सोमवार, 28 नवंबर 2016

एग्जिमा का घरेलू उपचार.. Home remedy for eczema


बॉडी में खुजली, एक्‍जिमा (खाज) होने के अलग - अलग कारण होते हैं। किसी रिसर्च के अनुसार, शरीर में इम्‍यून सिस्‍टम में गड़बड़ी के चलते खुजली हो जाती है तो कोई कहता है कि सरकाप्‍टस नामक परजीवी के कारण खुजली होने लगती है। वजह चाहें जो भी हो लेकिन शरीर में तकलीफ होने से आपकी दिनचर्या पर गंदा असर पड़ता है और आपकी पब्लिक इमेज की धज्जियां उड़ जाती हैं।
एक्जिमा एक प्रकार का चर्म रोग है। त्वचा के उत्तेजक, दीर्घकालीन विकार को एक्जिमा के नाम से जाना जाता है। इस रोग में त्वचा शुष्क हो जाती है और बार-बार खुजली करने का मन करता है क्योंकि त्वचा की ऊपरी सतह पर नमी की कमी हो जाती है, जिसके परिणामस्वरूप त्वचा को कोई सुरक्षा नहीं रहती, और जीवाणुओं और कोशाणुओं के लिए हमला करने और त्वचा के भीतर घुसने के लिए आसान हो जाता है। एक्जिमा के गंभीर मामलों में त्वचा के ग्रसित जगहों से में पस और रक्त का स्राव भी होने लगता है। यह रोग डर्माटाईटिस के नाम से भी जाना जाता है।
मुख्य रूप से यह रोग खून की खराबी के कारण होता है और चिकित्सा न कराने पर तेजी से शरीर में फैलता है। एक्जिमा का रोग अपने रोगियों को उम्र और लिंग के आधार पर नहीं चुनता। एक्जिमा के रोग से ग्रस्त रोगी अन्य विकारों के भी शिकार होते हैं। यह किसी भी उम्र के पुरुष या महिलाओं को प्रभावित कर सकता है। लेकिन कुछ आयुर्वेदिक उपचारों को अपनाकर इस समस्‍या के लक्षणों को कम किया जा सकता है।
दाद (एग्जिमा) होने का कारण-



एग्जिमा कई प्रकार का होता है और इसके कारण भी कई हो सकते हैं | जैसे एलर्जी, वंश परंपरा अथवा किसी प्रकार का तनाव आदि होना |
दाद (एग्जिमा) होने के लक्षण-
मुख्य रूप से यह तीन प्रकार का होता है-
1. बच्चों को होने वाला एक्जीमा-
यह एग्जिमा कुछ महीने के शिशु को भी हो सकता है | पहले मुंह पर दाने से निकलते हैं, फिर शरीर के अन्य भाग भी प्रभावित हो जा-ते हैं | बच्चा बार-बार त्वचा खुजलाता है और परेशान होता है |
2. सम्पर्क में आने से होने वाला एक्जीमा
इसमें यदि किसी वस्तु से एलर्जी है तो उसके सम्पर्क में आने से एग्जिमा अथवा दाद हो सकता है—उदाहरण के लिए बहुत सी औरतों को गहने पहनने से एलर्जी होने के कारण एग्जिमा हो सकता है | कुछ पौधे, फूल या सौंदर्य प्रसाधन सामग्री भी इसका कारण हो सकती है |
3. खुजलीवाला एक्जीमा-
तीसरे प्रकार के एग्जिमा में खुजली से बहुत अधिक बेचैनी होती है | इस प्रकार का एक्जीमा कपड़े धोने के साबुन या डिटर्जेन्ट पाउडर के प्रयोग से प्रायः हो जाता है |
एक्‍जिमा से बचने के लिये कुछ उपचार जैसे, लक्षणों को बिगाड़ने वाले उत्तेजकों से बचें, घावों को कुरेदें नहीं, अधिक समय तक स्नान न करें और देरी तक स्नानघर में न रहें, साबुन का प्रयोग कम से कम करें (बबल स्नान न करें), रोग को ठीक करने के लिये एंटी बायोटिक का प्रयोग किया जाता है।
मगर इसके अलावा भी आप के लिये ये बेहतर रहेगा कि आप कुछ घरेलू उपाय को अपनाकर अपनी एक्‍जिमा (खाज) प्रॉब्‍लम दूर कर लें।
उपचार-
* इस रोग के उपचार के लिए चिकित्सक स्टेराइड क्रीम, लोशन या एण्टीबायटिक दवाएं देते हैं | कीकर (बबूल) और आम के पेड़ की 25-25 ग्राम छाल लेकर एक लीटर पानी में उबालें | इसकी भाप से एग्जिमा प्रभावित स्थान को सेकें | इसके बाद इस भाग पर देसी धी लगा दें |
खीरे का पानी :
खीरे को बारीक स्‍लाइस में काटकर दो घंटे के लिए रख दें। पूरा रस निकल जाने के बाद उसे छान लें और खुजली वाली जगह पर लगा लें। जरूर आराम होगा।
* मकोय का रस पीने और एग्जिमा के स्थान पर इस रस को लगाने से आराम मिलता है |रस की मात्रा 150 से 210 मि.ली. तक रखें |
नींबू :
नींबू हर घर में आराम से मिल जाता है। इसलिए बॉडी में जहां पर भी खुजली हो रही हो उस जगह पर नींबू और गरी का तेल मिलाकर लगा लें। लगाने के तुरंत बाद खुजलाएं नहीं। थोड़ी देर में आराम मिल जाएगा।
आटे का लेप :
गेहूं के आटे का लेप करने से शरीर के सारे चर्म रोग दूर हो जाते हैं और खुजली में आराम मिलता है।
* नीम रक्त विकारों में बहुत ही लाभकारी है | पाव भर सरसों के तेल में नीम की 50 ग्राम के लगभग कोंपलें पकाएं | कोंपले काली होते ही तेल नीचे उतार लें | छानकर बोतल में रखें और दिन में थोड़ा-थोड़ा एग्जिमा प्रभावित स्थान पर लगाएं | नीम की कोंपलों का रस 10 ग्राम की मात्रा में नित्य सेवन करते रहने से भी एक्जीमा ठीक हो जाता है |



देशी घी की मालिश -:
शरीर में अचानक से ज्‍यादा खुजली होने पर तुरंत राहत के लिए आप घरों में इस्‍तेमाल किया जाने वाला देशी घी लगा लें। इससे फटाफट राहत मिलेगी।
एलोविरा जेल का इस्‍तेमाल-:
घर में लगे एलोविरा के पौधे की पत्‍ती को काट लें और उसमें से निकलने वाले जेल को खुजली वाली जगह पर लगा लें। दिन में कम से कम चार से पांच बार ऐसा करने पर आपको आराम मिलेगा। साथ ही ठीक होने तक लगाने पर बाद में कभी खुजली नहीं होगी।
4. तुलसी के पत्तों का रस पीने और लगाते रहने से लाभ होता है
हरड़ -:
हरड़ को बारीक पीस लें। दो चम्‍मच हरड़ को दो गिलास पानी में उबाल कर रख लें। जहां भी खुजली हो, उस पानी को लगा लें कुछ देर में आराम मिल जाएगा।
जैतून का तेल :
खुजली होने पर गुनगुने पानी से नहाएं और तुरन्‍त बाद किसी माश्‍चराइजर या क्रीम का यूज न करते हुए ऑलिव ऑयल यानि जैतून के तेल का इस्‍तेमाल करें। अच्‍छे से हल्‍के - हल्‍के मालिश करने पर खुजली वाली जगह में आराम मिलेगा।
5. तिल और तारेमीरे के तेल की समान मात्रा में दो चम्मच पिसी हुई दाल मिलाएं, जिससे मलहम सा बन जाए | उसमें दवाइयों के काम आने वाला मोम एक चम्मच के लगभग मिला दें | इसमें सरसों के तेल के दीपक से बनाया गया थोड़ा काजल मिलाएं | मलहम तैयार है | इसे दाद, फोड़े-फुन्सियों पर लगाने से लाभ होता है |
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छाछ
में एक साफ कपड़े का टुकड़ा भिगोकर त्वचा पर जलन, खुजली और बेचैनी वाले स्थान पर रखें | जितनी अधिक देर रख सकें, रखें | फिर उस स्थान को भली प्रकार साफ कर दें |
*. अब यह सिद्ध हो चुका है कि एग्जिमा, दाद आदि लाइनोलिक एसिड की कमी से होता है | इसके लिए सूरजमुखी का तेल लाभदायक होता है | प्रतिदिन दो चम्मच तेल पीएं | रोग में सुधार होने के बाद मात्रा कम कर दें |
चने के आटे में पानी मिलाकर पेस्ट सा बनाकर त्वचा के विकारग्रस्त स्थान पर लगाने से लाभ होता है | चने के आटे का उबटन के रूप में प्रयोग से मेकअप से होने वाला एक्जीमा भी ठीक हो जाता है |
* खुबानी के पत्तों के रस का दाद-खाज पर प्रयोग करना भी लाभदायक है |
एग्जिमा का घरेलू उपचार-
250 ग्राम सरसों का तेल लेकर लोहे की कढ़ाही में गर्म करें । जब तेल खोलने लगे तब उसमें 500ग्राम नीम की पत्ती (नई कोपलें) डाल दें ।कोपलें के काले पड़्ते ही कढ़ाही को नीचे उतारकर ठ्ण्डा कर एक बोतल में भर लें ।
दिन में चार बार एग्जिमा पर लगायें, कुछ दिनों एग्जिमा खत्म हो जायेगा । एक वर्ष लगाते रहें फिर यह रोग दोबारा लौट कर नहीं आयेगा ।
विशेष - इस प्रयोग से एग्जिमा के अतिरिक्त अन्य त्वचा के रोग में भी फायदा पहुँचता है 
परहेज- खटाई, तेज मिर्च मसाले, मादक पदार्थों का सेवन न करें ।
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