सोमवार, 22 अगस्त 2016

पिपली के गुण प्रयोग लाभ


पिप्पली या छोटी पीपल अनेक औषधीय गुणों से संपन्न होने के कारण आयुर्वेद की एक प्रमुख दवा है, आम जनमानस इसे गर्म मसाले की सामग्री के रूप में भी जानते हैं।
पिप्पली काली होती है तथा पंसारी के यहाँ आसानी से मिलती है। 

*पीपला पाइपर लोंगम का सूखा फल है जो एक चढने वाले गाँठदार तनाओं एवं चिरस्थाई काष्ठ-सदृश जडों से युक्त है। इसके पत्ते 5-9 से.मी. लंबे, 3-5 से.मी. चौडे, अण्डाकार, तल में विस्तृत वृत्ताकार पिण्डकवाले हैं। स्त्रीजातीय स्पाइक बेलनाकार, पुंजातीय स्पाइक बडे और पतले होते है। स्त्रीजातीय स्पाइक 1.3 - 2.5 से.मी. लंबे 4.5 मि.मी. व्यास के हैं। फल अण्डाभ, पीताभ नारंगी, छोटा, गुठलीदार फल एवं मांसल स्पाइक में डूबा हुआ होता है।
पिप्पली की कोमल तनों वाली लताऐं 1-2 मीटर तक जमीन पर फैलती है। इसके गहरे रंग के चिकने पत्ते 2-3 इंच लंबे एवं 1-3 इंच चौड़े, हृदय के आकार के होते हैं। इसके पुष्पदंड 1-3 इंच एवं फल 1 इंच से थोड़े कम या अधिक लंबे शहतूत के आकार के होते हैं। कच्चे फलों का रंग हल्का पीलापन लिए एवं पकने पर गहरा हरा रंग फिर काला हो जाता है। इसके फलों को ही छोटी पिप्पली या पीपल कहा जाता है।
वैदेही,कृषणा,मागधी,चपला आदि पवित्र नामों से अलंकृत,सुगन्धित पिप्पली भारतवर्ष के उष्ण प्रदेशों में उत्पन्न होती है | वैसे इसकी चार प्रजातियों- का वर्णन आता है परन्तु व्यवहार में छोटी और बड़ी दो प्रकार की पिप्पली ही आती है | बड़ी पिप्पली सिंगापुर से आयात की जाती है,परन्तु छोटी पिप्पली भारतवर्ष में प्रचुर मात्रा में उत्पन्न होती है |




*तीन पिप्पली पीसकर शहद में मिलाकर चाटने से श्वास, खांसी के साथ ज्वर, मलेरिया ठीक होता है।
*फ्लू में दो पिप्पली या चौथाई चम्मच सौंठ दूध में उबाल कर पिलाएं।
*पिप्पली के १-२ ग्राम चूर्ण में सेंधानमक,हल्दी और सरसों का तेल मिलाकर दांत पर लगाने से दांत का दर्द ठीक होता है ।
*पिप्पली मूल,काली मिर्च और सौंठ के समभाग चूर्ण को २ ग्राम की मात्रा में लेकर शहद के साथ चाटने से जुकाम में लाभ होता है।
* चार पिप्पली का चूर्ण आधा चम्मच शहद में डालकर नित्य चाटें, इससे मोटापा भी घटता है।
*पिप्पली वृक्ष के पत्ते दस्तों को बन्द करते हैं।इसके पत्ते चबाएं या पानी में उबालकर इसका उबला हुआ पानी पीयें।
*पिप्पली को पानी में पीसकर माथे पर लेप करने से सिर दर्द ठीक होता है।
*पिप्पली और वच चूर्ण को बराबर मात्रा में लेकर 3 ग्राम की मात्रा में नियमित रूप से दो बार दूध या गर्म पानी के साथ सेवन करने से आधासीसी का दर्द ठीक होता है |




पिप्पली या छोटी पीपल अनेक औषधीय गुणों से संपन्न होने के कारण आयुर्वेद की एक प्रमुख दवा है, आम जनमानस इसे गर्म मसाले की सामग्री के रूप में भी जानते हैं।
*इसका मसाले के रूप में और अचार एवं परिरक्षकों में भी प्रयोग होता है।
*इसके फल एवं जडें श्वसन-रोगों केलिए दवा के रूप में और पेशी दर्द और सूजन केलिए प्रति प्रकोपक एवं पीडाहारी के रूप में प्रयुक्त होते हैं। इसके वातहर, हीमैटिनिक एवं कृमि रोधी गुण होते हैं।
* पिप्पली चूर्ण में शहद मिलाकर प्रातः सेवन करने से,कोलेस्टरोल की मात्रा नियमित होती है तथा हृदय रोगों में लाभ होता है |
वातजनित समस्‍यायें
5-6 पुरानी पिप्पली के पौधे की जड़ सुखाकर कुटकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण की 1-3 ग्राम की मात्रा गर्म पानी या गर्म दूध के साथ पिला देने से शरीर के किसी भी भाग का दर्द 1-2 घंटे में दूर हो जाता है। वृद्धा अवस्था में शरीर के दर्दो में यह अधिक लाभदायक होता है।
*पिप्पली और छोटी हरड़ को बराबर-बररब- मिलाकर,पीसकर एक चम्मच की मात्रा में सुबह- शाम गुनगुने पानी से सेवन करने पर पेट दर्द,मरोड़,व दुर्गन्धयुक्त अतिसार ठीक होता है |
* आधा चम्मच पिप्पली चूर्ण में बराबर मात्रा में भुना जीरा तथा थोड़ा सा सेंधा नमक मिलाकर छाछ के साथ प्रातः खाली पेट सेवन करने से बवासीर में लाभ होता है |
*पिप्पली के 1-2 ग्राम चूर्ण में सेंधानमक,हल्दी और सरसों का तेल मिलाकर दांत पर लगाने से दांत का दर्द ठीक होता है |पिप्पली मे प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के निष्चित गुण हैं जिनके कारण टी.बी. एवं अन्य संक्रामक रोगों की चिकित्सा में इसका उपयोग लाभदायक होता है। पिप्पली अनेक आयुर्वेदीय एंव आधुनिक दवाओं की कार्यक्षमता को बढ़ा देती
 है।



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