17/7/14

चाय पान के हानि -लाभ



    चाय के बारे में उपयोगी जानकारी.





    चाय  चीन,जापान,लंका एव. बर्मा  में प्रचुर मात्रा में उगाई जाती है\ भारत में विशेषत: देहरादून,नीलगिरी,दार्जिलिंग और आसाम में  चाय  की खेती की जाती है|






   चाय का प्रभाव  मृदु उत्तेजक होने से  ज्ञान तंतुओं पर इसका विशेष असर  पड़ता है| तृषा,माईग्रेन ,नेत्र शूल,बवासीर,शौथ,शिरोवेदना,मूत्र कष्ट,नाड़ी की अति दुर्बलता,,आँतों के रोग तथा चिरकारी वृक्क प्रदाह में चाय उपयोगी है| मस्तिष्क  के लिए चाय लाब्ज दायक है| यह निद्रा का नाश करने वाली है| जो जागृत रहना चाहते हैं चाय उनके लिए उत्तम है|  भारत में गुजरात के लोग चाय के काफी शौकीन प्रतीत होते हैं\ चाय,दूध,शकर आवश्यक मात्रा में लेकर खूब उबालते हैं फिर छानकर  पीते हैं|  लेकिन इस प्रकार से बनाई गयी चाय शरीर और मस्तिष्क को नुक्सान पहुंचाती है\



   चाय बनाने का सही तरीका यह है:-पानी,दूध,शकर आवश्यक मात्रा में उबालें|जब उबाल आ जाये तब नीचे उतारलें और उसमें  आवश्यक मात्रा में चाय पती डालकर  पांच से १० मिनिट  ढँक कर रखें| इसके बाद इसे छानने  के बाद कुछ नाश्ता करें फिर शांति पूर्वक चाय पान करें\  यह चाय शरीर के लिए आरोग्यप्रद है|  चाय को अधिक स्वादिष्ट बनाने के लिए पुदीना,इलायची ,काली मिर्च,सौंठ का पावडर ,लौंग  तुलसी के पत्ती  भी  इच्छानुसार  डाले जा सकते हैं\



     चाय में केफीन तत्त्व होता है जो  बेहद हानिकारक होता है|  यह मूत्रल  होता है,नाड़ी मंडल  को उत्तेजित करता है और  मांस पेशियों  की ताकत  में कमी लाता  है| केफीन शरीर में तुरंत अवशोषित हो जाता है| यह शरीर से पसीने के द्वारा बाहर निकलता है|  इसी केफीन के कारण चाय पीने पर स्फूर्ति का अनुभव होता है|  अत; केफीन का उपयोग  सर दर्द,मूत्र कृच्छ,जीर्ण वृक्क प्रदाह,ह्रदय तथा फेफड़े के शौथ पर होता है| चाय दिल की धडकन बढाती है|  चाय में टेनिन  नामक तत्त्व  भी होता है जो शरीर को हानि करता है\ इससे अनिद्रा रोग पैदा होता है|  आरोग्य की दृष्टी से केफीन और  टेनिक एसिड  दोनों   हानि कारक हैं|






    ज्यादा उबाली हुई चाय  में टेनिक एसिड  लीवर  को हानि पहुंचाता है|  यह रुधिर वाहिनियों की दीवारों को कठोर बनाता है|  रक्त संचरण में बाधा डालता है|  सस्ती तथा बारीक चुरा जैसी चाय में टेनिक एसीड  की मात्रा ज्यादा होती है|  चाय का अधिक व्यवहार करने से  दुर्बलता आती है चेहरा फीका पड जाता है, पाचन क्रिया मंद  और विकृत हो जाती है|  कब्ज की बीमारी लग जाती है|  ब्लड  प्रेशर  बढ़ जाता है|



   चाय के  अधिक सेवन  से  नींद न आना,वीर्य का पतलापन , सहनशीलता का नाश,,नाड़ी -शूल,हृदय की क्रिया अनियमित  होना, और छाती में दर्द  जैसे लक्षण उत्पना हो जाते है|  कड़क और ज्यादा मीठी चाय पीने के ज्यादा दुष्प्रभाव होते हैं|



    चाय के  विकल्प के तौर पर पुदीना,तुलसी,लौंग,इलायची,दूध,पानी,शकर आवश्यक मात्रा में  मिलाकर ,उबालकर छानकर पीजिए| यह शरीर और मन के लिए हितकारी है\







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