शुक्रवार, 19 मई 2017

मूत्र का रुक – रुक कर आने के घरेलू उपचार



मूत्रावरोध का कारण व लक्षण
पेशाब का रुक-रुक कर आना भी प्राय: वृधावस्था की ही बीमारी है। इस रोग का प्रमुख कारण या तो मूत्र मार्ग में आया कोई अवरोध या मांसपेशियों पर शरीर के नियंत्रण में कमी होना होता है।
मूत्रावरोध का उपचार
* शलगमः पेशाब के रुक-रुककर आने पर शलगम व कच्ची मूली काटकर खानी चाहिए। इससे काफी लाभ होगा।
*नारियलः नारियल के सेवन से मूत्र संबंधी रोगों में काफी फायदा होता
*बेलः पांच ग्राम बेल के पत्ते, पांच ग्राम सफेद जीरा व पांच ग्राम सफेद मिश्री को मिलाकर पीस लीजिए। इस प्रकार तैयार चटनी को तीन-तीन घंटे के अंतराल के बाद खाएं। इससे खुलकर पेशाब आएगा।
*गुर्दे के रोग -

*आम की बनावट गुर्दे जैसी होती है। नित्य आम खाने से गुर्दे की दुर्बलता दूर हो जाती है। *अंगूर की बेल के ३० ग्राम पत्तों को पीसकर पानी मिलाकर छानकर नमक मिलाकर पीने से गुर्दे के दर्द में आराम मिलता है। 
*लौकी के टुकड़े को गर्म करके दर्द वाले स्थान पर इसके रस की मालिश करने से और लेप करने से आराम मिलता है।
मूत्रजलन —
 इलायची और आंवले का चूर्ण समान भाग में मिलाकर पानी से पीने पर मूत्र की जलन ठीक होती है।



पेशाब की रुकावट —
पलास के फूल सूखे या हरे पानी के साथ पीसकर थोड़ा सा कलमी शोरा मिलाकर नाभि के नीचे पेडू पर लगाने से ५.१० मिनट में पेशाब खुलकर आने लगता है।
पथरी — 
१ गिलास पानी में १ नींबू निचोडकर सेंधा नमक मिलाकर सुबह शाम दो बार नित्य १ माह तक पीने से पथरी पिघलकर निकल जाती है।
*आंवलाः आंवले को पीसकर पेडू पर लेप कर दें। कुछ ही मिनटों में खुलकर पेशाब आ जाएगा।
खीराः ताजे परंतु कच्चे खीरे को काटकर नमक में मसल लें व कुछ बूंद नीबूमिलाकर खाएं, दो घंटे तक पानी न पीएं पेशाब की सारी रुकावटें समाप्त हो जाएंगी।
उपचार
* नीबूः नीबू के बीजों को महीन पीसकर नाभि पर रखकर ठंडा पानी डालें। इससे रुका हुआ पेशाब खुल जाता है।
*. केलाः केले के तने का चार चम्मच रस लेकर उसमें दो चम्मच घी मिलाकर पीएं। इससे बंद हुआ पेशाब तुरंत खुलकर आने लगता है। केले की जड़ के रस को गोमूत्र में मिलाकर सेवन करने से रुका हुआ पेशाब खुल जाता है। केले की लुगदी बनाकर उसका पेडू पर लेप करने से भी पेशाब खुल जाता है। यह काफी प्राचीन व मान्यताप्राप्त नुस्खा है।
3. अरंडीः अरंडी का तेल 25 से 50 ग्राम तक गरम पानी में मिलाकर पीने से भी 15-20 मिनट में ही रुका हुआ पेशाब खुल जाता है।
पेशाब रुकना — हरे धनिए की पत्तियों का रस दो तोले और एक तोला शक्कर मिलाकर दें यदि एक बार देने से लाभ न हो तो दोबारा दें। गर्म दूध में गुड मिलाकर पीने से मूत्राशय के रोगों में लाभ होता है। यह नित्य एक गिलास दो बार पिएं। गुर्दे की खराबी से यदि पेशाब बनना बंद हो जाए तो मूली का रस दो औंस प्रति मात्रा पीने से वह फिर बनने लगता है। नींबू के बीजों को पीसकर नाभि पर रखकर ठण्डा पानी डालें। रुका हुआ पेशाब होने लगता है। जीरा और चीनी—दोनों को समान मात्रा में पीसकर दो चम्मच फंकी लेने से लाभ होता है। रोज दो बार ५० ग्राम नारियल खाने से लाभ होता है। ककड़ी का रस लेने से मूत्र अधिक मात्रा में आता है। खरबूजा लेने से भी लाभ होता है। केले के तने का रस चार चम्मच, घी दो चम्मच मिलाकर नित्य दो बार पिलाने से पेशाब खुलकर आता है। मूत्रकृच्छ (पेशाब में रक्त आना और रुकावट) रात को कोरी हाँडी में आधा किलो उबलता हुआ पानी भर कर उसमें तीस ग्राम अधकचरा कुटा हुआ धनिया डालना।
* तरबूजः तरबूज के भीतर का पानी 250 ग्राम, 1 माशा जीरा व 6 माशा मिश्री को मिलाकर पीने से मूत्र का रुकना ठीक हो जाता है व रोगी को बहुत आराम मिलता है।
* नारियलः नारियल व जौ का पानी, गन्ने का रस व कुलथी का पानी मिलाकर पीने से पेशाब खुल जाता है।



मूत्र का पीलापन

*शहतूतः शहतूत के शरबत में थोड़ी शक्कर घोलिए और पी जाइए। इससे पेशाब का पीलापन दूर हो जाएगा।
*संतराः पेशाब में जलन होने पर नियमित एक गिलास संतरे का रस पीएं।
* नीबूः नीबू की शिकंजी पीने से पेशाब का पीलापन दूर हो जाता है।
पेशाब रोग की होमियोपैथिक दवा
लक्षणों की समानता के आधार पर उपरोक्त वर्णित बीमारियों एवं रोग लक्षणों के लिए निम्न होमियोपैथिक औषधियां अत्यधिक कारगर एवं सफल सिद्ध रही हैं –
सारसापेरिला : पेशाब के समय असह्य कष्ट होना, गर्म चीजों के सेवन से कष्ट बढ़ना, बैठक पेशाब करने में तकलीफ के साथ-साथ बूंद-बूंद करके पेशाब उतरना, खड़े होकर करने पर पेशाब आसानी से होना, पेशाब में सफेद पदार्थ का निकलना और पेशाब का मटमैला होने की स्थिति में 6 शक्ति में लें।
केंथेरिस : मूत्र-मार्ग का संक्रमण, बार-बार पेशाब जाना, असंयम, पेशाब रोक पाने में असमर्थ, पेशाब रोकने पर दर्द, बूंद-बूंद करके पेशाब होना, पेशाब से पहले एवं पेशाब के बाद में जलन रहना, हर वक्त पेशाब की इच्छा, जेलीयुक्त पेशाब आदि लक्षण मिलने पर दवा 30 शक्ति में प्रयोग करनी चाहिए।
नाइट्रिक एसिड : थोड़ा पेशाब होना, घोड़े के बदबूदार पेशाब जैसी दुर्गंध, जलन, चुभन पेशाब में खून एवं सफेद पदार्थ (एल्ब्युमिन) आना, ठंडा पेशाब, साथ ही किसी चौपहिया गाड़ी में चलने पर सारी परेशानियां दूर हो जाती हैं, तो 30 शक्ति में औषधि का सेवन करना चाहिए।
हेमेमिलिस : बार-बार पेशाब की हाजत के साथ ही पेशाब में खून आना (काले रंग का रक्त स्राव, स्त्रियों में उपनियमित माहवारी) मूल अर्क में 5-10 बूंद औषधि दिन में तीन बार नियमित रूप से लेने पर आराम मिलता है। 30 शक्ति में भी ले सकते हैं।
एपिस : पेशाब में जलन व दुखन, कम मात्रा में कतरे आना, बार-बार हाजत, चुभन जैसा दर्द, गाढ़े पीले रंग का पेशाब, पेशाब की हाजत होने पर रोक पाना मुश्किल, आखिरी बूंद पर अत्यधिक जलन एवं दर्द महसूस होना आदि लक्षण मिलने पर 30 शक्ति में सेवन करना लाभप्रद रहता है।


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