन होता है और वहां पर आक्सीजन की मात्रा बढ़ती है। रोजाना हाथ और पैरों का 15 मिनट व्यायाम करना चाहिए। इसके अलावा हफ्ते में 5 दिन के लिए 30 मिनट एरोबिक्स करें, जिससे आप हमेशा स्वस्थ बने रहें।एक्सरसाइज शरीर के विभिन्न अंगों में ब्लड सर्कुलेशन और ऑक्सीजन में सुधार करता है, जिससे हाथ और पैर सहित शरीर के किसी भी अंग में सुन्नपन, झनझनाहट को रोकने में मदद मिलती है। इसके अलावा नियमित रूप एक्सरसाइज गतिशीलता में सुधार और कई स्वास्थ्य समस्याओं से बचाता है। 

प्रोस्टेट ग्रन्थि वृद्धि से मूत्र रुकावट का 100% सफल हर्बल इलाज

मैग्नी शियम का सेवन जरूर करें
हरी पत्तेीदार सब्जिेयां, मेवे, बीज, ओटमील, पीनट बटर, ठंडे पानी की मछलियां, सोया बीन, अवाकाडो, केला, डार्क चॉकलेट और लो फैट दही आदि जरूर खाएं। आप रोजाना मैग्नीlशियम 350 एम जी की सपलीमेंट भी ले सकते हैं। 



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हल्दी में मौजूद कुरकुर्मीन नाम का तत्व पूरे शरीर में ब्लड सर्कुलेशन में सुधार करने में मदद करता है। इसके अलावा, इसमें मौजूद एंटी-इंफ्लेमेंटरी गुण प्रभावित हिस्से में दर्द और परेशानी कम करने में मदद करता है। समस्या होने पर एक गिलास दूध में आधा चम्मच हल्दी मिक्स करके हल्की आंच पर पकाएं। फिर इसमें थोड़ा सा शहद मिलाकर दिन में एक बार पीने से ब्लड सर्कुलेशन में सुधार होता है। आप हल्दी और पानी से बने पेस्ट से प्रभावित हिस्से पर मसाज भी कर सकते हैं।
खूब खाएं Vitamin B फूड-
अगर हाथ-पैरों में झन्न-झन्नाहट सी होती है तो अपने आहार में ढेर सारे विटामिन बी, बी6 और बी12 को शामिल करें। इनके कमी से भी हाथ, पैरों, बाजुओं और उंगलियों में सुन्न पैदा हो जाती है। आपको अपने आहार में अंडे, अवाकाडो, मीट, केला, बींस, मछली, ओटमील, दूध, चीज़, दही, मेवे, बीज और फल शामिल करने चाहिये।
दालचीनी का उपयोग करें-
दालचीनी में केमिकल और न्यूट्रिएंट्स होते हैं जो हाथ और पैरों में ब्लड फ्लो को बढ़ाते हैं। एक्सपर्ट बताते हैं रोजाना 2-4 ग्राम दालचीनी पाउडर को लेने से ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है। इसको लेने का अच्छा तरीका है कि एक गिलास गर्म पानी में 1 चम्मच दालचीनी पाउडर मिलाएं और दिन में एक बार पिएं। दूसरा तरीका है कि 1 चम्मच दालचीनी और शहद मिला कर सुबह कुछ दिनों तक सेवन करें। 
प्रभावित हिस्‍से को ऊपर उठाएं-
हाथ और पैरों के खराब ब्लड सर्कुलेशन से ऐसा होता है। इसलिए उस प्रभावित हिस्से को ऊपर की ओर उठाइए जिससे वह नॉर्मल हो सके। इससे सुन्न वाला हिस्सा ठीक हो जाएगा। आप अपने प्रभावित हिस्से को तकिए पर ऊंचा कर के भी लेट सकते हैं।



गुर्दे की पथरी (किडनी स्टोन) के रामबाण आयुर्वेदिक उपचार


 किडनी,,युरेटर या ब्ला्डर, में पथरी निर्माण होना एक भयंकर पीडादायक रोग है। मूत्र में पाये जाने वाले रासायनिक पदार्थों से मूत्र अन्गों में पथरी बनती है,जैसे युरिक एसिड,फ़स्फ़ोरस केल्शियम और ओ़क्झेलिक एसिड। जिन पदार्थों से पथरी निर्माण होती है उनमें केल्शियम ओक्झेलेट प्रमुख है। लगभग ९० प्रतिशत पथरी का निर्माण केल्शियम ओक्झेलेट से होताहै। गुर्दे की पथरी( kidney stone) का दर्द आमतौर पर बहुत भयंकर होता है। रोगी तडफ़ उठता है। पथरी जब अपने स्थान से नीचे की तरफ़ खिसकती है तब यह दर्द पैदा होताहै। पथरी गुर्दे से खिसक कर युरेटर और फ़िर युरिन ब्लाडर में आती है। पेशाब होने में कष्ट होता
है,उल्टी मितली,पसीना होना और फ़िर ठड मेहसूस होना ,ये पथरी के समान्य लक्षण हैं।नुकीली पथरी से खरोंच लगने पर पेशाब में खून भी आता है।इस रोग में पेशाब थोड़ी मात्रा में कष्ट के साथ बार-बार आता है| रोग के निदान के लिये सोनोग्राफ़ी करवाना चाहिये।वैसे तो विशिष्ठ हर्बल औषधियों से ३० एम एम तक की पथरी निकल जाती है लेकिन ४-५ एम एम तक की पथरी घरेलू नुस्खों के प्रयोग से समाप्त हो सकती हैं। मैं ऐसे ही कुछ सरल नुस्खे यहां प्रस्तुत कर रहा हूं।

गठिया ,घुटनों का दर्द,कमर दर्द ,सायटिका  के अचूक उपचार

  ..तुलसी के पत्तों का रस एक चम्मच एक चम्मच शहद में मिलाकर जल्दी सबेरे लें। ऐसा ५-६ माह तक करने से छोटी पथरी निकल जाती है।
 २) मूली के पत्तों का रस २०० एम एल दिन में २ बार लेने से पथरी रोग नष्ट होता है।
 ३) दो अन्जीर एक गिलास पानी मे उबालकर सुबह के वक्त पीयें। एक माह तक लेना जरूरी है।
 ४) नींबू के रस में स्टोन को घोलने की शक्ति होती है। एक नींबू का रस दिन में १-२ बार मामूली गरम जल में लेना चाहिये।
 ५) पानी में शरीर के विजातीय पदार्थों को बाहर निकालने की अद्भुत शक्ति होती है। गरमी में ४-५ लिटर और सर्द मौसम में ३-४ लिटर जल पीने की आदत बनावें।

*किडनी फेल रोग का अचूक इलाज* 

 ६) दो तीन सेवफ़ल रोज खाने से पथरी रोग में लाभ मिलता है।
 ७) तरबूज में पानी की मात्रा ज्यादा होती है । जब तक उपलब्ध रहे रोज तरबूज खाएं। तरबूज में पुरुषों के लिये वियाग्रा गोली के समान काम- शक्ति वर्धक असर भी पाया गया है।
 ८) कुलथी की दाल का सूप पीने से पथरी निकलने के प्रमाण मिले है। २० ग्राम कुलथी दो कप पानी में उबालकर काढा बनालें। सुबह के वक्त और रात को सोने से पहिले पीयें।
 ९) शोध में पाया गया है कि विटमिन बी६ याने पायरीडोक्सीन के प्रयोग से पथरी समाप्त हो जाती है और नई पथरी बनने पर भी रोक लगती है। १०० से १५० एम जी की खुराक कई महीनों तक लेने से पथरी रोग का स्थायी समाधान होता है।

गोखरू के औषधीय गुण और प्रयोग

 १०. अंगूर में पोटेशियम और पानी की अधिकता होने से गुर्दे के रोगों लाभदायक सिद्ध हुआ है। इसमें अल्बुमिन और सोडियम कम होता है जो गुर्दे के लिये उत्तम है।
  . गाजर और मूली के बीज १०-१० ग्राम,गोखरू २० ग्राम,जवाखार और हजरूल यहूद ५-५ ग्राम लेकर पावडर बनालें और ४-४ ग्राम की पुडिया बनालें। एक खुराक प्रत: ६ बजे दूसरी ८ बजे और तीसरी शाम ४ बजे दूध-पानी की लस्सी के साथ लें। बहुत कारगर उपचार है|
 १२) पथरी को गलाने के लिये चौलाई की सब्जी गुणकारी है। उबालकर धीरे-धीरे चबाकर खाएं।दिन में ३-४ बार यह उपक्रम करें।

वर्षा ऋतु के रोग और आयुर्वेदिक घरेलू उपचार 

 १३) बथुआ की सब्जी आधा किलो लें। इसे ८०० मिलि पानी में उबालें। अब इसे कपडे या चाय की छलनी में छान लें। बथुआ की सब्जी भी भी इसमें अच्छी तरह मसलकर मिलालें। काली मिर्च आधा चम्मच और थोडा सा सेंधा नमक मिलाकर पीयें। दिन में ३-४ बार प्रयोग करते रहने से गुर्दे के विकार नष्ट होते हैं और पथरी निकल जाती है।
 १४) प्याज में पथरी नाशक तत्व होते हैं। करीब ७० ग्राम प्याज को अच्छी तरह पीसकर या मिक्सर में चलाकर पेस्ट बनालें। इसे कपडे से निचोडकर रस निकालें। सुबह खाली पेट पीते रहने से पथरी छोटे-छोटे टुकडे होकर निकल जाती है।
 १५) सूखे आंवले बारीक पीसलें। यह चूर्ण कटी हुई मूली पर लगाकर भली प्रकार चबाकर खाने से कुछ ही हफ़्तों में पथरी निकलने के प्रमाण मिले हैं।
 १६) स्टूल पर चढकर १५-२० बार फ़र्श पर कूदें। पथरी नीचे खिसकेगी और पेशाब के रास्ते निकल जाएगी। निर्बल व्यक्ति यह प्रयोग न करें।

बढ़ी हुई तिल्ली प्लीहा के घरेलू आयुर्वेदिक उपचार

 १७) मिश्री,सौंफ,सूखा धनिया सभी ५०-५० ग्राम की मात्रा में लेकर रात को डेढ़ लीटर पानी में भिगोकर रख दीजिए २४ घंटे बाद छानकर सौंफ, धनिया पीसकर यह पेस्ट पुन; तरल मिश्रण में घोलकर पीते रहने से मूत्र पथरी निकल जाती है|
 १८) जवाखार: गाय के दूध के लगभग 250 मिलीलीटर मट्ठे में 5 ग्राम जवाखार मिलाकर सुबह-शाम पीने से गुर्दे की पथरी खत्म होती है। जवाखार और चीनी 2-2 ग्राम की मात्रा में लेकर पीसकर पानी के साथ खाने से पथरी टूट-टूटकर पेशाब के साथ निकल जाती है। इस मिश्रण को रोज सुबह-शाम खाने से आराम मिलता है।
 १९) पालक: 100 मिलीलीटर नारियल का पानी लेकर, उसमें 10 मिलीलीटर पालक का रस मिलाकर पीने से 14 दिनों में पथरी खत्म हो जाती है। पालक के साग का रस 20 से 40 मिलीलीटर की मात्रा में प्रतिदिन सुबह-शाम खाने से पथरी में लाभ मिलता है।
 २०) गोक्षुर: गोक्षुर के बीजों का चूर्ण 3 से 6 ग्राम बकरी के दूध के साथ प्रतिदिन 2 बार खाने से पथरी खत्म होती है।

*सिर्फ आपरेशन नहीं ,प्रोस्टेट वृद्धि की 100% अचूक हर्बल औषधि *

 २१)  फिटकरी: भुनी हुई फिटकरी 1-1 ग्राम दिन में 3 बार रोगी को पानी के साथ सेवन कराने से रोग ठीक होता है।
 २२) कमलीशोरा: कमलीशोरा, गंधक और आमलासार 10-10 ग्राम अलग-अलग पीसकर मिला लें और हल्की आग पर गर्म करने के 1-1 ग्राम का आधा कप मूली के रस के साथ सुबह-शाम लेने से गुर्दे की पथरी में लाभ मिलता है।
 २३) आलू: एक या दोनों गुर्दो में पथरी होने पर केवल आलू खाते रहने पर बहुत लाभ होता है। पथरी के रोगी को केवल आलू खिलाकर और बार-बार अधिक मात्रा में पानी पिलाते रहने से गुर्दे की पथरियां और रेत आसानी से निकल जाती हैं। आलू में मैग्नीशियम पाया जाता है जो पथरी को निकालता है तथा पथरी बनने से रोकता है। 

लो ब्लड प्रेशर होने पर तुरंत करें ये पाँच उपाय 

२४) तुलसी: 20 ग्राम तुलसी के सूखे पत्ते, 20 ग्राम अजवायन और 10 ग्राम सेंधानमक लेकर पॉउड़र बनाकर रख लें। यह 3 ग्राम चूर्ण गुनगुने पानी के साथ प्रतिदिन सुबह-शाम सेवन करने से गुर्दे का तेज दर्द दूर होता है। २५) पके हुए प्याज का रस पीना पथरी निकालने के लिए बेहद लाभ प्रद उपाय है| दो मध्यम आकार के प्याज लेंकर भली प्रकार छीलें | एक गिलास जल में डालकर मध्यम आंच पर पकाएं| अब इस मिश्रण को मिक्सर में डालकर चलाएं | इस रस को छानकर पियें| ७ दिन तक यह उपचार करने से पथरी के टुकड़े निकल जाते हैं| 

 विशिष्ट  परामर्श- 
      

वैध्य श्री दामोदर 9826795656  की जड़ी बूटी - निर्मित औषधि से 30 एम एम तक के आकार की बड़ी  पथरी  भी  आसानी से नष्ट हो जाती है|  पथरी का भयंकर दर्द , गुर्दे की सूजन,पेशाब मे दिक्कत,जलन को तुरंत समाप्त करने मे यह  औषधि  रामबाण की तरह असरदार है|जो पथरी का दर्द महंगे इंजेक्शन से भी काबू मे नहीं आता ,इस औषधि की कुछ ही खुराक लेने से आराम लग जाता है|  आपरेशन की जरूरत ही नहीं पड़ती|औषधि मनी बेक गारंटी युक्त है|








याददाश्त (मेमोरी पावर) बढ़ाने के घरेलू,आयुर्वेदिक उपचार


स्मरण शक्ति की कमजोरी या विकृति से विद्यार्थी और दिमागी काम करने वालों को असुविधाजनक स्थिति से रुबरु होना पडता है। यह कोई रोग नहीं है और न किसी रोग का लक्षण है। इसकी मुख्य वजह एकाग्रता(कन्संट्रेशन) की कमी होना है। स्मरण शक्ति बढाने के लिये दिमाग को सक्रिय रखना आवश्यक है। शरीर और मस्तिष्क की कसरतें अत्यंत लाभदायक होती हैं। किसी बात को बार-बार रटने से भी स्मरण शक्ति में इजाफ़ा होता है और वह मस्तिष्क में द्रडता से अंकित हो जाती है। आजकल कई तरह के विडियो गेम्स प्रचलन में हैं । ये खेल भी मस्तिष्क को ताकतवर बनाने में सहायक हो सकते हैं|पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित पहेलियां हल करने से भी मस्तिष्क की शक्ति बढती है।
मैं नीचे कुछ ऐसे सरल उपचार प्रस्तुत कर रहा हूं जो मेमोरी पावर बढाने मे अत्यंत उपकारी सिद्ध होते हैं--
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१) बादाम ९ नग रात को पानी में गलाएं।सुबह छिलके उतारकर बारीक पीस कर पेस्ट बनालें। अब एक गिलास दूध गरम करें और उसमें बादाम का पेस्ट घोलें। इसमें ३ चम्मच शहद भी डालें। मामूली गरम हालत में पीयें। यह मिश्रण पीने के बाद दो घंटे तक कुछ न लें। यह स्मरण शक्ति वृद्दि करने का जबर्दस्त उपचार है। दो महीने तक करना ठीक रहेगा|



प्रोस्टेट  बढ़ने से मूत्र रुकावट की अचूक सफल औषधि

२) ब्राह्मी दिमागी शक्ति बढाने की मशहूर जडी-बूटी है। इसका एक चम्मच रस नित्य पीना हितकर है। इसके ७ पत्ते चबाकर खाने से भी वही लाभ मिलता है। ब्राह्मी मे एन्टी ओक्सीडेंट तत्व होते हैं जिससे दिमाग की शक्ति घटने पर रोक लगती है।



३) अखरोट जिसे अंग्रेजी में वालनट कहते हैं स्मरण शक्ति बढाने में सहायक है। नियमित उपयोग हितकर है। २० ग्राम वालनट और साथ में १० ग्राम किशमिस लेना चाहिये|






४) एक सेवफ़ल नित्य खाने से कमजोर मेमोरी में लाभ होता है। भोजन से १० मिनिट पहिले खाएं।
५) जिन फ़लों में फ़ास्फ़ोरस तत्व पर्यात मात्रा में पाया जाता है वे स्मरण शक्ति बढाने में विशेषतौर पर उपयोगी होते है। अंगूर ,खारक ,अंजीर एवं संतरा दिमागी ताकत बढाने के लिये नियमित उपयोग करना चाहिये।६) भोजन में कम शर्करा वाले पदार्थ उपयोगी होते हैं। पेय पदार्थों में भी कम चीनी का प्रयोग करना चाहिये।इन्सुलीन हमारे दिमाग को तेज और धारदार बनाये रखने में महती भूमिका रखता है। इसके लिये मछली बहुत अच्छा भोजन है। मछली में उपलब्ध ओमेगा ३ फ़ेट्टी एसीड स्मरण शक्ति को मजबूती प्रदान करता है।शाकाहारी लोग मछली के बजाय अलसी बीज का पावडर बनाकर तीन छोटा चम्मच भर पानी के साथ लेकर लाभ प्राप्त कर सकते हैं|
७) दालचीनी का पावेडर बनालें। १० ग्राम पावडर शहद में मिलाकर चाटलें। कमजोर दिमाग की अच्छी दवा है।
८) धनिये का पावडर दो चम्मच शहद में मिलाकर लेने से स्मरण शक्ति बढतीहै।
९) आंवला का रस एक चम्मच २ चम्मच शहद मे मिलाकर उपयोग करें। भुलक्कडपन में आशातीत लाभ होता है।
१०) अदरक ,जीरा और मिश्री तीनों को पीसकर लेने से कम याददाश्त की स्थिति में लाभ होता है।

११) दूध और शहद मिलाकर पीने से भी याद दाश्त में बढोतरी होती है।विद्यार्थियों के लिये फ़ायदेमंद उपचार है।२५० मिलि गाय के दूध में २ चम्मच शहद मिलाकर उपयोग करना चाहिये।
१२) तिल में स्मरण शक्ति वृद्दि करने के तत्व हैं। २० ग्राम तिल और थोडा सा गुड का तिलकुट्टा बनाकर नित्य सेवन करना परम हितकार उपचार है।
१३) काली मिर्च का पावडर एक चम्मच असली घी में मिलाकर उपयोग करने से याददाश्त में इजाफ़ा होता है।

१४) गाजर में एन्टी ओक्सीडेंट तत्व होते हैं। इससे रोग प्रतिरक्षा प्राणाली ताकतवर बनती है। दिमाग की ताकत बढाने के उपाय के तौर पर इसकी अनदेखी नहीं करना चाहिये।



१५) आम रस (मेंगो जूस) मेमोरी बढाने में विशेष सहायक माना गया है। आम रस में २ चम्मच शहद मिलाकर लेना उचित है।
१६) पौष्टिकता और कम वसा वाले भोजन से अल्जाईमर्स नामक बीमारी होने का खतरा कम रहता है और दिमाग की शक्ति में इजाफ़ा होता है इसके लिये अपने भोजन में ताजा फ़ल-सब्जियां.मछलियां ,ओलिव आईल आदि प्रचुरता से शामिल करें।
१७) तुलसी के ९ पत्ते ,गुलाब की पंखुरी और काली मिर्च नग एक खूब चबा -चबाकर खाने से दिमाग के सेल्स को ताकत मिलती है।





१८) गेहूं के जवारे का जूस याद दाश्त बढाने के मामले बहूत उपयोगी बताया जा रहा है| इस जूस में थोड़ी शकर और ७ नग बादाम का पेस्ट भी मिलाकर पीना अधिक गुणकारी सिद्ध होता है|



१९) चाय में भरपूर एन्टी आक्सीडेंट तत्व पाए जाते हैं जो हमारी मेमोरी को धारदार बनाने में सहायक साबित होती है| इसमें पालीफीनोल तत्त्व होता है जो स्मरण शक्ति बढाता है| दो चाय रोज पीना उचित है|
२०) अखरोट एन्टी आक्सी डेंट से भरपूर है| इसमें उच्च कोटि की प्रोटीन होती है\ | शरीर में मौजूद प्राकृतिक रसायनों को नष्ट होने से बचाने में एन्टी आक्सीडेंट तत्वों की महती भूमिका रहती है| रोजाना अखरोट के सेवन से मेमोरी बढ़ती है

   
किडनी फेल (गुर्दे खराब) की हर्बल औषधि 

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आर्थराइटिस(संधिवात)के घरेलू ,आयुर्वेदिक उपचार





डायलिसिस पर रोगी को नुकसानदायक आहार पदार्थ


                               

किडनी हमारे शरीर के लिए फ़िल्टर का काम करती हैं। ये यूरिन (मूत्र) के द्वारा हमारे शरीर से टॉक्सिंस (विषारी पदार्थ) को बाहर निकालती हैं। परन्तु जब किडनी अपना काम ठीक तरह से नहीं कर पाती तो डायलिसिस करना पड़ता है।
यह एक ऐसा उपचार है जिससे लगभग हर डायबिटीक रोगी (मधुमेह से ग्रस्त रोगी) को गुज़रना पड़ता है। डायलिसिस की सहायता से शरीर से टॉक्सिंस कृत्रिम रूप से बाहर निकाले जाते हैं।
डाइबिटीज़ पूरे विश्व में अपने पैर पसार रहा है और हर दूसरा व्यक्ति इसका शिकार हो रहा है। यह या तो अनुवांशिक होता है या अचानक भी हो जाता है।
सका मुख्य कारण बहुत अधिक टेंशन और तनाव है। हालाँकि एक बार जब व्यक्ति को डाइबिटीज़ हो जाता है तो मधुमेह रोग तज्ञ से परामर्श लेना बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है। उनकी सलाह से उचित दवाईयां लेना और शारीरिक व्यायाम करना भी महत्वपूर्ण होता है। इससे व्यक्ति का ब्लड शुगर लेवल नियंत्रण में रखा जा सकता है। परन्तु यदि समय पर डाइबिटीज़ का नियंत्रण नहीं किया गया तो इसके कारण अन्य घातक समस्याएं जैसे हार्टटैक, अंधापन, अंगों का ठीक तरह से काम न करना, विशेष रूप से किडनी फेल होना आदि हो सकती हैं। तो जब आपकी किडनी ठीक तरह से काम नहीं करती तो डायलिसिस ही एकमात्र विकल्प होता है। परन्तु यदि डायलिसिस का रोगी स्वस्थ रहना चाहता/चाहती है तो उसे आहार संबंधी कडक नियमों का पालन करना पड़ता है। नीचे कुछ खाद्य पदार्थ बताये गए हैं जिनका सेवन डायलिसिस के रोगी को नहीं करना चाहिए।
* मीट/प्रोटीन: डायलिसिस के रोगी को प्रतिदिन कम से कम 8-10 औंस प्रोटीन का सेवन करने की सलाह दी जाती है। प्रोटीन युक्त आहार जैसे फिश, मीट और अंडे का सेवन नियमित तौर पर किया जा सकता है परन्तु इसकी मात्रा को नियंत्रित रखना चाहिए। अधिक मात्रा में प्रोटीन का सेवन करने से अन्य प्रभाव हो सकते हैं। आप छोटे आकार की फिश या आधा चिकन ब्रेस्ट खा सकते हैं।
*अनाज: कार्बोहाइड्रेट के कारण शरीर में ब्लड शुगर लेवल बढ़ता है। डाइबिटीक रोगियों को दिन में 6-10 बार अनाज, सीरियल्स या ब्रेड खाने की आवश्यकता होती है। परन्तु साबुत अनाज या उच्च फाइबर युक्त आहार जैसे गेंहू से बनी ब्रेड, ब्रान सीरियल और ब्राउन राईस न खाएं क्योंकि इनमें बहुत अधिक मात्रा में फॉस्फोरस होता है। इस खाद्य पदार्थ पर नियंत्रण करके आप अपनी हड्डियों और रक्त वाहिनियों का ध्यान रख सकते हैं।
* डेयरी उत्पाद: डेयरी उत्पाद जैसे दूध, दही या चीज़ का सेवन सीमित मात्रा में करें। हालाँकि इन चीज़ों की आवश्यकता डाइबिटीज़ के मरीजों को होती है परन्तु इनकी सीमित मात्रा जैसे आधा कप दूध या दही या एक औंस चीज़ का सेवन करें। स्किम मिल्क, लो-फैट मिल्क आदि का सेवन न करें क्योंकि इनमें फॉस्फोरस होता है जो डायलिसिस के रोगियों के लिए अच्छा नहीं होता।
* फल/जूस: ऐसे फल जिनमें अधिक मात्रा में पोटैशियम हो जैसे कीवी, नेक्टरिन, प्रूनस, बनाना और खरबूजे न खाएं। 
इसके बजाय सेब, बेरीज़, चेरीज़, अंगूर, प्लम या अनानास खाएं। डॉक्टर की सलाह से ही इनका सेवन करें।
* सब्जियां/सलाद सभी सब्जियों में कुछ मात्रा में पोटैशियम रहता है परन्तु यह आप पर निर्भर करता है कि आप कितनी मात्रा का सेवन करते हैं। डायलिसिस के दौरान कम पोटैशियम वाली सब्जियों का दिन में दो या तीन बार सेवन करना आवश्यक होता है। हरे पत्तेदार सब्जियां जैसे ब्रोकोली, खीरा, लेट्युस आदि का सेवन करें। ज़मीन के अन्दर उगने वाली सब्जियों जैसे आलू, गाज़र, चुकंदर का सेवन न करें।
*पेय: डायलिसिस के दौरान हार्ड ड्रिंक्स (शराब) का सेवन बिलकुल करें। इसे आपके शरीर में ब्लड शुगर लेवल बढ़ सकता है जो आपके जीवन के लिए प्राणघातक हो सकता है। 
इसके बजाय एप्पल साइडर, अंगूर का जूस या लेमोनेड का सेवन करें।
*डिजर्ट (मिठाईयां): डाइबिटीज़ का मरीज़ विशेषकर जो डायलिसिस से गुज़र रहा हो, उसे भारी डिज़र्ट नहीं खाना चाहिए। हालाँकि वह अब बाज़ार में आसानी से उपलब्ध शुगर फ्री मिठाईयां खा सकता/सकती है।
नमक/सोडियम: डायलिसिस के दौरान वज़न बढ़ने से आपके उपचार पर दुष्परिणाम हो सकता है। अत: आपको सलाह दी जाती है कि आप कम नमक वाला खाना खाएं और यदि संभव हो तो सोडियम का सेवन न करें ताकि आपका ब्लडप्रेशर कम रहे। नमक के बजाय आप अन्य सीजनिंग जैसे हर्ब्स या मसालों का उपयोग कर सकते हैं परन्तु नमक के ऐसे विकल्पों का उपयोग न करें जिसमें पोटैशियम हो।
*डिब्बाबंद खाद्य पदार्थ: डिब्बाबंद खाद्य पदार्थों में उच्च मात्रा में सोडियम पाया जाता है जिसके कारण डायलिसिस के दौरान शरीर में फ्लूइड रिटेंशन हो सकता है। अत: अच्छा होगा कि इस तरह के खाद्य पदार्थों का सेवन न करें।
*नट्स और सीड्स (सूखे मेवे और बीज): इस प्रकार के खाद्य पदार्थों में बहुत अधिक मात्रा में पोटैशियम और फॉस्फोरस पाया जाता है। अत: आपको सलाह दी जाती है कि डायलिसिस के उपचार के दौरान आप पीनट बटर, सूखे मटर, बीन्स (फलियाँ) आदि का सेवन न करें।
 डायलिसिस बहुत ही दुखदायी प्रक्रिया है और डॉक्टर आपकी प्रतिदिन की पानी पीने की मात्रा को भी सीमित कर देते हैं। तो इस तरह की स्थिति आने से पहले अच्छा होगा कि आप जल्दी ही अपने स्वास्थ्य की देखभाल करना शुरू कर दें।




वजन कम करने के लिए त्रिफला सुरक्षित औषधि


वजन घटाना काफी कठिन काम है क्योंकि इसे कड़ी मेहनत की आवश्यकता होती है। कठिन काम होने के बावजूद आप फिट और स्वस्थ रहने के लिए अतिरिक्त वजन कम करते हैं। इसके अलावा, शरीर पर अतिरिक्त वजन कई स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का कारण बनता है। इस संबंध में, लोग वजन कम करने के लिए विभिन्न तरीकों को अपनाते हैं। वे आमतौर पर वर्कआउट का अभ्यास करते हैं, आहार योजना का पालन करते हैं और इंटरमिटेंट फास्टिंग भी करते हैं। यद्यपि ये विधियां वजन कम करने के लिए फायदेमंद होते हैं। वहीं कई जड़ी बूटियां भी हैं जो बिना किसी दर्द के वजन कम करने में आपकी सहायता करती हैं। वजन कम करने के लिए सबसे अच्छी जड़ी बूटी में से एक त्रिफला है। त्रिफला के सेवन से विषाक्त पदार्थों को दूर करके पेट, छोटी आंत और बड़ी आंतों को स्वस्थ रखने में मदद मिलती है। इसके अलावा, यह मेटाबॉलिज्म को भी बढ़ावा देता है और चयापचय को कम करता है।


त्रिफला चूर्ण क्‍या है

त्रिफला एक पांपरिक आयुर्वेदिक औषधि है जिसे सदियों से कई हेल्‍थ समस्‍याओं को दूर करने के लिए उपयोग किया जा रहा है। त्रिफला के नाम से ही पता चलता है कि इसे तीन फलों के मिश्रण से बनाया जाता है। त्रिफला में उपयोग किये जाने वाले तीनों फलों में औषधीय गुण भरपूर मात्रा में होते हैं। इन तीनों फलों में आंवला (Emblica Officinalis), बहेड़ा (black myrobalan) और हर्र या हरितकी (Haritaki) शामिल हैं। इन तीनों फलों के औषधीय गुणों के कारण त्रिफला को कई आयुर्वेदिक दवाओं का मिश्रण माना जाता है। त्रिफला चूर्ण का उपयोग जीवन आयु को बढ़ाने और कई गंभीर बीमारियों को रोकने में भी प्रभावी माना जाता है। आप अपने शरीर में मौजूद अतिरिक्‍त वसा को कम करने के लिए त्रिफला चूर्ण का उपयोग कर सकते हैं। इसलिए वजन घटाने वाले उपाय के रूप में त्रिफला चूर्ण आपको लाभ दिला सकता है।मोटापे से परेशान लोगों के लिए त्रिफला एक आयुर्वेदिक और प्रभावी औषधी है। त्रिफला का इस्‍तेमाल शरीर से विषाक्‍त पदार्थों को बाहर निकालने, पेट की छोटी और बड़ी आंत को स्‍वस्‍थ रखने में मदद करता है। त्रिफला एक प्रकार से कोलन टोनर (colon toner) के रूप में कार्य करता है और पेट के ऊतकों को मजबूत करने में मदद करता है। जिससे मोटे लोगों को अपना वजन कम करने में आसानी होती है। यह औषधीय और आयुर्वेदिक जड़ी बूटी कब्‍ज और पाचन तंत्र संबंधी अन्‍य समस्‍याओं को भी कम करने में प्रभावी होती है। नियमित रूप से त्रिफला का सेवन करना आपके शरीर में कोलेस्‍ट्रॉल के स्‍तर को भी नियंत्रित करने में सहायक होता है। खराब कोलेस्‍ट्रॉल की उच्‍च मात्रा कई स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍याओं के साथ ही आप जानते हैं कि, त्रिफला चूर्ण में उपयोग किये जाने वाले तीनों घटकों के अपने-अपने विशेष स्‍वास्‍थ्‍य लाभ हैं।
आइए जाने त्रिफला के तीनों घटक हमारे लिए किस प्रकार से लाभकारी होते हैं।मोटापे का प्रमुख कारण होता है।


त्रिफला चूर्ण में आंवला के फायदे-

आपको जानकर हैरानी होगी कि केवल आंवला ही ऐसा फल है जिसमें लगभग 5 स्‍वाद होते हैं। ऐसा माना जाता है कि स्‍वस्‍थ रहने के लिए सभी स्‍वाद वाले खाद्य पदार्थों का सेवन किया जाना चाहिए। आंवला में एंटीऑक्‍सीडेंट की उच्‍च मात्रा होती है जो हमारे शरीर से विषाक्‍त पदार्थों को निकालने में मदद करता है। यह औषधीय अग्न्‍याशय के स्‍वास्‍थ्‍य को नियंत्रित करता है। कोलेस्‍ट्रॉल के स्‍तर को नियंत्रित करता है और हड्डियों को मजबूत करता है। त्रिफला चूर्ण में मौजूद आंवला के अन्‍य स्‍वास्‍थ्‍य लाभ इस प्रकार हैं।
कोलेस्‍ट्रॉल कम करे
आंवला में फ्लेवोनॉयड्स होते हैं जो रक्‍त सीरम में लिपिड के स्‍तर को कम करते हैं। जिससे यह कोलस्‍ट्रॉल के संश्‍लेषण को कम करने में सहायक होता है। एक अध्‍ययन से यह पता चलता है कि मौखिक आधार पर त्रिफला चूर्ण या आंवले के चूर्ण का सेवन करने पर यह एलडीएल कोलेस्‍ट्रॉल के स्‍तर को कम करने में प्रभावी योगदान दे सकता है।
श्वसन तंत्र को स्‍वस्‍थ रखे
आवंले का नियमित सेवन करना आपके फेफड़ों और श्वसन तंत्र के लिए अच्‍छा होता है। इसके अलावा आंवला ब्रोंकाइटिस, अस्‍थमा और खांसी के लिए भी उपयोगी होता है। इस प्रकार के लाभ प्राप्‍त करने के लिए आप त्रिफला चूर्ण का भी सेवन कर सकते हैं।
एनीमिया को रोके
आंवला का सेवन करना आपको एनीमिया या रक्‍त की कमी संबंधी समस्‍याओं से बचा सकता है। नियमित रूप से त्रिफला पाउडर या आंवले का सेवन करने से रक्‍त में लाल रक्‍त कोशिकओं या हीमोग्‍लोबिन के स्‍तर को बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
ब्‍लड शुगर को कम करे
अध्‍ययनों से पता चलता है कि आंवला का सेवन रक्‍त शर्करा के स्‍तर को नियंत्रित करने में सहायक होता है। भूखे या खाली पेट में ब्‍लड शुगर (Fasting Blood Sugar) की मात्रा और एचबीए 1 सी दोनों को नियंत्रित करने में आंवला मदद करता है। 
सुरक्षा शक्ति बढ़ाये
आंवले को आयुर्वेद में सबसे प्रभावी औषधी माना जाता है। आवंला का सेवन करना आपकी ताकत को बढ़ाने में मदद करता है। यह हड्डियों के घनत्‍व को बढ़ाने और शरीर को फ्री रेडिकल्‍स के प्रभाव से बचाने में भी अहम योगदान देता है।


आंवला के गुण

आंवले में नमकीन स्‍वाद को छोड़कर लगभग सभी स्‍वाद होते हैं जैसे मीठा, खट्टा, कड़वा, तीखा और कसैला। आंवले की तासीर ठंडी होती है। आंवले का नियमित सेवन तीनो दोषों वात, पित्‍त और कफ को नियंत्रित करने में मदद करता है।
त्रिफला पाउडर में बहेड़ा के फायदे
बहेड़ा को बहुत से लोग बिभितकी के नाम से भी जानते हैं। ब्‍लैक मैरोबालन कोलेस्‍ट्रॉल के उच्‍च स्‍तर को नियंत्रित करने में मदद करता है। साथ ही यह मांसपेशियों और हड्डियों को स्‍वस्‍थ और मजबूत रखने में सहायक होता है। बहेड़ा को बेलिरिक मिरोब्‍लांस (Belliric Myrobalans) या टर्मिनलिया बेलिका (Terminalia belerica) के रूप में भी जाना जाता है जो कि इसका वनस्‍पतिक नाम है। त्रिफला चूर्ण में उपयोग किये जाने वाले बहेड़ा के अन्‍य स्‍वास्‍थ्‍य लाभ इस प्रकार हैं।
कोलेस्‍ट्रॉल कम करे
बहेड़ा के औषधीय गुण रक्‍त में कोलेस्‍ट्रॉल के स्‍तर को नियंत्रित करने में मदद करता है। इसके अलावा नियमित रूप से त्रिफला चूर्ण या बहेड़ा पाउडर का सेवन स्‍वस्‍थ प्‍लाज्मा, मांसपेशियों और हड्डियों को बढ़ावा देता है।
मोटापा कम करे
बहेड़ा में एंटी- ओवेसिटी (anti-obesity) गुण होते हैं। जिसके कारण यह वजन को प्रबंधित करने वाली विशेष औषधी माना जाता है। नियमित रूप से त्रिफला पाउडर या टर्मिनलिया बेलिरिका के फल का सेवन करना शरीर के वजन को नियंत्रित करने में सहायक होता है।
एंटीऑक्‍सीडेंट
एंटीमाइक्रोबियल (antimicrobial)
एंटीडायरेहियल (antidiarrheal)
एंटीडायबिटिक (antidiabetic)
दर्द नाशक (analgesic)
इम्‍युनोमोड्यूलेटरी (immunomodulatory)
एंटीहाइपरटेंसिव (antihypertensive)
हेपेटोप्रोटेक्टिव (hepatoprotective)
एंटीस्‍पास्‍मोडिक (antispasmodic)
ब्रोन्‍कोडायलेटर (bronchodilator)


हेड़ा के गुण –

आयुर्वेद में बहेड़ा को एक कायाकल्‍प जड़ी बूटी (rejuvenative herb) के रूप में उपयोग किया जाता है। यह जड़ी बूटी कफ दोष को दूर करने के लिए टॉनिक का काम करती है। इसके अलावा यह मधुमेह, गठिया और उच्‍च रक्‍तचाप का उपचार करने में भी सहायक है। बहेड़ा स्‍वाद में तीखा और पचने में आसान होता है। पाचन के बाद इसका प्रभाव मीठा होता है। बहेड़ा तासीर में गर्म होता है जो विशेष रूप से तीनों दोषों को प्र‍बंधित करने में सहायक होता है।
विषाक्‍तता को दूर करे
वजन घटाने के लिए बॉडी को डिटॉक्‍स करना बहुत जरुरी होता है आप अपनी बॉडी को डिटॉक्‍स करने या शरीर से विषाक्‍त पदार्थों को दूर करने के लिए बहेड़ा के चूर्ण का सेवन कर सकते हैं। इससे आपको शरीर पर जमी अतिरिक्त चर्बी को कम करने में मदद मिलेगी।
बहेड़ा के अन्‍य लाभ
बहेड़ा का सेवन करना स्‍वास्‍थ्‍य के लिए बहुत ही अच्‍छा माना जाता है। क्‍योंकि बहेड़ा में कई पोषक तत्‍व और औषधीय गुण होते हैं जो हमे स्‍वस्थ रखने में अहम योगदान देते हैं। जैसे कि :
एंटीऑक्‍सीडेंट
एंटीमाइक्रोबियल (antimicrobial)
एंटीडायरेहियल (antidiarrheal)
एंटीडायबिटिक (antidiabetic)
दर्द नाशक (analgesic)
इम्‍युनोमोड्यूलेटरी (immunomodulatory)
एंटीहाइपरटेंसिव (antihypertensive)
हेपेटोप्रोटेक्टिव (hepatoprotective)
एंटीस्‍पास्‍मोडिक (antispasmodic)
ब्रोन्‍कोडायलेटर (bronchodilator)
 आयुर्वेद में बहेड़ा को एक कायाकल्‍प जड़ी बूटी (rejuvenative herb) के रूप में उपयोग किया जाता है। यह जड़ी बूटी कफ दोष को दूर करने के लिए टॉनिक का काम करती है। इसके अलावा यह मधुमेह, गठिया और उच्‍च रक्‍तचाप का उपचार करने में भी सहायक है। बहेड़ा स्‍वाद में तीखा और पचने में आसान होता है। पाचन के बाद इसका प्रभाव मीठा होता है। बहेड़ा तासीर में गर्म होता है जो विशेष रूप से तीनों दोषों को प्र‍बंधित करने में सहायक होता है
त्रिफला चूर्ण में हर्र के फायदे –
हरिताकी एक अखरोट के आकार का फल होता है जो स्‍वास्‍थ्‍य के लिए बेहद फायदेमंद होता है। हर्र को दवाओं का राजा भी कहा जाता है। इसे चेबुलिक मिरोबलन (Chebulic Myrobalan) या टर्मिनलिया चेबुला (Terminalia chebula) भी कहा जाता है जो कि इसका वानस्‍पतिक नाम है। इसमें भी एंटीऑक्‍सीडेंट और एंटी-इंफ्लामेटरी गुण भरपूर मात्रा में होते हैं। हरीताकि के औषधीय गुण गले की खराश, एलर्जी, कब्‍ज और अपच जैसी कई स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍याओं के लिए फायदेमंद होता है।
हरीताकि के अन्‍य लाभ – हर्र या हरिताकि एंटी-एजिंग के रूप में कार्य करता है। इसमें बहुत ही शक्तिशाली एंटीऑक्‍सीडेंट होते हैं जो हमारी त्वचा कोशिकाओं को फ्री रेडिकल्‍स से बचाने में सहायक होते हैं।
वजन घटाने के लिए त्रिफला चूर्ण के फायदे –म सभी के मन में यह प्रश्‍न उठता है कि वजन घटाने में त्रिफला चूर्ण किस प्रकार मदद करता है। आइए जाने वजन घटाने में त्रिफला चूर्ण किस प्रकार प्रत्‍यक्ष और अप्रत्‍यक्ष रूप से हमारी मदद कर सकता है।
त्रिफला चूर्ण ग्‍लूकोज के स्‍तर को नियंत्रित करे
अध्‍ययनों से पता चलता है कि त्रिफला चूर्ण रक्‍त शर्करा के स्‍तर को कम करने में प्रभावी होता है। जिससे ग्‍लाइकेशन (glycation) को रोकने में मदद मिलती है। इस प्रकार यह डायबिटीज के लक्षणों को कम करने में सहायक होता है। रक्‍त शर्करा को नियंत्रित करने के साथ ही यह कोलेस्‍ट्रॉल, ट्राइग्लिसराइड्स (triglycerides) और कम घनत्‍व वाले लिपोप्रोटीन (lipoprotein) कोलेस्‍ट्रॉल को भी कम करता है। जिससे शरीर में मौजूद अतिरिक्‍त वसा को कम करने में मदद मिलती है। इस प्रकार आप त्रिफला चूर्ण का नियमित सेवन कर अपने मोटापे को कम कर सकते हैं।
त्रिफला चूर्ण में एंटरों-प्रोटेक्टिव गुण होते हैं
तीन प्रमुख जड़ी बूटियों के संयुक्‍त प्रभाव के कारण त्रिफला वात, पित्त और कफ तीनों दोष को संतुलित करने में सहायक होता है। जिससे पाचन संबंधी सभी प्रकार की समस्‍याओं से छुटकारा मिल सकता है। उचित पाचन तंत्र आपके बढ़ते वजन को नियंत्रित करने और आपके शरीर को उचित वजन प्राप्‍त करने में प्रभावी माना जाता है।


त्रिफला कब्‍ज को रोके

त्रिफला चूर्ण में फाइबर की अच्‍छी मात्रा होती है जिसके कारण यह पाचन के लिए बहुत ही अच्‍छा माना जाता है। यह आंतों के स्‍वास्‍थ्‍य को बढ़ावा देने और मल त्‍याग को आसान बनाने में सहायक होता है। जिससे कब्‍ज की समस्‍या से छुटकारा पाया जा सकता है। कब्‍ज और पाचन तंत्र की अन्‍य समस्‍याएं दूर करने के साथ ही यह वजन प्रबंधन में भी अहम भूमिका निभाता है। क्‍योंकि त्रिफला का सेवन करना शरीर में मौजूद विषाक्‍तता को आसानी से बाहर निकाल सकता है। साथ ही यह शरीर में तरल पदार्थों को अपने सामान्‍य स्‍तर पर बनाए रखने में मदद करता है।
वजन घटाने के लिए त्रिफला का उपयोग कैसे करें –
सामान्‍य रूप से आप त्रिफला चुर्ण का सेवन कर कई स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍याओं को दूर कर सकते हैं। यहां पर उचित लाभ प्राप्‍त करने के लिए त्रिफला चूर्ण का उपयोग करने के कुछ तरीके बताए गए हैं। जिनका इस्‍तेमाल करना आपको वजन घटाने में मदद कर सकता है।
त्रिफला का उपयोग ठंडे पानी के साथ –
आप एक गिलास ठंडा पानी लें और इसमें 2 चम्‍मच त्रिफला चूर्ण मिलाएं। इस मिश्रण को रात भर भीगने दें और अगली सुबह इसे खाली पेट सेवन कर सकते हैं।
त्रिफला चूर्ण शहद और दालचीनी के साथ –
एक गिलास पानी में एक चम्‍मच त्रिफला चूर्ण और दालचीनी पाउडर को मिलाएं। इस मिश्रण को भी रात भर के लिए ढक कर रख दें। अगली सुबह इस मिश्रण में 1 चम्‍मच शहद मिलाएं और खाली पेट इस मिश्रण का सेवन कर सकते हैं।
नींबू और शहद के साथ त्रिफला– 
अगर सादे पानी के साथ त्रिफला को लेने से आपको स्वाद अजीब लगता है, तो आप हल्के गुनगुने पीने में नींबू व शहद मिला सकते हैं।
त्रिफला चूर्ण शहद और दालचीनी के साथ –
एक गिलास पानी में एक चम्‍मच त्रिफला चूर्ण और दालचीनी पाउडर को मिलाएं। इस मिश्रण को भी रात भर के लिए ढक कर रख दें। अगली सुबह इस मिश्रण में 1 चम्‍मच शहद मिलाएं और खाली पेट इस मिश्रण का सेवन कर सकते हैं।

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मोटापे के कारण होने वाली बीमारियों के उपचार


मोटापा एक ऐसी बीमारी है, जो स्त्री, पुरुष व बच्चे किसी को भी हो सकती है। मोटापा व्यक्ति की सुन्दरता नष्ट कर देता है और ज्यादा मोटापा समाज में हास्यास्पद स्थिति पैदा कर देता है।
मोटापा कई कारणों से हो सकता है जैसे- खान-पान, बैठक का काम करना, व्यायाम न करना आदि। कई बार मोटापा वंशानुगत भी होता है, परिवार में सभी मोटे लोग हैं तो आने वाली संतान भी मोटी हो सकती है।
जिस प्रकार खाँसी को, कब्ज को रोग का घर कहा जाता है, वैसे ही मोटापे को भी कई बीमारियों का जनक माना जाता है। दिल संबंधी, ब्लडप्रेशर संबंधी, गैस संबंधी, डायबिटीज संबंधी आदि कई तरह की बीमारियों का संबंध मोटापे से होता है।
शरीर में अतिरिक्त चर्बी जम जाने पर यह प्रकट होता है। मोटापा शरीर के कुछ अंगों पेट, जाँघ, हाथ, नितम्ब, कमर आदि को अनावश्यक रूप से फुलाते हुए अपने आस-पास के अंगों को दबाता चला जाता है, इस तरह यह पूरे शरीर को अपने कब्जे में ले लेता है।

मोटापा एक जटिल विकार है जिसमें शरीर में वसा की अधिक मात्रा हो जाती है। मोटापा केवल आपकी सुन्दरता को ही कम नहीं करता है बल्कि यह आपके लिए रोगों और स्वास्थ्य समस्याओं जैसे हृदय रोग, मधुमेह और उच्च रक्तचाप के जोखिम को भी बढ़ाता है। बहुत ज्यादा मोटे होने का मतलब यह है कि आपको अपने वजन से संबंधित कई स्वास्थ्य समस्याएं होने की बहुत अधिक संभावना है जिससे जान का जोखिम भी हो सकता है। परन्तु यह भी अच्छी बात है की थोड़ा वजन घटाने से भी मोटापे से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं में सुधार या रोकथाम की जा सकती है। यदि आप अपना आहार परिवर्तन करते है, या कोई शारीरिक गतिविधि जैसे व्यायाम आदि करते है तो मोटापे से होने वाली कई गंभीर बीमारियों का इलाज किया जा सकता है।
कहा जाता है की मोटापा कई गंभीर बीमारियों की जड़ होता है और यह सही भी है क्योकि मोटापा बढ़ने से ही कई रोग होते है जो कई तरह के जोखिम तो पैदा करते ही है साथ में जानलेवा भी साबित होते है। आज हम आपको ऐसे ही कुछ रोगों के बारे में बतायेंगे जो सिर्फ मोटापा बढ़ने की वजह से होते है और बहुत घातक भी होते है।



मोटापे के कारण

* मोटापे का सबसे प्रमुख कारण है आरामतलबी होना, अय्याशी का जीवन जीना और परिश्रम न करना।
* चाहे जब भोजन करना, भोजन में वसा, मिठाई, तेल, घी, दूध, अंडे, शराब, मांस, धूम्रपान, अन्य तरह का नशा आदि की अति कर देना।
* महिलाओं में मोटापा फैलने के कारणों में- भोजन में अति, भोजन पश्चात दिन में सोना व परिश्रम कम करना, गर्भवती स्त्रियों को गर्भवती के नाम पर अनावश्यक खिलाते रहना। प्रसव बाद भी मेवों का अति सेवन कराना और शरीरिक श्रम कम करना, हमेशा घर में ही बने रहना आदि। प्रायः बाहर काम करने वाली स्त्रियाँ हाउस वाइफ की अपेक्षा कम मोटी होती हैं।
* बच्चों के मोटापे का कारण भी यही है कि माता-पिता लाढ़-प्यार में बच्चे को वसा, प्रोटीन से भरपूर पदार्थ अनावश्यक खिलाते रहते हैं। इससे शरीर में मेद वृद्धि बचपन से ही आ जाती है। कई बार दुबले माता-पिता के बच्चे इसी कारण मोटापे की गिरफ्त में आ जाते हैं।
* शरीर की कुछ ग्रंथियाँ भी मोटापे का कारण होती हैं, मौलिक चयापचय की क्रिया व शरीरिक क्रियाशीलता के फलस्वरूप अवटुका ग्रंथि और पीयूष ग्रंथि के स्रावों की कमी की वजह से मोटापा पनपता है।
मोटापा कई गंभीर बीमारियों की जड़ होता है मोटापे से लोगों को जो सबसे ज्यादा बीमारी होती है वह है हृदय रोग। एथेरोस्क्लेरोसिस (Atherosclerosis) मतलब धमनियों (arteries) का सख्त होना, यह समस्या कम मोटे लोगों की तुलना में मोटे लोगों में 10 गुना अधिक होता है। कोरोनरी धमनी की बीमारी (Coronary artery disease) भी मोटे लोगों में अधिक प्रचलित है, क्योंकि फैटी डिपॉजिट्स उन धमनियों में निर्माण कर लेते हैं जो हृदय के रक्त की आपूर्ति करती हैं। हृदय की रक्तवाहिनियों के छोटा होने से और रक्त प्रवाह कम होने से भी सीने में दर्द (एनजाइना) या दिल का दौरा पड़ सकता है। संकुचित धमनियों में रक्त के थक्के भी बन सकते हैं जो स्ट्रोक का कारण बन सकते हैं।
मोटापे से होने वाले रोग टाइप 2 डायबिटीज रोग –
मोटापे को बीमारी नहीं माना जाता, लेकिन मोटापा टाइप 2 डायबिटीज का प्रमुख कारण होता है। इस प्रकार का मधुमेह आमतौर पर वयस्क होने पर होता है लेकिन, अब इसके गंभीर लक्षण बच्चों में भी देखने को मिल रहे हैं। मोटापा इंसुलिन के प्रतिरोध (resistance) का कारण बनता है, यह हार्मोन रक्त शर्करा को नियंत्रित करने में मदद करता है। जब मोटापा इंसुलिन प्रतिरोध का कारण बनता है, तो ब्लड शुगर लेवल बढ़ जाता है। यहां तक ​​कि कम मोटापा भी मधुमेह के खतरे और जोखिम को बढ़ाता है।
स्लीप एपनिया रोग-
मोटापे की वजह से बहुत से लोगों को स्लीप एपनिया (sleep apnea) की बीमारी हो जाती है, जिसके कारण लोग थोड़े समय के लिए सांस लेना बंद कर देते हैं जिससे उनकी नींद में रात भर बाधा आती हैं और नींद पूरी ना होने के कारण दिन में नींद आने लगती हैं। स्लीप एपनिया भी लोगों में भारी खर्राटों की परेशानी का कारण बनता है। मोटापे से जुड़ी सांस की समस्याएं तब होती हैं जब बहुत ज्यादा मोटापे की वजह से चेस्ट वाल फेफड़ों को पूरी तरह निचोड़ लेता है और सांस लेने में परेशानी पैदा करता है।
उच्च रक्तचाप –
मोटापे की वजह से लोगों को उच्च रक्तचाप की बीमारी भी होती है जिससे जान भी जा सकती है। शरीर में अतिरिक्त वसा ऊतकों (Additional fat tissue) को जीवित रहने के लिए ऑक्सीजन और पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है, जिससे रक्त वाहिकाओं को वसा ऊतक को अधिक रक्त देना पड़ता है। यह हृदय के कार्यभार को बढ़ाता देता है क्योंकि इसे अतिरिक्त रक्त वाहिकाओं के माध्यम से अधिक रक्त पंप करना पड़ता है। अधिक रक्त पंप करने का मतलब धमनी की दीवारों पर अधिक दबाव पड़ना जिससे धमनी की दीवारों पर ज्यादा दबाव पड़ता है और यह उच्च रक्तचाप को बढ़ाता है। इसके अलावा, अतिरिक्त वजन हार्ट रेट को बढ़ा सकता है जिसकी वजह से रक्त वाहिकाओं की क्षमता कम हो जाती है जिससे उन्हें रक्त भेजने में परेशानी हो सकती है।


ऑस्टियोआर्थराइटिस रोग –

मोटापे की वजह से महिलाओं में अक्सर ऑस्टियोआर्थराइटिस जो एक सामान्य संयुक्त स्थिति (joint condition) है यह समस्या देखने को मिलती है। यह रोग अक्सर घुटने, कूल्हे या पीठ को प्रभावित करता है। अतिरिक्त वजन बढ़ जाने से इन जोड़ों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है और कार्टिलेज (मतलब जोड़ों को कुशनिंग करने वाले ऊतक) से दूर हो जाता है जिनका काम सामान्य रूप से जॉइंट्स की रक्षा करने का होता है।
महिलाओं में होते है विभिन्न कैंसर रोग
मोटापे की वजह से महिलाओं में विभिन्न तरह के कैंसर होने का खतरा बना रहता है, जैसे स्तन कैंसर (breast cancer), कोलन कैंसर (colon cancer), पित्ताशय की थैली का कैंसर (gallbladder cancer) और गर्भाशय का कैंसर (uterus cancer) सहित विभिन्न प्रकार के कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। अधिक वजन वाले पुरुषों में कोलोन कैंसर (colon cancer) और प्रोस्टेट कैंसर (prostate cancer) का खतरा अधिक होता है।
स्त्री रोग संबंधी बीमारियां –
मोटापे की वजह से महिलाओं में स्त्री रोग संबंधी बीमारियां जैसे इनफर्टिलिटी और अनियमित पीरियड्स की समस्याएं उत्पन्न होती है। आज के समय में ज्यादातर महिलाएं अनियमित माहवारी की परेशानी से जूझ रही है क्योकि मोटापा बढ़ने से उनके होर्मोनेस ठीक तरह से काम नहीं कर पाते है जिससे कई तरह की जटिलताएं पैदा हो जाती है।
मोटापे से होने वाले रोगों से बचाव
मोटापे से होने वाले रोगों से बचाव के लिए आपको कुछ सक्त कदम उठाने होंगे क्योकि अगर आप मोटापे की कगार पर है या मोटापे से पहले से पीड़ित है तो यह आपके लिए जानलेवा हो सकता है इसलिए मोटापे को समय रहते नियंत्रित करना बहुत ही जरुरी है क्योकि सरे रोगों की जड़ मोटापा ही है। इसके लिए आप अपनी दिनचर्या में बदलाव करके और अपनी जीवनशैली को ठीक करके इन सभी रोगों से छुटकारा पा सकते है।
यदि आप अपने वजन को बढ़ने से रोकना चाहते है तो इसके लिए आपको सप्ताह में कम से कम 150 से 300 मिनट की मध्यम-तीव्रता वाली शारीरिक गतिविधियां करनी होगी। मध्यम रूप से तीव्र शारीरिक गतिविधियों में तेज चलना और तैराकी भी शामिल है। इन गतिविधियों को करके आप मोटापे से अपने शरीर को सुरक्षित रख सकते है।
कम कैलोरी, पोषक तत्व से भरे खाद्य पदार्थ, जैसे कि फल, सब्जियां और साबुत अनाज अपने आहार में शामिल करें। संतृप्त वसा (saturated fat) से बचें और मिठाई और शराब को सीमित करें। दिन में तीन बार नियमित भोजन करें परन्तु स्नैक्स ज्यादा ना लें। आप चाहें तो छोटी मात्रा में उच्च वसा, उच्च कैलोरी खाद्य पदार्थों का आनंद ले सकते है। बस उन खाद्य पदार्थों का चयन करना पहले सुनिश्चित करें जो ज्यादातर समय स्वस्थ वजन और अच्छे स्वास्थ्य को बढ़ावा देते हों।


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मिश्री खाने के फायदे और नुकसान


मिश्री खाने के फायदे आपको इस बात से पता चल सकते है कि जब भी आप किसी रेस्‍तरां (Restaurant) में भोजन करते हैं तो इसके बाद आपको सौंफ और मिश्री दी जाती है। ये तो सामान्‍य बात है। मिश्री जिसे हम रॉक शुगर (Rock sugar) के नाम से जानते हैं। इसका उपयोग विभिन्‍न औषधीयों में किया जाता है। यह चीनी का छोटा अपरिष्‍कृत रूप होता है। अपने औषधीय गुणो के कारण मिश्रणी को आयुर्वेद में विभिन्‍न समस्‍याओं के निवारण के लिए पूरक के रूप में उपयोग किया जाता है। मिश्री का उपयोग प्रतिरक्षा बढ़ाने, पाचन को ठीक करने, मस्तिष्‍क को स्‍वस्‍थ्‍य रखने, आंखों की द्रष्टि बढ़ाने और अन्‍य स्‍वास्‍थ्‍य लाभ प्राप्‍त करने के लिए किया जाता है।
मिश्री क्‍या है –
चीनी का एक अ‍परिष्‍कृत रूप जिसे कैंडी शुगर (Candy sugar) या रॉक शुगर कहा जाता है। इसकी उत्‍पत्ति भारत में हुई है और यह क्रिस्‍टलाइज्‍ड और स्‍वादयुक्‍त चीनी से बना है। मिश्री गन्‍ने और पाल्‍म ट्री के रस से बनाया जाता है। यह सामान्‍य शुगर से कम मीठा होता है, लेकिन इसमें औषधीय गुण भरपूर होते हैं। औषधीय गुणों के कारण विभिन्‍न जड़ी-बूटियों के साथ मिश्रणी का सेवन किया जाता है।
रॉक शुगर (Rock sugar) बनाने प्रक्रिया प्राकृतिक और अद्वितीय है। आपको पता होगा कि शक्कर गन्‍ने से तैयार होती है। मिश्री भी गन्‍ने के रस से ही तैयार की जाती है। चीनी क्रिस्‍टल प्राप्‍त करने के लिए इसे क्रिस्‍टलाइज किया जाता है। कच्‍चे चीनी क्रिस्‍टल (Raw sugar crystals) जो गन्‍ने के रस के वाष्‍पीकरण के बाद बने होते हैं, इनका उपयोग मिश्री बनाने के लिए किया जाता है। इन कच्‍चे अपरिष्‍कृत चीनी क्रिस्‍टलों में अभी भी बहुत सी अशुद्धियां होती हैं जैसे गुड़ में आने वाला पीला रंग आदि। भारत में इन क्रिस्‍टलों को भूरा शुगर कहा जाता है।

मिश्री बनाने के लिए इन क्रिस्‍टलों को बड़े-बड़े औद्योगिक कंटेनर में पानी के साथ मिलाकर लंबे समय तक उबाला जाता है। जब तक की यह पूर्ण स्थिरता प्राप्‍त नहीं कर लेते हैं। मिश्री के इन क्रिस्‍टलों (Crystals) को सफेद बनाने के लिए कुछ मात्रा में दूध को उबलते मिश्रण में डाला जाता है। मिश्री बनाते समय किसी प्रकार का रसायन उपयोग नहीं किया जाता है। इसके बाद यह मिश्रण सेलर्स में स्‍थानांतरित हो जाता है इसे अच्‍छी तरह से ढंक दिया जाता है ताकि 7-8 दिनों तक इसमें सूर्य का प्रकाश या हवा न लगे। ऐसा करने पर मिश्री के बड़े-बड़े क्रिस्‍टल (Crystal) प्राप्‍त होते हैं।
मिश्री के पोषक तत्‍व –
ताड़ के पेड़ से निकाले गए रस से भी मिश्री बनाई जाती है। इस मिश्री को ताल मिश्री के नाम से जाना जाता है। प्राचीन समय में ताल मिश्री को बनाने के लिए ताड़ के फूलों (Palm flowers) के रस का उपयोग किया जाता था। इस रस को उबालकर गाढ़ा किया जाता था और इससे विभिन्‍न आकार में मिश्री को बनाया जाता था। ताल मिश्री (Tal mishri) गुर्दे की बीमारियों को ठीक करने के लिए बहुत ही प्रभावी माना जाता है।
मिश्री के गुण –
अक्‍सर लोगों कि यह जिज्ञासा रहती है कि औषधीय गुणों से भरपूर मिश्री की तासीर क्‍या है। मिश्री के हमारे शरीर में किस प्रकार के प्रभाव होते हैं। मिश्री का हमारे शरीर में शीतलन प्रभाव (Cooling effect) होता है। मिश्री के क्रिस्‍टलाइजेशन और पुनर्संरचना की पूरी प्रक्रिया इसे हमारे शरीर के लिए हल्‍का, आसानी से पचाने और शीतलन बनाती है। आयुर्वेदिक विशेषज्ञों के अनुसार मिश्री के मानव शरीर पर संतुलन प्रभाव पड़ता है। कुछ वैद्यों द्वारा इसे हल्‍के क्षारीय रूप में भी दर्शाया जाता है। मिश्री वात और पित्त दोषों (Vata and Pitta doshas) में प्रभावी भूमिका निभाती है।
मिश्री के फायदे –
अपने विभिन्‍न पोषक तत्‍वों (Nutrients) के कारण मिश्री का उपयोग विभिन्‍न आयुर्वेदिक दवाओं में उपयोग किया जाता है। मिश्री अपने 24 प्राकृतिक पोषक तत्‍वों के लिए जाना जाता है। यह प्राकृतिक रूप से कई स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍याएं जैसे गुर्दे की बीमारी (Kidney disease), उच्‍च रक्‍तचाप, सर्दी, खांसी, एनीमिया, अस्‍थमा आदि के उपचार के लिए उपयोग किया जाता है। मिश्री दिल को मजबूत करने और गठिया के दर्द के प्रभावी उपचार के लिए भी उपयोग किया जाता है।



मिश्री खाने के फायदे दूध पिलाने वाली मां के लिए –
इस आयुर्वेदिक औषधी के फायदे स्‍तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए जाने जाते हैं। ऐसा इसलिए है क्‍योंकि मिश्री एंटी-डिस्‍पेंटेंट के रूप में काम करता है और स्‍तनपान कराने वाली महिलाओं (Lactating women) के मूड को खुश रखता है। नियमित रूप से मिश्री और अन्‍य मां का दूध बढ़ाने वाली जड़ी-बूटियों (Herbs) का सेवन करने से उनके दूध उत्‍पादन की क्षमता को भी बढ़ाया जा सकता है।
मिश्री के लाभ प्रजनन क्षमता को बढ़ाए –
पुरुषों की प्रजनन क्षमता को बढ़ाने के लिए प्राचीन समय से मिश्री का उपयोग विभिन्‍न औषधीयों के साथ पूरक के रूप में किया जा रहा है। जब घी (स्‍वस्‍थ्‍य वसा), दूध या दही (प्रोटीन) के साथ मिश्री को मिलाया जाता है। तो यह प्रजनन क्षमता को बढ़ावा देने मे सहायक होती है। उदाहरण के लिए पंचमृत महिला और पुरुष दोनों की प्रजनन क्षमता (Fertility capacity) को बढ़ाता है जिसमें दूध, मिश्री, घी, दही और शहद शामिल होता है। इसका नियमित सेवन किया जाता है तो यह आपके यौन स्‍वास्‍थ्‍य और प्रजनन क्षमता को बढ़ाने में मदद करता है। यदि नियमित रूप से पुरुषों द्वारा रात में सोने से पहले मिश्री, केसर और दूध (Saffron and milk) का सेवन किया जाता है तो यह उनकी प्रजनन क्षमता में वृद्धि करता है।
मिश्री के फायदे ऊर्जा बढ़ाए –
रॉक शुगर में औषधीय गुण होते हैं जो भोजन के बाद ऊर्जा उत्‍तेजित (Energy stimulated) करते हैं। अक्‍सर देखने में आता है कि भोजन करने के बाद हम आलसी हो जाते हैं, लेकिन मिश्री हमारी ऊर्जा को बढ़ाने में मदद करता है। इस लिए ही भोजन के बाद मिश्री और सौंफ के बीज का सेवन करना भारत में एक आम प्रथा है। यह मिश्रण पाचन में मदद करता है साथ इसका सेवन करने से सांसे ताजा (Fresh breath) होती हैं।
शीतलता दिलाए –
भारत के प्रमुख क्षेत्रों में गर्मी के मौसम के समय मिश्री का उपयोग विभिन्‍न प्रकार के शीतल पेय बनाने के लिए उपयोग किया जाता है। इसका उपयोग आप सामान्‍य रूप से अपने घर पर भी कर सकते हैं। एक गिलास ठंडे पानी में 1 चम्‍मच मिश्री को घोल कर शीतल पेय तैयार किया जा सकता है। यह मस्तिष्‍क और शरीर पर सुखद प्रभाव डालता है। मिश्री से बने पेय का सेवन करने पर तनाव से भी छुटकारा मिल सकता है। ऐसा इसलिए होता है क्‍योंकि यह ग्‍लूकोज के रूप में हमे त्‍वरित ऊर्जा प्रदान करता है। मिश्री में पिट्टा दोष को संतुलित करने की क्षमता भी होती है जो गर्मियों के दिन में सामान्‍य रूप से बढ़ सकता है। मिश्री हमारी इंद्रियों को आराम दिलाने में भी सक्षम होती है।
आंखों को स्‍वस्‍थ्‍य रखे –
आप अपनी आंखों को स्‍वस्‍थ रखने और देखने की क्षमता को बढ़ाने के लिए मिश्री का लाभकारी उपयोग कर सकते हैं। आंखों में खराब द्रष्टि और मोतियाबिंद के गठन को रोकने के लिए मिश्री का अधिक से अधिक सेवन करें। अपनी आंखों को स्‍वस्‍थ (Eyes healthy) बनाए रखने के लिए नियमित रूप से भोजन के बाद मिश्री पानी का सेवन लाभकारी होता है।
सर्दी खांसी ठीक करे –
जब आपके गले में किसी प्रकार का संक्रमण (Infection) होता है तब आपके गले में खांसी हो सकती है। खांसी होने के अन्‍य कारणों में रोगाणुओं का हमला या बुखार आदि भी हो सकते हैं। मिश्री के औषधीय गुण आपको खांसी से तुरंत राहत दिला सकते हैं। खांसी के उपचार के लिए आप मिश्री को अपने मुंह में रखें और इसे धीरे-धीरे चूसते हुए खाएं। मिश्री का इस तरह से सेवन आपको लगातार आने वाली खांसी से राहत दिला सकता है। गले के संक्रमण को दूर करने के लिए मिश्री एक उपयोगी औषधी की तरह कार्य करती है। अधिक लाभ प्राप्‍त करने के लिए मिश्री को काली मिर्च पाउडर और घी के साथ मिलाकर रात में सोने से पहले उपभोग करें। पारंपरिक रूप से गायक अपनी आवाज को मधुर बनाने और गले को साफ रखने के लिए गायन अभ्‍यास के बाद मिश्री का सेवन करते हैं।
पाचन के लिए –
रॉक शुगर न केवल मुंह फ्रेशनर के रूप में काम करता है बल्कि सौंफ के साथ सेवन करने पर यह आपके पाचन तंत्र को भी मजबूत करता है। इन दोनों औषधीय पदार्थों में पाचन गुण होते हैं। जो कि सेवन करने के तुरंत ही पाचन प्रक्रिया को उत्‍तेजित करते हैं। इसलिए अपचन जैसी समस्‍याओं से बचने के लिए भोजन के बाद सौंफ और मिश्री का नियमित रूप से सेवन किया जाना चाहिए।
नाक रक्‍तस्राव रोके –

विभिन्‍न प्रकार के स्‍वास्‍थ्‍य लाभ दिलाने के साथ ही मिश्री नाक से खून बहने (Nose bleeding) को रोक सकती है। आपको आर्श्‍चय हो रहा होगा लेकिन यह सच है। नाक से खून आना बहुत ही आम समस्‍या है जो कि विशेष रूप से गर्मीयों के मौसम (Summer season) में होता है। यदि आप नाक से खून बहने की समस्‍या से पीड़ित हैं तो पानी के साथ मिश्री का सेवन करें। यह आपके शरीर को शीतलता (Coolness) प्रदान करने साथ ही नाक के रक्‍तस्राव को रोकने में मदद करेगा।
हीमोग्‍लोबिन बढ़ाए –
शरीर में खून की कमी या हीमोग्‍लोबिन (Hemoglobin) के कम स्‍तर के कारण एनीमिया की संभावना को बढ़ाता है। जिसके कारण चक्‍कर आना, कमजोरी और थकान आदि जैसी समस्‍याएं हो सकती हैं। इन सभी समस्‍याओं से बचने के लिए मिश्री (sugar-candy) का उपयोग किया जा सकता है। क्‍योंकि यह न केवल हीमोग्‍लोबिन के स्‍तर को बढ़ा सकता है बल्कि शरीर में रक्‍त परिसंचरण (blood circulation) को स्‍वस्‍थ्‍य बनाने में भी मदद करता है।



गर्भवती महिलाओं के लिए –
महिलाओ के गर्भावस्‍था (Pregnancy) एक ऐसी स्थिति होती है जहां उन्‍हें कई प्रकार की समस्‍याओं का सामना करना पड़ता है। गर्भावस्‍था के दौरान महिलाओं में कई प्रकार के प्रत्‍यक्ष और अप्रत्‍यक्ष परिवर्तन देखने को मिलते हैं। इस स्थिति में महिलाएं अक्‍सर अवसाद ग्रस्‍त देखी जा सकती हैं। जो कि उनके स्‍वास्‍थ्‍य के लिए प्रतिकूल होता है। इसलिए गर्भावस्‍था के दौरान उन्‍हें मिश्री का सेवन करना चाहिए। मिश्री अवसाद (Depression) को दूर करने में मदद करती है। यह उन माताओं के लिए भी फायदेमंद होता है जो स्‍तनपान करा रही हैं।
कामेच्‍छा को बढ़ाए –
केसर, मिश्री और अखरोट की निश्चित मात्रा का नियमित सेवन करने से पुरुषों में यौन इच्‍छा की कमी
को दूर किया जा सकता हैं। इसके लिए आपको भिंडी के पाउडर, अखरोट और मिश्री (Walnuts and mishri) की आवश्‍यकता होती है। एक गिलास गर्म दूध लें और इसमें इन सभी के पाउडर के साथ केसर की एक-एक चुटकी मिलाएं। इस दूध को रात में सोने से पहले पियें। यह कामेच्‍छा में कमी को दूर कर सकता है।
कामेच्‍छा में सुधार के लिए एक अन्‍य प्राकृतिक उपाय मिश्री का उपयोग भिंडी की जड़ों (Laddie Finger Root) के साथ है। बस भिंडी की जड़ का एक छोटा सा हिस्‍सा पीस लें और मिश्री के साथ बराबर मात्रा में मिलाकर खाएं। यह कामेच्‍छा की कमी (Low libido) को दूर करने का सबसे प्रभावी उपचार हो सकता है।
दस्‍त को ठीक करे –
यदि आप दस्‍त या ढीले मल (Loose motions) से परेशान हैं तो इसके लिए भी मिश्री बहुत ही फायदेमंद होती है। दस्‍त का उपचार करने के लिए आपको मिश्री और सूखे धनिया पाउडर की आवश्‍यकता होती है। आप 10 ग्राम मिश्री पाउडर और 10 ग्राम सूखा धनिया पाउडर लें। इन दोनों को 100 मिलीलीटर पानी में मिलाएं और इसका सेवन करें। इस मिश्रण को दिन में 2-3 बार सेवन करें। गर्मी के मौसम में होने वाले दस्‍त के लिए यह प्राकृतिक घरेलू उपचार माना जाता है।
वजन कम करने में –
आप अपने वजन को कम करने के लिए सौंफ या धनिया पाउडर के साथ मिश्री का सेवन करें। यह आपके वजन को नियंत्रित करने में सहायक होते हैं। इसके लिए आपको 50 मिश्री और 50 ग्राम सौंफ बीज की आवश्‍यकता है। आप इन दोनों को अच्‍छी तरह से पीस लें। नियमित रूप से प्रतिदिन सुबह गर्म पानी के साथ 1 चम्‍मच पाउडर का सेवन करें। इसी तरह से आप सौंफ के स्‍थान पर सूखा धनिया पाउडर (Dry coriander powder) का उपयोग कर सकते हैं। यह मिश्रण स्‍वाभाविक रूप से आपके वजन को कम करने में मदद करता है।



मुंह के अल्‍सर को ठीक करे –
पेट की खराबी या अन्‍य कारणों से आने वाले मुंह के छाले आपके लिए दुखदाई होते हैं। लेकिन आपके पास इसकी दवा के रूप में मिश्री मौजूद है। इलायची और मिश्री का सेवन आपके छालों के लिए बहुत ही फायदेमंद होते हैं। सबसे पहले बराबर मात्रा में हरी इलायची और मिश्री लें। इन दोनों को पीस कर पेस्‍ट बनाएं। इस पेस्‍ट को छालों पर दिन में 2-3 बार लगाएं। मुंह के छालों (Mouth ulcers) से यह आपको तुरंत ही राहत दिलाता है। आप इसे छोटे बच्‍चों के लिए भी उपयोग कर सकते हैं।
सावधानी-
विभिन्‍न प्रकार के स्‍वास्‍थ्‍य लाभ प्राप्‍त करने के लिए मिश्री का उपयोग किया जाता है। लेकिन आयुर्वेदिक औषधी के रूप में उपयोग करने पर ही मिश्री फायदेमंद होती है। अधिक मात्रा में सेवन करने से स्‍वास्‍थ्‍य पर इसके कुछ प्रतिकूल प्रभाव (Adverse effect) भी हो सकते हैं।
फाइबर (Fiber) की अच्‍छी मात्रा होने के कारण यह आपके पाचन के लिए अच्‍छा होता है। लेकिन अधिक मात्रा में इसका सेवन करने से आपको पेट से संबंधित समस्‍याएं जैसे पेट दर्द, दस्‍त (Diarrhea) आदि की समस्‍या हो सकती है।
मिश्री में शीतलन प्रभाव होता है। इसलिए सर्दी खांसी (cold, cough) का उपचार करते समय इसका केवल औषधी के रूप में उपयोग करें।
यदि आप किसी विशेष प्रकार की दवाओं का सेवन कर रहे हैं। तो मिश्री का औषधीय उपयोग करने से पहले अपने डॉक्‍टर से सलाह लें।


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