3/5/17

जोड़ों और हड्डियों में दर्द के कारण, लक्षण और उपचार





मौसम के बदलाव, उम्र के बढ़ने, अनियंत्रित जीवनशैली व कई अन्य कारणों से लोगों को अक्सर शरीर में सूजन, जोड़ों का दर्द आदि की शिकायत होती रहती है। सूजन और जोड़ों का दर्द एक तरह का इन्फ्लेमेशन कहलाता है जो बहुत लंबे समय तक शरीर में बना रहे तो बेहद घातक भी हो सकता है। दरअसल शरीर में लंबे दौर तक चलने वाले इन्फ्लेमेशन से कैंसर होने के दावे तक आधुनिक विज्ञान ने किए हैं।
जोड़ों का दर्द शरीर के किसी भी हिसे में हो सकता है .काफी समय बैठे रहने से, सफर करने से या उम्र बढ़ने से हमारे घुटने अकड़ जाते है या दर्द करने लग जाते है. जिसे हम जोड़ो का दर्द या Joint Pain कहते है. जोड़ों का दर्द दो प्रकार का हो सकता है Osteo और Rheumatoid . कभी कभी घुटनों के दर्द की वजह से पूरा पैर दर्द करने लग जाता है. जोड़ों का दर्द हमे पैरों के घुटनों, गुहनियों, गदर्न, बाजुओं और कूल्‍हों में हो सकता है.
जोड़ों की कड़ी लचीली हड्डी में कुछ अज्ञात कारणों से ऊतकों के निष्क्रिय होने की प्रक्रिया प्रारम्भ हो जाती है, जिसके कारण जोड़ों की साइनोवियल झिल्ली में सूजन आ जाती है। यह लगातार बढ़ती जाती है, जिस कारण जोड़ों की सामान्य संरचना छिन्न-भिन्न हो जाती है और एक्स-रे कराए जाने पर जोड़ों की संरचना में विषमता पाई जाती है।
यदि जोड़ों के भीतर पाये जाने वाले ‘साइनोवियल द्रव्य’ की सूक्ष्मदर्शी द्वारा जांच करवाई जाए, तो उसमें ‘मोनोसोडियम यूरेट’ नामक रसायन के कण पाए जाते हैं, जो जोड़ों पर जमा होने लगते हैं और सामान्य क्रियाओं में बाधक बनते हैं। इस अवस्था को गठिया कहते हैं। इसकी शुरुआत प्राय: हाथों एवं पैरों की उंगलियों के जोड़ों से होती है। दुनिया के लगभग सभी देशों में यह बीमारी पाई जाती है। लगभग 2.5% आबादी इस रोग से पीड़ित है। वैसे तो यह बचपन से नब्बे साल तक कभी भी प्रारम्भ हो सकता है, किन्तु40 से 60 वर्ष की उम्र में अधिक होता है। यह स्त्रियों में अधिक होता है
जोड़ों का दर्द के लक्षण
1. जोड़ों में दर्द एवं अकड़ाव रहता है।
2. जोड़ों में सूजन आ जाती है।
3. जोड़ों को चलाना-फिराना मुश्किल हो जाता है।
4. हाथों की पकड़ने की ताकत (ग्रिप) क्षीण हो जाती है।
5. जोड़ों के साथ ही मांसपेशियों में कमजोरी आने लगती है।
6. लेटने के बाद उठने पर जोड़ों में जकड़न महसूस होती है।
7. सुबह उठने पर लगभग आधे घटे तक जकड़न बनी रहती है।
8. इसकी शुरुआत कभी-कभी अचानक होती है। यह प्राय: धीरे-धीरे प्रारम्भ होता है।
जोड़ों के दर्द के कारण :–
* हड्डियों में मिनरल यानि की खनिज की कमी होना
* अर्थराइटिस
* बर्साइटिस
* कार्टिलेज का घिस जाना
* खून का कैंसर होना (Blood Cancer )
* उम्र बढ़ने के कारण
* हडियों में मिनरल की कमी



गठिया के लक्षण

1. यह आनुवंशिक रोग है (10% रोगियों में)।
2. 30-40 वर्ष की उम्र के बाद में यह रोग शुरू होता है।
3. इसकी शुरुआत अव्यवस्थित होती है और चोट लगने, बुखार, व्रत रखने, ऑपरेशन के बाद अथवा खान-पान की गड़बड़ियों के कारण कभी भी यह रोग प्रारम्भ हो सकता है और बहुत तेजी से विकसित होता है।
4. कलाई, कुहनी, घुटना एवं एंकिल (पैर को टांग से जोड़ने वाला जोड़) एवं हाथ-पैरों की उंगलियों के जोड़ों में इसकी शुरुआत होती है।
5. स्नायु एवं मांसपेशियां (संबंधित जोड़ों की) भी प्रभावित होने लगती हैं।
6. शुरुआत किसी एक जोड़ से (प्राय: पैर के अंगूठे अथवा एंकिल जोड़ से) होती है और शीघ्र ही अन्य जोड़ों में भी बीमारी के लक्षण परिलक्षित होने लगते हैं।
7. 101 से 103 डिग्री फारेनहाइट तक बुखार रहता है।
8. प्रभावित जोड़ में सूजन आ जाती है और दर्द रहने लगता है।
9. छूने मात्र से ही तीव्र-दर्द रहने लगता है। कभी-कभी तो मरीज प्रभावित जोड़ बिस्तर के कपड़ों तक से छू जाने पर दर्द महसूस करता है।
10. घुटने आदि जोड़ों में द्रव्य इकट्ठा होने लगता है।
11. पुरानी गठियाजनित जोड़ों में अकड़ाव, दर्द, सूजन, जोड़ों को घुमाना-फिराना मुश्किल हो जाता है।
12. साइनोवियल झिल्ली मोटी हो जाती है।
गठिया का रोकथाम एवं बचाव
(गठिया एवं जोड़ों की सूजन, दोनों ही स्थितियों में) –
1. रोग की अवस्था में (तीव्रता में) बिस्तर पर आराम आवश्यक है।
2. गठिया रोग होने पर प्यूरीनयुक्त भोजन,जैसे ग्रंथियुक्त विशेष प्रकार का मांस नहीं खाना चाहिए।
3. वजन कम नहीं होने देना चाहिए।
4. पानी अधिक से अधिक पीना चाहिए, ताकि गुर्दो में पथरी न बने।
5. अलग से सूक्ष्म मात्रा में सोडियम बाईकार्बोनेट लेना, गुर्दो में पथरी की सम्भावना को रोकता है, किन्तु अधिक मात्रा में नहीं लेना चाहिए, क्योंकि अधिकता होने पर (सोडियम की) उच्च रक्तचाप, हृदय संबंधी विकार आदि उत्पन्न हो सकते हैं।
6. शारीरिक चोटों से जोड़ों को बचाना चाहिए, अन्यथा सूजन और बढ़ जाएगी।
7. जोड़ों के व्यायाम (फिजियो थेरेपी) मांसपेशियों, स्नायुओं एवं जोड़ों की ताकत बढ़ाने एवं इनके सही संचालन में अत्यंत मददगार होते हैं।




गठिया का रोकथाम एवं बचाव
(गठिया एवं जोड़ों की सूजन, दोनों ही स्थितियों में) –
1. रोग की अवस्था में (तीव्रता में) बिस्तर पर आराम आवश्यक है।
2. गठिया रोग होने पर प्यूरीनयुक्त भोजन,जैसे ग्रंथियुक्त विशेष प्रकार का मांस नहीं खाना चाहिए।
3. वजन कम नहीं होने देना चाहिए।
4. पानी अधिक से अधिक पीना चाहिए, ताकि गुर्दो में पथरी न बने।
5. अलग से सूक्ष्म मात्रा में सोडियम बाईकार्बोनेट लेना, गुर्दो में पथरी की सम्भावना को रोकता है, किन्तु अधिक मात्रा में नहीं लेना चाहिए, क्योंकि अधिकता होने पर (सोडियम की) उच्च रक्तचाप, हृदय संबंधी विकार आदि उत्पन्न हो सकते हैं।
6. शारीरिक चोटों से जोड़ों को बचाना चाहिए, अन्यथा सूजन और बढ़ जाएगी।
7. जोड़ों के व्यायाम (फिजियो थेरेपी) मांसपेशियों, स्नायुओं एवं जोड़ों की ताकत बढ़ाने एवं इनके सही संचालन में अत्यंत मददगार होते हैं।
जोड़ों के दर्द के आयुर्वेदिक व औषधीय उपचार इस प्रकार है।
*कड़वे तेल में अजवायन और लहसुन जलाकर उस तेल की मालिश करने से बदन के जोड़ों के दर्द में आराम होता है।
*काले तिल और पुराने गुड़ को बराबर मात्रा में मिलाकर खाएं। ऊपर से बकरी का दूध पीएं 
बड़ी इलायची तेजपात, दालचीनी, शतावर, गंगेरन, पुनर्नवा, असगंध, पीपर, रास्ना, सोंठ, *गोखरू इन सबको गिलोय के रस में घोटकर गोली बनाकर, बकरी के दूध के साथ दो-दो गोली सुबह सबेरे खाने से गठिया रोग में आराम मिलता है।
*मजीठ हरड़, बहेड़ा, आंवला, कुटकी, बच, नीम की छाल, दारू हल्दी, गिलोय, का काढ़ा पीएं।
*लहसुन को दूध में उबालकर, खीर बनाकर खाने से गठिया रोग में आराम होता है।
शहद में अदरक का रस मिला कर पीने से जोड़ों के दर्द में आराम होता है।
*सौठ, अखरोट और काले तिल एक, दो, चार के अनुपात में पीस कर सुबह-शाम गरम पानी से दस से पंद्रह ग्राम की मात्रा में सेवन करने से जोड़ों के दर्द में लाभ होता है।
जोड़ों के दर्द के रोगी को भोजन से पहले आलू का रस दो-तीन चम्मच पीने से लाभ होता है। इससे यूरिक एसिड की मात्रा कम होने लगती है।
*जोड़ों के दर्द के रोगी को चुकंदर और सेव का सेवन करते रहना चाहिए। इससे यूरिक अम्ल की मात्रा नियंत्रण में रहती है।
*सौंठ और काली मिर्च का काढ़ा बनाकर रोगी को सुबह-शाम चाय की तरह सेवन करना चाहिए।
*अश्वगंधा चूर्ण तीन ग्राम एक गिलास दूध में उबालकर पियें। कुछ दिनों तक लगातार यह प्रयोग करने से लाभ होता है।
*लहसुन की 10 कलियों को 100 ग्राम पानी एवं 100 ग्राम दूध में मिलाकर पकायें। पानी जल जाने पर लहसुन खाकर दूध पीने से दर्द में लाभ होता है।
*250 मि.ली. दूध एवं उतने ही पानी में दो लहसुन की कलियाँ, 1-1 चम्मच सोंठ और हरड़ तथा 1-1 दालचीनी और छोटी इलायची डालकर पकायें। पानी जल जाने पर वही दूध पीयें।
*नागकेसर के तेल से मालिश करने से आराम होता है।
*प्याज को सरसों के तेल में पका लें। इस तेल से मालिश करने से जोड़ों के दर्द में लाभ होता है।
*मेंहदी के पत्तो को पीसकर जोड़ों पर बांधने से आराम होता है।
*इस रोग का उपचार करने में तुलसी बड़ी कारगर भूमिका निभाती है क्योंकि तुलसी में वात विकार को मिटाने का प्राकृतिक गुण होता है। तुलसी का तेल बनाकर दर्द वाली जगह लगाने से तुरंत आराम मिलता है।
*ज्यादा तकलीफ होने पर नमक मिले गरम पानी का टकोर व हल्के गुनगुने सरसों के तेल की मालिश करें।
*मोटापे पर नियंत्रण रखें। नियमित सूक्ष्म व्यायाम व योगाभ्यास करें।
*भोजन में खट्टे फलों का प्रयोग न करें।
*बथुआ के ताजा पत्तों का रस पन्द्रह ग्राम प्रतिदिन पीने से गठिया दूर होता है। इस रस में नमक-चीनी आदि कुछ न मिलाएँ। नित्य प्रात: खाली पेट लें या फिर शाम चार बजे। इसके लेने के आगे पीछे दो – दो घंटे कुछ न लें। दो तीन माह तक लें।
*जोड़ों के दर्द के समय या बाद में गर्म पानी के टब में कसरत करें या गर्म पानी के शॉवर के नीचे बैठें। आपको निश्चित ही राहत मिलेगी।
*दर्द घटाने के बाम, क्रीम आदि बार-बार इस्तेमाल न करें। इनके द्वारा पैदा हुई गर्मी से राहत तो मिलती है, पर धीरे-धीरे ये नुकसान पहुंचाते हैं।
*जोड़ों के दर्द के लिए चमत्कारिक दवा, तेल या मालिश वगैरह के दावे बहुत किए जाते हैं। इनको इस्तेमाल करने से पहले एक बार परख लें।
*एरंडी के तेल को गर्म करो और उसमे लहसुन की कलियाँ जला दो । ये तेल लगाने से जोड़ों का दर्द दूर होता है
*2 ग्राम दालचीनी पावडर और एक चम्मच शहद, एक कप गुनगुने पानी में मिलाकर दिन में तीन बार सेवन करने से तुरंत असर होता है|
विशिष्ट परामर्श-  


संधिवात,,कमरदर्द,गठिया, साईटिका ,घुटनो का दर्द आदि वात जन्य रोगों में जड़ी - बूटी निर्मित हर्बल औषधि ही अधिकतम प्रभावकारी सिद्ध होती है| रोग को जड़ से निर्मूलन करती है| बिस्तर पकड़े पुराने रोगी भी दर्द मुक्त होकर चल फिर सकने योग्य हो जाते हैं||औषधि के लिए वैध्य दामोदर से 98267-95656 पर संपर्क करने की सलाह दी जाती है|

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