2/12/16

बवासीर के मस्सों के लिए ब्रह्मास्त्र /infallible medicine for piles


बाहरी बवासीर में गुदा वाली जगह में मस्सा होता है|इसमें दर्द कम तथा खुजली अधिक होती है |इसमें गुदा वाली जगह में खून आने लगता है |पहले यहाँ पर केवल खून का रिसाव होता है और बाद में यह पिचकारी की तरह खून फैकने लगता है |
* अंदर की बवासीर में मस्से गुदे के अन्दर होते है | कब्ज़ की वजह से मल करते समय जोर लगाने से खून बाहर आ जाता है और अगर मस्से छिल जाए तो दर्द और भी बढ़ जाता है |
*बवासीर के अनेक कारण हो सकते है जैसे:- 

अधिक देर तक एक जगह कुर्सी पर बैठे रहना, 
ज्यादा तेज मिर्च-मसालों का सेवन करना,
 देर तक गाड़ी व बाइक चलाना, 
देर रात तक काम करना, 




मल त्याग करते समय अधिक जोर लगाना आदि |
अपना खान-पान सुधार कर ही इसको सही किया जा सकता है खान-पान में विशेष अधिक तीखा मिर्च मसाले वाला मैदा या मैदे से बने पदार्थ जैसे फ़ास्ट फ़ूड तले हुए पदार्थ न खाये और अधिक मात्रा में पानी पिए सुबह उठकर सेर पर जरूर जाये योगासन प्राणायाम जरूर करें अपने भोजन में फाइबर को ज्यादा स्थान दे
*बवासीर में गौ मूत्र में भिगोई हुई हरड़ बहुत ही लाभदायक है इसके थोड़े दिन के सेवन से ही बवासीर जैसा रोग सही हो जाता है बार-बार होने वाली बवासीर भी सही हो जाती है और बवासीर की मूल जड़ कब्ज पर भी इसका विशेष असर है|यह मस्सों के लिए ब्रमास्त्र है|

|*मूली के रस में नीम की पत्तियों का रस मिलाकर उसको रुई की मदद से गुदा द्वार पर लगाने से बवासीर में आराम मिलता है |
*करेले के बीजों को आवलें के रस में मिलाकर मस्से पर लगाने से मस्सा झड जाता है |
*चाय को पीने के बाद चाय की छानी हुई पतियों से बने पेस्ट को गुदा द्वार पर लगाने से मस्सा झड जाता है
*कपूर तथा नीम की पतियों से बनी टिकिया को गुदा द्वार पर लगाने से भी बवासीर में आराम मिलता है|
नारियल के तेल को गुदा द्वार पर लगाने से भी मस्से ठीक हो जाते है |
*रीठे के फल मे से बीज को निकालकर शेष बचे हुए भाग को लोहे की कढ़ाई में भून लेना है फिर जितनी मात्रा में रीठा लिया है उतनी ही मात्रा में पपड़ियाँकत्था लेना है फिर उसको सूती कपडे से छानकर उसका चूर्ण बना लेना है इस चूर्ण को मक्खन या मलाई के साथ सुबह या शाम खाने से बवासीर में आराम मिलता है |
*हल्दी तथा ग्लिसरीन से बने पेस्ट को मस्सो वाले स्थान पर लगाने से भी आराम मिलता है |



लोकी के रस में हल्दी मिलाकर उसको गुदा द्वार पर लगाने से भी बवासीर में आराम मिलता है |
*नीम की छाल को सिलबट्टे पर पीसने से जो रस निकलता है उसको गुदा द्वार पर लगाना बवासीर में एक रामबाण उपाय माना जाता है ||
*परम्परागत तथा सरल प्रक्रियाएं विफल हो जाए तो कई सारी शल्यचिकित्सा तकनीक भी उपयोग में लाई जा सकती है | लेकिन सभी शल्यचिकित्साओ के उपचारों में कुछ जटिलताए होती है जिसमे रक्त सत्राव, संकरमण, गुदा का सिकुडन तथा मूत्र प्रतिधारण शामिल है |
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