रविवार, 1 दिसंबर 2013

घुटनों में दर्द मे घरेलू आयुर्वेदिक नुस्खे




घुटनों  की पीड़ा:कारण और निवारण-





                                                       --डॉ.दयाराम आलोक 





            
घुटना शरीर का  भार  सहता है,उसे सपोर्ट  करता है और  चलायमान बनाता है| लेकिन घुटनों में विकार आने पर  रोजमर्रा  के काम करने में कठिनाई महसूस होने लगती है|  जीवन में कभी न कभी  घुटनों के दर्द  की समस्या  से सभी स्त्री-पुरुषों को रूबरू होना ही पड़ता है|   कुछ लोग जवानी में ही इस दर्द की चपेट में आ जाते हैं  और बुढापा तो  घुटनों की पीड़ा  के लिए खास तौर पर जाना जाता है| 
       घुटनों के अंदरूनी या मध्य भाग में दर्द  छोटी मोटी चोंटों या  आर्थराईटीज के कारण हो सकता है|  लेकिन घुटनों के पीछे का दर्द  उस जगह द्रव संचय  होने से होता है इसे  बेकर्स  सिस्ट कहते हैं|  सीढ़ियों से नीचे उतरते वक्त  अगर घुटनों में दर्द होता है तो इसे नी केप  समस्या जाननी चाहिए | यह लक्षण  कोंट्रोमलेशिया का भी हो सकता है|  सुबह के वक्त उठने पर अगर आपके घुटनों में दर्द होता है तो इसे आर्थराई टीज की शुरू आत समझनी चाहिए\ चलने फिरने से यह दर्द धीरे-धीरे कम हो जाता है|  बिना किसी चोंट या  जख्म  के  अगर घुटनों  में सूजन दिखे तो  यह ओस्टियो आर्थ रा ईटीज,गाऊट अथवा जोड़ों का संक्रमण  की वजह से होता है| 





घुटनों के दर्द की चिकित्सा -


 
  घुटनों में दर्द को कम करने के लिए गरम या ठंडे पेड  से सिकाई की जरूरत  हो सकती है|  घुटनों में तीव्र  पीड़ा होने पर आराम की सलाह डी जाती है ताकि दर्द और सूजन कम हो सके\  फिजियो थेरपी  में चिकित्सक  विभिन्न  प्रक्रियाओं के द्वारा  घुटनों के दर्द  और सूजन को कम करने का प्रयास करते हैं\ 
     भोजन द्वारा इलाज के अंतर्गत  रोजाना ३-४ खारक  खाते रहने से घुटनों की शक्ति को बढ़ाया जा सकता  है| अस्थियों को मजबूत बनाए रखने के लिए केल्शियम का सेवन करना उपकारी है|  केल्शियम की ५०० एम् जी की गोली सुबह शाम लेते रहें| | दूध ,दही,ब्रोकली और मछली  में  पर्याप्त  केल्शियम होता है| 
     घुटनों के लचीलेपन को बढाने के लिए  दाल चीनी,जीरा,अदरक और हल्दी का उपयोग उत्तम फलकारी है|   इन पदार्थों में ऐसे तत्त्व पाए जाते हैं जो घुटनों  की सूजन और दर्द का निवारण करते हैं|
       गाजर  में जोड़ों में दर्द  को दूर करने के गुण मौजूद हैं |चीन में सैंकडों वर्षों  से गाजर का इस्तेमाल संधिवात  पीड़ा के लिए किया जाता रहा है| गाजर को पीस लीजिए और इसमें थोड़ा सा नीम्बू का रस मिलाकर  रोजाना खाना उचित है| यह घुटनों के लिगामेंट्स  का पोषण कर  दर्द निवारण का काम करता है|
        मैथी के बीज संधिवात की पीड़ा निवारण करते हैं|  एक चम्मच मैथी बीज रात भर साफ़ पानी में गलने दें | सुबह  पानी निकाल दें और मैथी के बीज  अच्छी तरह चबाकर  खाएं|  शुरू में तो कुछ कड़वा  लगेगा  लेकिन बाद में कुछ मिठास  प्रतीत होगी|  भारतीय चिकित्सा में मैथी बीज  की गर्म तासीर मानी गयी है|  यह गुण जोड़ों के दर्द  दूर करने में मदद करता है|
      प्याज अपने सूजन विरोधी  गुणों  के कारण  घुटनों की पीड़ा में लाभकारी हैं| दर असल प्याज में फायटोकेमीकल्स पाए जाते हैं जो हमारे  इम्यून  सिस्टम  को ताकतवर बनाते हैं|  प्याज में पाया जाने वाला गंधक  जोड़ों में दर्द  पैदा करने वाले एन्जाईम्स  की उत्पत्ति रोकता है|  एक ताजा रिसर्च  में पाया गया है कि  प्याज में  मोरफीन  की तरह के पीड़ा नाशक गुण होते हैं|




    गरम तेल से हल्की मालिश करना घुटनों के दर्द में बेहद उपयोगी है|  एक बड़ा चम्मच  सरसों के तेल  में लहसुन की २ कुली पीसकर डाल दें | इसे गरम करें कि लहसुन  भली प्रकार पक जाए|  आच से उतारकर मामूली गरम हालत  में इस तेल से घुटनों या जोड़ों की मालिश करने से दर्द में तुरंत राहत मिल जाती है|  इस तेल में संधिवात की सूजन दूर करने के गुण  हैं|   घुटनों की पीड़ा निवारण की यह असरदार चिकित्सा है|
   जोड़ों की पीड़ा  दूर करने  के लिये   तेल निर्माण  करने का एक  बेहद  असरदार  फार्मूला  नीचे लिख रहा हूँ ,जरूर प्रयोग करें-
       काला उड़द १० ग्राम ,बारीक पीसा हुआ अदरक ५ ग्राम ,पीसा हुआ कर्पूर  २ ग्राम लें|  ये तीनों पदार्थ ५0 ग्राम सरसों के तेल में  ५ मिनिट तक गरम करें और  आंच से उतारकर  छानकर  बोतल में भर लें|  मामूली गरम  इस तेल से जोड़ों  की मालिश करने से दर्द में   आराम मिलता है|  दिन में २-३ बार मालिश करना उचित है|  यह तेल आर्थ्रराईटीज जैसे दर्दनाक रोगों में भी गजब का असर दिखाता है|
   प्रतिदिन नारियल की गिरी का सेवन करें|इससे घुटनों  को ताकत  आती है|
लगातार 20 दिनों तक अखरोट की गिरी खाने से घुटनों का दर्द समाप्त होता है।
       बिना कुछ खाए प्रतिदिन प्रात: एक लहसन कली, दही के साथ दो महीने तक लेने से घुटनों के दर्द में चमत्कारिक लाभ होता है। 
विशिष्ट परामर्श-  

संधिवात,,कमरदर्द,गठिया, साईटिका ,घुटनो का दर्द आदि वात जन्य रोगों में जड़ी - बूटी निर्मित हर्बल औषधि ही अधिकतम प्रभावकारी सिद्ध होती है| रोग को जड़ से निर्मूलन करती है| बिस्तर पकड़े पुराने रोगी भी दर्द मुक्त होकर चल फिर सकने योग्य हो जाते हैं||औषधि के लिए वैध्य दामोदर से 98267-95656 पर संपर्क करने की सलाह दी जाती है|

  





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