5/6/17

जावित्री के गुण फायदे उपयोग






जावित्री
जावित्री के दो पहलु होते हैं - एक खाने योग्य होता है और दूसरा नहीं। यहाँ हम जावित्री के बारे में बात करने जा रहे हैं - भारतीय पाकशैली में सबसे स्वादिष्ट और महक वाला मसालों में यह एक है।
इसका अपना एक लंबा इतिहास है
पहले यह जाने कि जावित्री है क्या। जावित्री मोमी लाल और जालीदार वृद्धि वाला होता है जो जयफल के बीज को चारों तरफ से घेरकर रहता है। लेकिन जयफल है क्या? किसी और समय हम इसकी व्याख्या करेंगे। चलिए, आपको एक बात बताता हूं कि ए.डी. पहली शताब्दी को व्यंजन में जयफल के इस्तेमाल के इतिहास का पता चला है। 1843 में बनडा से बीज लाकर ग्रेनाडा में पेश किया गया और सेंट जॉन के क्षेत्र व्लेविडेरा एस्टेट में बीजारोपण किया गया। जयफल के पौधे ज़्यादातर उष्णकटिबंधीय देशों में पाए जाते है जहाँ की जलवायु और मिट्टी पौधे के वृद्धि के लिए उपयुक्त होती है।
गरम स्वाद गरम रंग



जयफल सूखने के साथ नारंगी रंग में बदल जाता है और उच्च क्वालिटी का मसाला अपने रंग को बनाए रखता है। कुछ प्रकार क्रीमी या भूरे रंग में बदल जाते हैं। पूरा सूखा जयफल को ब्लेड कहा जाता है। ब्लेड को पीस लेना ही अच्छा होता है। रसोइए अपने ज़रूरतानुसार इसको पीस लेते हैं। ब्लेड के रूप में संरक्षित करने से इसका स्वाद अच्छा रहता है। ठंडे और सूखे जगह पर इसको संरक्षित करना चाहिए, नमी के संपर्क में नहीं आना चाहिए।
पाक-शैली में इस्तेमाल
लगभग 55 डिग्री फैरनहाइट के तापमान में और आद्र गरम जलवायु में इस मसाले को उपजाया जाता है। आजकल यह मसाला भारत, इंडोनेशिया, श्रीलंका, वेस्ट इंडीज़ और ब्राज़ील में उपजाया जाता है। वैसे तो जयफल और जावित्री महक, स्वाद, में लगभग समान है जबकि जावित्री ज़्यादा परिष्कृत होता है और मीठा और नमकीन दोनों व्यंजनों में इसका इस्तेमाल होता है। भारत में, यह मूल रूप से मुघलाई व्यंजनों में इस्तेमाल होता है जबकि इटली में पास्ता के फिलींग के रूप में इस्तेमाल होता है, अरबी मटन में इस्तेमाल करते हैं तो यूरोप में मीठा और नमकीन व्यंजनों में इसका इस्तेमाल किया जाता है।
दूसरे वैशिष्ट्य
यह माना जाता है कि यह मसाला हजम करने में मदद करता है और मितली से राहत दिलाता है। सावधानी की बात, इसमें हालूसीनोजेन्स होता है और फैटली विषाक्त का खुराक बड़ी मात्रा में रहता है। थोड़े मात्रा में इस्तेमाल करने से यह सुरक्षित होता है।




जावित्री के असरदार नुस्खे और उपाय 
जावित्री:
*1 से 3 ग्राम जावित्री के चूर्ण को 100 से 250 मिलीलीटर दूध के साथ दिन में 2 बार लेने से वीर्य का जल्दी निकलने का रोग दूर हो जाता है।
*जावित्री, सफेद कनेर की छाल, समुद्रशोष, अफीम, खुरासानी अजवायन, जायफल, पीपल, मिश्री को बराबर मात्रा में लेकर बारीक पीसकर गुड़ के साथ 4-4 ग्राम की गोलियां बनाकर रख लें। इसमें से एक गोली रात को सोते समय खाने से संभोगशक्ति बढ़ जाती है।अकरकरा: अकरकरा, सोंठ, लौंग, केसर, पीपल, जायफल, *जावित्री, और सफेद चन्दन को 6-6 ग्राम की मात्रा में लेकर बारीक पीसकर उसमें 20 ग्राम अफीम मिला लें। फिर इसमें शहद मिलाकर उड़द के आकार की गोलियां बनाकर एक-एक गोली खा लें और ऊपर से दूध पी लें। इससे संभोग करने की कमजोरी दूर होती है।

*कष्ट को दूर करें (Trouble) – अगर किसी व्यक्ति को किसी भी प्रकार का कष्ट हो दुःख हो, तो वह हर प्रकार के कष्ट से निजात पाने के लिए इस उपाय को कर सकता हैं. इस उपाय को करने के लिए रोजाना गणेश जी की मूर्ति पर जावित्री चढाएं और रात को सोने से पहले जावित्री को खाकर सोयें.लगातार 21 दिनों तक इस उपाय को करने से आपके सभी संकट, कष्ट तथा दुःख दूर हो जायेंगे
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