10/6/16

थायराईड ग्रंथि के विकार और उपचार



थायराईड ग्रंथि के विकार और उपचार

स्वस्थ शरीर में थाईराईड ग्रंथि टी३ और टी४ हारमोन स्रवित करती है जो शरीर के विभिन्न क्रिया-कलापों को प्रभावित करते हैं। ये हारमोन शरीर की चयापचय क्रिया को प्रभावित कर रोगी के वजन ,रोगी को गर्मी,सर्दी कितनी लगती है और हमारे शरीर में कितनी केलरी दहन होती है इन सभी बातों को नियंत्रित करने की क्षमता संपन्न होते हैं।



हाईपर थायराईडिस्म रोग में थाईराईड ग्रंथि बढ जाती है।ग्रंथि से अधिक मात्रा में हार्मोन्स का स्राव होने लगता है। ये हार्मोन्स हृदय की गति बढा देते हैं ,इतना ही नहीं ये हार्मोन्स शरीर् के अन्य अंगों को भी प्रभावित उनकी क्रियाशीलता में अभिवृद्धि कर देते हैं।

पुरुषों की बनिस्बत स्त्रियों में यह रोग ज्यादा पाया जाता है।रजोनिवृति के समय, मानसिक तनाव,गर्भावस्था के समय और यौवनारंभ के समय यह रोग अधिक प्रभावशाली हो जाता है।



रोग लक्षण:-
इस रोग से पीड़ित रोगी का वजन कम होने लगता है, शरीर में अधिक कमजोरी मेहसूस होने लगती है, गर्मी सहन नहीं होती है, शरीर से अधिक पसीना आने लगता है, अंगुलियों में कंपकपी होने लगती है तथा घबराहट होने लगती है। इस रोग के कारण रोगी का हृदय बढ़ जाता है, रोगी व्यक्ति को पेशाब बार-बार आने लगता है, याददाश्त कमजोर होने लगती है, भूख नहीं लगती है तथा उच्च रक्तचाप का रोग हो जाता है। इस रोग के कारण रोगी के बाल भी झड़ने लगते है। इस रोग की गिरफ़्त में आने पर स्त्रियों के मासिकधर्म में गड़बड़ी होने लगती है।अन्य लक्षण इस प्रकार हैं-
घबराहट,बैचेनी
नींद न आना,निद्राल्पता
श्वास में कठिनाई
आंतों की अधिक क्रियाशीलता.
ज्यादा थकावट मेहसूस होना
हृदय की चाल बढ जाना.
हाथों में कंपन्न होना
स्त्रियों में मासिक धर्म की मात्रा कम होना या मासिक धर्म बंद हो जाना.
पर्याप्त खाना खाने के बावजूद शरीर का वजन गिरते जाना।
मांसपेशियों में कमजोरी मेहसूस होना
त्वचा का गर्म और आर्द्र रहना
हायपो थायराईडिस्म याने थायराइड का सिकुड़ना-
इस रोग में थायराईड ग्रन्थि के द्वारा कम हारमोन बनने लगती है।
थायराइड के सिकुड़ने का लक्षण:-
रोगी व्यक्ति का वजन बढ़ने लगता है तथा उसे सर्दी लगने लगती है। रोगी को कब्ज की शिकायत रहने लगती है।रोगी के बाल की चमक खत्म होकर रुखे-सूखे हो जाते हैं। रोगी की कमर में दर्द, नब्ज की गति धीमी हो जाना, जोड़ो में अकड़न तथा चेहरे पर सूजन हो जाना आदि लक्षण प्रकट हो जाते हैं।
थायराईड ग्रंथि के रोगों के होने का कारण:- १) थायराईड के रोग अधिकतर शरीर में आयोडीन की कमी के कारण होते हैं।

२) यह रोग उन व्यक्तियों को भी हो जाता है जो अधिकतर पका हुआ भोजन करते हैं तथा प्राकृतिक भोजन बिल्कुल नहीं करते हैं। प्राकृतिक भोजन करने से शरीर में आवश्यकतानुसार आयोडीन मिल जाता है लेकिन पके हुए खाने में आयोडीन नष्ट हो जाता है।

३)मानसिक, भावनात्मक तनाव, गलत तरीके से खान-पान की वजह से भी रोग उत्पन्न होता है।








थायराईड रोगों का प्राकृतिक और घरेलू पदार्थों से उपचार:-
१) थायराईड रोगों का उपचार करने के लिए रोगी व्यक्ति को कुछ दिनों तक फलों का रस (नारियल पानी, पत्तागोभी, अनानास, संतरा, सेब, गाजर, चकुन्दर, तथा अंगूर का रस) पीना चाहिए तथा इसके बाद 3 दिन तक फल तथा तिल को दूध में डालकर पीना चाहिए। इसके बाद रोगी को सामान्य भोजन करना चाहिए जिसमें हरी सब्जियां, फल तथा सलाद और अंकुरित दाल अधिक मात्रा में हो। इस प्रकार से कुछ दिनों तक उपचार करने से रोग ठीक हो जाता है।



२) इस रोग से पीड़ित रोगी को कम से कम एक वर्ष तक फल, सलाद, तथा अंकुरित भोजन का सेवन करना चाहिए।



३) सिंघाड़ा, मखाना तथा कमलगट्टे का सेवन करना भी लाभदायक होता है।
४) घेंघा रोग को ठीक करने के लिए रोगी को 2 दिन के लिए उपवास रखना चाहिए और उपवास के समय में केवल फलों का रस पीना चाहिए। रोगी को एनिमा क्रिया करके पेट को साफ करना चाहिए। इसके बाद प्रतिदिन उदरस्नान तथा मेहनस्नान करना चाहिए।






५) थायराइड रोगों से पीड़ित रोगी को तली-भुनी चीजें, मैदा, चीनी, चाय, कॉफी, शराब, डिब्बाबंद खाद्य पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए।





६) एक कप पालक के रस में एक बड़ा चम्मच शहद मिलाकर फिर चुटकी भर जीरे का चूर्ण मिलाकर प्रतिदिन रात के समय में सोने से पहले सेवन करने से थायराइड रोग ठीक हो जाता है।
७) कंठ के पास गांठों पर भापस्नान देकर दिन में 3 बार मिट्टी की पट्टी बांधनी चाहिए और रात के समय में गांठों पर हरे रंग की बोतल का सूर्यतप्त तेल लगाना चाहिए।
८) इस रोग को ठीक करने के लिए सबसे पहले रोगी व्यक्ति को उन चीजों का भोजन में अधिक प्रयोग करना चाहिए जिसमें आयोडीन की अधिक मात्रा हो।





९) एक गिलास पानी में 2 चम्मच साबुत धनिये को रात के समय में भिगोकर रख दें तथा सुबह के समय में इसे मसलकर उबाल लें। फिर जब पानी चौथाई भाग रह जाये तो खाली पेट इसे पी लें तथा गर्म पानी में नमक डालकर गरारे करें। इस प्रकार से प्रतिदिन उपचार करने से थायराइड रोग ठीक हो जाता है।

थायराईड ग्रंथि के विकार और उपचार का विडियो -


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