शनिवार, 25 फ़रवरी 2017

श्वेत प्रदर ,ल्यूकोरिया,सफ़ेद पानी जाने के घरेलू,आयुर्वेदिक उपचार



    अधिकतर महिलाएं ल्यूकोरिया जैसे-श्वेतप्रदर, सफेद पानी जैसी बीमारियो से जुझती रहती हैं, लेकिन शर्म से किसी को बताती नहीं और इस बीमारी को पालती रहती हैं। यह रोग महिलाओं को काफी नुकसान पहुंचाता है। इस बीमारी से छुटकारा पाने के लिए पथ्य करने के साथ-साथ योगाभ्यास का नियमित अभ्यास रोगी को रोग से छुटकारा देने के साथ आकर्षक और सुन्दर भी बनाता है।
    श्वेत प्रदर तथा रक्त प्रदर दोनों ही महिलाओं के शरीर की योनी से सम्बन्धित रोग हैं. श्वेत प्रदर के रोग के होने पर महिला की योनी मार्ग से सफेद पानी निकलने लगता हैं. जो की श्वेत प्रदर की बीमारी का सूचक होता हैं. रक्त प्रदर का रोग अधिकतर मासिक धर्म के दिनों में होता हैं. इन दिनों में ऋतुस्त्राव के समय में अधिक रक्तस्त्राव होता हैं. जिसका प्रभाव महिला के शरीर व स्वास्थ्य पर अधिक पड़ता हैं.
श्वेत प्रदर होने के कारण
श्वेत प्रदर का रोग कई बार महिला के अधिक मांस – मछली खाने, चाय पीने, शराब का सेवन करने से भी हो जाता हैं. अधिक चटपटे पदार्थों का सेवन करने से भी यह रोग हो सकता हैं. जिन महिलाओं का जीवन आलस्य से भरा होता हैं उनको भी यह रोग हो जाता हैं. मासिक धर्म के अनियमित समय पर होने के कारण भी यह रोग हो सकता हैं. कई लडकियों की जल्दी शादी हो जाती हैं जिसके कारण ही उन्हें जल्दी गर्भ धारण करना पड़ता हैं. उनको भी यह रोग हो जाता हैं. बार – बार गर्भ धारण करने के कारण भी यह रोग हो सकता हैं. इन सब के आलावा योनी के भीतरी भाग में किसी प्रकार की फुंसी, फोड़े या रसूली के होने के कारण भी यह रोग हो जाता हैं
अन्य कारण
अत्यधिक उपवास
उत्तेजक कल्पनाए
अश्लील वार्तालाप
सम्भोग में उल्टे आसनो का प्रयोग करना
सम्भोग काल में अत्यधिक घर्षण युक्त आघात
रोगग्रस्त पुरुष के साथ सहवास
सहवास के बाद योनि को स्वच्छ जल से न धोना व वैसे ही गन्दे बने रहना आदि इस रोग के प्रमुख कारण बनते हैं।
बार-बार गर्भपात कराना भी एक प्रमुख कारण है।
योनि के स्राव से बचने के लिए



यौन सम्बन्धों से लगने वाले रोगों से बचने और उन्हें फैलने से रोकने के लिए कंडोम का इस्तेमाल अवश्य करना चाहिए।

जननेन्द्रिय क्षेत्र को साफ और शुष्क रखना जरूरी है।
योनि को बहुत भिगोना नहीं चाहिए (जननेन्द्रिय पर पानी मारना) बहुत सी महिलाएं सोचती हैं कि माहवारी या सम्भोग के बाद योनि को भरपूर भिगोने से वे साफ महसूस करेंगी वस्तुत: इससे योनिक स्राव और भी बिगड़ जाता है क्योंकि उससे योनि पर छाये स्वस्थ बैक्टीरिया मर जाते हैं जो कि वस्तुत: उसे संक्रामक रोगों से बचाते हैं
दबाव से बचें।
मधुमेह का रोग हो तो रक्त की शर्करा को नियंत्रण में रखाना चाहिए।
श्वेत प्रदर रोग के लक्षण
श्वेत प्रदर के रोग के होने पर महिलाओं के योनी मार्ग से गाढ़ा सफेद पानी निकलता हैं. यह पानी मटमैला, चिपचिपा, हल्का लाल और बदबूदार होता हैं. यह यह श्वेत प्रदर के रोग का गम्भीर रूप का लक्षण होता हैं. इन लक्षणों के आलावा इस रोग के गम्भीर रूप धारण करने पर महिला के हाथ – पैरों में, पिंडलियों में, घुटनों में और पैर की हड्डियों में बहुत दर्द होता हैं. इस रोग के होने पर हाथ – पैरों में जलन होती हैं. स्मरण शक्ति कम हो जाती हैं. शरीर में कमजोरी आ जाती हैं. चेहरा पीला पड जाता हैं. पेट में भारीपन महसूस होता हैं. इस रोग के होने पर शरीर में कैल्शियम की कमी हो जाती हैं तथा भूख भी कम लगती हैं. इस रोग के होने पर योनी में खुजली, जलन, योनिशूल, योनिगंध की समस्या उत्पन्न हो जाती हैं. इस रोग के होने पर योनी द्वार में जख्म भी हो जाता हैं.
उपचार:
 *श्वेत प्रदर के रोग से मुक्ति पाने के लिए आप फालसे के शर्बत का सेवन कर सकते हैं. फालसे के शर्बत का सेवन करने से जल्दी ही श्वेत प्रदर के रोग से राहत मिलती हैं.



*घृतकुमारी / घीकुंवर ( aloe-barbadenis) गुड़ या मिसरी के साथ खाली पेट लें ।
खुराक: 1 चम्मच 5-10 दिनों के लिए, यदि स्थिति में सुधार न हो तो इसे जारी रखें।एक सप्ताह या दस दिन के अन्तराल पर, यह उपचार 1-2 माह तक जारी रख सकते हैं आवश्यकतानुसार ।
*अशोक( saraca- indica- ashoka-tree) का 60 ग्राम छाल को 1 लीटर पानी में उबाल कर 250 मिलीलीटर तक कर लें।
खुराक: चार बार 1-2 चम्मच प्रतिदिन लें, 1-2 माह तक।

*नागकेशर
नागकेशर को 3 ग्राम की मात्रा में छाछ के साथ पीने से श्वेतप्रदर (ल्यूकोरिया) की बीमारी से छुटकारा मिल जाता है।*शतावर (Asparagus Racemosus) की ताज़ी कंदमूल या सूखी जड़ो का चूर्ण 5-10 ग्राम स्वादानुसार जीरे के चूर्ण के साथ 1 कप ढूध में सुबह खाली पेट में पिलाने से कमजोरी औ तनाव से होने वाली श्वेत वाली प्रदर 2-3 सप्ताह में ठीक हो जाती है ।
*गुलाब
गुलाब के फूलों को छाया में अच्छी तरह से सुखा लें, फिर इसे बारीक पीसकर बने पाउडर को लगभग 3 से 5 ग्राम की मात्रा में प्रतिदिन सुबह और शाम दूध के साथ लेने से श्वेतप्रदर (ल्यूकोरिया) से छुटकारा मिलता है।
*5 या 6 कच्चे केले लें और उन्हें सुखा लें. फिर इन सूखे केलों को पीसकर इसका चुर्ण तैयार कर लें. अब चुर्ण की समान मात्रा में गुड़ लें और उसे चुर्ण में मिला दें. फिर इस चुर्ण का सेवन करें. चुर्ण का सेवन करने से श्वेत प्रदर के रोग ठीक हो जायेगा|



*ब्राम्ही, बेंग साग (Centella asiatica) का चूर्ण दो छोटी चम्मच या उसका स्वरस 1-2 चाय की चम्मच दिन में दो बार मिसरी के साथ 15 -20 दिन तक दें।

*भिंडी का सेवन करने से भी श्वेत प्रदर का रोग ठीक हो जाता हैं. इस रोग को ठीक करने के लिए रोजाना सुबह खाली पेट कच्ची भिंडी का सेवन करें. आपको इस रोग से आराम मिलेगा|
*चना
सेंके हुए चने पीसकर उसमें खांड मिलाकर खाएं। ऊपर से दूध में देशी घी मिलाकर पीयें, इससे श्वेतप्रदर (ल्यूकोरिया) गिरना बंद हो जाता है।
*श्वेत प्रदर के रोग में आराम पाने के लिए 20 ग्राम मुलैठी लें. 10 ग्राम जीरा लें. 40 ग्राम अशोक के पेड़ की छाल लें. अब इन सभी चीजों मिलाकर महीन चुर्ण पीस लें. पिसने के बाद इस चुर्ण का सेवन दिन में 4 या 5 बार करें. आपको इस रोग से जल्दी ही छुटकारा मिलेगा.
*फिटकरी
चौथाई चम्मच पिसी हुई फिटकरी पानी से रोजाना 3 बार फंकी लेने से दोनों प्रकार के प्रदर रोग ठीक हो जाते हैं। फिटकरी पानी में मिलाकर योनि को गहराई तक सुबह-शाम धोएं और पिचकारी की सहायता से साफ करें। ककड़ी के बीजों का गर्भ 10 ग्राम और सफेद कमल की कलियां 10 ग्राम पीसकर उसमें जीरा और शक्कर मिलाकर 7 दिनों तक सेवन करने से स्त्रियों का श्वेतप्रदर (ल्यूकोरिया) रोग मिटता है।
*जामुन
छाया में सुखाई जामुन की छाल का चूर्ण 1 चम्मच की मात्रा में दिन में 3 बार पानी के साथ कुछ दिन तक रोज खाने से श्वेतप्रदर (ल्यूकोरिया) में लाभ होता है।
*सफेद मूसली का चुर्ण और ईसबगोल का सेवन करके भी श्वेत प्रदर के रोग से निजात पाई जा सकती हैं. श्वेत प्रदर के रोग से मुक्ति पाने के लिए मूसली का चुर्ण लें और ईसबगोल लें. अब इन दोनों का सेवन एक साथ करें. ईसबगोल और मूसली के चुर्ण का सेवन करने से यह रोग जल्दी ही ठीक हगो जायेगा|*श्वेत प्रदर के रोग को ठीक करने के लिए 3 केलों का सेवन रोजाना करें. आपको इस रोग से जल्द ही मुक्ति मिलेगी|
*सेमल (Bomabax-malabaricum- Silk cotton) की छाल- 200 ग्राम, पलाश (Butena fondosa – palas) का छाल- 200 ग्राम, शतावरी (Asparagus recemosus) की जड़ ( मूलकंद) -200 ग्राम, सभी को बराबर मात्र में लेकर कूट- पिसकर छान कर चूर्ण को कांच की शीशी में भरकर रख लें।इस चूर्ण को 1-2 चम्मच ठण्डे पानी या चावल के पानी, या मांड (ठण्डा) के साथ 15-20 दिन तक सुबह –शाम लें।
*श्वेत प्रदर के रोग को ठीक करने के लिए 5 या 6 ग्राम आंवले का चुर्ण लें और थोडा शहद लें. अब इन दोनों को अच्छी तरह से मिला लें और इसका सेवन करें. श्वेद प्रदर के रोग से राहत मिलेगी.
तेल, खटाई, मसाला, टमाटर, गर्मी पैदा करने वाला भोजन व कब्ज कारक पदार्थों का सेवन न करें|
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