शनिवार, 16 जुलाई 2016

शिलाजीत से मचाएँ सारी रात बिस्तर पर धूम


      जीवन के उतार-चढ़ाव, व्यस्तता और जीवनशैली में आए बदलाव की वजह से शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति ऐसा होगा जिसकी फैमिली लाइफ बहुत स्मूद चल रही हो। दिनभर ऑफिस का काम और फिर घर की जिम्मेदारियों का बोझ व्यक्ति को शारीरिक से ज्यादा मानसिक तौर पर थका देता है, जिसके चलते दांपत्य जीवन में व्यक्ति को कड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
     अगर आप भी ऑफिस के काम और अन्य परेशानियों के चलते अपने पार्टनर के साथ टाइम स्पेंड नहीं कर पा रहे हैं, जिसकी वजह से आपका विवाहित जीवन बहुत टफ होता जा रहा है तो हम आपको एक ऐसी चमत्कारी दवा से परिचित करवाने जा रहे हैं जिसका सेवन चुटकियों में आपकी ये परेशानी हल कर सकता है|
भारत की भूमि पर विभिन्न प्रकार की उत्तम जड़ी-बूटियां पाई जाती हैं जिनमें से शिलाजीत भी एक है। आयुर्वेद में भी शिलाजीत की खूबियों का बखान करने के साथ उसके कई गुणों को प्रतिष्ठित भी किया गया है। आपको बता दें कि महर्षि चरक ने स्वयं यह कहा था कि पृथ्वी पर ऐसा कोई रोग नहीं है जिसका इलाज शिलाजीत से ना किया जा सके।

    आयुर्वेद के अनुसार शिलाजीत की उत्पत्ति शिला अर्थात पत्थर से हुई है। ग्रीष्म ऋतु में सूर्य की प्रखर किरणों के ताप से पर्वत की चट्टानों के धातु अंश पिघलने से जो एक प्रकार का स्राव होता है, उसे शिलाजतु या शिलाजीत कहा गया है।
स्वाद में शिलाजीत काफी कड़वा, कसैला, उष्ण और वीर्य पोषण करने वाला होता है। देखने में यह तारकोल की तरह बेहद काला और गाढ़ा होता है जो सूखने के बाद एकदम चमकीला रूप ले लेता है।
   मधुमेह, स्वप्नदोष, यौन दुर्बलता, शारीरिक दुर्बलता दूर करने के लिए शिलाजीत का प्रयोग उत्तम माना जा सकता है। इसके अलावा वृद्धावस्था में आने वाली शारीरिक कमियों और अन्य व्याधियों से मुक्ति पाने के लिए शिलाजीत सहायक साबित होता है।
यौन शक्तिवर्द्धक (Shilajit for Sex Desire Stimulation)
शिलाजीत को इंडियन वियाग्रा कहा जाता है। शीघ्र स्खलन (Early Ejaculation) और ऑर्गेज्म (Orgasm) सुख से वंचित लोगों में यह कामोत्तेजना बढ़ाने का काम करता है।
सदियों से आयुर्वेद में शिलाजीत को यौन शक्ति वर्द्धक दवा के रुप में इस्तेमाल किया जा रहा है। यह पुरुषों में वीर्य की संख्या बढ़ाता है और सेक्स हार्मोन को भी नियंत्रित करता है।
   तनाव और मानसिक थकावट -
शिलाजीत के सेवन से नर्वस सिस्टम सही से काम करता है। मानसिक थकावट, अवसाद, तनाव और चिंता से लड़ने के लिए शिलाजीत का सेवन करना चाहिए। इससे स्मरण शक्ति भी बढ़ती है, किसी भी काम करने में मन लगता है। दिमागी ताकत के लिए प्रतिदिन एक चम्मच मक्खन के साथ शिलाजीत का सेवन लाभदायक होता है ।
दिल के सेहत का भी रखता ख्याल (Shilajit for Heart Health)
शिलाजीत दिल के सेहत के लिए भी अच्छा है। दिल के साथ-साथ यह रक्त चाप को भी नियंत्रित करता है।
पाचनतंत्र के लिए -
शिलाजीत शरीर के पाचन तंत्र को भी मजबूत करता है। इसके सेवन से अपच, गैस, कब्ज और पेट के दर्द जैसी बिमारियां खत्म होती हैं।



किडनी और अंत:स्राव ग्रंथि -
शिलाजीत के सेवन से किडनी, पैनक्रियाज और थायराइड ग्लैंड भी सही से काम करते हैं। यह ब्लड सर्कुलेशन के लिए भी अच्छा है।
डायबिटीज मे उपयोगी -
इसके सेवन से डायबिटीज भी कंट्रोल में रहता है। यह रक्त में शर्करा के स्तर को नियंत्रित करता है और शरीर से हानिकारक टॉक्सिंस बाहर निकालने का काम करती है।
और भी हैं कई औषधीय लाभ (Shilajit for Common Health Problems)
*रोग प्रतिरोधी क्षमता को मजबूत बनाता है
*सांस संबंधी बिमारियों में
*कफ को खत्म करने में
*गठिया और जोड़ों के दर्द में
*सूजन को कम करने में
*दिल को सेहतमंद बनाने में
*पेशाब और किडनी की बीमारी में
*एनिमिया के इलाज में
*अल्सर को कम करने में
*अल्जाइमर
*पीलिया

   अगर आपको लगता है कि बीमारी के बाद ही आप शिलाजीत का प्रयोग कर सकते हैं तो आप गलत सोचते हैं। अगर कोई स्वस्थ मनुष्य शिलाजीत का सेवन करता है तो उसका शरीर हष्ट-पुष्ट बनता है और वह थकान या अन्य शारीरिक निर्बलता से दूर रहता है।
मानसिक तौर पर मजबूती प्राप्त करने के लिए प्रतिदिन एक चम्मच मक्खन के साथ शिलाजीत का सेवन करना लाभ प्रदान करेगा। इससे आपको दिमागी थकावट से मुक्ति मिलेगी।
   विशेषज्ञों का कहना है कि शिलाजीत के सेवन के लिए जो मात्रा निर्धारित होनी चाहिए वह दो से बारह रत्ती के बीच होनी चाहिए। इसके अलावा व्यक्ति की आयु और उसकी पाचन क्षमता को जानकर ही उसे शिलाजीत का सेवन करने दिया जाना चाहिए।
शिलाजीत का सेवन सूर्योदय से पहले किया जाए तो ही बेहतर है। दूध और शहद के साथ सुबह सूर्योदय से पहले शिलाजीत का सेवन करें और इसके 3-4 घंटे बाद ही कुछ खाएं।
वे लोग जिन्हें शीघ्र पतन की समस्या का सामना करना पड़ता है उनके लिए शिलाजीत एक वरदान साबित हो सकता है। बीस ग्राम शिलाजीत और बीस ग्राम बंग भस्म में दस ग्राम लौह भस्म और छः ग्राम अभ्रक भस्म घोटकर दो-दो रत्ती की गोलियां बना लें। सुबह के समय एक गोली को मिश्री मिले दूध के साथ लें, इससे आपको अप्रत्याशित लाभ मिलेगा।

   शिलाजीत के सेवन के साथ-साथ कुछ बातों का ध्यान रखना अति आवश्यक है। जिन लोगों के शरीर में पित्त का प्रकोप होता है उन्हें शिलाजीत के सेवन से बचना चाहिए। जब तक आप शिलाजीत का सेवन कर रहे हैं तब तक मिर्च-मसाले, खटाई, नॉन वेज और शराब आदि के सेवन से बचना चाहिए। शिलाजीत के सेवन के साथ-साथ कुछ बातों का ध्यान रखना अति आवश्यक है। जिन लोगों के शरीर में पित्त का प्रकोप होता है उन्हें शिलाजीत के सेवन से बचना चाहिए। जब तक आप शिलाजीत का सेवन कर रहे हैं तब तक मिर्च-मसाले, खटाई, नॉन वेज और शराब आदि के सेवन से बचना चाहिए।

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