25/6/16

आँखों की देखभाल और रोगों की चिकित्सा Home remedies of eye diseases



वैसे तो प्रकृति ने हमारी आंखों की रक्षा का प्रबंध बहुत ही अच्छे ढंग से कर रखा है। आंखों की बनावट इस प्रकार की है कि हडि्डयों से बने हुए कटोरे इनकी रक्षा करते हैं। आंखो के आगे जो दो पलकें होती हैं वे आंखों में धूल तथा मिट्टी तथा अन्य चीजों से रक्षा करती है। आंखो की अन्दरुनी बनावट भी इस प्रकार की है कि पूरी उम्र भर आंखे स्वस्थ रह सकती हैं। सिर्फ आंखों की अन्दरूनी रक्षा के लिए उचित आहार की जरुरत होती है जिसके फलस्वरूप आंखें स्वस्थ रह सकती हैं। सभी व्यक्तियों की आंखें विभिन्न प्रकार की होती हैं तथा उनके रंग भी अलग-अलग हो सकते हैं।
आंख के श्वेत भाग के रोग:- 
इस रोग के कारण रोगी व्यक्ति की आंख में जो श्वेत (सफेद भाग) होता है उस भाग में लाली या बिन्दु जैसा कोई आकार बन जाता है।
दृष्टिदोष से सम्बन्धित रोग:- 
इस रोग से पीड़ित रोग को आंखो से कुछ भी नहीं दिखाई देता है।
आंखो के आगे अन्धेरा छा जाना:- इस रोग के कारण रोगी व्यक्ति की आंखो के आगे अन्धेरा छाने लगता है तथा उसे कुछ भी नहीं दिखाई देता है।
आंखो से धुंधला नजर आना:-
इस रोग के कारण रोगी को आंखो से धुंधला नजर आने लगता है।
गुहांजनी (बिलनी या अंजनिया):-
इस रोग के होने के कारण रोगी व्यक्ति की आंखो की पलकों पर फुन्सियां हो जाती हैं।
मोतियाबिन्द:-
इस रोग के कारण रोगी व्यक्ति की आंखो के काले भाग में सफेदी सी छा जाती है जिसके कारण रोगी व्यक्ति को कम दिखाई पड़ने लगता है तथा उसकी आंखो का लेंस धीरे-धीरे धुंधला हो जाता है।
आंखो में खुजली होना:-
इस रोग के कारण रोगी व्यक्ति की आंखो में खुजली होने लगती है जो किसी अन्य रोग के होने का लक्षण भी हो सकता है।
आंखो में रोहे, रतौंधी:-
इस रोग से पीड़ित रोगी को रात के समय में दिखाई नहीं देता है।
आंखें पीली होना:- 
इस रोग के कारण रोगी की आंखो का सफेद भाग पीला हो जाता है। यह पीलिया रोग का लक्षण होता है।
बरौनियों का झड़ना:-
इस रोग के कारण रोगी व्यक्ति की आंखो की पलकों के बाल झड़ने लगते हैं।
दूर दृष्टिदोष:–
इस रोग से पीड़ित रोगी को दूर की वस्तुएं ठीक से दिखाई नहीं देती हैं या दिखाई देती भी हैं तो धुंधली-धुंधली सी।
निकट दृष्टिदोष –
इस रोग के कारण रोगी व्यक्ति को पास की वस्तुएं साफ-साफ दिखाई नहीं देती हैं।
अर्द्ध दृष्टिदोष (आंशिक दृष्टि):-
इस रोग के कारण रोगी व्यक्ति को कोई भी वस्तु साफ-साफ दिखाई नहीं देती है।
वक्र दृष्टिदोष:-
इस रोग से पीड़ित रोगी को कोई भी वस्तु टेढ़ी-मेढ़ी दिखाई देती है।
दिनौंधी:-
इस रोग के कारण रोगी व्यक्ति को दिन के समय में दिखाई नहीं देता है।
द्वि- दृष्टिदोष या भेंगापन:-
इस रोग के काण रोगी व्यक्ति को हर वस्तु 2 दिखाई देती हैं
वर्ण दृष्टिदोष या कलर ब्लाइण्डनेस:-

इस रोग से पीड़ित रोगी को आंखो से देखने पर किसी भी रंग की वस्तु के रंग की पहचान नहीं हो पाती है।
धूम दृष्टिदोष:-
इस रोग से पीड़ित रोगी को आंखो से देखने पर हर वस्तु धुंधली दिखाई देने लगती है।
कलान्तृष्टि:–
इस रोग से पीड़ित रोगी जब किसी भी वस्तु को ज्यादा देर तक देखता है तो उसकी आंखो में दर्द होने लगता है।
नजर कमजोर पड़ जाना:-
इस रोग से पीड़ित रोगी को आंखो पर चश्मा लगवाने की जरूरत पड़ जाती है। इस रोग में बिना चश्मे के रोगी व्यक्ति को कुछ भी नहीं दिखाई देता है या दिखाई देता भी है तो बहुत कम।
क्रोनिक कंजक्टिवाइटिस:
इस रोग से पीड़ित रोगी की आंखो से पानी निकलने लगता है तथा उसकी अश्रु ग्रन्थियां सूज जाती हैं। रोगी व्यक्ति को नींद भी नहीं आती है।
धुंआ :
हमारे चारों ओर का वातावरण विषैले धुएं से भर चुका है जिसके कारण जब हमारी आंखें विषैली धुंए के संपर्क में आती है तो आंखो में विभिन्न प्रकार के विकार उत्पन्न हो जाते हैं।
धूल :
वर्तमान समय में हमारे चारों ओर के वातावरण में धूल के कण विद्यमान हैं। धूल के कारण भी हमारी आंखो में रोग उत्पन्न हो जाते हैं।
रात को काफी देर में सोना :
रात को अधिक समय तक रोशनी में पढ़ना अथवा अधिक समय तक कार्य करना भी स्वास्थ्य की दृष्टि से आंखो के लिए हानिकारक होता है।
तेज धूप :
गर्मियों के मौसम में दोपहर के समय तेज धूप की किरणें हमारे आंखो की रोशनी के लिए हानिकारक होती है।
अधिक समय तक एक ही स्थान पर देखते रहना :
आंखो को लगातार एक ही जगह जमाकर रखने वाले कार्य जैसे कम्प्यूटर पर एकटक देखते रहना भी आंखो की रोशनी के लिए हानिकारक होता है। इसलिए आंखो को एक स्थान से हटाकर कुछ देर के लिए इधर-उधर भी देखना चाहिए।
आंखो के खराब होने के प्रमुख कारण:-
आंखो के रोग होने के विभिन्न कारण होते हैं जैसे- 

*अधिक गर्म खाद्य-पदार्थों का सेवन, नशीले पदार्थ, धूल के कण, अधिक सोचना, कम्यूटर या टी.बी. पर अधिक समय आंखे टिकाए रहना, अधिक समय तक सेक्स सम्बंधी बातों में लिप्त रहना, मधुमेह या मूत्र रोगों के कारण पुरानी कब्ज का होना, पूरी नींद न लेना तथा भोजन में पोषक तत्वों और विटामिन `ए´ की कमी होना आदि।
*आंखो की कुछ बीमारियां अनुवांशिक होती हैं।
*अधिक ठंड तथा गर्मी के कारण आंखो में कई प्रकार के रोग हो सकते हैं।
*उत्तेजक वस्तुओं के आंखो में प्रवेश करने के कारण भी आंखो के कई प्रकार के रोग हो सकते हैं।
*शरीर में दूषित द्रव्य के जमा होने के कारण भी आंखो में कई प्रकार के रोग हो सकते हैं।
*अधिक शराब पीने तथा विभिन्न प्रकार की दवाइयों के एलर्जियों के होने से व्यक्ति का स्वास्थ्य खराब हो जाता है जिसके कारण उसकी आंखें में कई प्रकार के रोग हो सकते हैं।
*शरीर में विटामिन ए तथा कई प्रकार के लवणों आदि की कमी के कारण आंखो के रोग हो सकते हैं।
अधिक पढ़ने-लिखने का कार्य करने तथा कोई भी ऐसा कार्य जिसके करने से आंखो पर बहुत अधिक जोर पड़ता है, के कारण आंखो में कई प्रकार के रोग हो सकते हैं।
*अधिक टेलीविजन देखने तथा कम्प्यूटर पर कार्य करने के कारण भी आंखो में रोग हो सकते हैं।
*आंखो में धूल-मिट्टी तथा कीड़े-मकोड़े जाने के कारण भी आंखो में कई प्रकार के रोग हो जाते हैं।
रात के समय में अधिक देर तक जागने तथा कार्य करने और पूरी नींद न लेने के कारण आंखो में कई प्रकार के रोग हो सकते हैं।
*कम्प्यूटर पर लगातार काम करने से उसकी स्क्रीन से निकलने वाली रोशनी आंखो में कई प्रकार के रोगों को जन्म दे सकती है क्योंकि उसकी रोशनी आंखो के लिए हानिकारक होती है।
*पढ़ते समय आंखो पर अधिक जोर देने से, अधिक चिंता करने से, अधिक सोच-विचार का कार्य करने के कारण भी आंखो में कई प्रकार के रोग हो जाते हैं।
*बस, चलती हुई रेलगाड़ी, टिमटिमाते हुए बल्ब देखने या कम प्रकाश में पढ़ने के कारण भी आंखो के रोग हो सकते हैं।
*अधिक क्रोध करने के कारण आंखो पर जोर पड़ता है जिसके कारण आंखो में कई प्रकार के रोग हो जाते हैं।
अधिक दु:ख का भाव होने तथा रोने से आंखो से आंसू निकलते है जिसके कारण आंखो के रोग हो सकते हैं।
*सिर में किसी प्रकार से तेज चोट लगने के कारण भी आंखो में कई प्रकार के रोग हो सकते हैं।

*जहर या अधिक उत्तेजक खाद्य पदार्थों का सेवन करने से भी आंखो के रोग हो सकते हैं।
सूर्य के प्रकाश को अधिक देर तक देखने के कारण भी आंखो के कई प्रकार के रोग हो सकते हैं।
वीर्य के वेग को बार-बार रोकने तथा सैक्स के प्रति कोई अनुचित कार्य करने जैसे हस्तमैथुन या गुदामैथुन करने के कारण भी आंखो के रोग हो सकते हैं।
अधिक संभोग करना तथा धातु रोग के कारण भी कई प्रकार के आंखो के रोग हो सकते हैं।
तेज बिजली की रोशनी में काम-काज करने के कारण भी आंखो के रोग हो सकते हैं।
दांतों से सम्बन्धित रोगों के होने के कारण भी आंखो में बहुत से रोग हो सकते हैं।
ठीक समय पर भोजन न करने, अनुचित ढंग से भोजन करने और जरूरत से अधिक भोजन करने के कारण भी आंखो से सम्बन्धित रोग हो सकते हैं।
मिट्टी के तेल वाली रोशनी में पढ़ने से, रास्ते में चलते-चलते पढ़ने से, दिन के समय में कृत्रिम रोशनी में कार्य करने तथा धूप में पढ़ने-लिखने का कार्य करने के कारण भी आंखो में रोग पैदा हो सकते हैं।
किसी भी न देखने योग्य या अनिच्छित वस्तु को देखने या किसी अंजान स्थान पर जाकर वहां की बहुत सी वस्तुओं को एक ही साथ देखने की कोशिश करने के कारण भी आंखो में रोग हो सकते हैं।

*चश्मे की आवश्यकता न होने पर भी अधिक समय तक चश्मा लगाए रखने के कारण भी आंखो के रोग हो सकते हैं।
*सोते समय अधिक सपनों को देखने के कारण भी आंखो में रोग हो सकते हैं।
*अपने सोने का स्थान खिड़की के ठीक सामने रखने के कारण भी आंखो में कई प्रकार के रोग हो सकते हैं।
सिलाई-कढ़ाई आदि का कार्य करते समय, सीने-पिरोने का काम करते समय, सुई की गति के साथ नजर को घुमाने के कारण भी आंखो में कई प्रकार के रोग हो सकते हैं।
*डर-चिंता, क्रोध, मानसिक रोग, दोषयुक्त कल्पना करने, अशुद्ध विचार रखने के कारण भी आंखो के बहुत से रोग हो सकते हैं।
*जब मन तथा आंखें आराम करना चाहते हो उस समय आराम न करने के कारण आंखो में कई प्रकार के रोग हो सकते हैं।


*स्त्रियों में माहवारी से सम्बन्धित कोई रोग होने के कारण भी उसे आंखो के रोग हो सकते हैं।







आंखो का लकवा :
आंखों के लकवा रोग की प्राकृतिक चिकित्सा के लिए हरे रंग की कांच की बोतल में पानी को भरकर उसे सूर्य के प्रकाश में रखकर उसमें औषधीय गुण लाते हैं। इसके बाद इस जल से दिन में तीन-चार बार आंखों को धोना चाहिए तथा हरे रंग की बोतल में गाय के शुद्ध घी को भरकर सूर्य के प्रकाश में गर्म करके प्रतिदिन 3-4 बार आंखों में डालने से तथा आंखों का व्यायाम करने से आंखों का लकवा ठीक हो जाता है।
आंखो की पलकों के ऊपरी भाग के बालों का झड़ना :
आंखों की पलकों के ऊपरी भाग के बालों का झड़ने की समस्या से छुटकारा पाने के लिए हरे रंग की कांच की बोतल में सूर्य किरणों द्वारा तैयार पानी को सुबह के समय खाली पेट प्यास के अनुसार पीना चाहिए। इसे लगभग 100 से 200 मिलीग्राम की मात्रा में पीना चाहिए। इसके लिए सूर्य के प्रकाश द्वारा तप्त (चार्ज) नीली कांच के बोतल में गाय के घी को आंखों के पलकों के ऊपर बालों पर लगाने से अथवा मालिश करने से पलकों के बालों का गिरना बंद हो जाता है। सूर्योदय के समय नीले रंग के सैलोफिन कागज की चार परत बनाकर लगभग 8 से 10 सेमी की दूरी पर रखकर 5-7 मिनट तक आंखों के ऊपर पलकों पर रोशनी देते हैं। ऐसा शाम के समय भी कर सकते हैं। सूर्य के अस्त होने के समय सूर्य की रोशनी अधिक गुणकारी होती है।
आंखो का सौंदर्य :
आंखो के सौंदर्य के लिए कांच के हरे रंग की बोतल में जल भरकर सूर्य की किरणों के प्रकाश द्वारा गर्म कर लेते हैं तथा आंखो को 3-4 बार धो लेते हैं। आंखो को धोने वाले यंत्र से आंखो को विभिन्न मुद्राओं में घुमाने से आंखें लचीली हो जाती हैं जिससे आंखो की चंचलता वापस लौट आती है। इसके बाद आंखो को कुछ देर तक खोलना, बंद करना, इधर-उधर घुमाना चाहिए। ऐसा करने से आंखो का व्यायाम हो जाता है।
आंखो पर अधिक जोर देने से उत्पन्न सिरदर्द :
आंखो से सम्बंधित कार्य करने से हुए सिरदर्द के इलाज के लिए कांच के हरे रंग की बोतल में जल भरकर सूर्य की किरणों के प्रकाश द्वारा गर्म कर लेते हैं तथा आंखो को 3-4 बार धो लेते हैं। इसके साथ ही सूर्य के प्रकाश द्वारा गर्म किये हुए गुलाब जल की 3-4 बूंदे दिन में 4-5 बार आंखो में डालने से सिर का दर्द ठीक हो जाता है। सिरदर्द को दूर करने के लिए सूर्य के प्रकाश में गर्म किया हुआ नीली बोतल के नारियल के तेल से सिर तथा पैरों के तलवे, कनपटी और मस्तक पर मालिश की जाती है।
आंखो में कीचड़ आना :
जब आंखो में कीचड़ आने लगे तो कुछ समय के लिए पढ़ना-लिखना बंद कर देना चाहिए। इसके इलाज के लिए कांच के हरे रंग की बोतल में जल भरकर सूर्य की किरणों के प्रकाश द्वारा गर्म कर लेते हैं तथा आंखो को 3-4 बार धोते हैं। इसके साथ ही सूर्य के प्रकाश द्वारा गर्म किये हुए तैयार गुलाबजल की 3-4 बूंदें दिन में 4-5 बार आंखो में डालनी चाहिए। यह क्रिया लगभग एक सप्ताह तक करने से आंखो के सभी रोगों में लाभ मिलता है।
आंखो के नीचे की फुंसी का प्राकृतिक इलाज :
इसके इलाज के लिए हरे रंग की कांच की बोतल में जल भरकर सूर्य किरणों के प्रकाश द्वारा गर्म कर लेते हैं। इस पानी से आंखो को दिन में 3-4 बार धोना चाहिए तथा हरे रंग की कांच की बोतल में गाय का शुद्ध घी भरकर उसे सूर्य के प्रकाश द्वारा गर्म करके तैयार कर लेते हैं। इस घी को आंखो में डालने से और 3-4 दिनों तक आंखो की पलकों के नीचे रखने से आंखो की पलकों के नीचे की फुंसियां ठीक हो जाती हैं।
आंखो का धुंध तथा जाला :
सूर्य किरण और रंग चिकित्सा के द्वारा तैयार किए शुद्ध गुलाबजल की तीन-चार बूंदें आंखोमें डालने से आंखो के धुंध तथा जाला जैसे रोगों में लाभ मिलता है। इसके अलावा हरे रंग की कांच की बोतल के पानी को सूर्य की किरणों के प्रकाश द्वारा गर्म करके इस पानी से नियमित रूप से आंखो को दिन में दो-तीन बार धोते हैं। इससे आंखो का धुंध और जाला समाप्त हो जाता है। इस रोग से पीड़ित रोगी को अपनी आंखो को तेज रोशनी से बचाकर रखना बहुत ही आवश्यक होता है।
दूर–दृष्टिदोष :
दूर-दृष्टिदोष के रोग में रोगी दूर की वस्तुओं को आसानी से देख सकता है परन्तु पास की वस्तुओं को देखने में उसे कठिनाई का अनुभव होता है। रोगी को दूर-दृष्टिदोष का रोग काफी पुराने बुखार, फालिज, पुराना जुकाम तथा चश्मे का अधिक प्रयोग करने के कारण हो जाता है।
दूर-दृष्टिदोष से पीड़ित रोगी को संतुलित और स्वाभाविक भोजन ही सेवन करना चाहिए। उसे प्रतिदिन सुबह के समय गर्दन से सम्बंधित व्यायाम करने चाहिए तथा सूर्य के प्रकाश की किरणों द्वारा तप्त (चार्ज) हरे रंग की बोतल का जल की छींटे दिन में कई बार आंखो पर मारनी चाहिए। सुबह के समय सूर्य की किरणों को बंद आंखो पर डालने से अधिक लाभ होता है तथा शाम के समय नियमित रूप से लगभग 20-25 मिनट तक आंखो का व्यायाम करना चाहिए। इस रोग में आंखो का व्यायाम विशेष रूप से लाभकारी होता है। इस रोग से पीड़ित रोगी को आंखो के व्यायाम के बाद जितना हो सके आंखो के पास किताब को रखकर पढ़ना चाहिए। ऐसा करने से आंखो पर जोर नहीं पड़ता है। पढ़ते समय बीच-बीच में पलकें गिराकर झपकनी चाहिए और आंखो को भी विश्राम देते रहना चाहिए। इस प्रकार कुछ दिनों तक करते रहने से आंखो पर लगा चश्मा भी हट जाता है।
आंखों का दर्द या आंख आना :
आंखो में दर्द होने पर या आंखे आने पर हमें 2-3 दिन कुछ भी नहीं खाना चाहिए। इससे आंखें स्वयं ही धीरे-धीरे करके ठीक हो जाती हैं। यदि ऐसा नहीं होता है तो पेट के विकारों को दूर करने के लिए कोई भी हल्का जुलाब लेना चाहिए। शरीर में दूषित स्टार्च विष एकत्रित होने से प्राय: कफ के कारण यह रोग होता है। इस रोग के लिए सबसे अच्छा इलाज उपवास करना होता है क्योंकि उपवास करने से शरीर की सफाई हो जाती है। विभिन्न प्रकार के एनिमा, उपवास तथा फलाहार, दूध, आहार की बजाय रसदार फलों से कुछ दिनों तक शरीर की आंतरिक सफाई करनी चाहिए।





आंखों में किसी भी प्रकार के रोग से पीड़ित रोगी को फलों में सेब, संतरे, बेर, चेरी, अनन्नास, पपीता, अंगूर आदि फलों का सेवन अधिक करना चाहिए। इन फलों में अधिक मात्रा में विटामिन `ए´, `सी´ तथा कैल्शियम होता है जो आंखों के लिए बहुत लाभदायक होता है।

    आंखो के किसी भी प्रकार के रोग से पीड़ित रोगी को हरी सब्जियों में पत्तागोभी, पालक, मेथी तथा अन्य हरी पत्तेदार सब्जियां जैसे शाक, मूली का भोजन में अधिक सेवन करना चाहिए। क्योंकि इनमें अधिक मात्रा में विटामिन `ए´ पाया जाता है और विटामिन `ए´ आंखों के लिए लाभदायक होता है।
आंखोआंखों के रोगों को दूर करने के लिए कंद मूल जैसे- आलू, गाजर, चुकंदर तथा प्याज का अधिक सेवन करना चाहिए। ये कंद मूल आंखों के लिए लाभदायक होते हैं।
अखरोट, खजूर, किशमिश तथा अंजीर का प्रतिदिन सेवन करने से आंखों के बहुत सारे रोग ठीक हो जाते हैं।
प्रतिदिन बिना क्रीम का दूध तथा मक्खन खाने से आंखों में कई प्रकार के रोग नहीं होते हैं और यदि हैं भी तो वे जल्दी ही ठीक हो जाते हैं।
पके हुए भोजन में प्रतिदिन चपाती में घी लगाकर खाने से आंखों को बहुत लाभ मिलता है।आंखों को कई प्रकार के रोगों से बचाने के लिए व्यक्ति को डिब्बाबंद भोजन, केचप, जैम, ज्यादा गर्म भोजन, सूखे भोजन, तली हुई सब्जियां, आचार, ठंडे पेय पदार्थ, आइसक्रीम, केक, पेस्ट्री तथा घी और चीनी से बनी चीजें, मैदा तथा बेसन की मिठाइयों का अधिक सेवन नहीं करना चाहिए।
रात को किसी मिट्टी या कांच के बर्तन में पानी भरकर एक चम्मच त्रिफला का चूर्ण भिगोने के लिए रख दें और सुबह के समय में इसे किसी चीज से छानकर पानी से बाहर निकाल लें। फिर इस पानी से आंखों को धोएं। इस प्रकार से यदि प्रतिदिन उपचार किया जाए तो आंखों के बहुत सारे रोग ठीक हो जाते हैं।
आंखों के अनेकों रोगों को ठीक करने के लिए प्रतिदिन नेत्र स्नान करना चाहिए। नेत्र स्नान करने के लिए सबसे पहले एक चौड़े मुंह का बर्तन ले लीजिए तथा इसके बाद उसमें ठंडा पानी भर दीजिए। फिर इस पानी में अपने चेहरे को डुबाकर अपनी आंखों को पानी में दो से चार बार खोलिए और इसके बाद साफ कपड़े से चेहरे तथा आंखों को पोंछिए।
प्रतिदिन सुबह के समय घास पर पड़ी हुई ओस को पलकों पर तथा आंखों के अन्दर लगाने से आंखों की रोशनी बढ़ने लगती है तथा आंखों के अनेकों रोग ठीक हो जाते हैं।
प्रतिदिन ठंडे पानी की धार सिर पर लेने से आंखो की रोशनी बढ़ने लगती है तथा आंखों के रोग भी ठीक हो जाते हैं।
सुबह के समय में उठते ही कुल्ला करके मुंह में ठंडा पानी भर लेना चाहिए तथा पानी को कम से कम एक मिनट तक मुंह के अन्दर रखना चाहिए। इसके साथ-साथ आंखों पर ठंडे पानी के छींटे मारते हुए धीरे-धीरे पलकों को मसलना चाहिए। फिर इसके बाद पानी को मुंह से बाहर उगल दें। इस क्रिया को दो से चार बार प्रतिदिन दोहराएं। इस प्रकार से प्रतिदिन करने से आंखों के कई प्रकार के रोग ठीक हो जाते हैं तथा आंखों के देखने की शक्ति में वृद्धि होती है।

आंखों के रोग से पीड़ित रोगी को रात के समय में जल्दी सो जाना चाहिए तथा गहरी नींद में सोना चाहिए। सोते समय आंखों को हथेलियों से ढक लें और किसी नीली वस्तु का ध्यान करते-करते सो जाएं। सुबह के समय में उठते ही 5 मिनट तक इसी प्रकार से दुबारा ध्यान करे और आंखों को खोलें। इस प्रकार की क्रिया करने से आंखों के रोग ठीक हो जाते हैं।
प्रतिदिन शुद्ध सरसों के तेल से सिर पर मालिश करने तथा दो बूंद तेल कानों में डालने से आंखों की रोशनी बढ़ने लगती है।
प्रतिदिन सुबह तथा शाम के समय में कम से कम 20 मिनट तक उदरस्नान करने से भी आंखों की रोशनी बढ़ती है।
प्रतिदिन मेहनस्नान करने से आंखों के कई प्रकार के रोग ठीक हो जाते हैं।
आंखों के बहुत सारे रोगों को ठीक करने के लिए प्रतिदिन आंखों और गर्दन के पीछे के भाग पर भीगी पट्टी का प्रयोग करने से आंखों में जलन, दर्द तथा लाली रोग ठीक हो जाते हैं।
प्रतिदिन 5-6 पत्ती तुलसी, एक काली मिर्च तथा थोड़ी सी मिश्री को एक साथ चबाकर खाने से आंखों के रोग जल्दी ही ठीक हो जाते हैं।
प्रतिदिन गाजर तथा चुकंदर का रस पीने से आंखों की रोशनी में वृद्धि होती है।
प्रतिदिन 5 भिगोए हुए बादाम चबा-चबाकर खाने से आंखों की रोशनी बढ़ने लगती है।
प्रतिदिन एक आंवले का मुरब्बा खाएं क्योंकि आंवले में विटामिन `सी´ की मात्रा अधिक होती है जिसके फलस्वरूप आंखों के रोग ठीक हो जाते हैं तथा आंखों की रोशनी में वृद्धि होती है।
प्रतिदिन सुबह तथा शाम को चीनी में सौंफ मिलाकर खाने से आंखों की रोशनी बढ़ने लगती है।
हरे धनिये को धोकर फिर उसको पीसकर रस बना लें। इस रस को छानकर दो-दो बूंद आंखों में डालने से आंखों के रोग ठीक हो जाते हैं तथा आंखों की रोशनी बढ़ने लगती है।
कच्चे आलू को पीसकर सप्ताह में कम से कम दो बार आंखों के ऊपर 10 मिनट के लिए लगाने से आंखों की रोशनी तेज हो जाती है।
प्रतिदिन भोजन करने के बाद हाथों को धो लीजिए तथा इसके बाद अपनी गीली हथेलियों को आंखों पर रगड़ने से आंखों की रोशनी बढ़ती है।
आंख आने में कपड़े की गीली पट्टी को 10 से 15 मिनट तक आंखों पर रखना चाहिए तथा कुछ समय के बाद इस पट्टी को बदलते रहना चाहिए। इसके साथ ही कम से कम तीन घण्टे के बाद आंखों की 20 मिनट तक गर्म पानी से भीगे कपड़े से सिंकाई करनी चाहिए। इसके फलस्वरूप आंखों का यह रोग ठीक हो जाता है।
आंख आने पर मांड के कारण पलकें आपस में चिपक जाती हैं। इस समय आंखों को खोलने में कभी भी जबरदस्ती नहीं करनी चाहिए। आंखों को खोलने के लिए आंखों पर पानी के छींटे मारने चाहिए तथा जब तक आंखों की पलकें न खुल जाएं तब तक आंखों पर पानी मारने चाहिए। इसके बाद नीले रंग का चश्मा आंखों पर लगाना चाहिए तथा नीली बोतल के सूर्यतप्त जल से सनी मिट्टी की पट्टी पेड़ू पर दिन में 2 बार लगानी चाहिए। ऐसा करने से यह रोग जल्दी ही ठीक हो जाता है।
आंखों के विभिन्न प्रकार के रोगों को ठीक करने के लिए साफ पिण्डोल मिट्टी की पट्टी का लेप बनाकर आंखों के आस-पास चारों तरफ लगाना चाहिए। यह पट्टी एक बार में कम से कम 15 मिनट तक लगानी चाहिए। इस क्रिया को दिन में कम से कम 2-3 बार दोहराएं। इसके फलस्वरूप रोगी व्यक्ति को बहुत लाभ मिलता है।
आंखों की अनेकों बीमारियों को ठीक करने के लिए रोगी व्यक्ति को दिन में उदरस्नान करना चाहिए तथा इसके बाद मेहनस्नान करना चाहिए। इसके बाद रीढ़ की ठंडी पट्टी का प्रयोग करना चाहिए। इससे रोगी को बहुत लाभ मिलता है।
आंखों के रोगों को ठीक करने के लिए उषापान करना चाहिए। उषपान केवल आंखों के रोगों को ही ठीक नहीं करता है बल्कि शरीर के और भी कई प्रकार के रोगों को भी ठीक करता है। उषापान करने के लिए रोगी व्यक्ति को रात के समय में तांबे के बर्तन में पानी को भरकर रखना चाहिए तथा सुबह के समय में उठते ही इस पानी को पीना चाहिए। इससे शरीर के अनेकों प्रकार के रोग तथा आंखों के रोग ठीक हो जाते हैं तथा आंखों की रोशनी भी बढ़ती है। उषापान करने से मस्तिष्क का विकास होता है तथा पेट भी साफ हो जाता है।
आंखों तथा शरीर के विभिन्न प्रकार के रोगों को ठीक करने के लिए प्रतिदिन जलनेति क्रिया करनी चाहिए।
शुद्धकमल को जलाकर उसका काजल बनाकर प्रतिदिन रात को सोते समय आंखों में लगाने से आंखों की रोशनी तेज होती है तथा आंखों के विभिन्न प्रकार के रोग ठीक हो जाते हैं।
चांदनी रात में चन्द्रमा की तरफ कुछ समय के लिए प्रतिदिन देखने से आंखों की दृष्टि ठीक हो जाती है।
यदि किसी रोगी व्यक्ति की देखने की शक्ति कमजोर हो गई है तो उसे प्रतिदिन दिन में 2 बार कम से कम 6 मिनट तक आंखों को मूंदकर बैठना चाहिए। इससे रोगी व्यक्ति को बहुत लाभ मिलता है
आंखों के रोगों से पीड़ित रोगी को प्रतिदिन सुबह के समय में उठकर अपनी आंखों को बंद करके सूर्य के सामने मुंह करके कम से कम दस मिनट तक बैठ जाना चाहिए। इससे रोगी व्यक्ति को बहुत अधिक लाभ मिलता है।
आंखों के रोग से पीड़ित रोगी को कोई भी ऐसा कार्य नहीं करना चाहिए जिससे आंखों से देखने के लिए जोर लगाना पड़े जैसे- अधिक छोटे अक्षर को पढ़ना, अधिक देर तक टी.वी. देखना आदि।
आंखो के रोग से पीड़ित रोगी को पानी पीकर सप्ताह में एक दिन उपवास रखना चाहिए। यदि कब्ज की शिकायत हो तो उसे दूर करने के लिए एनिमा क्रिया कीजिए। इससे रोगी व्यक्ति की आंखों के रोग ठीक हो जाते हैं।
यदि आंखों के पास सूजन हो गई हो तो रोगी व्यक्ति को आंखों पर कुछ समय के लिए मिट्टी की गीली पट्टी करनी चाहिए तथा भोजन में अधिक से अधिक हरी सब्जियों का उपयोग करना चाहिए क्योंकि हरी सब्जियों में विटामिन `ए´ अधिक मात्रा में पाया जाता है।
यदि आंखो की पलकें आपस में चिपक गई हैं तो आंखों को सावधानी पूर्वक धोना चाहिए और फिर गीले कपड़े से आंखो को पोंछकर पलकों को छुड़ाना चाहिए।
आंखोके रोग से पीड़ित रोगी को नींबू या नीम के पानी से एनिमा क्रिया करके अपने पेट को साफ करना चाहिए, क्योंकि एनिमा क्रिया से पेट साफ होकर कब्ज आदि की समस्या दूर हो जाती है। कब्ज के कारण भी आंखों में विभिन्न प्रकार के रोग हो जाते हैं जो कब्ज को दूर करने पर आसानी से ठीक हो जाते हैं।
आंखो में प्रतिदिन गुलाबजल डालने से आंखों के कई प्रकार के रोग ठीक हो जाते हैं।
यदि आंखो में सूजन या लाली पड़ गई है तो सूर्य की किरणों के द्वारा तैयार हरी बोतल के पानी से आंखों को सुबह तथा शाम के समय धोना चाहिए। इससे यह रोग कुछ ही समय में ठीक हो जाता है।
सुबह के समय में जल्दी उठना चाहिए तथा हरी घास पर नंगे पैर कुछ दूर तक चलना चाहिए। रोजाना ऐसा करने से आंखों की रोशनी तेज होती है।
आंखो में यदि किसी प्रकार का रोग हो जाता है तो सबसे पहले रोगी व्यक्ति को आंखो में रोग होने के कारणों को दूर करना चाहिए।
आंखोके रोग से पीड़ित रोगी को रोग की स्थिति के अनुसार एक से तीन दिनों तक फलों के रस (नारियल पानी, अनन्नास, संतरे, गाजर) का सेवन करके उपवास रखना चाहिए।
आंखो के रोग से पीड़ित रोगी को उत्तेजक खाद्य पदार्थों जैसे- चाय, कॉफी, चीनी, मिर्च-मसालों का उपयोग बंद कर देना चाहिए।
आंखो के रोग से पीड़ित रोगी को विटामिन `ए´, `बी´ तथा `सी´ युक्त पदार्थो का भोजन में अधिक सेवन करना चाहिए क्योंकि इन विटामिनों की कमी के कारण आंखों में कई प्रकार के रोग हो जाते हैं।
आंखों को प्रतिदिन दो बार पानी से धोना चाहिए। आंखों को धोने के लिए सबसे पहले एक मोटा तौलिया लेना चाहिए। इसके बाद चेहरे को दो मिनट के लिए आंखें बंद करके रगड़ना चाहिए। फिर आंखों पर पानी मारकर आंखों को धोना चाहिए। इसके बाद साफ तौलिए से आंखों को पोंछना चाहिए। एक दिन में कम से कम 6 से 7 घण्टे की नींद लेनी चाहिए। इससे आंखों की देखने की शक्ति पर कम दबाव पड़ता है। इसके फलस्वरूप आंखों में किसी प्रकार के रोग नहीं होते हैं और यदि आंखों में किसी प्रकार के रोग होते भी हैं तो वे ठीक हो जाते हैं।
आंखों के दृष्टिदोष को दूर करने के लिए रोगी व्यक्ति को कम से कम पांच बादाम रात को पानी में भिगोने के लिए रखने चाहिए। सुबह उठने के बाद बादामों को उसी पानी में पीसकर पेस्ट बना लें। फिर इस पेस्ट को खाना खाने के बाद अपनी आंखों पर कुछ समय के लिए लगाएं। इसके बाद आंखों को ठंडे पानी से धोएं और साफ तौलिए से पोंछे। इसके साथ-साथ रोगी व्यक्ति को गाजर, नारियल, केले, तथा हरी सब्जियों का भोजन में
अधिक उपयोग करना चाहिए। कुछ महीनों तक ऐसा करने से आंखों में दृष्टिदोष से सम्बन्धित सभी रोग ठीक हो जाते हैं।

आंखों के व्यायाम
एक दिशा से दूसरी दिशा में जाने तथा झूलने वाले व्यायाम-
हाथ की तर्जनी उंगली से व्यायाम-
पैरों के तलुवों का व्यायाम-
सूर्यमुखी व्यायाम-
कुर्सी पर बैठकर सूर्यमुखी व्यायाम-
पलक मारने का व्यायाम-
दृष्टिपट पर चक्षु व्यायाम-
आंखो के अनेकों रोगों को ठीक करने कि लिए विभिन्न प्रकार के व्यायाम हैं जिन्हें प्रतिदिन सुबह तथा शाम करने से ये रोग जल्दी ही ठीक हो जाते हैं।
ठंडे पानी में आंखो को खोलने का व्यायाम:-
पलक झपकाने का व्यायाम-
हथेली के द्वारा व्यायाम-
आंखो को घुमाने का व्यायाम-
कमजोर आंख तथा नजर के चश्मा छुड़ाने के लिए प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार:-


सुबह के समय में प्रतिदिन हरे केले के पत्तों को अपनी आंखो के सामने रखकर कुछ मिनटों तक सूर्य के प्रकाश को देखने तथा इसके बाद पामिंग करने और फिर इसके बाद उदरस्नान या मेहनस्नान करने से आंखों पर से चश्मा हट सकता है तथा कई प्रकार के रोग जो आंखों से संबन्धित होते हैं, ठीक हो जाते हैं।
प्रतिदिन रात को सोते समय आंखो पर गीली मिट्टी की पट्टी लगाने तथा कमर पर कपड़े की गीली पट्टी करने और अपने पेड़ू पर गीली मिट्टी की पट्टी लगाने से रोगी व्यक्ति की आंखो पर से चश्मा हट सकता है लेकिन इसके साथ-साथ रोगी व्यक्ति को प्रतिदिन एनिमा क्रिया भी करनी चाहिए तथा सप्ताह में एक बार उपवास रखना चाहिए।
सुबह के समय में उठकर व्यक्ति को प्रतिदिन कम से कम 12 मिनट से लेकर 30 मिनट तक सूर्य की ओर मुंह करके आंखों को बंद करके बैठना चाहिए। इस प्रकार बैठने से पहले रोगी को अपने सिर को ठंडे पानी से धोना चाहिए। इस क्रिया को करने के बाद आंखों पर ठंडे पानी के छींटे मारकर आंखों को धोना चाहिए। इसके बाद कम से कम पांच मिनट तक पामिंग करना चाहिए। इसके फलस्वरूप आंखों के रोग ठीक हो जाते हैं तथा चश्मे का नम्बर कम होने लगता है।
सुबह के समय में मुंह धोने के बाद एक गिलास पानी में कागजी नींबू का रस मिलाकर पीना चाहिए। इसके बाद दोपहर के समय में भोजन करने तक और कुछ भी नहीं खाना चाहिए। दोपहर में चोकर युक्त आटे की रोटी खानी चाहिए। उबली हुई शाक-सब्जियां खानी चहिए। शाम के समय में फलों का रस पीना चाहिए। इस प्रकार से प्रतिदिन उपचार करने से चश्मा हट सकता है तथा आंखों के कई प्रकार के रोग भी ठीक हो जाते हैं।



एक टिप्पणी भेजें