19/5/18

कलौंजी(प्याज के बीज) के औषधीय उपयोग // Medicinal Uses of Kalonji (Onion Seeds)

                                                                   

1. इसे संस्कृत में कृष्णजीरा, उर्दू में كلونجى कलौंजी, बांग्ला में कालाजीरो, मलयालम में करीम जीराकम, रूसी में चेरनुक्षा, तुर्की में çörek otu कोरेक ओतु, फारसी में शोनीज, अरबी में हब्बत-उल-सौदा, हब्बा-अल-बराकाحبه البركة, तमिल में करून जीरागम और तेलुगु में नल्ला जीरा कारा कहते हैं. लेकिन ध्यान रखें काली जीरी अलग होती है.
2. इसका स्वाद हल्का कड़वा व तीखा और गंध तेज होती है. इसका प्रयोग विभिन्न व्यंजनों नान, ब्रेड, केक और अचारों में किया जाता है.
3. इसमें मौजूद थाइमोक्विनोन एक बढ़िया एंटी-आक्सीडेंट है, कैंसर रोधी, कीटाणु रोधी, फंगस रोधी है, यकृत का रक्षक है और असंतुलित प्रतिरक्षा प्रणाली को दुरूस्त करता है.
4. कलौंजी, शरीर से कैंसर कोशिकाओं का सफाया करती है और एंटी-बोडीज के निर्माण करने वाली कोशिकाओं की संख्या को बढ़ाती है.
5. यकृत की कोशिकाओं की रक्षा करती है और यकृत में एस.जी.ओ.टी व एस.जी.पी.टी. के स्राव को कम करती है.
6. कलौंजी में उपस्थित उड़नशील तेल रक्त में शर्करा की मात्रा को कम करते हैं.


7. कलौंजी दमा, अस्थिसंधि शोथ आदि रोगों में शोथ (इन्फ्लेमेशन) दूर करती है. , सूजन को कम कर दर्द निवारण करती हैं. कलौंजी में विद्यमान 'निजेलोन' कोशिकाओं में हिस्टेमीन का स्राव कम करते हैं तथा श्वास नली की मांसपेशियों को ढीला कर दमा के रोगी को राहत प्रदान करते हैं.

8. यह श्वास नली की मांसपेशियों को ढीला करती है, प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत करती है और खांसी, दमा, ब्रोंकाईटिस आदि को ठीक करती है.
9. पेट के कीड़ों को मारने के लिए आधी छोटी चम्मच कलौंजी के तेल को एक बड़ी चम्मच सिरके के साथ दस दिन तक दिन में तीन बार पिलाते हैं. मीठे से परहेज जरूरी है.
10 एच.आई.वी./एड्स के रोगी को नियमित कलौंजी, लहसुन और शहद देने से शरीर की रक्षा करने वाली टी-4 और टी-8 लिंफेटिक कोशिकाओं की संख्या में आश्चर्यजनक रूप से वृद्धि होती है.
11. कलौंजी दुग्ध वर्धक और मूत्र वर्धक होती है. कलौंजी जुकाम ठीक करती है और कलौंजी का तेल गंजापन दूर करता है. कलौंजी के नियमित सेवन से पागल कुत्ते के काटे जाने पर भी लाभ होता है. लकवा, माइग्रेन, खांसी, बुखार, फेशियल पाल्सी के इलाज में यह फायदा पहुँचाती हैं. दूध के साथ लेने पर यह पीलिया में लाभदायक पाई गई है. यह बवासीर, पाइल्स, मोतिया बिंद की आरंभिक अवस्था, कान के दर्द व सफेद दाग में भी फायदेमंद है.
 अलग-अलग रोगोपचार में कलौंजी की प्रयोग विधियाँ:
12. कैंसर के उपचार में कलौंजी के तेल की आधी बड़ी चम्मच को एक गिलास अंगूर के रस में मिलाकर दिन में तीन बार लें. लहसुन भी खूब खाएँ. 2 किलो गेहूँ और 1 किलो जौ के मिश्रित अनुपात से आटे की रोटी 40 दिन तक खिलाएँ. आलू, अरबी और बैंगन से परहेज़ करें.


13. अवसाद और सुस्ती की स्थिति में एक गिलास संतरे के रस में एक बड़ी चम्मच तेल डाल कर 10 दिन तक सेवन करें. बहुत फर्क महसूस होगा.

14. सफेद दाग और कुष्ठ रोग में 15 दिन तक रोज पहले सेब का सिरका मलें, फिर कलौंजी का तेल मलें.

15. पुरषों के गुप्तरोग जैसे स्वप्नदोष, स्तंभन दोष, पुरुषहीनता आदि रोगों में एक प्याला सेब के रस में आधा छोटी चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर दिन में दो बार 21 दिन तक पियें. थोड़ा सा तेल गुप्तांग पर रोज मलें. तेज मसालेदार चीजों से परहेज करें.
16. मधुमेह में एक कप कलौंजी के बीज, एक कप राई, आधा कप अनार के छिलके और आधा कप पितपाप्र को पीसकर चूर्ण बना लें. इसकी आधी छोटी चम्मच कलौंजी के तेल के साथ रोज नाश्ते के पहले एक महीने तक लें.
17 गुर्दे की पथरी और मूत्राशय की पथरी में पाव भर कलौंजी को महीन पीस कर पाव भर शहद में अच्छी तरह मिला कर रख दें. इस मिश्रण की दो बड़ी चम्मच को एक कप गर्म पानी में एक छोटी चम्मच तेल के साथ अच्छी तरह मिला कर रोज नाश्ते के पहले पियें.
18. उल्टी और उबकाई एक छोटी चम्मच कार्नेशन और एक बड़ी चम्मच तेल को उबले पुदीने के साथ दिन में तीन बार लें.
19. सुन्दर व आकर्षक चेहरे के लिए, एक बड़ी चम्मच कलौंजी के तेल को एक बड़ी चम्मच जैतून के तेल में मिलाकर चेहरे पर मलें और एक घंटे बाद चेहरे को धो लें. कुछ ही दिनों में आपका चेहरा चमक उठेगा. एक बड़ी चम्मच तेल को एक बड़ी चम्मच शहद के साथ रोज सुबह लें, आप तंदुरूस्त रहेंगे और कभी बीमार नहीं होंगे.
20. हृदयरोग, रक्तचाप और हृदय की धमनियों के अवरोध की स्थिति में जब भी कोई गर्म पेय लें, उसमें एक छोटी चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर लें, साथ ही रोज सुबह लहसुन की दो कलियाँ नाश्ते के पहले लें और तीन दिन में एक बार पूरे शरीर पर कलौंजी के तेल की मालिश करके आधा घंटा धूप का सेवन करें. यह उपचार एक महीने तक लें.
21. कमर दर्द और गठिया में कलौंजी के तेल को हल्का गर्म करके जहाँ दर्द हो वहाँ मालिश करें और एक बड़ी चम्मच तेल दिन में तीन बार लें. 15 दिन में बहुत आराम मिलेगा.


22. सर में रूसी हो तो 10 ग्राम कलौंजी का तेल, 30 ग्राम जैतून का तेल और 30 ग्राम पिसी मेंहदी को मिलाकर गर्म करें. ठंडा होने पर बालों में लगाएँ और एक घंटे बाद बालों को धोकर शैंपू कर लें.

23. सिरदर्द में माथे और सिर के दोनों तरफ कनपटी के आस-पास कलौंजी का तेल लगायें और नाश्ते के पहले एक चम्मच तेल तीन बार लें कुछ सप्ताह बाद सिरदर्द पूर्णतः खत्म हो जायेगा.
24. अम्लता और आमाशय शोथ में एक बड़ी चम्मच कलौंजी का तेल एक प्याला दूध में मिलाकर रोज पाँच दिन तक सेवन करने से आमाशय की सब तकलीफें दूर हो जाती है.
25. नेत्र रोग और कमजोर नजर में रोज सोने के पहले पलकों ओर आँखो के आस-पास कलौंजी का तेल लगायें और एक बड़ी चम्मच तेल को एक प्याला गाजर के रस के साथ एक महीने तक लें.
26. दस्त या पेचिश में एक बड़ी चम्मच कलौंजी के तेल को एक चम्मच दही के साथ दिन में तीन बार लें तुरंत लाभ मिटा है.
27. मानसिक तनाव एक चाय की प्याली में एक बड़ी चम्मच कलौंजी का तेल डालकर लेने से मन शांत हो जाता है और तनाव के सारे लक्षण ठीक हो जाते हैं.
28. खाँसी व दमा में छाती और पीठ पर कलौंजी के तेल की मालिश करें, तीन बड़ी चम्मच तेल रोज पिएँ और पानी में तेल डाल कर उसकी भाप लें.
29. बाल झड़ते हों तो बालों में नीबू का रस अच्छी तरह लगाएँ, 15 मिनट बाद बालों को शैंपू कर लें व अच्छी तरह धोकर सुखा लें, सूखे बालों में कलौंजी का तेल लगायें एक सप्ताह के उपचार के बाद बालों का झड़ना बन्द हो जायेगा.
30. स्त्रियों के गुप्त रोगों ( जैसे श्वेत प्रदर, रक्त प्रदर, प्रसवोपरांत दुर्बलता व रक्त स्त्राव आदि) के लिए कलौंजी अत्यंत गुणकारी है. थोड़े से पुदीने की पत्तियों को दो गिलास पानी में डालकर उबालें व इसमें आधा चम्मच कलौंजी का तेल डालकर दिन में दो बार पियें. बैगन, अचार, अंडा, मछली आदि मांसाहार से परहेज रखें.
31. स्मरणशक्ति और मानसिक चेतना के लिए एक छोटी चम्मच तेल 100 ग्राम उबले हुए पुदीने के साथ सेवन करें.


4/5/18

घर पर ही दर्द नाशक मालिश का तेल बनायें// Make painkiller oil at home


 

इस आयुर्वेदिक तेल से मालिश करने से बरसों बरस पुराना  दर्द ,गठिया,वातव्याधि ,कमर दर्द ,जोड़ों की पीड़ा मे जबर्दस्त फायदा मिलता है|इसको तैयार करना भी बेहद आसान है|
औषधि तैयार करने की सामग्री
10 चमच  का नमक
20 चमच जैतून का तेल 


निर्माण विधि: 

 एक कांच के बर्तन में दोनों चीज़े मिला लें. बर्तन को अच्छी तरह से 2 दिन के लिए बंद (air tight) कर के रखें और दो दिन बाद एक हलके रंग की औषधि तैयार हो जाएगी|
इस्तेमाल करने की विधि-
सुबह इस औषधि को प्रभावित जगह पर लगायें और हलके हाथों से मालिश करें. शुरुआत में 2-3 मिनट के लिए करें और धीरे धीरे अवधी बढाए. विशेषज्ञों के अनुसार ज़यादा से ज़यादा 20 मिनट की मालिश काफ़ी है. मालिश करने के बाद गीले तोलिये से साफ करें |
अगर आपको तव्चा पर हलकी जलन महसूस हो तो बच्चों के इस्तेमाल का पाउडर लगायें इस से आपको जलन से राहत मिलेगी|
10 दिन में ये औषधि आपके खून के बहाव को बढाएगी और आपकी मासस्पेशिओं को पुनर्जीवित कर के आपके तंत्रिका तंत्र्र और हडियो को मज़बूत करेगी|
इस इलाज के बाद आपका सर दर्द हमेशा के लिए चला जायेगा क्योंकि  ये औषधि खून के बहाव को बढाने में मदद करती है और अच्छी दृष्टि भी प्रदान करती है. इस के इलावा ये आपके शारीर को विजातीय  तत्वों से मुक्त करेगी और आपके पाचन तंत्र को मज़बूत करेगी. याद रखें इसके इस्तेमाल से आप थोड़ा असहज महसूस कर सकते हैं लेकिन  इसके इस्तेमाल से आपको अश्चर्यजनक नतीजे मिलेगे , और सब से अच्छी बात ये है की  इसका कोई दुष्प्रभाव भी नही है |




4/4/18

शकर के फायदे और नुकसान // Benefits and disadvantages of sugar


                                     

      मन्दाग्नि, अपच, कब्ज़, अम्लता (Acidity), सर्दी, संधिवात, बदबूवाला पसीना, टॉन्सिल आदि रोग अधिक मात्रा में शक्कर, शक्कर से बनी चीजें खाने से होते हैं। अधिक शक्कर खाने से स्वाद-शक्ति मर जाती है, ताजे फलों और सब्जियों के प्राकृतिक मिठास का अनुभव नहीं होता। अत: मिठाइयाँ और शक्कर से बनी चीजें नहीं खानी चाहिये, खानी भी पड़ें तो कम-से-कम खानी चाहिए।
    दानेदार चीनी को प्राकृतिक चिकित्सा में ‘सफेद विष’ कहा गया है। इसे खाने से क्षय, गठिया, रक्तचाप और मदिरा सेवन की इच्छा होती है। इसके स्थान पर मीठे फल, गुड़, गुड़िया शक्कर, देशी बूरा, मिश्री उपयोगी हैं। चीनी खाने से व्यवहार में अपराधवृति आती है। चिड़चिड़ापन और क्रोध अधिक आता है। चीनी सारहीन खाद्य है। इसके सेवन से शरीर में विद्यमान विटामिन और कैल्शियम नष्ट हो जाते हैं। चीनी खाना आवश्यक नहीं है।
दाँतों के रोग – शक्कर के अधिक उपयोग से दाँत सड़ते हैं। प्रयोगों से सिद्ध हुआ है कि नीरोग दाँत वालों को शक्कर खिलाने से दाँत बिगड़ने लगते हैं। शक्कर बन्द करते ही बिगाड़ रुक जाता है।
बाल-लकवा – प्रोटीन वाले पदार्थों के साथ शक्कर खाने से लकवा होता है। दूध में शक्कर अधिक लेने से पेट में ऑक्जेलिक अम्ल पैदा होता है। यह अम्ल जब रक्त में मिलता है तो लकवा होता है। डॉ. वेन्जामिन सेल्डलर ने लिखा है -‘शक्कर के अधिक उपयोग से बाल-लकवा होता है। यदि रोगी की चौबीस घण्टे शक्कर बन्द कर दी जाये तो वह बच जाता है। दस वर्ष तक अगर बालकों को शक्कर न खाने दी जाये, तो उन्हें न तो लकवा होगा और न इसके कारण होने वाली मृत्यु ही होगी।
मासिक धर्म में दर्द शक्कर अधिक खाने से होता है।


शीघ्रता से प्रसव –
प्रसवकाल के अन्तिम भाग में जबकि कोई यान्त्रिक अवरोध न रहे, जरायु की क्रियाहीनता के कारण विलम्ब होता हो, उस हालत में शीघ्रता से प्रसव कराने के लिए चीनी का प्रयोग उपयुक्त होता है। 25 ग्राम चीनी जल में गलाकर आधा घण्टे के अन्तर से कई बार देना चाहिए।
कमर दर्द – खस-खस (पंसारी के मिलती है) और मिश्री समान भाग लेकर पीसकर दो-दो चम्मच सुबह-शाम गर्म दूध से नित्य फंकी लें। कमर दर्द मिट जायेगा।
रुका हुआ जुकाम – जलते हुए कोयलों पर शक्कर डालकर नाक से धुआँ अन्दर खींचने पर रुका हुआ जुकाम ठीक हो जाता है।
बेचैनी, हड़फूटनी, बदन में दर्द हो तो आधा कप शक्कर की गर्म चाशनी पीकर कपड़ा ओढ़कर सो जायें। शीघ्र आराम होगा।
चक्कर आना – दो चम्मच शक्कर और दो चम्मच सूखा धनिया मिलाकर चबाने से लाभ होता है।
खुजली – जिन्हें खुजली हो वे चीनी व चीनी से बनी चीजें, जैसे-टॉफी, मिठाइयाँ नहीं खायें। खुजली ठीक हो जायेगी।
जलना – जले हुए अंगों पर चीनी घोलकर लेप करें। पानी कम मात्रा में मिलायें जिससे घोल गाढ़ा तैयार हो। इससे जलन बन्द हो जाती है।
गर्मी के मौसम के रोग – दही में चीनी डालकर गर्मी के मौसम में नित्य खायें। इससे अधिक प्यास लगना, लू लगना, और दाह दूर हो जाता है। सर्दी-जुकाम ठीक होता है। वीर्य की वृद्धि होती है।
शक्तिवर्धक – दो चम्मच चीनी और दो चम्मच घी में दस पिसी हुई कालीमिर्चे मिलाकर नित्य भूखे पेट चाटें। इससे मस्तिष्क में तरावट आती है, कमजोरी का सिरदर्द ठीक, हो जाता है।
आँखें दुखने पर देशी शक्कर (बूरा) या बताशे के साथ रोटी खाने से लाभ होता है।
खाँसी बार-बार चलती हो तो मिश्री का टुकड़ा मुँह में रखें। मिश्री चबायें नहीं अपितु उसे चूसते रहें।
पथरी – 15 दाने बड़ी इलायची के, एक चम्मच खरबूजे के बीजों की मींगी, दो चम्मच मिश्री-इन सबको पीसकर एक कप पानी में मिलाकर नित्य सुबह-शाम पीते रहें। इससे गुर्दे की पथरी भी गल जाती है।
कोलेस्ट्रॉल – चीनी खाने से बढ़ता है।


फरास –
चीनी, नीबू का रस, बेसन और पानी प्रत्येक तीन-तीन चम्मच मिलाकर सिर में लगायें। एक घण्टे बाद साबुन से सिर धोयें। बाल सूखने पर नारियल का तेल लगायें। फरास दूर हो जायेगी।
     होम्योपैथी में चीनी से बनी औषधि सैकेरम ऑफिसिनेल है। जब चर्म पर ललाई हो, चर्म से पानी निकलता हो, खुजली हो तो सैकेरम ऑफिसिनेल 30 शक्ति को आठ-आठ गोलियों की पाँच खुराक नित्य लेने से शीघ्र लाभ होता है।
हिचकी – लगातार हिचकी चलती रहे, बन्द ही नहीं हो तो एक चम्मच चीनी, शक्कर जीभ के नीचे रख कर चूसें। हिचकी बन्द हो जायेगी। चीनी इस विधि से चूसने से गले के पिछले भाग की नसें उतेजित हो जाती हैं जिससे शरीर के अन्दर सिग्नल रुक जाते हैं और हिचकी बन्द हो जाती है।
कैंसर – अधिक शक्कर खाने से कैंसर हो जाता है। कैंसर की अन्तिम अवस्था में बीमार को शक्कर देना बन्द करके केवल फल और साग-सब्जी दी जाये तो इसकी वेदना कम हो जाती है और उसे बहुत आराम मिलता है।
दस्त – दस्त होने से अभिप्राय है दिन में कम-से-कम तीन बार पतले शौच का आना। दस्त होने पर शीघ्रता से शरीर में पानी, नमक व शक्ति की कमी अनुभव होती है।
गर्मी के मौसम के रोग – दही में चीनी डालकर गर्मी के मौसम में नित्य खायें। इससे अधिक प्यास लगना, लू लगना, और दाह दूर हो जाता है। सर्दी-जुकाम ठीक होता है। वीर्य की वृद्धि होती है।

मोटापा – यकृत (Liver) 150 ग्राम से अधिक शक्कर का संग्रह नहीं कर सकता। इसलिए अधिक शक्कर खाने का रूपान्तर चर्बी में होता है और शरीर मोटापे के कारण बेडौल बन जाता है।
दस्तों के उपचार के लिए रोगी को पानी एवं नमक का सेवन कराइए। पानी को उबालकर ठण्डा करके एक गिलास भर लें। इसमें जरा-सा नमक और स्वाद के अनुसार चीनी मिलाकर घोल लें। इसे बार-बार पिलायें। रोगी को कुछ-न-कुछ पिलाते रहें तथा नियमित भोजन करने को कहें, जिससे कि शारीरिक कमजोरी न होने पाए।



20/3/18

सिर्फ गंजेपन की ही नहीं अनेक रोगों की दिव्य औषधि है कलोंजी //Not only baldness, it is the divine medicine of many diseases-Kalonji/

                                                       

महिलाएं ही क्या पुरुष भी आम तौर पर अपने बालों को लेकर काफी चिंतित रहते हैं, आज की आधुनिक शैली और आधुनिक प्रोडक्ट्स ने हमारे शरीर को फायदा पहुंचाने के बजाय नुक्सान ही पहुंचाया है. बहुत कम लोग जानते हैं कि हमारे आसपास ऐसी बहुत सारी चीजें हैं, जिन्हें सही तरीके से खाकर सुन्दर त्वचा, बालों से लेकर अच्छी सेहत का फायदा उठाया जा सकता है.
     इन्हीं में शामिल है कलौंजी जिसमें बहुत सारे मिनरल्स और न्यूट्रिएंट्स होते हैं. आयरन, सोडियम, कैल्शियम, पोटैशियम और फाइबर से भरपूर कलौंजी कई प्रकार के रोगों का घर बैठे इलाज है. लगभग 15 एमीनो एसिड वाला कलौंजी शरीर के लिए जरूरी प्रोटीन की कमी भी पूरी करता है.बालों को लाभकलौंजी के लाभ में से सबसे बड़ा लाभ बालों को होता है. अनहेल्दी लाइफस्टाइल, स्ट्रेस जैसी कई समस्याओं से महिला हो या पुरुष, दोनों के ही साथ बालों के गिरने की समस्या आम हो चुकी है.
    इसके लिए तमाम तरह के ट्रीटमेंट कराने पर भी फायदा नहीं होता. लेकिन घर में मौजूद कलौंजी इस समस्या के निपटारे में बहुत ही कारगर उपाय है. सिर पर 20 मिनट तक नींबू के रस से मसाज करें और फिर अच्छे से धो लें. इसके बाद कलौंजी का तेल बालों में लगाकर उसे अच्छे से सूखने दें. लगातार 15 दिनों तक इसका इस्तेमाल बालों के गिरने की समस्या को दूर करता है.कलौंजी ऑयल, ऑलिव ऑयल और मेहंदी पाउडर को मिलाकर हल्का गर्म करें. ठंडा होने दें और हफ्ते में एक बार इसका इस्तेमाल करें. इससे गंजेपन की समस्या भी दूर होती है.
   

*कलौंजी की राख को तेल में मिलाकर गंजे अपने सर पर मालिश करें कुछ दिनों में नए बाल पैदा होने लगेंगे. इस प्रयोग में धैर्य महत्वपूर्ण है.कलौंजी के अन्य लाभडायबिटीज से बचाता है, पिंपल की समस्या दूर, मेमोरी पावर बढ़ाता है, सिरदर्द करे दूर, अस्थमा का इलाज, जोड़ों के दर्द में आराम, आंखों की रोशनी, कैंसर से बचाव, ब्लड प्रेशर करे कंट्रोल.कलौंजी एक बेहद उपयोगी मसाला है. इसका प्रयोग विभिन्न व्यंजनों जैसे दालों, सब्जियों, नान, ब्रेड, केक और आचार आदि में किया जाता है

    *कलौंजी का तेल बनाने के लिए 50 ग्राम कलौंजी पीसकर ढाई किलो पानी में उबालें. उबलते-उबलते जब यह केवल एक किलो पानी रह जाए तो इसे ठंडा होने दें. कलौंजी को पानी में गर्म करने पर इसका तेल निकलकर पानी के ऊपर तैरने लगता है. इस तेल पर हाथ फेरकर तब तक कटोरी में पोछें जब तक पानी के ऊपर तैरता हुआ तेल खत्म न हो जाए. फिर इस तेल को छानकर शीशी में भर लें और इसका प्रयोग औषधि के रूप में करें.आयुर्वेद कहता है कि इसके बीजों की ताकत सात साल तक नष्ट नहीं होती.
  दमा, खांसी, एलर्जीः एक कप गर्म पानी में एक चम्मच शहद तथा आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर सुबह निराहार (भोजन से पूर्व) पी लेना चाहिए, फिर रात में भोजन के बाद उसी प्रकार आधा चम्मच कलौंजी और एक चम्मच शहद गर्म पानी में मिलाकर इस मिश्रण का सेवन कर लेना चाहिए. इस प्रकार 40 दिनों तक प्रतिदिन दो बार पिया जाए. सर्दी के ठंडे पदार्थ वर्जित हैं.
मधुमेहः एक कप काली चाय में आधा चाय का चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर सुबह नाश्ते से पहले पी लेना चाहिए. फिर रात को भोजन के पश्चात सोने से पहले एक कप चाय में एक चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर पी लेना चाहिए. चिकनाई वाले पदार्थों के उपयोग से बचें. इस इलाज के साथ अंगे्रजी दवा का उपयोग होता है तो उसे जारी रखें और बीस दिनों के पश्चात शर्करा की जांच करा लें. यदि शक्कर नार्मल हो गई हो तो अंग्रेजी दवा बंद कर दें, किंतु कलौंजी का सेवन करते रहें.
*हृदय रोगः

एक कप दूध में आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर प्रतिदिन दो बार प्रयोग करें. इस तरह दस दिनों तक उपचार चलता रहे. चिकनाई वाले पदार्थों का सेवन न करें.

नेत्र रोगों की चिकित्साः नेत्रों की लाली, मोतियाबिंद, आंखों से पानी का जाना, आंखों की तकलीफ और आंखों की नसों का कमजोर होना आदि में एक कप गाजर के जूस में आधा चम्मच कलौंजी का तेल दो चम्मच शहद मिलाकर दिन में दो बार सुबह (निराहार) और रात में सोते समय लेना चाहिए. इस प्रकार 40 दिनों तक इलाज जारी रखें. नेत्रों को धूप की गर्मी से बचाएं.
अपच या पेट दर्द में आप कलौंजी का काढा बनाइये फिर उसमे काला नमक मिलाकर सुबह शाम पीजिये. दो दिन में ही आराम देखिये.
*कैंसर के उपचार में कलौजी के तेल की आधी बड़ी चम्मच को एक ग्लास अंगूर के रस में मिलाकर दिन में तीन बार लें.
*हृदय रोग,ब्लड प्रेशर और हृदय की धमनियों का अवरोध के लिए जब भी कोई गर्म पेय लें, उसमें एक छोटी चम्मच तेल मिला कर लें.
सफेद दाग और लेप्रोसीः 15 दिन तक रोज पहले सेब का सिरका मलें, फिर कलौंजी का तेल मलें.
एक चाय की प्याली में एक बड़ी चम्मच कलौंजी का तेल डाल कर लेने से मन शांत हो जाता है और तनाव के सारे लक्षण ठीक हो जाते हैं. कलौंजी के तेल को हल्का गर्म करके जहां दर्द हो वहां मालिश करें और एक बड़ी चम्मच तेल दिन में तीन बार लें. 15 दिन में बहुत आराम मिलेगा.
एक बड़ी चम्मच कलौंजी के तेल को एक बड़ी चम्मच शहद के साथ रोज सुबह लें, आप तंदुरूस्त रहेंगे और कभी बीमार नहीं होंगे; स्वस्थ और निरोग रहेंगे .
    याददाश्त बढाने के लिए और मानसिक चेतना के लिए एक छोटी चम्मच कलौंजी का तेल 100 ग्राम उबले हुए पुदीने के साथ सेवन करें.पथरी हो तो कलौंजी को पीस कर पानी में मिलाइए फिर उसमे शहद मिलाकर पीजिये, १०-११ दिन प्रयोग करके टेस्ट करा लीजिये.कम न हुई हो तो फिर १०-११ दिन पीजिये.
*अगर गर्भवती के पेट में बच्चा मर गया है तो उसे कलौंजी उबाल कर पिला दीजिये, बच्चा निकल जायेगा.और गर्भाशय भी साफ़ हो जाएगा.
   *किसी को बार-बार हिचकी आ रही हो तो कलौंजी के चुटकी भर पावडर को ज़रा से शहद में मिलकर चटा दीजिये.
   *अगर किसी को पागल कुत्ते ने काट लिया हो तो आधा चम्मच से थोडा कम करीब तीन ग्राम कलौंजी को पानी में पीस कर पिला दीजिये, एक दिन में एक ही बार ३-४ दिन करे.


*जुकाम परेशान कर रहा हो तो इसके बीजों को गरम कीजिए ,मलमल के कपडे में बांधिए और सूंघते रहिये.दो दिन में ही जुकाम और सर दर्द दोनों गायब .

*कलौंजी की राख को पानी से निगलने से बवासीर में बहुत लाभ होता है
कलौंजी का उपयोग चर्म रोग की दवा बनाने में भी होता है.
*कलौंजी को पीस कर सिरके में मिलाकर पेस्ट बनाए और मस्सों पर लगा लीजिये. मस्से कट जायेंगे.
मुंहासे दूर करने के लिए कलौंजी और सिरके का पेस्ट रात में मुंह पर लगा कर सो जाएँ.
*जब सर्दी के मौसम में सर दर्द सताए तो कलौंजी और जीरे की चटनी पीसिये और मस्तक पर लेप कर लीजिये.
घर में कुछ ज्यादा ही कीड़े-मकोड़े निकल रहे हों तो कलौंजी के बीजों का धुँआ कर दीजिये.
गैस/पेट फूलने की समस्या –50 ग्राम जीरा, 25 ग्राम अजवायन, 15 ग्राम कलौंजी अलग-अलग भून कर पीस लें और उन्हें एक साथ मिला दें. अब 1 से 2 चम्मच मीठा सोडा, 1 चम्मच सेंधा नमक तथा 2 ग्राम हींग शुद्ध घी में पका कर पीस लें. सबका मिश्रण तैयार कर लें. गुनगुने पानी की सहायता से 1 या आधा चम्मच खाएं.
*महिलाओं को अपने यूट्रस (बच्चेदानी) को सेहतमंद बनाने के लिए डिलीवरी के बाद कलौंजी का काढा ४ दिनों तक जरूर पी लेना चाहिए. काढ़ा बनाने के लिए दस ग्राम कलौंजी के दाने एक गिलास पानी में भिगायें, फिर २४ घंटे बाद उसे धीमी आंच पर उबाल कर आधा कर लीजिये. फिर उसको ठंडा करके पी जाइये, साथ ही नाश्ते में पचीस ग्राम मक्खन जरूर खा लीजियेगा. जितने दिन ये काढ़ा पीना है उतने दिन मक्खन जरूर खाना है.
*आपको अगर बार बार बुखार आ रहा है अर्थात दवा खाने से उतर जा रहा है फिर चढ़ जा रहा है तो कलौंजी को पीस कर चूर्ण बना लीजिये फिर उसमे गुड मिला कर सामान्य लड्डू के आकार के लड्डू बना लीजिये. रोज एक लड्डू खाना है ५ दिनों तक , बुखार तो पहले दिन के बाद दुबारा चढ़ने का नाम नहीं लेगा पर आप ५ दिन तक लड्डू खाते रहिएगा, यही काम मलेरिया बुखार में भी कर सकते हैं.
*ऊनी कपड़ों को रखते समय उसमें कुछ दाने कलौंजी के डाल दीजिये,कीड़े नहीं लगेंगे.भैषज्य रत्नावली कहती है कि अगर कलौंजी को जैतून के तेल के साथ सुबह सवेरे खाएं तो रंग एकदम लाल सुर्ख हो जाता है.
चेहरे को सुन्दर व आकर्षक बनाने के लिए कलौंजी के तेल में थोड़ा सा जैतून का तेल मिलाकर चेहरे पर लगाएं और थोड़ी देर बाद चेहरा धो लें. इससे चेहरे के दाग़-धब्बे दूर होते हैं|



17/3/18

मासिक धर्म के दौरान वर्जित कार्य// Instructions for menstruation


                                           

      'मासिक धर्म' महिलाओ के जीवन मे सामान्य है जो कि हर महीने में आता रहता है और लगभग 4 से 5 दिन तक रहता है, इस दौरान बहोत सारी महिलाओं को बहोत ज्यादा तकलीफ भी होती है, पर कुछ महिलाओं को तकलीफ नही होती है और वो अपने 'पीरिएड्स' के दिन बहोत आराम से रहती है, तो चलिए आज मैं आपको बताता हूँ कि क्या नही करने चाहिए आपको 'पीरियड्स' यानी कि 'मासिक धर्म' के समय.
'पीरियड्स' के दौरान  न करें ये काम-
1- ज्यादा कॉफी का पीना.
अक्सर ज्यादा तर महिलाएं कॉफी या चाय हद से ज्यादा पी लेती हैं, तो ये आपको परेशान कर सक्ति हैं उस वक्त खास कर जब आप अपने 'पीरियड्स' के टाइम में हों, क्योकि इससे आपके कमर में हो रहे दर्द को ये और बढ़ा सकता है.


2- बाथरूम में ज्यादा समय तक रहना.

'पीरियड्स' के समय अगर आप ज्यादा समय तक बाथरूम में रहती हैं तो आपकी ये आदत आपके लिये परेशानी का कारण बन सकता है, क्योकि टॉयलेट के शिट पे जमे बैक्टिरिया महिलाओं के शरीर के अंदर चले जाते हैं और बहोत सारि बीमारी के कारण बन सकते हैं आगे जाके.
3- सिगरेट पिने की आदत.
एक रिसर्च से पता चला है कि अगर महिलाएँ 'सिगरेट्स' का सेवन करती हैं तो 'पीरियड्स' के समय उन्हें ज्यादा दर्द की परेशानी हो सकती है, इसलिए अगर आप दर्द से बचना चाहती हैं तो 'सिगरेट' पीना बन्द कर दें.
4 ज्यादा शकर खाने की आदत.
अगर आपको ज्यादा मिठा खाने की आदत है तो आपको बहोत ज्यादा परेशान कर सकता है आपका ये आदत, माना जाता है कि ज्यादा मिठा खाने से शरीर मे हार्मोन की कमी हो जाती है जिसके कारण 'पीरियड्स' के समय  ज्यादा दर्द और चिड़चिड़ा पन ला सकता है.


5- 'शराब' का पीना.

अगर आप 'अल्कोहल' पीती हैं तो आपको सिर में दर्द,गुस्सा और मूड स्विंग हो जाता है, और मैग्नीशियम की भी कमी हो जाती है, खास कर 'मासिक धर्म' के वक्त.
6- अधिक मात्रा में नमक खाना.
नमक खाने से ज्यादा तर महिलाओं के पेट फूलने की समस्या आती है तो आप उस वक्त नामक से बनी कोई भी चीज न खायें.
7- रात में अच्छे से ना सोना.
ज्यादा तर महिलाएं 'पीरियड्स' के दर्द के कारण रात में अच्छे से सो नही पति है जिसके कारण उनका 'पीरियड्स' का टाईम बढ़ सकता है, और इस वजह से आपको आपने शरीर में थकान और ज्यादा दर्द महसूस हो सकता है तो आप रात में अपना पूरा नींद लें.
8- पीरियड्स' के वक्त खाना नही खाना.
ज्यादा तर महिलाएं 'पीरियड्स' के समय हो रहे दर्द के कारण खाना खाना छोड़ देती है जिसके कारण वो कमजोर हो जाती हैं और जिसके कारण उन्हें और ज्यादा दर्द का सामना करना पड़ता शरीर में एसिड की कमी के कारण वो कमजोर हो जाती हैं, और उनका दर्द और बढ़ जाता है.




12/3/18

भुने हुआ लहसुन के हैरान कर देने वाले फायदे //Benefits of the roasted garlic

                                                        

     लहसुन अपने स्वाद, एंटी बायोटिक तत्वों और सेहत लाभ के लिए जाना जाता है, इसलिए आप इसे भोजन में या फिर कच्चा उपयोग करते हैं। लेकिन भुनी हुई लहसुन खाने के यह फायदे जानेंगे तो आप हैरान रह जाएंगे।
    सुबह खालीपेट लहसुन को भूनकर खाने से कॉलेस्ट्रॉल कम होता है, और कॉलेस्ट्रॉल से जुड़ी सभी स्वास्थ्य समस्याओं जैसे हृदय की नलियों में कॉलेस्ट्रॉल का जमाव आदि के लिए यह बेहद फायदेमंद तरीका है।
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*वजन कम करना चाहते हैं तो भी यह फायदेमंद है, क्योंकि कॉलेस्ट्रॉल का स्तर कम होने के साथ-साथ आपका वजन घटने लगेगा और मोटापा गायब हो जाएगा। 
*सर्दी के दिनों में यह सर्दी, खांसी और जुकाम से बचाता है और शरीर में गर्माहट पैदा करने में मदद करता है। इतना ही नहीं यह रक्तप्रवाह को भी बेहतर बनाए रखता है।
*सर्दी के दिनों में यह सर्दी, खांसी और जुकाम से बचाता है और शरीर में गर्माहट पैदा करने में मदद करता है। इतना ही नहीं यह रक्तप्रवाह को भी बेहतर बनाए रखता है।


*प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ यह ब्लडप्रेशर नियंत्रित करता है और अपने एंटी इंफ्लेमटरी एवं एंटी *फंगल गुणों के कारण शरीर की अंदरूनी सफाई कर  कई बीमारियों से बचाए

रखता है।
*इसमें मौजूद भरपूर कार्बोहाइड्रेट शरीर की कमजोरी को दूर कर शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है। यह ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में भी मददगार है और कब्ज से भी बचाता है।

अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन की रिसर्च के अनुसार लहसुन में मौजूद फाइटोकेमिकल्स पुरुषों की हेल्थ के लिए फायदेमंद है। प्रोस्टेट कैंसर और कार्डियो वेस्क्यूलर डिसीज में इसे खाने के कई फायदे हैं। इसलिए महर्षि अायुर्वेद हॉस्पिटल, नई दिल्ली की डॉ. भानु शर्मा रोज पुरुषों को सोने से पहले भुने हुए लहसुन की एक कली खाने की सलाह देती हैं।
कैसे भूनें-
लहसुन की कलियों को थोड़े से देसी गाय के घी या ऑलिव आईल मे हल्की आंच पर भूरे रंग की होने तक  तवे पर गरम करें|



7/3/18

पान खाने के फायदे // Benefits of eating Tambul

                                                            

       हमारे देश में पान खाना एक बहुत ही सामान्य बात है. खाने के बाद पान खाना यहां की परंपरा में
शामिल है. पान की पत्तियां कई रंगों में मिलती हैं. कुछ गहरे हरे रंग की होती हैं और कुछ हल्के रंग की.
पान की पत्ती खाने में थोड़ी कसैली होती है लेकिन इसे खाने वाले इसमें सुपारी, कत्था, चूना और दूसरी कई चीजें मिलाकर खाते हैं. आमतौर पर लोग इसे गलत आदत मानते हैं लेकिन हर चीज की तरह इसके भी कुछ फायदे भी हैं.
हालांकि ये जरूर है कि पान खाकर इधर-उधर थूकना एक बेहद बुरी आदत है और पान खाने वालों को हमेशा इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि पान खाने के बाद कूड़ेदान का ही इस्तेमाल करें न कि किसी दीवार और सड़क का|

   पान खाने वालों की संख्या तो बहुत है लेकिन कुछ ही लोगों को पता होता है कि इसे खाने के कुछ फायदे भी हैं:
1. मसूड़ों में सूजन पर या गांठ आ जाने पर-
मसूड़े में गांठ या फिर सूजन हो जाने पर पान का इस्तेमाल काफी फायदेमंद होता है. पान में पाए जाने तत्व इन उभारों को कम करने का काम करते हैं.



2. साधारण बीमा‍रियों और चोट लगने पर-

अगर आपको सर्दी हो रखी है तो ऐसे में पान के पत्ते आपके लिए फायदेमंद रहेंगे. इसे शहद के साथ मिलाकर खाने से फायदा होता है. साथ ही पान में मौजूद एनालजेसिक गुण सिर दर्द में भी आराम देता है. चोट लगने पर पान का सेवन घाव को भरने में मदद करता है.
3. कामोत्तेजना बढ़ाने मे-
पान के पत्ते कामोत्तेजना बढ़ाने में भी सहायक होते हैं. अंतरंग पलों को और खुशनुमा बनाने के लिए आप पान के पत्तों को इस्तेमाल कर सकते हैं.
4. पाचन में सहायक-
पान खाना पाचन क्रिया के लिए फायदेमंद है. ये सैलिवरी ग्लैंड को सक्रिय करके लार बनाने का काम करता है जोकि खाने को छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़ने का काम करता है. कब्ज की समस्या से जूझ रहे लोगों के लिए भी पान की पत्ती चबाना काफी फायदेमंद है. गैस्ट्र‍िक अल्सर को ठीक करने में भी पान खाना काफी फायदेमंद है.
5. मुंह के स्वास्थ्य के लिए-
पान के पत्ते में कई ऐसे तत्व होते हैं जो बैक्टीरिया के प्रभाव को कम करने में सहायक होते हैं. जिन लोगों के मुंह से दुर्गंध आ रही हो उनके लिए पान का सेवन काफी फायदेमंद होता है. इसमें इस्तेमाल होने वाले मसाले जैसे लौंग, कत्था और इलायची भी मुंह को फ्रेश रखने में सहायक होते हैं. पान खाने वालों के लार में एस्कॉर्बिक एसिड का स्तर भी सामान्य बना रहता है, जिससे मुंह संबंधी कई बीमारियां होने का खतरा कम हो जाता है.



6/3/18

अजमोद के गुण उपयोग फायदे // Benefits of using parsley


अजमोद पौधे का परिचय : -
      प्रकृति ने हमे वनस्पति के रूप में बहुत बड़ा उपहार दिया है । जिनका प्रयोग हम दवाइयों के रूप मेंकरते है । उनमें से एक अजमोदा का पौधा है । इसका प्रयोग हर प्रकार की सब्जी बनाने में भी किया जाता है , स्वाद के साथ साथ यह गुणवता को भी बढ़ावा देता है, इसका पेड़ सारे भारत में पायाजाता है । इस पौधे की खेती सर्दियों के मौसम में बंगाल में की जाती है । यह पेड़ हिमालय के उतरीऔर पश्चमी प्रदेश में, पंजाब की पहाड़ियों पर और फारस में अधिक संख्या में पाये जाते है।
 अजमोद के विभिन्न नाम , 
Different names of celery plant
अंग्रेजी में = सेलरी सीड्स, Celery Seeds
हिंदी में = अजमोद
संस्कृत में = अजमोदा , बस्तमोदा , मर्कटी , कारवी
अजमोद पौधे की बाहरी संरचना :-
अजमोदा का पौधा १ -३ फुट ऊँचे होते है । इसपौधे का आकार अजवाइन के पौधे जैसा होता है । इसके पत्ते किनारे से कटे हुए और इसमें design होते है । इस पौधे के फूल छोटे - छोटे आकार केसफेद रंग के होते है । इन फूलों का आकार छतरीनुमा होता है । जो बाद में पककर बीज बन जाते है। इन्ही बीजों को अजमोद कहते है।
अजमोद के पौधे की रासायिनक गुणवत्ता :-
इस पौधे में उड़नशील तेल , गंधक , लुआब , गोद , क्षार , एल्ब्यूमिन , और कुछ मात्रा में नमकपाया जाता है । अजमोदे के पौधे में कपूर से मिलता जुलता एक तेलिए और तीक्ष्ण पदार्थ भी पायाजाता है|

गुण धर्म :- अजमोदे के पौधे का उपयोग कई बीमारियों को ठीक करने के लिए किया जाता है ।जैसे :- वात , पित्त , कफ , इसके जूस से गर्भाशय की भी सफाई होती है , शरीर के दर्द को दूर करता है , हिचकी रोग के उपचार के लिए , वमन व गुदाशय का दर्द और कुकुर खांसी इत्यादि के उपचार के लिए इस औषधि का प्रयोग किया जाता है । इसके जूस के सेवन से अर्श और पथरी का रोग भी ठीक हो जाता है और पथरी मूत्र मार्ग से धीरे धीरे बाहर निकल जाती है ।




पाचन तंत्र को मजबूत करके उसके प्रत्येक अंगो के लिए और पेट में होने वाली परेशानियों को आराम देता है ।अजमोद के पौधे के उपयोग से यकृत ह्रद्य और प्लीहा की शिकायत का समाधान होता है ।
गर्भवती महिला अजमोद का सेवन न करे
अजमोद के खाने के बाद छाती में जलन पैदा हो जाती है । गर्भवती महिलाओं को इसका सेवन नहीं करना चाहिए । क्योकि यह गर्भाशय उत्तेजिक होती है इसके उपयोग से गर्भपात भी हो सकता है ।
अपस्मार से पीड़ित रोगी को भी अजमोद का सेवन नहीं करना चाहिए ऐसा करने से हानि हो सकती है ।
अजमोद का अधिक सेवन निषेध है | .





24/2/18

भूमि आँवला लीवर के रोगों की महा औषधि

                                                     
    भूमि आंवला लीवर की सूजन, सिरोसिस, फैटी लिवर, बिलीरुबिन बढ़ने पर, पीलिया में, हेपेटायटिस B और C में, किडनी क्रिएटिनिन बढ़ने पर, मधुमेह आदि में चमत्कारिक रूप से उपयोगी हैं।
    यह  पौधा लीवर व किडनी के रोगो मे चमत्कारी लाभ करता है। यह बरसात मे अपने आप उग जाता है और छायादार नमी वाले स्थानो पर पूरा साल मिलता है। इसके पत्ते के नीचे छोटा सा फल लगता है जो देखने मे आंवले जैसा ही दिखाई देता है। इसलिए इसे भुई आंवला कहते है। इसको भूमि आंवला या भू धात्री भी कहा जाता है। यह पौधा लीवर के लिए बहुत उपयोगी है। इसका सम्पूर्ण भाग, जड़ समेत इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके गुण इसी से पता चल जाते हैं के कई बाज़ीगर भूमि आंवला के पत्ते चबाकर लोहे के ब्लेड तक को चबा जाते हैं।
    बरसात मे यह मिल जाए तो इसे उखाड़ कर रख ले व छाया मे सूखा कर रख ले। ये जड़ी बूटी की दुकान पंसारी आदि के पास से आसानी से मिल जाता है।

 सेवन मात्रा-

आधा चम्मच चूर्ण पानी के साथ दिन मे 2-4 बार तक। या पानी मे उबाल कर छान कर भी दे सकते हैं। इस पौधे का ताज़ा रस अधिक गुणकारी है।

लीवर की सूजन, बिलीरुबिन और पीलिया में फायदेमंद-

लीवर की यह सबसे अधिक प्रमाणिक औषधि है। लीवर बढ़ गया है या या उसमे सूजन है तो यह पौधा उसे बिलकुल ठीक कर देगा। बिलीरुबिन बढ़ गया है , पीलिया हो गया है तो इसके पूरे पौधे को जड़ों समेत उखाडकर, उसका काढ़ा सुबह शाम लें। सूखे हुए पंचांग का 3 ग्राम का काढ़ा सवेरे शाम लेने से बढ़ा हुआ बाईलीरुबिन ठीक होगा और पीलिया की बीमारी से मुक्ति मिलेगी। पीलिया किसी भी कारण से हो चाहे पीलिया का रोगी मौत के मुंह मे हो यह देने से बहुत अधिक लाभ होता है। अन्य दवाइयो के साथ भी दे सकते (जैसे कुटकी/रोहितक/भृंगराज) अकेले भी दे सकते हैं। पीलिया में इसकी पत्तियों के पेस्ट को छाछ के साथ मिलाकर दिया जाता है।
वैकल्पिक रूप से इसके पेस्ट को बकरी के दूध के साथ मिलाकर भी दिया जाता है। पीलिया के शुरूआती लक्षण दिखाई देने पर भी इसकी पत्तियों को सीधे खाया जाता है।
कभी नहीं होगी लीवर की समस्या।
अगर वर्ष में एक महीने भी इसका काढ़ा ले लिया जाए तो पूरे वर्ष लीवर की कोई समस्या ही नहीं होगी। LIVER CIRRHOSIS जिसमे यकृत मे घाव हो जाते हैं यकृत सिकुड़ जाता है उसमे भी बहुत लाभ करता है। Fatty LIVER जिसमे यकृत मे सूजन आ जाती है पर बहुत लाभ करता है।
हेपेटायटिस B और C में. Hepatitis b – hepatitis c
हेपेटायटिस B और C के लिए यह रामबाण है। भुई आंवला +श्योनाक +पुनर्नवा ; इन तीनो को मिलाकर इनका रस लें। ताज़ा न मिले तो इनके पंचांग का काढ़ा लेते रहने से यह बीमारी बिलकुल ठीक हो जाती हैइसमें शरीर के विजातीय तत्वों को दूर करने की अद्भुत क्षमता है।
                                    

मुंह में छाले और मुंह पकने पर-

मुंह में छाले हों तो इनके पत्तों का रस चबाकर निगल लें या बाहर निकाल दें। यह मसूढ़ों के लिए भी अच्छा है और मुंह पकने पर भी लाभ करता है।

स्तन में सूजन या गाँठ-

स्तन में सूजन या गाँठ हो तो इसके पत्तों का पेस्ट लगा लें पूरा आराम होगा।
जलोदर या असाईटिस
जलोदर या असाईटिस में लीवर की कार्य प्रणाली को ठीक करने के लिए 5 ग्राम भुई आंवला +1/2 ग्राम कुटकी +1 ग्राम सौंठ का काढ़ा सवेरे शाम लें।


खांसी-


खांसी में इसके साथ तुलसी के पत्ते मिलाकर काढ़ा बनाकर लें .


किडनी-

यह किडनी के इन्फेक्शन को भी खत्म करती है। इसका काढ़ा किडनी की सूजन भी खत्म करता है। SERUM CREATININE बढ़ गया हो, पेशाब मे इन्फेक्शन हो बहुत लाभ करेगा।


स्त्री रोगो में-

प्रदर या प्रमेह की बीमारी भी इससे ठीक होती है। रक्त प्रदर की बीमारी होने पर इसके साथ दूब का रस मिलाकर 2-3 चम्मच प्रात: सायं लें। इसकी पत्तियाँ गर्भाधान को प्रोत्सहित करती है। इसकी जड़ो एवं बीजों का पेस्ट तैयार करके चांवल के पानी के साथ देने पर महिलाओ में रजोनिवृत्ति के समय लाभ मिलता है।

पेट में दर्द-

*मलेरिया के बुखार में इसके संपूर्ण पौधे का पेस्ट तैयार करके छाछ के साथ देने पर आराम मिलता है।


आँतों का इन्फेक्शन-


आँतों का इन्फेक्शन होने पर या अल्सर होने पर इसके साथ दूब को भी जड़ सहित उखाडकर , ताज़ा ताज़ा आधा कप रस लें . रक्त स्त्राव 2-3 दिन में ही बंद हो जाएगा .

*पेट में दर्द हो और कारण न समझ आ रहा हो तो इसका काढ़ा ले लें। पेट दर्द तुरंत शांत हो जाएगा। ये पाचन प्रणाली को भी अच्छा करता है।

शुगर में-

शुगर की बीमारी में घाव न भरते हों तो इसका पेस्ट पीसकर लगा दें . इसे काली मिर्च के साथ लिया जाए तो शुगर की बीमारी भी ठीक होती है।

पुराना बुखार-

पुराना बुखार हो और भूख कम लगती हो तो , इसके साथ मुलेठी और गिलोय मिलाकर, काढ़ा बनाकर लें। इसका उपयोग घरेलू औषधीय के रूप में जैसे ऐपेटाइट, कब्ज. टाइफाइट, बुखार, ज्वर एवं सर्दी किया जाता है। 

अन्य उपयोग-

*प्लीहा एवं यकृत विकार के लिये इसकी जडों के रस को चावल के पानी के साथ लिया जाता है।
*इसकी पत्तियों का पेस्ट आंतरिक घावों सुजन एवं टूटी हड्डियो पर बाहरी रूप से लगाने में किया जाता है।
*खुजली होने पर इसके पत्तों का रस मलने से लाभ होता है।
*इसे मूत्र तथा जननांग विकारों के लिये उपयोग किया जाता है।
*इसे अम्लीयता, अल्सर, अपच, एवं दस्त में भी उपयोग किया जाता है।
*इसकी पत्तियाँ शीतल होती है।
*इसकी जडों का पेस्ट बच्चों में नींद लाने हेतु किया जाता है।
*एनीमिया, अस्थमा, ब्रोकइटिस, खांसी, पेचिश, सूजाक, हेपेटाइटिस, पिलिया एवं पेट में ट्यूमर होने की दशा में उपयोग किया जा सकता है।
*इसे बच्चों के पेट में कीडे़ होने पर देने से लाभ पहुँचाता है।लिवर व् किडनी रोगियों के लिए विशेष।
*लीवर व किडनी के रोगी को खाने मे घी तेल मिर्च खटाई व सभी दाले बंद कर देनी चाहिए। मूंग की दाल कम मात्रा मे ले सकते हैं। मिर्च के लिए कम मात्रा मे काली मिर्च व खटाई के लिए अनारदाना प्रयोग करना चाहिए।*भोजन मे चावल का अधिक प्रयोग करना चाहिए। हरे नारियल का पानी बहुत अच्छा है।

भोजन –

1- यदि खटाई की इच्छा हो खट्टा सूखा अनारदाना प्रयोग करे।
2- प्रतिदिन लगभग 50 ग्राम किशमिश/दाख/ मुनक्का (सूखा अंगूर) , खजूर व सुखी अंजीर पानी मे धो कर खिलाए।
3- सभी किस्म की दाले बंद कर दे। केवल मूंग बिना छिलके की दाल ले सकते।
4-लाल मिर्च, हरी मिर्च, अमचूर, इमली, गरम मसाला और पैकेट का नमक बंद कर दे।
5- सैंधा नमक और काली मिर्च का प्रयोग करे बहुत कम मात्रा मे।
6- सफ़ेद पेठा (कूष्माण्ड जिसकी मिठाई बनाई जाती है) वह मिले तो उसका रस पिए व उसकी सब्जी खाए। पीले रंग का पेठा जिसे काशीफल या सीताफल कहते हैं वह न खाए।
7- चावल उबालते समय जो पानी (माँड़) निकलता है वह ले। वह स्वास्थ्य के लिए बहुत अच्छा है।
8- गेहू का दलिया, लौकी की सब्जी, परवल की सब्जी दे
9- भिंडी, घुइया (अरबी), कटहल आदि न खाए।

15/2/18

जामुन के सिरके के फायदे और बनाने की विधि // Benefits of berries vinegar and the method of making

                               
कब्ज और उदर रोग में जामुन का सिरका उपयोग करें। जामुन का सिरका गुणकारी और स्वादिष्ट होता है, इसे घर पर ही आसानी से बनाया जा सकता है और कई दिनों तक उपयोग में लाया जा सकता है।
जामुन का सिरका जितना पुराना होता है यह खाने में उतना ही स्वादिष्ट और पेट सम्बंधित रोगों के लिए उतना ही अधिक लाभकारी होता है। जामुन के सिरके के सेवन से भूख बढ़ती है, पेट की वायु निकलती है और कब्ज की समस्या दूर होती है
जामुन की तासीर ठंडी होती है और इसकी कई देसी विदेशी किस्मे होती हैं | लेकिन सबके धर्म, गुण समान हैं। जामुन का अंग्रेजी नाम – Java Plum और Blackberry है | जामुन से भूख बढती है और भोजन पचाती है, शरीर से गंदगी बाहर निकलती है। जामुन नहीं होने पर इसका सिरका काम में ले सकते हैं। यह मोटी और पकी हुई अच्छी होती है। इसका खट्टापन और अम्लीय गुण रक्त-दोषों को दूर करते है।




जामुन का सिरका रेसपी 

काले जामुन – 1/2 किलो
सूखी मिर्च – 3
नमक – आवश्यकतानुसार
पानी – आवश्यकतानुसार
सहायक सामग्री
सूती कपड़ा – जामुन बांधने के लिए
मिट्टी का बर्तन – जामुन रखने के लिए
कांच की बोतल – सिरका रखने के लिए
जामुन का सिरका बनाने का तरीका
– काले जामुन को साफ पानी से धो कर पोछ लें।
– फिर इसे मिट्टी के बर्तन में डालकर नमक मिलाकर साफ कपड़े से बांध कर धूप में रख दें।
– लगभग एक महीनों तक धूप में रखने के बाद इसके रस को किसी साफ सूती कपड़े से छानकर कांच के बोतल में भर कर रख लें।
– अब इसमें 3 सूखी लाल मिर्च डाल दें और कांच की बोतल का मुंह बंद कर दें।
उपयोग
– जामुन के सिरके में कटी हुई मूली, प्याज, गाजर, हरी मिर्च और सिंघाड़े आदि के टुकड़े इन्हें डालकर चावल के साथ चख सकते है।
– जामुन का सिरका सलाद में डालकर भी भोजन के साथ खाया जा सकता है।



22/1/18

रतनजोत के फायदे// Benefits of Ratanjot Plant

    

      रतनजोत का उपयोग बालों को काला करने के लिए किया जाता है | परन्तु इसका उपयोग मसाले के रूप में भी किया जाता है | रतनजोत को और भी कई नामों से जाना जाता है | जैसे :- लालजड़ी और दामिनी बालछड | अंगेजी भाषा में इस पौधे को onosma भी कहा जाता है | रतनजोत अधिकतर हिमालय के भागों में पाया जाता है | इसका उपयोग आँखों की रौशनी और बालो को काला करने के लिए किया जाता है | तो आइए जानते है कि रतनजोत को कैसे बालों के लिए प्रयोग करें |
*सबसे पहले महंदी का पेस्ट बना लें | इसके बाद इस पेस्ट में रतनजोत मिला लें और गर्म कर लें | जब यह गर्म हो जाये तो ठंडा होने के लिए रख दें | जब यह ठंडा हो जाये तो इसे बालों में लगा लें और कम से कम 15 से 20 मिनट के लिए छोड़ दें | इसके बाद पानी से सिर धो लें |

जिस तेल का आप प्रयोग करते है | उस तेल में रतनजोत के थोड़े से टुकड़े डालकर अच्छी तरह से मिलाएं | इसके मिलाने से तेल का रंग सुंदर तो होता है | इस तेल को बालों में लगाने से बाल स्वस्थ और काले हो जाते है | इसके साथ ही साथ इस तेल का प्रयोग करने से मष्तिष्क की ताकत भी बढती है |
*रतनजोत को थोडा सा घिस लें | इस घिसे हुए रतनजोत को अपने माथे पे लगायें | इस उपचार को करने से डिप्रेशन नही होता और मानसिक क्षमता बढती है |
*रतनजोत को बारीक़ पीस लें | इसे तेल में डाल दें | इस तैयार तेल से अपने शरीर की मालिश करें | ऐसा करने से स्किन का रुखापन दूर हो जाता है |

   रतनजोत के और भी अन्य उपाय निम्नलिखित है :-
 रतनजोत के पौधे की जड़ को पीसकर बारीक कर लें | जिन लोगों को मिर्गी या दौरे पड़ते हों ,उन्हें इस बारीक़ चूर्ण की एक ग्राम की मात्रा को सुबह के समय और शाम के समय खिलाएं | इस उपचार को लगातार करने से मिर्गी और दौरे की समस्या दूर हो जाती है |
यदि आपको स्किन की बीमारी है तो रतनजोत के पौधे की जड़ को पीसकर पावडर बना लें | इस पावडर को रोजाना सुबह और शाम लगभग आधे ग्राम की मात्रा में सेवन करें | इस उपचार को करने से स्किन की प्रोब्लम दूर हो जाती है |




· रतनजोत के पौधे की पत्तियों की चाय बनाकर पीने से दिल से जुडी हुई बीमारी नही होती |
· रतनजोत की ताज़ी पत्तियों का सेवन करने से खून का शुद्धिकरण होता है | इसके आलावा रतनजोत का उपयोग से स्किन पर होने वाले दाद , खुजली से छुटकारा मिल जाता है | जिसे पथरी की समस्या है , उसे नियमित रूप से रतनजोत के पत्तों का काढ़ा बनाकर पीना चाहिए | इस उपचार को करने से गुर्दे की पथरी ठीक हो जाती है |
     रतनजोत , एक किलोग्राम सरसों का तेल , मेंहदी के पत्ते , जलभांगर के पत्ते , और आम की गुठलियों को आपस में मिलाकर सरसों के तेल को छोडकर कूट लें | (लेकिन ध्यान रहे कि इन सभी पदार्थों की लगभग 100 – 100 ग्राम की मात्रा ही लेनी है | ) जब यह कूट जाये तो इसे निचोड़ लें | निचोड़ने के बाद इसे सरसों के तेल में इतना उबाल ले कि इसका पानी खत्म हो जाये और केवल तेल बचे | अब इस तेल को छानकर अलग कर लें | इस तरह से यह एक औषधि तैयार है | इस तेल को रोजाना सिर पर लगाने से बाल काले हो जाते है | इस तेल को लगाने के साथ ही साथ कम से कम 250 ग्राम दूध का सेवन करना चाहिए |यह उपचार बेहद कारगर है |
· आंवले को पीसकर बारीक़ चूर्ण बना लें | इस चूर्ण में निम्बू का रस और रतनजोत मिलाकर के मिश्रण बनाएं | इस तैयार मिश्रण को बालों में लेप की तरह लगा लें | इस लेप को लगभग १५ से 20 मिनट तक रखें और सिर धो लें | ऐसा करने से बाल काले हो जाते है | आंवला और लौह चूर्ण को आपस में मिलाकर पानी के साथ पीस लें | इसे अपने बालो में लगा लें और कुछ समय बाद सिर धो लें | ऐसा करने से सफेद बाल काले हो जाते है |
     100 ग्राम दही ,100 ग्राम हल्दी , पीसी हुई एक ग्राम काली मिर्च और रतनजोत लें | अब इन सभी को आपस में मिलाकर एक मिश्रण बनाएं | इस मिश्रण को सिर में कुछ देर तक लगाकर छोड़ दें और हल्के गर्म पानी से सिर धो लें | इस तरह के उपचार को एक सप्ताह में कम से कम एक बार करें | इससे आपके बालों का झड़ना बंद हो जायेगा और बाल स्वस्थ और काले हो जायेंगे |




18/1/18

मानसिक रोगों के लक्षण और चिकित्सा //Signs of Mental Illness and treatment



    आधुनिक दवाएं किस तरह से मानसिक रोगों का उपचार करती हैं इस बारे में लोगों में बहुत ज़्यादा जानकारी नहीं है। और इस बारे में भी कि मानसिक रोगों में दी जाने वाली दवाएं कितनी असरकारी हैं। ज़्यादातर लोग मानते हैं कि इस क्षेत्र में डॉक्टर कुछ नहीं कर सकते और मानसिक बीमारियों के लिए वे केवल ओझाओं साधुओं आदि पर ही विश्वास करते हैं।
    ज़्यादातर लोगों को मानसिक रोगों के इलाज के लिए बिजली के झटकों और बंद करके रखे जाने के बारे में ही पता है। इस भाग में मानसिक रोगों के उपचार के बारे में बताया जा रहा है। निरोगण के मुख्य अवयव हैं दवाएं, बातचीत, आपातकालीन स्थिति में बिजली के झटके देना, अस्पताल में रखना और पुनर्वास। हर मामले में इनमें से सब की ज़रूरत नहीं होती। साधारण बीमारी दवाइयों और सुझावों से ही ठीक हो सकती है। गंभीर बीमारियॉं जैसे विखन्डित मनस्कता तक भी केवल दवाओं से दूर हो जाती हैं।
     अस्पताल में रखे जाने और बिजली के झटकों की ज़रूरत कभी कभी ही होती है। विखन्डित मनस्कता और उन्माद अवसादी विक्षिप्ति में लंबे समय तक मानसिक रोगों के इलाज की ज़रूरत होती है।इन बीमारियों में हालांकि पूरी तरह से ठीक होना मुश्किल है परन्तु इलाज से स्थिति को बिगड़ने से रोका जा सकता है। मानसिक रोगों में इलाज लगातार चलने की ज़रूरत होती है।
इस रोग के होने का सबसे प्रमुख कारण गलत तरीके का खान-पान है। शरीर में दूषित द्रव्य जमा हो जाने के कारण मस्तिष्क के स्नायु में विकृति उत्पन्न हो जाती है जिसके कारण मस्तिष्क के स्नायु अपना कार्य करना बंद कर देते हैं और मानसिक रोग हो जाता है।
• शरीर के खून में अधिक अम्लता हो जाने के कारण भी यह रोग हो सकता हैं क्योंकि अम्लता के कारण मस्तिष्क (नाड़ियों में सूजन) में सूजन आ जाती है जिसके कारण मस्तिष्क शरीर के किसी भाग पर नियंत्रण नहीं रख पाता है और उसे मानसिक रोग हो जाता है।
• अधिक चिंता, सोच-विचार करने, मानसिक कारण, गृह कलेश, लड़ाई-झगड़े तथा तनाव के कारण भी मस्तिष्क की नाड़ियों में रोग उत्पन्न हो जाता है और व्यक्ति को पागलपन का रोग हो जाता है।
• अधिक मेहनत का कार्य करने, आराम न करने, थकावट, नींद पूरी न लेने, जननेन्द्रियों की थकावट, अनुचित ढ़ग से यौनक्रिया करना, आंखों पर अधिक जोर देना, शल्यक्रिया के द्वारा शरीर के किसी अंग को निकाल देने के कारण भी मानसिक रोग हो सकता है।
• यह रोग पेट में अधिक कब्ज बनने के कारण भी हो सकता है क्योंकि कब्ज के कारण आंतों में मल सड़ने लगता है जिसके कारण दिमाग में गर्मी चढ़ जाती है और मानसिक रोग हो जाता है।होम्योपैथी-
     होम्योपैथी मानसिक बीमारियों के इलाज के लिए काफी उपयोगी होती है। इसलिए आपको जहॉं भी ज़रूरी हो होम्योपैथी का इस्तेमाल करना चाहिए। मानसिक रोगों के लिए होम्योपैथिक दवाओं के बारे ध्यान से पढें।
इन्हें शायद सहायता की ज़रूरत है
जिन लोगों को मनोचिकित्सा की ज़रूरत होती है, उनकी सूची नीचे दी गई है।
जो कि बेसिरपैर की बातें करता हो और अजीबोगरीब और असामान्य व्यवहार करता हो।
जो बहुत चुप हो गया हो और औरों से मिलना जुलना और बात करना छोड़ दे।
अगर कोई ऐसी बातें सुनने या ऐसी चीज़ें देखने का दावा करे जो औरों को न सुनाई / दिखाई दे रही हों।
अगर कोई बहुत ही शक्की हो और वह हमेशा यह शिकायत करता रहे कि दूसरे लोग उसे नुकसान पहुँचाने की कोशिश कर रहे हैं।
     अगर कोई ज़रूरत से ज़्यादा खुश रहने लगे, हमेशा चुटकुले सुनाता रहे या कहे कि वह बहुत अमीर है या औरों से बहुत बेहतर है जबकि वास्तव में ऐसा नहीं हो।
अगर कोई बहुत दु:खी रहने लगे और बिना मतलब रोता रहे।
अगर कोई आत्महत्या की बातें करता रहे या उसने आत्महत्या की कोशिश की हो।
अगर कोई कहे कि उसमें भगवान या कोई आत्मा समा गई है। या अगर कोई कहता रहे कि उसके ऊपर जादू टोना किया जा रहा है या कोई बुरी छाया है।
अगर किसी को दौरे पड़ते हों और उसे बेहोशी आ जाती हो और वो बेहोशी में गिर जाता हो।
अगर कोई बहुत ही निष्क्रिय रहता हो, बचपन से ही धीमा हो और अपनी उम्र के हिसाब से विकसित न हुआ हो।
उचित मानसिक स्वास्थ्य-
अभी तक हमने मानसिक रोगों और समस्याओं के बारे में बात की है। परन्तु उचित मानसिक स्वास्थ्य भी कोई चीज़ है और हम सबको अपना मानसिक स्वास्थ्य वैसा बनाना चाहिए। साथ ही मानसिक स्वास्थ्य ठीक रख पाने में दूसरों की मदद करनी चाहिए।
 यह ज़्यादातर लोगों के लिए बचपन से ही शुरू हो जाता है, परन्तु कभी भी बहुत देर नहीं हुई होती।
रोज़ कसरत करना, सैर करना और खेलना अच्छे मानसिक स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण हैं।
टीम वाले खेल सबसे ज़्यादा अच्छे होते हैं क्योंकि इनसे दिमाग में गलत विचार नहीं आते।
योगा से मदद मिलती है। और योगा ज़रूर करना चाहिए 
सार्थक काम करने और काम में संतुष्टी होने से भी मानसिक स्वास्थ्य अच्छा रहता है।
हमें अपने बारे में ध्यान से सोच कर अपनी स्वाभाव को समझना चाहिए और अपनी गलतियों को सुधारना चाहिए। किताबों और दोस्तों से सबसे ज़्यादा मदद मिलती है।
धर्म – 
सहानुभूति, वैराग्य, आदर और अच्छा इन्सान बनने के धर्म के बुनियादी सिद्धांत से मानसिक स्वास्थ्य बेहतर होता है। इससे जीवन के दु:खों और मुश्किलों से निपटने में मदद मिलती है। परन्तु उन लोगों से सावधान रहें जो कि धर्म के नाम पर लोगों के बीच फूट डालने की कोशिश करते हैं।
नाच गाने, होली, डांडिया आदि जैसी सामाजिक घटनाएं लोगों के दिमाग से गलत विचार निकलाने में मदद करती हैं। जब भी ऐसे मौके आएं तो लोगों के साथ मिलने जुलने की कोशिश करें।
देसी घरेलु उपचार व आयुर्वेदिक नुस्खे-
• अखरोट की बनावट मानव-मस्तिष्क से होती है । अतः प्रातःकाल एक अखरोट व मिश्री दूध में मिलाकर ‘ ॐ ऐं नमः’ या ‘ ॐ श्री सरस्वत्ये नमः ‘ जपते हुए पीने से मानसिक रोगों में लाभ होता है व यादशक्ति पुष्ट होती है ।
• मालकाँगनी का 2-2 बूँद तेल एक बताशे में डालकर सुबह-शाम खाने से मस्तिष्क के एवं मानसिक रोगों में लाभ होता है।
• स्वस्थ अवस्था में भी तुलसी के आठ-दस पत्ते, एक काली मिर्च तथा गुलाब की कुछ पंखुड़ियों को बारीक पीसकर पानी में मिलाकर प्रतिदिन सुबह पीने से मस्तिष्क की शक्ति बढ़ती है। इसमें एक से तीन बादाम मिलाकर ठंडाई की तरह बना सकते हैं। इसके लिए पहले रात को बादाम भिगोकर सुबह छिलका उतारकर पीस लें। यह ठंडाई दिमाग को तरावट व स्फूर्ति प्रदान करती है।
• रोज सुबह आँवले का मुरब्बा खाने से भी स्मरण शक्ति में वृद्धि होती है। अथवा च्यवनप्राश खाने से इसके साथ कई अन्य लाभ भी होते हैं।
• गर्म दूध में एक से तीन पिसी हुई बादाम की गिरी और दो तीन केसर के रेशे डालकर पीने से मानसिक रोगों में लाभ होता है साथ ही स्मरणशक्ति तीव्र होती है।
• सिर पर देसी गाय के घी की मालिश करने से भी मानसिक रोगों में लाभ होता है।
• मूलबन्ध, उड्डीयान बंध, जालंधर बंध (कंठकूप पर दबाव डालकर ठोडी को छाती की तरफ करके बैठना) से भी बुद्धि विकसित होती है, मन स्थिर होता है।




किडनी विकृति के कारण और उपचार //kidney failure and ayurvedic treatment


    गुर्दे शरीर को स्वच्छ रखते हैं। रक्त में से मूत्र बनाने का महत्त्वपूर्ण कार्य गुर्दे करते हैं। शरीर में रक्त में उपस्थित विजातीय व अनावश्यक कचरे को मूत्रमार्ग द्वारा शरीर से बाहर निकालने का कार्य गुर्दों का ही है।
गुर्दा वास्तव में रक्त का शुद्धिकरण करने वाली एक प्रकार की 11 सैं.मी. लम्बी काजू के आकार की छननी है जो पेट के पृष्ठभाग में मेरुदण्ड के दोनों ओर स्थित होती हैं। प्राकृतिक रूप से स्वस्थ गुर्दे में रोज 60 लीटर जितना पानी छानने की क्षमता होती है। सामान्य रूप से वह 24 घंटे में से 1 से 2 लीटर जितना मूत्र बनाकर शरीर को निरोग रखती है। किसी कारणवशात् यदि एक गुर्दा कार्य करना बंद कर दे अथवा दुर्घटना में खो देना पड़े तो उस व्यक्ति का दूसरा गुर्दा पूरा कार्य सँभालता है एवं शरीर को विषाक्त होने से बचाकर स्वस्थ रखता है। 
     अपने शरीर में गुर्दे   होशियार  टेक्नीशियन की भाँति कार्य करते हैं। गुर्दा शरीर का अनिवार्य एवं क्रियाशील भाग है, जो अपने तन एवं मन के स्वास्थ्य पर नियंत्रण रखता है। उसके बिगड़ने का असर रक्त, हृदय, त्वचा एवं यकृत पर पड़ता है। वह रक्त में स्थित शर्करा (Sugar), रक्तकण एवं उपयोगी आहार-द्रव्यों को छोड़कर केवल अनावश्यक पानी एवं द्रव्यों को मूत्र के रूप में बाहर फेंकता है। यदि रक्त में शर्करा का प्रमाण बढ़ गया हो तो गुर्दा मात्र बढ़ी हुई शर्करा के तत्त्व को छानकर मूत्र में भेज देता है।
     गुर्दों का विशेष सम्बन्ध हृदय, फेफड़ों, यकृत एवं प्लीहा (तिल्ली) के साथ होता है। ज्यादातर हृदय एवं गुर्दे परस्पर सहयोग के साथ कार्य करते हैं। इसलिए जब किसी को हृदयरोग होता है तो उसके गुर्दे भी बिगड़ते हैं और जब गुर्दे बिगड़ते हैं तब उस व्यक्ति का रक्तचाप उच्च हो जाता है और धीरे-धीरे दुर्बल भी हो जाता है।
आयुर्वेद के निष्णात वैद्य कहते हैं कि गुर्दे के रोगियों की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही है। इसका मुख्य कारण आजकल के समाज में हृदयरोग, दमा, श्वास, क्षयरोग, मधुमेह, उच्च रक्तचाप जैसे रोगों में किया जा रहा अंग्रेजी दवाओं का दीर्घकाल तक अथवा आजीवन सेवन है।
    इन अंग्रेजी दवाओं के जहरीले असर  के कारण ही गुर्दे एवं मूत्र सम्बन्धी रोग उत्पन्न होते हैं। कभी-कभी किसी आधुनिक दवा के अल्पकालीन सेवन की विनाशकारी प्रतिक्रिया (Reaction) के रूप में भी किडनी फेल्युअर (Kidney Failure) जैसे गम्भीर रोग होते हुए दिखाई देते हैं। अतः मरीजों को हमारी सलाह है कि उनकी किसी भी बीमारी में, जहाँ तक हो सके, वे निर्दोष वनस्पतियों से निर्मित एवं विपरीत तथा परवर्ती असर (Side Effect and After Effect) से रहित आयुर्वेदिक दवाओं के सेवन का ही आग्रह रखें। एलोपैथी के डॉक्टर स्वयं भी अपने अथवा अपने सम्बन्धियों के इलाज के लिए आयुर्वेदिक दवाओं का ही आग्रह रखते हैं।
   

आधुनिक विज्ञान कहता है कि गुर्दे अस्थि मज्जा  बनाने का कार्य भी करते हैं। इससे भी यह सिद्ध होता है कि आज रक्त कैंसर की व्यापकता का कारण भी आधुनिक दवाओं का विपरीत एवं परवर्ती प्रभाव ही हैं।

किडनी विकृति के कारणः 
    आधुनिक समय में मटर, सेम आदि द्विदलो जैसे प्रोटीनयुक्त आहार का अधिक सेवन, मैदा, शक्कर एवं बेकरी की चीजों का अधिक प्रयोग चाय कॉफी जैसे उत्तेजक पेय, शराब एवं ठंडे पेय, जहरीली आधुनिक दवाइयाँ जैसे – ब्रुफेन, मेगाडाल, आइबुजेसीक, वोवीरॉन जैसी एनालजेसिक दवाएँ, एन्टीबायोटिक्स, सल्फा ड्रग्स, एस्प्रीन, फेनासेटीन, केफीन, ए.पी.सी., एनासीन आदि का ज्यादा उपयोग, अशुद्ध आहार अथवा मादक पदार्थों का ज्यादा सेवन, सूजाक (गोनोरिया), उपदंश (सिफलिस) जैसे लैंगिक रोग, त्वचा की अस्वच्छता या उसके रोग, जीवनशक्ति एवं रोगप्रतिकारक शक्ति का अभाव, आँतों में संचित मल, शारीरिक परिश्रम को अभाव, अत्यधिक शारीरिक या मानसिक श्रम, अशुद्ध दवा एवं अयोग्य जीवन, उच्च रक्तचाप तथा हृदयरोगों में लम्बे समय तक किया जाने वाला दवाओँ का सेवन, आयुर्वेदिक परंतु अशुद्ध पारे से बनी दवाओं का सेवन, आधुनिक मूत्रल (Diuretic) औषधियों का सेवन, तम्बाकू या ड्रग्स के सेवन की आदत, दही, तिल, नया गुड़, मिठाई, वनस्पति घी, श्रीखंड, मांसाहार, फ्रूट जूस, इमली, टोमेटो केचअप, अचार, केरी, खटाई आदि सब गुर्दा-विकृति के कारण है।
सामान्य लक्षणः

गुर्दे खराब होने पर निम्नांकित लक्षण दिखाई देते हैं-
आधुनिक विज्ञान के अनुसारः 
   आँख के नीचे की पलकें फूली हुई, पानी से भरी एवं भारी दिखती हैं। जीवन में चेतनता, स्फूर्ति तथा उत्साह कम हो जाता है। सुबह बिस्तर से उठते वक्त स्फूर्ति के बदले आलस्य एवं बेचैनी रहती है। थोड़े श्रम से ही थकान लगने लगती है। श्वास लेने में कभी-कभी तकलीफ होने लगती है। कमजोरी महसूस होती है। भूख कम होती जाती है। सिर दुखने लगता है अथवा चक्कर आने लगते हैं। कइयों का वजन घट जाता है। कइयों को पैरों अथवा शरीर के दूसरे भागों पर सूजन आ जाती है, कभी जलोदर हो जाता है तो कभी उलटी-उबकाई जैसा लगता है। रक्तचाप उच्च हो जाता है। पेशाब में एल्ब्यमिन पाया जाता है।
आयुर्वेद के अनुसारः

    सामान्य रूप से शरीर के किसी अंग में अचानक सूजन होना, सर्वांग वेदना, बुखार, सिरदर्द, वमन, रक्ताल्पता, पाण्डुता, मंदाग्नि, पसीने का अभाव, त्वचा का रूखापन, नाड़ी का तीव्र गति से चलना, रक्त का उच्च दबाव, पेट में किडनी के स्थान का दबाने पर पीड़ा होना, प्रायः बूँद-बूँद करके अल्प मात्रा में जलन व पीड़ा के साथ गर्म पेशाब आना, हाथ पैर ठंडे रहना, अनिद्रा, यकृत-प्लीहा के दर्द, कर्णनाद, आँखों में विकृति आना, कभी मूर्च्छा और कभी उलटी होना, अम्लपित्त, ध्वजभंग (नपुंसकता), सिर तथा गर्दन में पीड़ा, भूख नष्ट होना, खूब प्यास लगना, कब्जियत होना – जैसे लक्षण होते हैं। ये सभी लक्षण सभी मरीजों में विद्यमान हों यह जरूरी नहीं।


गुर्दा रोग से होने वाले अन्य उपद्रवः 


      गुर्दे की विकृति का दर्द ज्यादा समय तक रहे तो उसके कारण मरीज को श्वास (दमा), हृदयकंप, न्यूमोनिया, प्लुरसी, जलोदर, खाँसी, हृदयरोग, यकृत एवं प्लीहा के रोग, मूर्च्छा एवं अंत में मृत्यु तक हो सकती है। ऐसे मरीजों में ये उपद्रव विशेषकर रात्रि के समय बढ़ जाते हैं।
आज की एलोपैथी में गुर्दो रोग का सरल व सुलभ उपचार उपलब्ध नहीं है, जबकि आयुर्वेद के पास इसका  प्रभावी सरल व सुलभ इलाज है।
आहारः
     प्रारंभ में रोगी को 3-4 दिन का उपवास करायें अथवा मूँग या जौ के पानी पर रखकर लघु आहार करायें। आहार में नमक बिल्कुल न दें या कम दें। नींबू के शर्बत में शहद या ग्लूकोज डालकर 15 दिन तक दिया जा सकता है। चावल की पतली घेंस या राब दी जा सकती है। लौकी का जूस आधा गिलास देना शुरू करे। फिर जैसे-जैसे यूरिया की मात्रा क्रमशः घटती जाय वैसे-वैसे, रोटी, सब्जी, दलिया आदि दिया जा सकता है। मरीज को मूँग का पानी, सहजने का सूप, धमासा या गोक्षुर का पानी चाहे जितना दे सकते हैं। किंतु जब फेफड़ों में पानी का संचय होने लगे तो उसे ज्यादा पानी न दें, पानी की मात्रा घटा दें।
विहारः 
    गुर्दे के मरीज को आराम जरूर करायें। सूजन ज्यादा हो अथवा यूरेमिया या मूत्रविष के लक्षण दिखें तो मरीज को पूर्ण शय्या आराम  करायें। मरीज को थोड़े गरम एवं सूखे वातावरण में रखें। हो सके तो पंखे की हवा न खिलायें। तीव्र दर्द में गरम कपड़े पहनायें। गर्म पानी से ही स्नान करायें। थोड़ा गुनगुना पानी पिलायें।
औषध-उपचारः
     गुर्दे के रोगी के लिए कफ एवं वायु का नाश करने वाली चिकित्सा लाभप्रद है। जैसे कि स्वेदन, वाष्पस्नान , गर्म पानी से कटिस्नान |
     रोगी को आधुनिक तीव्र मूत्रल औषधि न दें क्योंकि लम्बे समय के बाद उससे गुर्दे खराब होते हैं। उसकी अपेक्षा यदि पेशाब में शक्कर हो या पेशाब कम होता हो तो नींबू का रस, सोडा बायकार्ब, श्वेत पर्पटी, चन्द्रप्रभा, शिलाजीत आदि निर्दोष औषधियों या उपयोग करना चाहिए। गंभीर स्थिति में रक्त मोक्षण (शिरा मोक्षण) खूब लाभदायी है किंतु यह चिकित्सा मरीज को अस्पताल में रखकर ही दी जानी चाहिए।
    सरलता से सर्वत्र उपलब्ध पुनर्नवा नामक वनस्पति का रस, काली मिर्च अथवा त्रिकटु चूर्ण डालकर पीना चाहिए। कुलथी का काढ़ा या सूप पियें। रोज 100 से 200 ग्राम की मात्रा में गोमूत्र पियें। पुनर्नवादि मंडूर, दशमूल, क्वाथ, पुनर्नवारिष्ट, दशमूलारिष्ट, गोक्षुरादि क्वाथ, गोक्षुरादि गूगल, जीवित प्रदावटी आदि का उपयोग दोषों एवं मरीज की स्थिति को देखकर बनना चाहिए।
रोज 1-2 गिलास जितना लौहचुंबकीय जल (Magnetic Water) पीने से भी गुर्दे के रोग में लाभ होता है।


विशिष्ट परामर्श-

किडनी फेल रोगी के बढे हुए क्रिएटनिन के लेविल को नीचे लाने और गुर्दे की क्षमता  बढ़ाने  में हर्बल औषधि सर्वाधिक सफल होती हैं| इस हेतु वैध्य श्री दामोदर से 98267-95656 पर संपर्क किया जा सकता है| दुर्लभ जड़ी-बूटियों से निर्मित यह औषधि कितनी आश्चर्यजनक रूप से फलदायी है ,इसकी कुछ केस रिपोर्ट पाठकों की सेवा मे प्रस्तुत कर रहा हूँ -







इस औषधि के चमत्कारिक प्रभाव की एक लेटेस्ट  केस रिपोर्ट प्रस्तुत है-

रोगी का नाम -     राजेन्द्र द्विवेदी  
पता-मुन्नालाल मिल्स स्टोर ,नगर निगम के सामने वेंकेट रोड रीवा मध्यप्रदेश 
इलाज से पूर्व की जांच रिपोर्ट -
जांच रिपोर्ट  दिनांक- 2/9/2017 
ब्लड यूरिया-   181.9/ mg/dl
S.Creatinine -  10.9mg/dl






हर्बल औषधि प्रारंभ करने के 12 दिन बाद 
जांच रिपोर्ट  दिनांक - 14/9/2017 
ब्लड यूरिया -     31mg/dl
S.Creatinine  1.6mg/dl








जांच रिपोर्ट -
 दिनांक -22/9/2017
 हेमोग्लोबिन-  12.4 ग्राम 
blood urea - 30 mg/dl 

सीरम क्रिएटिनिन- 1.0 mg/dl
Conclusion- All  investigations normal 








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