16/3/10

केन्सर रोग से लड़ने के सरल उपचार. how to treat and tackle cancer?

केंसर रोग हितकारी  चिकित्सा.

                                       

         केन्सर एक बीमारी नही है,अपितु लगभग १०० रोगों के सम्मिलित समूह का नाम है। इस रोग मे शरीर की कोषिकाओं (Cells) की अनियन्त्रित वृद्धि होने लगती है  और ये अनियमित आकार की कोषिकाएं अपने मूल पैदाईशी स्थान से शरीर के अन्य दूरस्थ भागों को अभिगमन करने लगती हैं। अगर इन  केन्सर सेल्स को समय रहते रोका नहीं गया तो रोगी की मृत्यु  हो जाती है।

    यह रोग वैसे तो हर उम्र में हो सकता है लेकिन आंकडों पर नजर डाली जावे तो ६० प्रतिशत केन्सर रोगी ६५  साल से ज्यादा आयु के लोग होते हैं।
      
      जब जांच कराने के बाद मालूम हो जाये कि केन्सर अस्तित्व में आ चुका है तो रोगी को केन्सर पैदा करने वाली चीजों से परहेज करना चाहिये-
  १..तम्बाखू.
२..ज्यादा शराब पीना.
 ३..अधिक कैफ़िन तत्व युक्त पदार्थ जैसे चाय और काफ़ी.
 ४..एक्स-रे.
  ५..सिर के उपर से गुजरने वाली अतिशक्ति, हाई पावर विद्युत लाईन  
६..भोजन के पदार्थों में रंग मिश्रित करना।
     केन्सर रोगी के शरीर में विजातीय याने अनावश्यक जहरीले द्रव्यों का संग्रह मौजूद रहता है और इस रोग के इलाज में पहली जरूरत इन विजातीय पदार्थों को शरीर से बाहर निकालना है।विजातीय पदार्थों के शरीर से निष्कासन होने से हमारा प्रतिरक्षा तन्त्र मजबूत होता है और शरीर में केन्सर से लडने की ताकत पैदा होती है।

         जहरीले विजातीय पदार्थों के निष्कासन के लिये क्या करें?

१) अदरक का रस दो चम्मच दिन में दो मर्तबा पीयें।

२) अंग्रेजी औषधी Inositol  ८०० एम जी प्रतिदिन लेते रहें।

३) अंग्रेजी दवा ग्लुटाथिओन १५० एम.जी रोज लें।

४) लिपोईक एसिड ६०० एम जी प्रतिदिन लें।

उक्त  दवाएं किसी जानकार चिकित्सक के मार्ग दर्शन में लेना फ़ायदेमंद रहेगा।





१) हल्दी


२)लहसुन

३)फ़ोलिक एसिड

  ४)अलसी का तेल १५ ग्राम प्रतिदिन

 ५  सेलेनिअम ४०० एम जी  प्रतिदिन

 ६)विटामिन   ई  ८०० एम जी रोज।

  केन्सर से लडने के लिये हम क्या खाएं?




   अंकुरित गेहूं याने जुवारे २० ग्राम मिक्सर में पीसकर रस बनाकर प्रतिदिन पीयें। इससे नया खून बनेगा और केन्सर से लडने की ताकत बढेगी।


 लहसुन और प्याज प्रचुर मात्रा में सेवन करना केन्सर रोग में हितकारी उपाय है।


  पत्तेदार हरी सब्जीयां,लाल मिर्च, अंगूर बैर,गाजर इन भोजन पदार्थों में एन्टि ओक्सीडेन्ट तत्व होते हैं जो केन्सर के विरुद्ध लडाई में मददगार होते हैं।

      इनके अलावा केन्सर रोगी को निम्न पदार्थों का प्रचुर मात्रा में सेवन करने की सलाह दी जाती है--फ़ूल गोभी. पत्तागोभी, ब्रोकली,  आलू, मक्का, भूरे चावल ,मछली,अखरोट और सेव फ़ल।

      सबसे जरूरी बात ये है कि केन्सर के सेल्स याने कोषिकाओं का  पोषण बंद करना चाहिये जिससे केन्सर की कोषिकाएं भूखे मरकर समाप्त होने लगे।  इसके  लिये निम्न बातों पर ध्यान दें---

१)  शकर ऐसा पदार्थ है जिससे केन्सर को पोषण मिलता है। अत: शकर का उपयोग करना छोड दें, इसकी जगह थौडी मात्रा में शहद या  गुड ले सकते हैं।


   २)  दूध मे श्लेष्मा होती है।  आंतों में मौजूद श्लेष्मा केन्सर कोषिकाओं का पोषण करती है अत: दूध और दूध से बने पदार्थ उपयोग में न लाएं।  हां,सोयाबीन का दूध ले सकते हैं।  फ़लत: केन्सर के सेल्स भूखों मरेंगे और समाप्त होने लगेंगे।

  




३) केन्सर सेल्स अम्लीय वातावरण में तेजी से पनपते हैं। मंसाहार अम्लीय गुण वाला होता है। इसलिये कुछ और जीने   की तमन्ना हो तो  केन्सर रोगी मांसाहार छोड दें।








४)  काफ़ी,चाय,चाकलेट में ज्यादा मात्रा में केफ़िन तत्व होता है जो केन्सर को बढावा देता है,अत: इनका त्याग आवश्यक है।






५)  केन्सर सेल्स का आवरण मजबूत प्रोटीन से बना होता है  जब मांसाहार से परहेज करेंगे तो शरीर मे अधिक मात्रा में एन्जाईम उत्पादन होंगे और ये एन्जाईम केन्सर सेल्स की दीवारो पर चोट कर उन्हें नष्ट करेंगे।और ये एन्जाईम हमारे शरीर के स्वस्थ्य सेल्स को ताकत देंगे  जिससे वे केन्सर के सेल्स को नष्ट कर सकेंगे।



६)  केन्सर के सेल्स भरपूर आक्सीजन युक्त वातावरण में जीवित नहीं रह सकते। अत: शरीर में आक्सीजन का प्रवाह बढाने के लिये बाबा राम देवजी के बताये प्राणायाम करने लाभदायक रहेंगे।

   कच्चा भोजन फ़ायदेमंद है-


      केन्सर रोगी के भोजन में ८० प्रतिशत सब्जियों का रस जरूरी है। अनाज के बीज,सूखे मेवे और कुछ फ़ल भी ले सकते हैं।  बाकी २० प्रतिशत भोजन पकाया हुआ या उबाला हुआ लेना चाहिये। यह केन्सर रोगी का आदर्श भोजन विधान है।



    ताजा सब्जीयों में ऐसे एन्जाईम होते हैं जो शीघ्र ही  हमारी कोशिकाओं की  गराई तक पहुंच जाते हैं  जिससे स्वस्थ सेल्स का निर्माण होता है  । सभी तरह की सब्जीयों का  रस पियें और कच्ची सब्जियां भी भरपूर तादाद में इस्तेमाल करें।





 एक ताजा शोध में यह प्रमाणित हुआ है कि तुलसी और पुदिने में ऐसे रासायनिक तत्व काफ़ी मात्रा में पाये जाते हैं जिनमें केन्सर उत्पादक फ़्री रेडिकल्स से लडने की शक्ति मौजूद रहती है।




   वैसे तो केन्सर का कारगर ईलाज जैसी कोई बात  अभी तक इस दुनियां में नहीं है लेकिन मेरे बताये कुदरती उपचारों से केन्सर रोगी की जीवन रेखा में ईजाफ़ा होगा और क्वालिटी आफ़ लाईफ़  में भी सुधार होगा।मन मजबूत बनाकर निर्देशों के मुताबिक अपनी जीवनशैली निर्धारित करें।
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