21/4/10

प्रोस्टेट ग्रंथि बढ़ जाने के सरल उपचार : Home Remeduies to Cure Enlarged Prostate

  



प्रोस्टेट एक छोटी सी ग्रंथि होती है जिसका आकार अ्खरोट के बराबर होता है। यह पुरुष के मूत्राषय के नीचे और मूत्रनली के आस-पास होती है।


५० की आयु के बाद बहुधा प्रोस्टेट ग्रन्थि का आकार बढने लगता है।इसमें पुरुष के सेक्स हार्मोन प्रमुख भूमिका होती है। जैसे ही प्रोस्टेट बढती है मूत्र नली पर दवाब बढता है और पेशाब में रुकावट की स्थिति बनने लगती है। पेशाब पतली धार में ,थोडी-थौडी मात्रा में लेकिन बार-बार आता है कभी-कभी पेशाब टपकता हुआ बूंद बूंद जलन के साथ भी आता है। कभी-कभी पेशाब दो फ़ाड हो जाता है। रोगी मूत्र रोक नहीं पाता है। रात को बार -बार पेशाब के लिये उठना पडता जिससे नीद में व्यवधान पडता है।
यह रोग ७० के उम्र के बाद उग्र हो जाता है। पेशाब पूरी तरह रूक जाने पर चिकित्सक केथेटर लगाकर यूरिन बेग में मूत्र का प्रावधान करते हैं।
यह देखने में आया है कि ६० के पार ५०% पुरुषों और ७०-८० की आयु पार कर चुके लगभग ९०% पुरुषों में प्रोस्टेट वृद्धि के लक्षण दिखाई पडते हैं।
प्रोस्टेट वृद्धि के लक्षण--
१) पेशाब करने में कठिनाई मेहसूस होना।
२) थौडी २ देर में पेशाब की हाजत होना। रात को कई बार पेशाब के लिये उठना।
३) पेशाब की धार चालू होने में विलंब होना।
४) मूत्राषय पूरी तरह खाली नहीं होता है। मूत्र की कुछ मात्रा मूत्राषय में शेष रह जाती है। इस शेष रहे मूत्र में रोगाणु पनपते हैं।
५) मालूम तो ये होता है कि पेशाब की जोरदार हाजत हो रही है लेकिन बाथरूम में जाने पर बूंद-बूंद या रुक-रुक कर पेशाब होता है।
६) पेशाब में जलन मालूम पडती है।
७) पेशाब कर चुकने के बाद भी मूत्र की बूंदे टपकती रहती हैं, याने मूत्र पर नियंत्रण नहीं रहता।
८) अंडकोषों में दर्द उठता रहता है।
९) संभोग में दर्द के साथ वीर्य छूटता है।

आधुनिक चिकित्सा में इस रोग को स्थाई तौर पर ठीक करने वाली कोई सफ़ल औषधि इजाद नहीं हुई है। इसलिये रोगी को आपरेशन की सलाह दी जाती है। इस आपरेशन में लगभग २० हजार का खर्च बैठता है। ऐसा भी देखने में आता है कि आपरेशन के कुछ साल बाद फ़िर मूत्र रूकावट के हालात बनने लगते हैं।
    अपने दीर्घकालिक अनुभव के आधार पर बुजुर्गों को परेशान करने वाली इस बीमारी को नियंत्रित करने वाले कुछ घरेलू उपचार यहां प्रस्तुत कर रहा हूं जिनका समुचित प्रयोग करने से इस व्याधि पर नियंत्रण पाया जा सकता है|
१) दिन में ३-४ लिटर पानी पीने की आदत डालें। लेकिन शाम को ६ बजे बाद जरुरत मुताबिक ही पानी पियें ताकि रात को बार बार पेशाब के लिये न उठना पडे।.

२) अलसी को मिक्सर में चलाकर पावडर बनालें । यह पावडर २० ग्राम की मात्रा में पानी में घोलकर दिन में दो बार पीयें। बहुत लभदायक उपचार है।
3) कद्दू में जिन्क पाया जाता है जो इस रोग में लाभदायक है। कद्दू के बीज की गिरी निकालकर तवे पर सेक लें। इसे मिक्सर में पीसकर पावडर बनालें। यह चूर्ण २० से ३० ग्राम की मात्रा में नित्य पानी के साथ लेने से प्रोस्टेट सिकुडकर मूत्र खुलासा होने लगता है।
४) चर्बीयुक्त ,वसायुक्त पदार्थों का सेवन बंद कर दें। मांस खाने से भी परहेज करें।
५) हर साल प्रोस्टेट की जांच कराते रहें ताकि प्रोस्टेट केंसर को प्रारंभिक हालत में ही पकडा जा सके।

६) चाय और काफ़ी में केफ़िन तत्व पाया जात है। केफ़िन मूत्राषय की ग्रीवा को कठोर करता है और प्रोस्टेट रोगी की तकलीफ़ बढा देता है। इसलिये केफ़िन तत्व वाली चीजें इस्तेमाल न करें।
७) सोयाबीन में फ़ायटोएस्टोजीन्स होते हैं जो शरीर मे टेस्टोस्टरोन का लेविल कम करते हैं। रोज ३० ग्राम सोयाबीन के बीज गलाकर खाना लाभदायक उपचार है।
८) विटामिन सी का प्रयोग रक्त नलियों के अच्छे स्वास्थ्य के लिये जरूरी है। ५०० एम जी की ३ गोली प्रतिदिन लेना हितकर माना गया है।
9) दो टमाटर प्रतिदिन अथवा हफ़्ते में कम से कम दो बार खाने से प्रोस्टेट केंसर का खतरा ५०% तक कम हो जाता है। इसमें पाये जाने वाले लायकोपिन और एन्टिआक्सीडेंट्स केंसर पनपने को रोकते हैं।

१०) नियमित अंतराल पर सेक्स करने से प्रोस्टेट ग्रन्थि का स्वास्थ्य ठीक रहता है। अत:अधिक संयम गैर जरूरी माना गया है। सेक्स की अति और अधिक संयम दोनो ठीक नहीं ।शारीरिक क्षमता के मुताबिक महीने में ५ से ८ बार सेक्स करने की सलाह दी जाती है।
११) जिन्क एवं विटामिन डी३ प्रोस्टेट बढने की बीमारी में उत्तम परिणाम प्रस्तुत करते हैं। ३० एम जी जिन्क प्रतिदिन लेने से अच्छे परिणाम आते हैं। विटामिन डी३ याने केल्सीफ़ेर्रोल ६०० एम जी प्रतिदिन लेना चाहिये।
१२) आधुनिक चिकित्सक इस रोग में बहुधा टेम्सुलोसीन और फ़ेनास्टरीड दवा का प्रयोग करते
हैं।
प्रोस्टेट केन्सर के घरेलू उपचार -
एलोवेरा-
ग्वार पाठा प्रोस्टेट केन्सर मे बहुत लाभदायक माना गया है|एलोवेरा मे केन्सर रोधी तत्व होते है जिससे केंसर की कोशिकाओं की बढ़त रूक जाती है| नियमित रूप से एलोवेरा का उपयोग करना चाहिए|
ग्रीन टी -
प्रोस्टेट केन्सर ग्रस्त मरीज को नियमित रूप से एक या दो कप ग्रीन टी सेवन करना चाहिए| ग्रीन टी मे केन्सर से लड़ने के तत्व पाये जाते हैं|
लहसुन-
लहसुन मे शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट्स पाये जाते हैं जैसे एलीसीन,सेलेनियम,विटामिन सी,विटामिन बी |इन तत्वों से केन्सर से बचाव होता है| लहसुन के सेवन से केन्सर को बढ्ने से रोका जा सकता है|
अंगूर-
अंगूर मे पोर्थोंसाईनिडीज़ तत्व मिलता है जो केन्सर के खिलाफ लड़ाई मे मदद करता है| यह तत्व शरीर मे एस्ट्रोजीन लेविल कम करता है फलस्वरूप केन्सर के ईलाज मे मदद मिलती है|
अमरूद और तरबूज -
अमरूद और तरबूज मे लाईकोपिन तत्व अधिक मात्रा मे होता है जी केन्सर रोधी होता है| केन्सर के मरीजों को इनका नियमित सेवन करना लाभप्रद रहता है|
सोयाबीन-
सोयाबीन मे ऐसे एंजाईम्स पाये जाते हैं जो हर प्रकार के केन्सर से निपटने मी सहायक होते हैं| आता: भोजन मे सोयाबीन का समावेश करें| सोयाबीन को अंकुरित कर खाना भी अधिक लाभप्रद है|
गेहूं के जवारे का रस -
अनुसंधान मे यह साबित हो चुका है कि प्रोस्टेट केन्सर मे व्हीट ग्रास जूस फायदेमंद है| इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है| यह केन्सर की कोशिकाओं की संख्या कम करता है| जवारे का रस पीने से शरीर से विषैले पदार्थ बाहर निकलते हैं|
१४) विशिष्ट परामर्श- 
   
हर्बल औषधि से बढी हुई प्रोस्टेट ग्रंथि की वजह से मूत्र रुकावट संबंधी तमाम समस्याओं का समाधान हो जाता है | जिन मरीजों को केथेटर नली से पेशाब हो रहा हो उनको नली से मुक्ति मिल जाती है और बिना तकलीफ पेशाब आने लगता है |प्रोस्टेट ग्रंथि के  अनेक रोग इस औषधि के प्रभाव क्षेत्र मे हैं|यह मरीज को आपरेशन से बचाने वाली औषधि है | दवा मंगाने के लिए वैध्य दामोदर से 98267-95656 पर कांटेक्ट कर सकते हैं|
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