शुक्रवार, 15 सितंबर 2017

आँखों का चश्मा हटाने का लाजवाब घरेलू उपाय //Do not buy glasses by precise household remedies!


आँखों पर नजर का चश्मा लगाना एक अवस्था में मजबूरी भरी जरूरत बन जाता है जिसका समाधान सिर्फ आँखों के ऑप्रेशन द्वारा ही हो पाता है । किंतु अब यही एकमात्र सत्य नही है चश्में से छुटकारा एक स्पेशल उपाय द्वारा भी पाया जा सकता है । इस उपाय के बारे में हम आपको इस पोस्ट के माध्यम से बता रहे हैं, जरूर पढ़िये और लाभ उठाइये ।

जरूरी सामग्री -

देशी गाय के दूध से बना देशी घी आधा किलो
असली शुद्ध शहद 250 ग्राम
काली मिर्च 100 ग्राम
असली केसर 2 ग्राम
बादाम की गिरी 100 ग्राम
पिस्ते की गिरी 100 ग्राम
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बनाने की विधि -

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सबसे पहले काली मिर्च को सुखाकर और मिक्सी में पीसकर बारीक चूर्ण तैयार कर लें और बादाम एवं पिस्ते को बारीक बारीक कतर लें । इसके बाद देशी घी को सिर्फ इतना गर्म करें कि वो पिघल जाये । घी के पिघल जाने पर उसमें सभी चीजे अर्थात शहद, काली मिर्च का चूर्ण, केसर, पिस्ता और बादाम को मिलाकर खूब अच्छी तरह से मिक्स करदें । बस आपका नुस्खा तैयार है । इसको साफ काँच की शीशी अथवा मर्तबान में भरकर रख दीजिये । रोज सुबह और शाम एक-एक चम्मच सेवन करना है । 12 साल से छोटे बच्चों को आधा आधा चम्मच ही देना उचित है ।





सोमवार, 11 सितंबर 2017

सिर्फ एक सप्ताह मे बढ़ाएँ अपनी यौन शक्ति

   

यौन शक्ति बढ़ाने के लिये कौंच के बीजों के विशेष नुस्खे, जिनको आप घर पर ही तैयार कर सकते हैं
आयुर्वेद की लगभग सभी यौन शक्ति वर्धक दवाओं में कौंच के बीजों का प्रयोग प्राचीन काल से ही होता आया है । वैसे तो कौंच के बीज देखने में बहुत साधारण से लगते हैं किंतु गुणों के मामले में ये बीज बहुत आगे रहते हैं । साधारण जनमानस कौंच के बीजों के बारे में सुनता तो रहता है किंतु इसको सही तरह से प्रयोग करने का तरीका बहुत कम लोग जानते हैं । वैसे तो जो भी जानते हैं वो कौंच के बीजों की जानकारी सिर्फ यौन शक्ति वर्धन तक ही सीमित रखते हैं किंतु यह सही नही है । कौंच के बीज और भी बहुत से रोगों में प्रयोग किये जा सकते हैं जैसे कि कफ और वायु के विकार, हड्डियों की कमजोरी, रक्त विकार आदि किंतु इस पोस्ट के माध्यम से हम आपको कौंच के बीजों के यौन शक्ति गुणों से सम्बंधित प्रयोग ही बतायेंगे । उम्मीद है ये प्रयोग आपको लाभ जरूर देंगे । इतना ध्यान रखियेगा कि कौंच के बीजों को छिलका उतारकर ही प्रयोग करना उचित होता है । अतः इस लेख में जहॉ पर भी कौंच के बीज का उल्लेख हो वहॉ पर छिलका उतारे हुये कौंच के बीजों का ही ग्रहण करें ।

प्रयोग 1 :-

कौंच के बीज, सफेद मूसली, काली मूसली और शतावरी इन सभी चीजों को बराबर मात्रा में लेकर, धूप में सुखाकर बारीक चूर्ण तैयार कर लें । इस चूर्ण की मात्रा 5-5 ग्राम दिन में दो बार लेनी है । यदि इसको मिश्री डालकर मीठे किये गये गाय के दूध के साथ लिया जाये तो यह और भी लाभकारी हो जाता है । इस चूर्ण के लाभ शरीर के दुबलेपन, नसों की कमजोरी और सम्बंध बनाने से विरक्ति आदि दशाओं में विशेष दिखाई देते हैं ।

प्रयोग 2 :- 




कौंच के बीज 100 ग्राम, अश्वगंधा 200 ग्राम, विदारी कंद 100 ग्राम और मिश्री 100 ग्राम लेकर इन सबका एक साथ बारीक पीसकर कपड़े में छाना हुआ चूर्ण तैयार कर लें । इस चूर्ण की मात्रा 6-6 ग्राम दिन में दो बार गुनगुने पानी के साथ लेनी चाहिये । जिन लोगों को शुगर की समस्या हो वो मिश्री के बिना ही इस चूर्ण को तैयार करें । यह चूर्ण शारीरिक बल में कमी, जल्दी थकान होना और मानसिक तनाव जैसी समस्याओं में लाभ देता है ।
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प्रयोग 3 :‌-


कौंच के बीज 200 ग्राम, उड़द की साबुत दाल 200 ग्राम शतावरी 100 ग्राम और तालमखाना 100 ग्राम लेकर सभी को धूप में सुखाकर बारीक चूर्ण बना लें । इस चूर्ण को 5-5 ग्राम की मात्रा में दिन में दो बार शहद के साथ लिया जाना उचित होता है । यह चूर्ण यौन शक्ति को विशेष रूप से बढ़ाता है । जिन लोगों को समय कम हो गया है उनके लिये यह बहुत लाभकारी सिद्ध होता है । यह चूर्ण पेट को थोड़ा भारी पड़ता है अतः जिन लोगों की पाचन शक्ति कमजोर हो उनको यह चूर्ण सेवन करने की सलाह नही दी जाती है । फिर भी अगर कमजोर पाचन शक्ति वाले इस चूर्ण का प्रयोग करना चाहते हैं तो इसके सेवन काल में आयुर्वेदिक औषधि "अश्वगंधा-रिष्ट" का सेवन 10-10 मिलीलीटर का सेवन बराबर मात्रा में पानी मिलाकर दिन में दो बार भोजन के बाद अवश्य करें ।

गुरुवार, 7 सितंबर 2017

शरीर की बंद नसें खोलने का जादुई नुस्खा //A magical recipe for opening the closed veins of the body


आवश्यक सामग्री
10 gm काली मिर्च साबुत
10gm तेज पत्ता
1gm दाल चीनी
10 gm अखरोट गिरी
10gm अलसी
10gm मगज
10 gm मिश्री डला
सभी सामाग्री का वजन 61 ग्राम


बनाने का तरीका :
    सभी को मिक्सी में पीस कर पाउडर बना ले और ६ ग्राम की 10 पुड़िया बना लीजिये |
एक पुड़िया हर रोज सुबह खाली पेट मामूली गरम पानी से लेनी है और एक घंटे तक कुछ भी नही खाना है ,हाँ चाय पी सकते हैं| ऐड़ी से ले कर चोटी तक की कोई भी नस बन्द हो खुल जाएगी |
    हृदय रोगियों के लिए बेहद फायदेमंद है|गारंटीड।लंबे समय तक लेते रहने से हार्ट पेशेंट को लकवा या हार्ट अटेक नही आयेगा|





सोमवार, 4 सितंबर 2017

नमक से करें गठिया ,सिरदर्द का ईलाज





शुद्ध नमक सोडियम और क्लोराइड से बनता है. इन तत्वों को शरीर नहीं बना पाता है इसलिए भोजन से इन्हें ग्रहण किया जाता है. यह शरीर में तमाम मिनिरल्स के बीच संतुलन बनाने और कोशिकाओं को सक्रिय रखने के लिए जरूरी है.
नमक के बिना सभी प्रकार के मसालों का स्वाद निरर्थक है अत: मसालों के स्वाद को बढ़ाने के लिए नमक का उपयोग किया जाता है।
यह सभी प्रकार के रसों का केन्द्र माना जाता हैं क्योंकि इसके बिना सभी व्यंजन बेस्वाद पड़ जाते हैं। नमक को सब्जी में डाला जाता है, यदि नमक सब्जी में न डाला जायें तो सब्जी में स्वाद नहीं आता है, नमक की अनेक किस्मे होती हैं लेकिन मुख्य रूप से पांच प्रकार के नमक का उपयोग अधिक होता है।सामग्री: नमक: 250 ग्राम
कैसे करे प्रयोग:
1) गठिया (जोड़ों का दर्द) :
1 किलो गर्म पानी में 4 चम्मच नमक डालकर इस पानी से गठिया को धोएं इससे लाभ मिलेगा।
गठिया के रोग में कमजोरी के कारण होने वाले दर्द में सैंधानमक, सोया, देवदारू, पीपल, कालीमिर्च, चीता, बायबिडंग, अजमोद, पीपरामूल को 20-20 ग्राम लें और विधारा तथा सोंठ 200-200 ग्राम लें व 100 ग्राम हरड़ लेकर इन सबको कूट-पीस लें। फिर इस चूर्ण को छानकर अच्छी तरह मिला लें। इसके बाद 680 ग्राम गुड़ को पानी में मिलाकर आग पर पकाकर चाशनी बना लें। चाशनी बन जाने के बाद प्राप्त चूर्ण को उसमें मिलाकर 4-4 ग्राम की गोलियां बना लें। प्रतिदिन सुबह-शाम 1-1 गोली गर्पानी के साथ लें।


2) सिर का दर्द :

1 चुटकी भर पिसा हुआ नमक जीभ पर रखें और 10 मिनट के बाद 1 ठंड़ा गिलास पानी पीनें से सिर में दर्द ठीक हो जाता है।
चौथाई कप जल में 3 ग्राम नमक मिलाकर उस पानी को सूंघने से सिर के दर्द में आराम मिलता है।
सनाय और नमक के चूर्ण को पानी के साथ मिलाकर सेवन करने से सिर दर्द में आराम मिलता है।
लगभग 10 ग्राम नमक को लगभग 1 किलोग्राम पानी में मिलाकर सूंघने से सिर का दर्द दूर हो जाता है।
सिर में दर्द होने पर ठंड़े पानी में चुटकीभर नमक डालकर पीएं इससे लाभ मिलेगा।
लगभग 1.5 ग्राम लाहौरी नमक को 10 ग्राम पानी में मिलाकर नाक के नथुनों में डालने से सिर का दर्द और आधासीसी का दर्द दूर हो जाता है।



किन बातों का रखे ख्याल:

नमक का ज्यादा सेवन करने से पाचन क्रिया, खून, मांस और धातुओं तथा वात नाड़ियों (नसों) में दोष उत्पन्न होता है।
इसका अधिक मात्रा में सेवन करने से आमाशय और शरीर के अन्य अंगों में जलन उत्पन्न होती है। उच्च रक्तचाप, गुर्दे के रोग, हिस्टीरिया, मिर्गी, जलोदर (पेट में पानी भरना), सूजन, चेचक, खुजली, कोढ़ और रक्तदोष के रोग (खून में खराबी के कारण उत्पन्न रोग) से पीड़ित रोगी को नमक का सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि इससे उन्हें हानि हो सकती है।
यह मांस की गांठों को फोड़ने तथा कुरेदने वाला, इन्द्रियों को कमजोर बनाकर काम शक्ति को कम करने वाला व शरीर वृद्ध बनाने वाला होता है। इसका अधिक मात्रा में सेवन करने से बाल सफेद व झड़ने लगते हैं।
अगर आप नमक का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं तो सोडियम को संतुलित करने के लिए शरीर को अधिक पानी की जरूरत होती है इसलिए हमें प्यास ज्यादा लगती है.
आमतौर पर हम प्रतिदिन छह से सात ग्राम नमक का सेवन करते हैं लेकिन दिन भर में इसे पांच ग्राम से अधिक नहीं लेना चाहिए. अधिक नमक के सेवन से हाई ब्लड प्रेशर, दिल के रोग, किडनी संबंधी रोग और स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है. इन रोगों के मरीजों को प्रतिदिन तीन ग्राम से अधिक नमक नहीं लेना चाहिए.
ऐसे में भोजन में अचार, सॉस, तले नमकीन स्नैक्स और पैकेज्ड फूड का सेवन कम करना ही बेहतर है.
और हां, भोजन पर ऊपर से नमक छिड़कने की आदत तो छोड़ ही दें.
एक चम्मच = पांच ग्राम
कम नमक के भी हैं नुकसान शरीर में नमक की कमी डायरिया, हैजा, उल्टियां, अतिरिक्त पसीना, अत्याधिक युरीन जैसी समस्याओं के कारण शरीर में नमक की कमी हो सकती है.
इतना ही नहीं, इसकी कमी से त्वचा संबंधी समस्याएं, आंखों में दिक्कत, उलझन, कोमा और कई मामलों में मृत्यु तक हो सकती है.




गुरुवार, 31 अगस्त 2017

शारीरिक दर्द नाशक तेल का नुस्खा -


हर प्रकार के दर्द को दूर कर देगा ये तेल-
ये तेल पीठ दर्द, कमर का दर्द, हिप-शूल, मांसपेशियों के दर्द, जोड़ों के दर्द, घुटनो के दर्द, कंधे की जकड़न, गर्दन का दर्द (सर्वाइकल स्पोंडोलाइटिस), वात विकार से पैदा हुए आदि दर्दो में ये तेल अदभुत रिजल्ट देता हैं। अगर आपके शरीर में कहीं भी दर्द हो तो ये तेल एक बार ज़रूर अपनाये, ये बनाने में भी बहुत आसान हैं।
आइये जाने ये तेल बनाने की विधि

लहसुन और अजवायन का तेल-

एक लहसुन की गांठ  लेकर उसकी चार कलिया छीलकर तीस ग्राम सरसों के तेल में डाल दें। अब उसमे दो ग्राम ( आधा चम्मच ) अजवायन के दाने डालकर धीमी-धीमी आंच पर पकाएं। लहसुन और अजवायन काली पड़ने पर तेल उतारकर थोड़ा ठंडा कर छान ले। इस सुहाते-सुहाते गर्म तेल की मालिश करने से हर प्रकार का बदन का दर्द दूर हो जाता है।
आवश्यकता अनुसार लहसुन और अजवाईंन की मात्रा बढ़ाई जा सकती हैं।
एक और नुस्खा प्रस्तुत है-



मंगलवार, 29 अगस्त 2017

फिटकरी के स्वास्थ्य और ज्योतीषीय फायदे // Health and astrological benefits of alum





एंटीसेप्टिक के रूप में-

भारतीय घरों में फिटकरी एक एंटीसेप्टिक के रूप में प्रयोग होता रहा है। सामान्य अर्धपारदर्शी पत्थर की तरह दिखने वाला यह पदार्थ वास्तव में पोटाशियम एल्यूमिनियम सल्फेट है जो एंटीसेप्टिक और एंटीबैक्टीरियल होता है। खून रोकने से लेकर घाव ठीक करने तक यह औषधीय गुण युक्त है।
एंटी बैक्टीरियल-
यही वजह है कि आम भारतीय घरों में हमेशा से यह दाढ़ी बनाने के बाद आफ्टर शेव के रूप में प्रयोग होता रहा है। इसके अलावा घुली हुई अशुद्धियां दूर करना भी इसकी खास खूबी है। आज भले ही वाटर प्यूरिफायर की सुविधा हो लेकिन पहले ऐसा नहीं था। नदी या तालाब के पानी में फिटकरी डालकर ही उसे शुद्ध किया जाता था, यह उपाय आज भी गांवों में इस्तेमाल किया जाता है।
धन और व्यापार की परेशानियां-
व्यापार में लगातार नुकसान हो रहा हो, तो दुकान या ऑफिस के किसी भी कोने में 50 ग्रामिटकरी रखें। इसके अलावा आपको अपने निवास स्थल के भी हर कमरे में और विशेषकर अपने सोने के कमरे में किसी जगह फिटकरी अवश्य रखना चाहिए। इससे आपके घर और व्यापार से जुड़े सभी वास्तु दोष समाप्त हो जाते हैं और लाभ की स्थितियां बनने लगतीबंधी हुई फिटकरी
अगर लगे कि व्यापार में पर्याप्त लाभ नहीं हो रहा, तो घर और कार्यस्थल दोनों ही जगह मुख्य द्वार पर एक लाल कपड़े या रुमाल में फिटकरी बांधकर लटकाएं। इससे भी आपके व्यापार से जुड़ी बाधाएं दूर होंगी और मुनाफा होने लगेगा।
धन सुरक्षा-
अगर चाहते हैं कि भविष्य में आपके जीवन में कोई मुश्किल ना आए, तो घर में फिटकरी रखना सबसे आसान उपाय है। घर के बाथरूम में विशेषकर इसे जरूर रखें, लेकिन हर माह पुरानी फिटकरी बदलकर इसकी जगह एक नया टुकड़ा रखना ना भूलें। इसके लिए फिटकरी के कुछ टुकड़े कांच की किसी कटोरी या जार में रखकर बाथरूम में ऐसी जगह रखें जहां से ये गिरे ना और रखा रहे।


बाथरूम-

बाथरूम सफाई की जगह है, एक प्रकार से देखा जाए तो गंदगी के रूप में आप अपनी सारी नकारात्मक ऊर्जा यहां जाकर छोड़ आते हैं। क्योंकि यह आपके घर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है इसलिए लगातार जमा हो रही यह नकारात्मक ऊर्जा एक समय के बाद आपके घर को कई रूपों में नुकसान पहुंचाती है।
वास्तु दोषों में फिटकरी-
आम जीवन में फिटकरी के ये सामान्य उपयोग हैं जिनसे आप शायद वाकिफ ही होंगे, लेकिन एक बात जो शायद आप ना जानते हों वह यह कि इन एंटीसेप्टिक गुणों के अलावा यह शास्त्रीय उपायों में भी बहुत महत्व रखता है,जी हां, इस एंटीसेप्टिक सफेद पत्थर में आपके घर की नकारात्मक ऊर्जा को सोखकर कर सभी प्रकार के वास्तु दोषों को खत्म कर सकने की क्षमता है। इतना ही नहीं, यह चूहे और तिलचट्टे आदि को भी आपके घर से दूर रखता है, इसलिए अपने घर में एक फिटकरी हमेशा रखना आपके लिए हर तरह से लाभकारी है। कुछ विशेष परेशानियां दूर करने के लिए आप किस प्रकार इसे प्रयोग कर सकते हैं, यह हम आगे की स्लाइड्स में बता रहे हैं।



बनते-बनते काम बिगड़ना-

बनते-बनते काम बिगड़ना, व्यापार-नौकरी में बाधाएं और नुकसान होना, अपमान होना आदि जैसी चीजें इसके कारण होना संभव है। बाथरूम में फिटक-री रखना इस नकारात्मक ऊर्जा को खत्म करता है और आपके जीवन में ये परेशानियां आती नहीं हैं या अगर वर्तमान में हो भी, तो धीरे-धीरे खत्म हो जाती हैं।
सफाई के दौरान-
इसके अलावा घर में सफाई के दौरान पोछे के पानी में थोड़ी फिटकरी और सामान्य नमक मिलाकर पोछा डालना घर के सभी वास्तु दोष खत्म करता है और पूरा परिवार तरक्की करता है।
कर्ज में
अगर लगे कि लगातार कर्ज के हालात बन रहे हैं और आप इससे मुक्त नहीं पो रहे हैं, तो भी फिटकरी का उपाय आपके काम आ सकता है। फिटकरी का एक छोटा टुकड़ा लें और इस पर थोड़ा सिंदूर छिड़कें। अब एक ताजा पान के पत्ते में इसे लपेटकर लाल धागे या कलावा (कच्चा सूत) से बांध दें। पान की इस पोटली को शाम के समय किसी भी पीपल पेड़ के नीचे मिट्टी में दबा दें। यह उपाय जल्दी ही असर दिखाएगा और धीरे-धीरे आप कर्ज से मुक्त हो जाएंगे।




रविवार, 27 अगस्त 2017

पुदीना के अनेक रोगों मे चमत्कारी प्रभाव //Miracle effect of mint in many diseases


हनुमन>पुदीना (Mint) ,एक लोकप्रिय औषधि, खाने के कई स्वास्थ्य लाभ हैं जिनमें उचित पाचन, वजन घटाने, अवसाद, थकान और सिरदर्द, अस्थमा, स्मृति हानि, और त्वचा की देखभाल संबंधी समस्याओं से राहत शामिल है। पुदीने को एक बेहतरीन माउथ फ्रेश्नर के रूप में भी जाना जाता है। पुदीने की दो दर्जन से अधिक प्रजातियां और सैकड़ों प्रकार की किस्मे पायी जाती है। यह एक औषधिय पौधा है जिसका उपयोग सैकड़ों वर्षों में इसके उल्लेखनीय औषधीय गुणों के लिए किया गया है। बाज़ार में आपको अनेक ऐसे उत्पाद देखने के लिए मिल जाएंगे जिनमें पुदीने का इस्तेमाल किया जाता है। इनमे टुथ पेस्ट, च्विंगम, माउथ फ्रेष्नेर्स, कैंडी और इनहेलर्स जैसे कई उत्पाद शामिल है।
पोदीने की उपयोगिता:
1. .शराब के अंदर पुदीने की पत्तियों को पीसकर चेहरे पर लगाने से चेहरे के दाग, धब्बे, झांई सब मिट जाते हैं और चेहरा चमक उठता है।
2. पुदीना के रस को शहद के साथ पन्द्रह दिनों तक सेवन करने से पीलिया में लाभ होगा। पोदीने की चटनी नित्य रोटी के साथ खाने से पीलिया में लाभ होता है।
८.५0 ग्राम पोदीने को पीसकर उसमें स्वाद के अनुसार सेंधानमक, हरा धनिया और कालीमिर्च को डालकर चटनी के रूप में सेवन करने से निम्न रक्तचाप में लाभ होता है।
3. .हरे पोदीने को पीसकर कम से कम २0 मिनट तक चेहरे पर लगाने से चेहरे की गर्मी समाप्त हो जाती है।
4.गठिया के रोगी को पोदीने का काढ़ा बनाकर पीने से पेशाब खुलकर आता है और गठिया रोग में आराम मिलता है।
5. पोदीने का रस कृमि (कीड़े) और वायु विकारों (रोगों) को नष्ट करने वाला होता है। पोदीने के ५ मिलीलीटर रस में नींबू का 5 मिलीलीटर रस और 7-8 ग्राम शहद मिलाकर सेवन करने से उदर (पेट) के रोग दूर हो जाते हैं।
२.२ चम्मच पुदीने का रस, 1 चम्मच नींबू का रस और २ चम्मच शहद को मिलाकर सेवन करने से पेट के रोग दूर होते हैं।
३.100 मिलीलीटर पुदीना का रस गर्म करके, ९ ग्राम शहद और लगभग ६ ग्राम नमक को मिलाकर पीने से उल्टी होकर पेट की बीमारी ठीक हो जाती है।
6. हरा धनिया, पोदीना, कालीमिर्च, अंगूर या अनार की चटनी बनाकर उसमें नींबू का रस मिलाकर खाने से अरुचि (भूख का न लगना) समाप्त होती है और पाचन क्रिया तेज होने से भूख भी अधिक लगती है।
५.५-५ ग्राम पोदीना, लोहबान और अजवायन का रस, ५ ग्राम कपूर और ५ ग्राम हींग को २५ ग्राम शहद में मिलाकर एक साफ शीशी में भरकर रख लें, फिर पान के पत्ते में चूना-कत्था लगाकर शीशी में से ४ बूंदे इस पत्ते में डालकर खाने से गले का दर्द दूर होता है।
7.पेट दर्द :
२ चम्मच पोदीने के पत्तों का सूखा चूर्ण और 1 चम्मच मिश्री या चीनी मिलाकर सेवन करने से पेट के दर्द में आराम होता है।
सूखा पोदीना और चीनी को बराबर मात्रा में मिलाकर २ चम्मच की फंकी लेने से पेट दर्द ठीक हो जाता है।
५-५ मिलीलीटर पोदीना का रस, अदरक का रस और 1 ग्राम सेंधानमक को मिलाकर सेवन करने से पेट का दर्द दूर हो जाता है।
५ मिलीलीटर पोदीने का रस और ५ मिलीलीटर अदरक के रस को मिलाकर, उसमें थोड़ा-सा सेंधानमक डालकर सेवन करने से उदर शूल (पेट में दर्द) समाप्त हो जाता है।
पोदीना के ७ पत्ते और छोटी इलायची का 1 दाना पानी के पत्ते में लगाकर खाने से पेट में होने वाले दर्द में लाभ करता है।
पोदीना के पत्तों का शर्बत पीने से पेट का दर्द समाप्त हो जाता है। 4 ग्राम पुदीने में आधा-आधा चम्मच सौंफ और अजवायन, थोड़ा-सा कालानमक और लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग हींग को मिलाकर बारीक मात्रा में पीसकर चूर्ण बना लें, इस बने चूर्ण को गर्म पानी के साथ सेवन करने से पेट में होने वाले दर्द में लाभ होता है।
3 ग्राम पोदीना, जीरा, हींग, कालीमिर्च और नमक आदि को पीसकर पानी में मिलाकर पीने से पेट के दर्द में आराम मिलता है।


पोदीना, सौंफ, सोंठ और गुलकंद को अच्छी तरह पीसकर पानी में उबालकर दिन में 3 बार रोजाना खुराक के रूप में पीने से पेट के दर्द और कब्ज की शिकायत दूर होती है।

2 चम्मच सूखे पुदीने को काले नमक के साथ सेवन करने से पेट के दर्द में लाभ होता है।
सूखा पोदीना और चीनी को बराबर मात्रा में पीसकर रख लें, फिर २ चम्मच को फंकी के रूप में गर्म पानी के साथ पीने से पेट के दर्द में लाभ होता है।
8.पोदीना १० ग्राम और २0 ग्राम गुड़ को 100 मिलीलीटर पानी में उबालकर पीने से बार-बार पित्ती निकलना ठीक हो जाती है। पोदीने को पानी के साथ काढ़ा बनाकर थोड़ा-सा गुड़ मिलाकर खाने से पित्त में बहुत ही लाभ होता है।
9. .पेट के गैस :
४ चम्मच पोदीने के रस में 1 नींबू का रस और २ चम्मच शहद मिलाकर पीने से गैस के रोग में आराम आता है।
सुबह 1 गिलास पानी में २५ मिलीलीटर पोदीना का रस और 30 ग्राम शहद मिलाकर पीने से गैस समाप्त हो जाती है।
६० ग्राम पोदीना, 10 ग्राम अदरक और ८ ग्राम अजवायन को 1 गिलास पानी में डालकर उबाल लें। उबाल आने पर इसमें आधा कप दूध और स्वाद के अनुसार गुड़ मिलाकर पीएं। चौथाई कप पोदीने का रस आघा कप पानी में आधा नींबू निचोड़कर ७ बार उलट-उलट कर पीने से भी गैस से होने वाला पेट का दर्द तुरंत ठीक हो जाता है।
पोदीने की ताजी पत्ती, छुहारा, कालीमिर्च, सेंधानमक, हींग, कालीद्राक्ष (मुनक्का) और जीरा इन सबकी चटनी बनाकर उसमें नींबू का रस निचोड़कर खाने से भोजन के प्रति रुचि उत्पन्न होती है, स्वाद आता है, गैस दूर होकर भोजन पचाने की क्रिया तेज होती है और मुंह का फीकापन दूर होता है।
20 मिलीलीटर पोदीने का रस, 10 ग्राम शहद और ५ मिलीलीटर नींबू के रस को मिलाकर खाने से पेट के वायु विकार (गैस) समाप्त हो जाते हैं।
पुदीने की पत्तियों का २ चम्मच रस, आधा नींबू का रस मिलाकर पीने से लाभ होता है।
10. पोदीने का रस रोगी को पिलाने से आंतों के कीड़े समाप्त हो जाते हैं।
.बिच्छू के काटने पर पोदीने का लेप करने और पानी में पीसकर रोगी को पिलाने से लाभ होता है।पोदीने का रस पीने से या उसके पत्ते खाने से बिच्छू के डंक मारने से होने वाला कष्ट दूर होता है।
11.लू का लगना:
लगभग २० पोदीने की पत्तियां, लगभग 3 ग्राम सफेद जीरा और २ लौंग मिलाकर इन सबको पीसकर जल में घोलकर, छानकर रोगी को पिलाने से लू से होने वाली बेचैनी खत्म हो जाती है।
लगभग १५० मिलीलीटर पोदीने के रस को इतने ही ग्राम पानी के साथ पीने से लू से होने वाले खतरों से बचा जा सकता है।
सूखा पोदीना, खस तथा बड़ी इलायची लगभग ५०-५०ग्राम की बराबर मात्रा में लेकर कूट लें और इसका चूर्ण बना लें, फिर इसे एक लीटर पानी में उबालकर काढ़ा बना लें। इस काढ़े को ठंडा करके लगभग १०० मिलीलीटर की मात्रा में पीने से लू ठीक हो जाती है।
123. .घबराहट व बैचेनी में पोदीने का रस लाभदायक होता है।
13. .पुदीने के रस में नींबू का रस मिलाकर, पानी में डालकर पिलाने से यकृत वृद्धि मिट जाती है।
14. जंगली पुदीना और हंसराज दोनों को थोड़ी-थोड़ी मात्रा में लेकर काढ़ा बनाकर इसमें थोड़ी सी मिश्री मिलाकर सेवन करने से प्रजनन में दर्द नहीं होता है।
२५.कफ (बलगम) होने पर चौथाई कप पोदीने का रस इतने ही गर्म पानी में मिलाकर रोज 3 बार पीने से कफ में लाभ होता है।
११.२ चम्मच पुदीने की चटनी शक्कर में मिलाकर भोजन के साथ खाने से मूत्र रोग में लाभ होता है।
15. .पोदीने की पत्तियों को थोड़े-थोड़े समय के बाद चबाते रहने से मुंह की दुर्गंध दूर हो जाती है। पोदीने की १५-२०हरी पत्तियों को १ गिलास पानी में अच्छी तरह उबालकर उस पानी से गरारे करने से भी मुंह की दुर्गंध दूर हो जाती है।
16. .पोदीने के पत्तों को पीसकर किसी जहरीले कीड़े के द्वारा काटे हुए अंग (भाग) पर लगाएं और पत्तों का रस २-२ चम्मच की मात्रा में दिन में 3 बार रोगी को पिलाने से आराम मिलता है।
17. पोदीने की पत्तियों को पीसकर गाढ़े लेप को सोने से पहले चेहरे पर अच्छी तरह से मल लें। सुबह चेहरा गर्म पानी से धो लें। इस लेप को रोजाना लगाने से चेहरे के दाग-धब्बे, झांइयां और फुंसियां दूर हो जाती हैं और चेहरे पर निखार आ जाता है।


18. .बेहोश व्यक्ति
को पुदीना की खुशबू सुंघाने से बेहोशी दूर हो जाती है। पोदीने के पत्तों को मसलकर सुंघाने से बेहोशी दूर हो जाती है।

19.  कप पानी में पुदीने की चटनी बनाकर, थोड़ी-सी चीनी डालकर अच्छी तरह मिलाकर सेवन करने से अम्लपित्त के कारण पेट में होने वाली जलन को शांत होती है।
20. ग्राम पोदीने के रस में हींग, जीरा, कालीमिर्च और थोड़ा सा नमक डालकर गर्म करके पीने से पेट के दर्द और अरुचि (भोजन की इच्छा न होना) रोग ठीक हो जाते हैं।
21. .पोदीने की पत्तियों और कालीमिर्च को मिलाकर गर्म-गर्म चाय रोगी को पिलाने से सर्दी-खांसी, जुकाम, दमा और बुखार में आराम मिलता है।
22.आधा कप पोदीने का रस दिन में २ बार नियमित रूप से कुछ दिनों तक पिलाते रहने से पेट के कीड़े समाप्त हो जाते हैं।
23. ४-६ मुनक्का के साथ १० पोदीने की पत्तियां सुबह-शाम खाने के बाद नियमित रूप से चबाते रहने से बदहजमी में आराम मिलेगा।
24. .पुदीना के पत्तों का अधिक मात्रा में बार-बार सेवन करने से माहवारी शुरू हो जाती है। इसे चाहे जिस रूप में सेवन किया जाए या इसके पत्तों को पीस-घोलकर या मिश्री मिलाकर शर्बत के रूप में सेवन करना चाहिए।
25. .पुदीने की चटनी कुछ दिनों तक लगातार खाने से मासिक-धर्म नियमित हो जाता है।
26. .कान के अंदर अगर बहुत ही बारीक कीड़ा चला जाये तो कान में पुदीने का रस डालने से कान का कीड़ा समाप्त हो जाता है।कान में दर्द हो तो पोदीना का रस डालें या हरी मकोय का रस कान में डालना चाहिए।
27. .पुदीना का रस लगभग ३० मिलीलीटर प्रत्येक ६ घंटे पर गर्भवती स्त्री को सेवन कराने से जी का मिचलाना बंद हो जाता है।
28. .पुदीना को पानी से पीसकर घोल बनाकर दिन में 3 से ४ बार कुल्ला करने से मुंह से दुर्गंध व अन्य रोग भी ठीक होते हैं।
29.हिचकी:
पोदीने के पत्तों को चूसने और पत्तों को नारियल (खोपरे) के साथ चबाकर खाने से हिचकी दूर होती है।
पोदीने के पत्ते या नींबू को चूसने या पोदीने के पत्तों को शक्कर (चीनी) में मिलाकर चबाने से हिचकी का आना बंद हो जाता है।
पुदीना के सूखे और हरे पत्ते को शक्कर के साथ चबाने से हिचकी नहीं आती है।
२ मिलीलीटर हरे पुदीने के रस में २ ग्राम चीनी मिलाकर चबाने से हिचकी मिट जाती है।
पुदीने के पत्ते को मिश्री के साथ खाने से हिचकी मिट जाती है।
पुदीना के रस को हिचकी में पीने से लाभ होता है।
हिचकी बंद न हो तो पुदीने के पत्ते या नींबू चूसें। पुदीने के पत्तों पर शक्कर डालकर हर दो घंटे में चबाने से हिचकी में फायदा होता है।
1-1 गोली पुदीना खाना-खाने के बाद सुबह-शाम पानी के साथ सेवन करने से हिचकी में लाभ होता है।
1 चम्मच पुदीने का रस, 1 चम्मच नींबू का रस और 1 चम्मच शक्कर आदि तीनों को एक साथ मिलाकर पीने से हिचकी नहीं आती है।
30. पोदीना १० या २० ग्राम को २०० मिलीलीटर पानी में उबालकर छानकर पिलाने से बार-बार उछलने वाली पित्ती ठीक हो जाती है।
31. .सिर पर हरे पोदीने का रस निकालकर लगाने से सिर दर्द दूर हो जाता है।
32.हैजा:
पोदीने का रस पीने से हैजा, खांसी, वमन (उल्टी) और अतिसार (दस्त) के रोग में लाभ होता है। इससे पेट में से गैस और कीड़े भी समाप्त हो जाते हैं।
हैजा होने पर पोदीना, प्याज और नींबू का रस मिलाकर रोगी को देने से लाभ मिलता है।
किसी व्यक्ति को हैजा होने पर उस व्यक्ति को प्याज का रस पिलाने से हैजे के रोग में आराम आता है।
२५ पुदीने की पत्तियां, ५ कालीमिर्च, काला-नमक २ चुटकी, २ भुनी हुई इलायची, 1 चोई इमली पकी। इन सब चीजों में पानी डालकर चटनी बना लें। इस चटनी को बार बार रोगी को चाटने के लिए दें।
पोदीना की ३० पत्तियां, कालीमिर्च के दाने 3 नग, कालानमक 1 ग्राम, भुनी हुई २ छोटी इलायची, कच्ची अथवा पकी इमली 1 ग्राम इन सबको पानी के साथ पीसकर चटनी-सी बना लें। यह चटनी हैजे के रोगी को चटाने से पेट दर्द, उल्टी, दस्त तथा प्यास आदि विकार दूर हो जाते हैं।
10-10 मिलीलीटर पोदीने, प्याज और नींबू का रस मिलाकर थोड़ी-थोड़ी मात्रा में रोगी को पिलाने से हैजे के रोग में बहुत लाभ होता है। इससे वमन (उल्टी) भी जल्दी बंद हो जाती है।
33. .पोदीना, तुलसी, कालीमिर्च और अदरक का काढ़ा पीने से वायु रोग (वात रोग) दूर होता है और भूख भी बहुत लगती है।
34. .पुदीने को पीसकर प्राप्त रस को 1 चम्मच की मात्रा में लेकर 1 कप पानी में डालकर पीने से दस्त कम हो जाते हैं.
35. .हरा पोदीना, सूखा धनिया और मिश्री बराबर मात्रा में लेकर चबायें और लार को नीचे टपकायें। इससे मुंह के छाले ठीक हो जाते हैं।
36. .पोदीने को सुखाकर बारीक पीसकर चूर्ण बनाकर रख लें, फिर इसे स्त्री को संभोग (सहवास) करने से पहले लगभग 10 ग्राम की मात्रा में पानी के साथ पिलाने से स्त्री का गर्भ नहीं ठहरता हैं। ध्यान रहे कि जब गर्भाधान अपेक्षित हो तो इस चूर्ण का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
37.वमन (उल्टी):
४ पोदीने के पत्ते और २ आम के पत्तों को लेकर 1 कप पानी में डालकर उबालने के लिए रख दें। जब उबलता हुआ पानी आधा बाकी रह जाए तो उस पानी में मिश्री डालकर काढ़े की तरह पीने से उल्टी ठीक हो जाती है।
६ मिलीलीटर पोदीने का रस और लगभग लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग सेंधानमक मिलाकर पीस लें इसे ताजे पानी में मिलाकर थोड़ा-थोड़ा पीने से उल्टी आना बंद हो जाती है।
अगर पेट के खराब होने की वजह से छाती भारी-भारी लग रही हो और बेचैनी के कारण उल्टी हो रही हो तो 1 चम्मच पुदीने के रस को पानी के साथ पिलाने से लाभ होता है।
२-२ ग्राम पोदीना, छोटी पीपल और छोटी इलायची को एक साथ मिलाकर खाने से उल्टी होना बंद हो जाती है।
10 बूंद पुदीने के रस को पानी में मिलाकर उसमें शक्कर डालकर पीने से उल्टी आना बंद हो जाती है।
पुदीना के पत्तों का शर्बत दिन में कई बार पीने से उल्टी और जी मिचलाना (उबकाई) आदि रोग दूर होते हैं।
पोदीने का रस और नींबू के रस को बराबर मात्रा में दिन में 1 चम्मच की मात्रा में ३-४ बार रोगी को पिलाने से उल्टी आना बंद हो जाती है।
पोदीना को नींबू के साथ देने से उल्टी आना बंद हो जाती है। आधा कप पोदीना का रस २-२ घण्टे के अंतराल में पिलाते रहने से लाभ उल्टी, दस्त और हैजा में मिलता है।
38. .पोदीना और इमली को पीसकर उसमें सेंधानमक या शहद मिलाकर खाने से खट्टी डकारे और उल्टी आना शांत हो जाती है।
39. .चौथाई कप पोदीना का रस इतने ही पानी में मिलाकर रोजाना 3 बार पीने से खांसी, जुकाम, कफ-दमा व मंदाग्नि में लाभ होता है।


40. .जुकाम:

पोदीना, कालीमिर्च के पांच दाने और नमक इच्छानुसार डालकर चाय की भांति उबालकर रोजाना तीन बार पीने से जुकाम, खांसी और मामूली ज्वर में लाभ मिलता है।
पोदीने के रस की बूंदों को नाक में डालने से पीनस (जुकाम) के रोग में लाभ होता है।
पोदीने की चाय बनाकर उसके अंदर थोड़ा-सा नमक डालकर पीने से खांसी और जुकाम में लाभ मिलता है।
पोदीने के रस की 1-2 बूंदे नाक में डालने से पीनस (जुकाम) रोग नष्ट हो जाता है।
41..चोट लग जाने से रक्त जमा हो जाने (गुठली-सी बन जाने पर) पुदीना का अर्क (रस) पीने से गुठली पिघल जाती है।पोदीने का रस पिलाने से जमा हुआ खून टूटकर बिखर जाता है।सूखा पोदीना पीसकर फंकी लेने से खून का जमाव बिखर जाता है।
३४.२० हरे पुदीना की पत्तियां, ५ ग्राम जीरा और थोड़ी-सी हींग, कालीमिर्च के 10 दाने, चुटकीभर नमक को मिलाकर चटनी बनाकर 1 गिलास पानी में उबालें जब पानी आधा गिलास शेष रह जाए, तो छानकर पीने से अपच में लाभ होता है।
३५.पुदीने के पत्तों को पीसकर पोटली बनाकर जख्म पर बांधने से घाव के कीड़े मर जाते हैं।
42. .पोदीने के रस को मुल्तानी मिट्टी में मिलाकर चेहरे पर लेप करने से चेहरे की झांइयां समाप्त हो जाती हैं और चेहरे की चमक बढ जाती है।
५७.दाद:शरीर के किसी भाग में दाद होने पर उस भाग पर पोदीने के रस को 1 दिन में २-३बार दाद पर लगाने से लाभ मिलता है।
43. .बुखार:
पुदीना और तुलसी का काढ़ा बनाकर रोजाना पीने से आने वाला बुखार रुक जाता है।
पोदीने और अदरक को पानी में उबालकर काढ़ा बना लें, फिर इसे छानकर दिन में २ बार पीने से बुखार ठीक हो जाता है। प्रतिश्याय (जुकाम) में भी इससे बहुत लाभ होता है।
पुदीना के पत्तों और मिश्री को मिलाकर शर्बत बनाकर बार-बार पीने से कफ के साथ-साथ बुखार में आराम मिलता है।
44. .चेहरे की त्वचा अधिक तैलीय होने पर रोजाना पोदीने का रस रूई के साथ चेहरे पर लगाने से त्वचा का तैलीयपन कम होता है और चेहरे का सौंदर्य भी बढ़ता है।
45. .पुदीने में विटामिन-ई पाया जाता है, जो शरीर की शिथिलता (कमजोरी) और वृद्धावस्था (बुढ़ापे) को आने से रोकता है। इसके सेवन करने से नसे भी मजबूत होती हैं।
46. .पुदीना चबाकर खाने से दांतों के बीच छिपे भोजन के कण दूर होते हैं और मुंह की सफाई भी हो जाती है।
47. .अफारा (गैस का बनना):
पोदीना के ५ मिलीलीटर रस में थोड़ा-सा सेंधानमक मिलाकर सेवन कराने से आध्यमान (अफारा) ठीक हो जाता है।
पोदीने का रस ५० मिलीलीटर, मिश्री ५ ग्राम और २ ग्राम यवक्षार मिलाकर खाने से आध्यमान (अफारा, गैस) दूर हो जाता है।
पोदीने के पत्तों का शर्बत बनाकर पीने से अफारा में लाभ होता है।
48..पोदीना का ताजा रस शहद के साथ सेवन करने से आंतों की खराबी और पेट के रोग मिटते हैं। आंतों की बीमारी से पीड़ित रोगियों के लिए पोदीने के ताजे रस का सेवन करना बहुत ही लाभकारी है।
49. .पोदीना और अदरक का रस या काढ़ा पीने से शीतज्वर मिट जाता है। इससे पसीना निकल आता है और हर प्रकार का ज्वर मिट जाता हैं। गैस और जुकाम के रोग में भी यह काढ़ा बहुत लाभ पहुंचाता है।
50. पोदीना, राम तुलसी (छोटे और हरे पत्तों वाली तुलसी) और श्याम तुलसी (काले पत्तों वाली तुलसी) का रस निकालकर उसमें थोड़ा-सा शक्कर (चीनी) मिलाकर सेवन करने से टायफाइड (मोतीझारा) के रोग में लाभ होता है।
51.पोदीना का ताजा रस शहद के साथ मिलाकर हर 1 घंटे के बाद देने से न्युमोनिया (त्रिदोषज्वर-वात, पित्त और कफ) से होने वाले अनेक विकारों (बीमारियों) की रोकथाम करता है और बुखार को समाप्त करता है।
52. पुदीना (Mint) एंटीऑक्सिडेंट्स और फ़िटेन्यूयरिक्स से भरपूर है और पेट के लिए अद्भुत तरीके से काम करता हैं। पुदीने में मौजूद मेथेनोल पाचन के लिए जरूरी एंजाईम्स को भोजन पचाने में मदद करता है। पुदीना (Mint) पेट की चिकनी मांसपेशियों को आराम पहुंचाता हैं और अपच और ऐंठन की संभावना को कम करता हैं। इसके अलावा पेट की अम्लता को कम करने और पेट की जलन को समाप्त करने के लिए भी पुदीने(Mint) का इस्तेमाल किया जा सकता है। अधिक स्वास्थय लाभ के लिए ग्रीन-टी में कुछ पुदीने(Mint) की पत्तिया डाल कर इस्तेमाल करें।








शुक्रवार, 25 अगस्त 2017

पैर गर्म पानी में डुबाने के होंगे ये हैरान करने वाले फायदे //Amazing benefits of Damping the feet in hot water




जब आप काम से थक कर घर आएं और कोई आपके लिये गरम पानी से भरा टब पैरो के नीचे रख दे. फिर आप उसमें अपने पैरों को डुबो कर अपने शरीर की सारी थकान मिटाएं. है ना सुकून देने वाला एहसास

आपको करना केवल इतना है कि एक बाल्‍टी में गरम पानी भरिये और उसमें थोड़ा सा नमक मिला कर पैरों को डुबो लीजिये. कई लोग रात को सोने से पहले पैरों को डुबोते हैं. जिससे उन्‍हें अच्‍छी नींद आ सके.
पैर में होने वाले दर्द का कारण और उपचार - 
जी हां, गरम पानी में पैर डुबोने से ना केवल शरीर की थकान मिटाई जा सकती है बल्‍कि इससे अन्‍य स्‍वास्‍थ्‍य लाभ भी मिलते हैं. पैरों को गरम पानी में डुबोने से मासपेशियों की थकान मिटती है, दर्द और सूजन से भी राहत मिलती है.
पानी में क्‍या मिलाना चाहिए - 
यदि आपको सर्दी-जुखाम है तो पानी के टब में ताजी अदरक की जड़ें डालें. अगर आपको गठिया है तो पानी में दालचीनी या काली मिर्च डाल सकते हैं. पैरों की थकान दूर करने और खुद को रिलैक्‍स करने के लिये लेवेंडर ऑइल या रोजमैरी ऑइल भी मिला सकते हैं.
सुबह में पैर डुबोने के फायदे -
 

सुबह के दौरान गरम पानी में पैरों को डुबोने से एनर्जी बढ़ती है. रातभर एक ही पोजिशन में सोने से खून का संचार धीमा पड़ जाता है इसलिये अगर सुबह के दौरान अपने पैरों को गरम पानी में डुबोया जाए तो आप पहले से कहीं ज्‍यादा फ्रेश फील करने लगेंगे.

शाम में पैर डुबोने के फायदे -
 लेकिन सबसे अच्‍छा समय होता है शाम 5 बजे से 7 बजे का. इस दौरान आपकी किडनियों की एनर्जी बढ़ती है और खून का संचार तेज होता है. ऐसा करने के बाद अपने तलवों की तेल से मालिश करें, खासतौर पर एडियों की.
किसे नहीं डुबोने चाहिये गर्म पानी में पैर
वे लोग जिन्‍हें लो बीपी की समस्‍या है. उन्‍हें गरम पानी में पैर डुबोने से बेहोशी आ सकती है. मधुमेह रोगियों को भी इससे बचना चाहिये. क्‍योंकि गरम पानी से पैरों की त्‍वचा जल सकती है. यदि आपको काफी तेज भूखे हैं या फिर बहुत ज्‍यादा खा लिया है. तो भी पैरों को गरम पानी में ना डुबोएं



बुधवार, 23 अगस्त 2017

जीरा के इतने सारे फायदे नहीं जानते होंगे आप // You may not know the huge benefits of cumin seed

     

   

खाने के स्वाद को बढ़ाने के अलावा जीरा आपके स्वास्थ्य को भी बढ़ाता है। यह एंटीऑक्सीडेंट, एंटी-इंफ्लेमेटरी, एंटी-फ्लैटुलेंटगुणों का घर माना जाता है। इसके अलावा यह डाइटरी फाइबर और लौह, तांबा,कैल्शियम,पोटेशियम, मैग्नीज, सेलेनियम, जिंक, विटामिन्स और मैग्नीशियम का बहुत अच्छा स्रोत है।
    आप जीरे के साबुत बीज एवं जीरा पाउडर दोनों का ही सेवन अपने स्वास्थ्य में सुधार लाने के लिए कर सकते हैं। कई ऐसे पदार्थ जिनका उपयोग हम खाना बनाने में नियमित तौर पर करते हैं उनका उपयोग कई प्रकार की बीमारियों के उपचार में तथा कई बीमारियों को रोकने में सहायक होता है
जीरे के फायदे हैं

*जीरे से  ब्लोटिंग का प्रभावी उपचार-
ब्लोटिंग या फिर फूला हुआ पेट गैस का भी एक कारक है। इससे आपको पेट में दर्द भी हो सकता है। आपको ब्लोटिंग की शिकायतकब्ज, अपच,रजनोवृत्ति पूर्व सिंड्रोम (पी.एम.एस.) और इर्रिटेबल बोवेल सिंड्रोम (आई.बी.एस.) की वजह से हो सकती है।मध्य पूर्व जर्नल ऑफ डाइजेस्टिव डिसीज़ में प्रकाशित एक 2013का अध्ययन का कहना है कि जीरा ब्लोटिंग सहित इर्रिटेबल बोवेल सिंड्रोम सभी के लक्षणों में सुधार लाने में कारगर है।
ब्लोटिंग की शिकायत  मे -
1 कप पानी उबालने के लिए गैस पर चढ़ाएं।
इसमें 1 चुटकी पिसा हुआ जीरा, अदरक पाउडर और समुद्री नमक के साथ-साथ आधा चमच्च सौंफ के बीज डालें।
पांच मिनट के लिए इसे कम आंच पर उबलने दें।
.छानने के पश्चात इसे ठंडा होने दे और पी लें।
.जरूरत पड़ने पर यह प्रक्रिया दोबारा दोहराएँ
* वजन घटाने में सहायक-
जीरा भी वजन घटाने वाले आहार के रूप में उपयोग किया जाता है। क्लिनिकल प्रैक्टिस की कॉंप्लिमेंटरी थेरपीज़ में प्रकाशित 2014 के एक अध्ययन में अधिक वजन और मोटापे से ग्रस्त महिलाओं के शरीर की संरचना और लिपिड प्रोफाइल पर जीरा पाउडर के सकारात्मक प्रभाव का उल्लेख किया गया है। यह शरीर में चर्बी एवं कोलेस्ट्रॉल को कम करने में अति सहायक है। इसके अलावा यह आपकी चयापचय क्रियाओं को उत्तेजित करता है और आपकी खाना खाने की इच्छा को कम करता है।
वजन कम करने के लिए
जीरे को भून लें।.इस भुने हुए जीरे को मिक्सी की मदद से पीसकर चूर्ण बना लें। .इस चूर्ण का एक चमच्च रोजाना दही में मिलाकर दो बार खाएं।
*जीरे  से एनीमिया का इलाज -
एनीमिया का सबसे बड़ा कारक होता है -शरीर में लौह की कमी। लौह का एक समृद्ध स्रोत होने के कारण, जीरा एनीमिया को ठीक करने में भी सक्षम है। एक चमच्च जीरे का पाउडर आपके शरीर को चार मिलीग्राम लौह से पोषित करता है। इसमें निहित लौह रेड ब्लड सेल्स के उत्पादन को बढ़ावा देता है और थकावट जैसे एनीमिया के लक्षणों को भी हराता है।
यह आपकी उपापचय क्रियाओं में भी सुधार लाता है। लौहकी कमी को दूर करने के लिए एवं शरीर को एनीमिया से बचाने के लिए अपने दैनिक आहार में जीरा पाउडर को शामिल करें। इससे थकान, चिंता,संज्ञानात्मक दोष एवं पाचन विकार जैसे एनीमिया के लक्षणों से भी राहत मिलती है।
*जीरा पानी से उदरशूल मे आराम-
अपनी वायुनाशी गुण के वजह से जीरा उदरशूल में हो रहें दर्द का भी एक सफल उपचार है। बच्चों के उदरशूल में दर्द होना बहुत ही आम है और जीरा बच्चों को उदरशूल से हो रही पीड़ा से राहत दिला सकता है।
उदरशूल दर्द से छुटकारा पाने के लिए एक कप में एक चमच्च जीरा डालें।
.इस कप में गर्म पानी डालें और इसे ढक दें।
.15 मिनट बाद इसे छान लें।
.इस घोल का 1-2 चमच्च अपने बच्चे को पिलायें।
*जीरे का उपयोग माँ का दूध बढ़ाने के लिए-
जीरा कैल्शियम और आयरन से समृद्ध होता है यह दोनों ही गर्भवती एवं स्तनपान करा रही महिलाओं के लिए उत्तम है। यह स्तन-दूध के उत्पादन को उत्तेजित कर उसकी मात्रा में बढ़ोतरी लाता है। इसके अलावा यह माँओं को शिशु-जन्म उपरान्त खोई हुई ताकत और फुर्ती को वापिस लाने में भी सहायक है।
स्तन-दूध को बढ़ाने के लिए
एक चमच्च जीरा पाउडर एक गिलास गर्मदूधमें मिलाएं।
.इसमें शहद की मिठास मिलाएं।
.कुछ हफ़्तों के लिए इसका सेवन रोजाना रात को खाना खाने के बाद सोने से पहले करें।
*जीरा  पाचन क्रिया को बढ़ाता है-


जीरा आयुर्वेद में पेट दर्द, अपच,दस्त, पेट फूलना, मतली आदि पाचन सम्बंधित विकारों के उपचार के लिए एक बहुत ही मशहूर औषधि है। यह अग्नाशय एंजाइम जो पाचन क्रिया में समर्थक होते हैं, उन्हें उत्तेजित करता है। यह पेट में हो रही अम्लता का भी एक सफल उपचार है।

पाचन क्रिया को उत्तेजित करने के लिए-
एक गिलास पानी में 1 चमच्च भुना हुआ जीरा पाउडर मिलायें।
इसे दिन एक या दो बार रोजाना पियें।
.छाछके एक गिलास में ¼ चम्मच भुना हुआ जीरा पाउडर और काली मिर्चपाउडर डालें। आप इसे रोजाना एक बार पीकर भी पाचन क्रिया को प्रभावी बना सकते हैं।
* जीरा के औषधीय गुण-
मधुमेह को नियंत्रित करने केलिए
आयुर्वेद के अनुसार जीरे में बहुत अच्छेमधुमेहविरोधी गुण पाए जाते हैं। खाद्य विज्ञान और पोषण के इंटरनेशनल जर्नल में प्रकाशित 2005 के एक अध्ययन ने भी इस बात की पुष्टि की है किजीरा हाइपोग्लाइसीमिया (hypoglycemia) और ग्लुकोसुरिया (glucosuria) में सहायता कर सकता है।
मधुमेह को नियंत्रित करने के लिए
आठ चमच्च काला जीरा भून लें।
.इसके पश्चात भुने हुए जीरे को पीसकर चूर्ण बना लें।
.इस चूर्ण का आधा चमच्च पानी के साथ खा लें।
.कुछ महीनों के लिए ऐसा रोजाना दिन में दो बार करें।
नोट :- चूँकि जीरे का सेवन आपकी सर्जरी को प्रभावित कर सकता है, जीरे का सेवन सर्जरी से दो सप्ताह पहले ही करना बंद कर दें।
* जीरे की चाय से अनिद्रा का इलाज-
यदि आप अनिद्रा के शिकार है तो चिंता मत कीजिये, जीरे की मदद से आप इस विकार से आसानी से लड़ सकते हैं। जीरे में मेलाटोनिन होता है जो अनिद्रा से एवं अन्य सोने से सम्बंधित विकारों से लड़ने के लिए अनिवार्य माना जाता है। मेलाटोनिन एक ऐसा हॉर्मोन है जो आपकोसोने में सहायता करता है।
अनिद्रा को दूर भगाने के लिए-
.एक केले को अच्छे से मसल लें और फिर उसमें 1 चम्मच जीरा पाउडर मिला दें। इस मिश्रण को दैनिक रूप से सोने से पहले खाएं।
.अन्य विकल्प यह है कि आप रोजाना रात में जीरे से बनी हुई चाय पिएं।जीरे की चाय बनाने के लिए 2 या 3 सेकंड 1 चम्मच जीरे पाउडर कम आंच पर पकाये। इसके बाद इसमें 1 कप पानी डालें और इसे उबलने दें। उबलने के पश्चात इसे पांच मिनट तक ढक कर रख दें और फिर छान कर पी लें।


* जीरा बढ़ाएँ स्मरण-शक्ति-

जीरे में निहित एंटी-ऑक्सीडेंट एवं एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण स्मरण-शक्ति में तो सुधार लाते ही हैं साथ ही यह एकाग्रता के स्तर में भी सुधार लाते हैं। यह अलजाइमर एवं उम्र के साथ आने वालीयाददाश्तसंबधित विकारों का भी एक सफल उपचार है।
इसमें विभिन्न प्रकार केविटामिन बीएवंविटामिन ईभी है जो नसों को उत्तेजित कर दिमाग के कार्यशीलता में तो सुधार लाता है। 2011 में फार्मास्यूटिकल बाइऑलजी में प्रकाशित एक अध्य्यन के अनुसार जीरा का नियमित रूप से सेवन करने से स्मरण-शक्ति में सुधार आता है और दिमाग पर पड़ रहा स्ट्रेस भी कम होता है।रोजाना आधा चमच्च भुने हुए जीरे चबाकर खाएं और अपनी स्मरण शक्ति को उत्प्ररित करें।
*जीरा चूर्ण बनाए हड्डियों को मजबूत-
जीरा आपके हड्डी के स्वास्थ्य के लिए अत्यंत फायदेमंद होता है। इसमें कैल्शियम, पोटैशियम एवं मैग्नीशियम जैसे खनिज निहित हैं जो हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए अनिवार्य माने जाते हैं। इसके अलावा इसमें विटामिन बी 12 भी है जो हड्डियों के लिए स्वास्थ्यवर्धक है।
इसमें एस्ट्रोजन के यौगिक भी होते हैं जो रजनोवृत्ति उपरान्त महिलाओं में ओस्टेपोरोसिस के खतरे को कम करताहै।अपनी हड्डियों को स्वस्थ बनाने के लिए और उनके घनत्व में सुधार लाने के लिए अपने दैनिक आहार में जीरे को शामिल करें।
सावधानी-
हमेशा अच्छी गुणवत्ता वाला जीरा ही खरीदें, जो तर्जनी (Index Finger) और अंगूठे के बीच निचोड़ने पर एक सुहानी एवं मिर्च-सा महक फैलाती है।
.जीरे को एक हवाबंद-डब्बे में ही रखें।
.पिसे हुए जीरे को हवा-सील कंटेनरों में फ्रिज में स्टोर करें।
कैसे करें जीरे का सेवन-
भुनी हुई हींग , काला नमक और जीरा समान मात्रा में लेकर चूर्ण बना लें. इसे 1-3 ग्राम की मात्रा में दिन में 2 बार दही के साथ लेने से भी मोटापा कम होता है. इससे शरीर में फालतू चर्बी तो निकलती ही है, साथ ही कोलेस्ट्रॉल भी घटता है और खून का परिसंचरण तेजी से होता है.
.एक गिलास पानी में एक बड़ा चम्मच जीरा रात भर भिगोकर रख दें. सुबह इसे उबालें और चाय की तरह इस पानी को पीएं. बचा हुआ जीरा खा लें. इसके रोजाना सेवन से शरीर में फालतू चर्बी निकल जाती है लेकिन इस बात को ध्यान में रखें कि इस पानी को पीने के बाद 1 घंटें तक कुछ न खाएं.
वेट लॉस के लिए क्यू्मिन ड्रिंक बनाएं. इसके लिए रात में दो चम्मच जीरे को पानी में भिगो दें और सुबह इसे उबाल लें. सीड्स को पानी से अलग कर दें और पानी में आधा नींबू निचोड़े. सुबह इसे खाली पेट पीएं. लगातार दो सप्ताह तक ऐसा करें.
जीरे को वजन कम करने के लिए और भी कई तरीके से लिया जा सकता है. जीरे पाउडर को दही के साथ मिलाकर भी लिया जा सकता है. एक चम्मच जीरे को 5 ग्राम दही में मिलाकर रोजाना लें.
.3 ग्राम जीरे के पाउडर को पानी में मिला कर इसमें कुछ बूंदें शहद की मिलालें और इसे पीएं.
.वेजिटेबल सूप बनाकर इसमें एक चम्मच क्यूमिन पाउडर डालकर लें.
.ब्राउन राइस में भी जीरा पाउडर डालकर सेवन करने से फायदा होता है.
जीरे के साथ अदरक और नींबू का सेवन करने से जल्दी वजन कम होता है. अदरक को काट लें और गाजर के साथ अन्य सब्जियों को उबालें. इसमें जीरा पाउडर, नींबू और कटी हुई अदरक डालें. रात में इस सूप को पीने से वजन कम करने में फायदा होगा.
जीरे के नुकसान-
जीरा एक ऐसा मसाला है जिसके बिना तो भारतीय व्यंजनों की कल्पना करना भी असंभव सा लगता है। सभी प्रकार के भारतीय व्यंजनों में स्पेशल स्वाद के कारण जीरा का उपयोग किया जाता है।
लेकिन क्या आपजानते हैं कि जीरे के कई प्रकार के दुष्प्रभाव भी होते हैं जीरे का अधिक सेवन पाचन संबंधी समस्या, हार्टबर्न का एक कारण हो सकता है।जीरे के वातहर प्रभाव के कारण यह अत्यधिक डकार का कारण बन सकता है।
जीरे से गर्भवती महिलाओं पर गर्भान्तक प्रभाव पड़ सकता है। ज्यादा मात्रा में जीरे के सेवन से गर्भपात या समय से पहले डिलीवरी होने की आंशका बढ़ जाती है। इसलिए गर्भवती महिलाओं को जीरे के अधिक सेवन से बचना चाहिए।





गुरुवार, 17 अगस्त 2017

खीरा खाने के अद्भुत फायदे // The amazing benefits of eating cucumber





बालों व त्वचा की देखभाल

खीरे में सिलिकन व सल्फर बालों की ग्रोथ में मदद करते हैं। अच्छे परिणाम के लिए आप चाहें तो खीरे के जूस को गाजर व पालक के जूस के साथ भी मिलाकर ले सकते हैं। फेस मास्क में शामिल खीरे के रस त्वचा में कसाव लाता है। इसके अलावा खीरा त्वचा को सनबर्न से भी बचाता है। खीरे में मौजूद एस्कोरबिक एसिड व कैफीक एसिड पानी की कमी( जिसके कारण आंखों के नीचे सूजन आने लगती है।) को कम करता है।
शरीर को जलमिश्रित रखने में मदद करता है
खीरे में 95% पानी रहता है। इसलिए यह शरीर से विषाक्त और अवांछित पदार्थों को निकालने में मदद करके शरीर को स्वस्थ
 और जलमिश्रित रखने में मदद करता है।
मासिक धर्म में फायदेमंद
खीरे का नियमित सेवन से मासिक धर्म में होने वाली परेशानियों से छुटकारा मिलता है। लड़कियों को मासिक धर्म के दौरान काफी परेशानी होती है, वो दही में खीरे को कसकर उसमें पुदीना, काला नमक, काली मिर्च, जीरा और हींग डालकर रायता बनाकर खाएं इससे उन्हें काफी आराम मिलेगा।

मसूडे स्वस्थ रखता है

खीरा खाने से मसूडों की बीमारी कम होती हैं। खीरे के एक टुकड़े को जीभ से मुंह के ऊपरी हिस्से पर आधा मिनट तक रोकें। ऐसे में खीरे से निकलने वाला फाइटोकैमिकल मुंह की दुर्गंध को खत्म करता है।
विटामिन के का अच्छा माध्यम
खीरे के छिलके में विटामिन-के पर्याप्त मात्रा में मिलता है. ये विटामिन प्रोटीन को एक्ट‍िव करने का काम करता है. जिसकी वजह से कोशिकाओं के विकास में मदद मिलती है. साथ ही इससे ब्लड-क्लॉटिंग की समस्या भी पनपने नहीं पाती है।
कैंसर से बचाए
खीरा के नियमित सेवन से कैंसर का खतरा कम होता है। खीरे में साइकोइसोलएरीक्रिस्नोल, लैरीक्रिस्नोल और पाइनोरिस्नोल तत्व होते हैं। ये तत्व सभी तरह के कैंसर जिनमें स्तन कैंसर भी शामिल है के रोकथाम में कारगर हैं।
मुँह के बदबू से राहत दिलाता है
अगर मुँह से बदबू आ रही है तो कुछ मिनटों के लिए मुँह में खीरे का टुकड़ा रख लें क्योंकि यह जीवाणुओं को मारकर धीरे-धीरे बदबू निकलना कम कर देता है। आयुर्वेद के अनुसार पेट में गर्मी होने के कारण मुँह से बदबू निकलता है, खीरा पेट को शीतलता प्रदान करने में मदद करता है।
पाचन के लिए फायदेमंद
खीरे के छिलके में ऐसे फाइबर मौजूद होते हैं जो घुलते नहीं है. ये फाइबर पेट के लिए संजीवनी बूटी की तरह काम करता है. कब्ज की परेशानी को दूर करने में भी ये कारगर है. खीरे के छिलके से पेट अच्छी तरह साफ हो जाता है।


यह हैंगओवर को कम करने में मदद करता है

शराब पीने के बहुत सारे दुष्परिणाम होते हैं उनमें अगले दिन का हैंगओवर बहुत ही कष्ट देनेवाला होता है। इससे बचने के लिए आप रात को सोने से पहले खीरा खाकर सोयें। क्योंकि खीरे में जो विटामिन बी, शुगर और इलेक्ट्रोलाइट होते हैं वे हैंगओवर को कम करने में बहुत मदद करते हैं।
वजन कम करने में सहायक
अगर आप वजन कम करना चाह रही हैं तो आज से खीरे के छिलके को अपनी डाइट का हिस्सा बना लें. वैसे तो खीरा भी वजन कम करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है लेकिन छिलके के साथ इसका सेवन करना और भी अधिक फायदेमंद रहता है।
     सलाद के तौर पर प्रयोग किए जाने वाले खीरे में इरेप्सिन नामक एंजाइम होता है, जो प्रोटीन को पचाने में सहायता करता है। खीरा पानी का बहुत अच्छा स्रोत होता है, इसमें 96% पानी होता है। खीरे में विटामिन ए, बी1, बी6 सी,डी पौटेशियम, फास्फोरस, आयरन आदि प्रचुर मात्रा में पाये जाते हैं। नियमित रुप से खीरे के जूस शरीर को अंदर व बाहर से मजबूत बनाता है।



मधुमेह व रक्तचाप में फायदेमंद

मधुमेह व रक्तचाप की समस्या से बचने के लिए नियमित रुप से खीरे का सेवन फायदेमंद हो सकता है। खीरे के रस में वो तत्व हैं जो पैनक्रियाज को सक्रिय करते हैं। पैनक्रियाज सक्रिय होने पर शरीर में इंसुलिन बनती है। इंसुलिन शरीर में बनने पर मधुमेह से लड़ने में मदद मिलती है। खीरा खाने से कोलस्ट्रोल का स्तर कम होता है। इससे हृदय संबंधी रोग होने की
 आशंका कम रहती है। खीरा में फाइबर, पोटैशियम और मैगनीशियम होता है जो ब्लड प्रेशर दुरुस्त रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। खीरा हाई और लो ब्लड प्रेशर दोनों में ही एक तरह से दवा का कार्य करता है।

आंखों के लिए लाभकारी

अक्सर फेसपैक लगाने के बाद आंखों की जलन से बचने के लिए खीरे को स्लाइस की तरह काटकर आंखों की पलक के ऊपर पर रखते हैं। इससे आंखों को ठंडक मिलती है। खीरा की तासीर जलन कम करने की होती है। जरूरी नहीं है कि सिर्फ फेसपैक लगाने के बाद ही ऐसा कर सकते हैं। जब भी आंखों में जलन महसूस हो तो आप खीरे की मदद ले सकते हैं।







सोमवार, 14 अगस्त 2017

अपराजिता के गुण औषधीय उपयोग // Medicinal Properties of Aparajita


आयुर्वेद के ग्रंथों में बताई गई एक बहुत ही उपयोगी जड़ी बूटी अपराजिता पौधा है. ये कई औषधीय उपयोगों के साथ एक बहुत ही सुंदर घास से बनी होती है. अपराजिता पौधा का शरीर की संचार तंत्रिका और मनोवैज्ञानिक सिस्टम पर एक बहुत सुखदायक प्रभाव पड़ता है.
अंग्रेजी नाम - क्लितोरिया , हिन्दी नाम - कोयाला , संस्कृत नाम - कोकिला , बंगाली नाम - अपराजिता , गुजराती नाम - गरणी, मलयालम नाम - शंखपुष्पम, मराठी नाम - गोकर्णी, तमिल नाम - कक्कानम, तेलुगु नाम - शंखपुष्पम, यूनानी नाम – मेज़ेरिओन


अपराजिता पौधे की पत्तियां उज्ज्वल हरी और उज्ज्वल नीले रंग की होती है. इसके फूल का रंग सफेद होता है.ये कभी-कभी शंख रूप में उगता है. ये भारत, मिस्र, अफगानिस्तान, फारस, मेसोपोटामिया, इराक आदि के सभी भागों में पाया जाता है.
अपराजिता पौधे के सभी भागों को औषधीय उद्देश्य के लिए इस्तेमाल किया जाता हैं. अपराजिता पौधा सामान्य तौर पर आयुर्वेद के पंचकर्म उपचार में प्रयोग किया जाता है. आयुर्वेद का पंचकर्म उपचार शरीर में से टॉक्सिन्स को निकालकर शरीर के संतुलन में सहायता करता है.
शरीर के आंतरिक विषहरण के लिए ये बहुत प्रभावी उपचार हैं. नर्वस सिस्टम को ठीक करने के लिए के लिए अपराजिता पौधे का उपयोग किया जाता है.
आयुर्वेद में अपराजिता जड़ी बूटी को मेध्या श्रेणी के अंतर्गत वर्गीकृत किया जाता है. मेध्या जड़ी बूटिया याददाश्त और लर्निंग सुधारने में मदद करती हैं. ये मस्तिष्क के विकास की समस्याओं और इम्पैरेड कॉग्निटिव फंक्शन की समस्याओं से पीड़ित बच्चों के लिए बहुत मददगार है.
अपराजिता जड़ी बूटी डिटॉक्सिफिकेशन और मस्तिष्क की आल राउंड क्लीनिंग और उससे संबंधित स्ट्रक्टर्ज़ में मदद करती है.
अपराजिता जड़ी बूटी वॉइस क़्वालिटी और गले की समस्याओं में सुधार के लिए फायदेमंद है.
अपराजिता पौधे की जड़ को अक्सर त्वचा पर लेप बनाकर प्रयोग किया जाता है और इससे चेहरे की चमक बढ़ती है. यह आंखों पर एक बहुत कूलिंग प्रभाव डालता है. यह आँखों रोशनी में सुधार करने में मदद करता है.


अपराजिता पौधा पुरुषों में स्पर्म जनरेशन की प्रक्रिया में सुधार करने में मदद करता है. नपुंसकता मुद्दों के लिए ये बहुत अच्छा विकल्प है.
* अगर सांप के विष का असर चमड़ी के अन्दर तक हो गया हो तो अपराजिता की जड़ का पावडर 12 ग्राम की मात्रा में घी के साथ मिला कर खिला दीजिये। - सांप का ज़हर खून में घुस गया हो तो जड़ का पावडर 12 ग्राम दूध में मिला कर पिला दीजिये। - सांप का जहर मांस में फ़ैल गया हो तो कूठ का पावडर और अपराजिता का पावडर 12-12 ग्राम मिला कर पिला दीजिये। - अगर इस जहर की पहुँच हड्डियों तक हो गयी हो तो हल्दी का पावडर और अपराजिता का पावडर मिलाकर दे दीजिये। - दोनों एक एक तोला हों अगर चर्बी में विष फ़ैल गया है तो अपराजिता के साथ अश्वगंधा का पावडर मिला कर दीजिये और सांप के जहर ने आनुवंशिक पदार्थों तक को प्रभावित कर डाला हो तो - अपराजिता की जड़ का 12 ग्राम पावडर ईसरमूल कंद के 12 ग्राम पावडर के साथ दे दीजिये। इन सबका 2 बार प्रयोग करना काफी होगा। लेकिन सांप के विष की पहुँच कहाँ तक हो गयी है ये बात कोई बहुत जानकार व्यक्ति ही आपको बता पायेगा। - मेडिकल साइंस तो कहता है कि ज़हर की गति सांप की जाति पर निर्भर करती है लेकिन वे सांप जिन्हें जहरीला नहीं माना जाता जैसे पानी वाले सांप उनका जहर वीर्य तक पहुँचने में 5 दिन का समय ले लेता है और आने वाली संतान को प्रभावित करता है अतः सांप के ज़हर का निवारण जरूर कर लेना चाहिए। गा। - मेडिकल साइंस तो कहता है कि ज़हर की गति सांप की जाति पर निर्भर करती है लेकिन वे सांप जिन्हें जहरीला न नहीं माना जाता जैसे पानी वाले सांप उनका जहर वीर्य तक पहुँचने में 5 दिन का समय ले लेता है और आने वाली संतान को प्रभावित करता है अतः सांप के ज़हर का निवारण जरूर कर लेना चाहिए।
पानी वाले सांप उनका जहर वीर्य तक पहुँचने में 5 दिन का समय ले लेता है और आने वाली संतान को प्रभावित करता है अतः सांप के ज़हर का निवारण जरूर कर लेना चाहिए।

* श्वेत कुष्ठ (सफेद दाग) :

श्वेत कुष्ठ पर अपराजिता की जड़ 20 ग्राम, चक्रमर्द की जड़ 1 ग्राम, पानी के साथ पीसकर, लेप करने से लाभ होता है। इसके साथ ही इसके बीजों को घी में भूनकर सुबह-शाम पानी के साथ सेवन करने से डेढ़ से 2 महीने में ही श्वेत कुष्ठ में लाभ हो जाता है। 

*चेहरे की झाँइयां :



मुंह की झांईयों पर अपराजिता की जड़ की राख या भस्म को मक्खन में घिसकर लेप करने से मुंह की झांई दूर हो जाती है। 

*आधाशीशी यानी आधे सिर का दर्द (माइग्रेन) :

अपराजिता के बीजों के 4-4 बूंद रस को नाक में टपकाने से आधाशीशी का दर्द भी मिट जाता है। Note : यहाँ जिन भी औषधियों के नाम आए है ये आपको पंसारी या कंठालिया की दुकान जो जड़ी-बूटी रखते है, उनके वहाँ मिलेगी। इस लेख के माध्यम से लिखा गया यह उपचार हमारी समझ में पूरी तरह से हानिरहित हैं । फिर भी आपके आयुर्वेदिक चिकित्सक के परामर्श के बाद ही इनको प्रयोग करने की हम आपको सलाह देते हैं । ध्यान रखिये कि आपका चिकित्सक आपके शरीर और रोग के बारे में सबसे बेहतर जानता है और उसकी सलाह का कोई विकल्प नही होता है ।

* सिर दर्द :

अपराजिता की फली के 8-10 बूंदों के रस को अथवा जड़ के रस को सुबह खाली पेट एवं सूर्योदय से पूर्व नाक में टपकाने से सिर का दर्द ठीक हो जाता है। इसकी जड़ को कान में बांधने से भी लाभ होता है। 

*त्चचा के रोग :

अपराजिता के पत्तों का फांट (घोल) सुबह और शाम पिलाने से त्वचा सम्बंधी सारे रोग ठीक हो जाते हैं। 

*पीलिया :

पीलिया, जलोदर और बालकों के डिब्बा रोग में अपराजिता के भूने हुए बीजों के आधा ग्राम के लगभग महीन चूर्ण को गर्म पानी के साथ दिन में 2 बार सेवन कराने से पीलिया ठीक हो जाती है।