गुरुवार, 20 जुलाई 2017

अचार खाने के फायदे और नुकसान //The advantages and disadvantages of eating pickle





  नींबू, गाजर, टमाटर, प्याज, लहसुन, आंवला, कटहल, आम, आंवला और न जाने क्या कुछ. बात अगर अचार की हो तो लिस्ट इतनी लंबी हो जाएगी कि पढ़ते-पढ़ते ही मुंह में पानी आ जाएगा. हालांकि अचार की ढ़ेरों क्वालिटी होने के बावजूद कुछ ही ऐसे अचार होते हैं जिन्हें प्रमुखता से खाया जाता है.
अचार कम ही मात्रा में सही पर हमारे खान-पान का महत्वपूर्ण का हिस्सा होते हैं. खट्टे, मीठे और तीखे स्वाद में उपलब्ध अचार भारतीय थाली के जायके को और अधिक बढ़ाने का काम करते हैं. कोई भी अचार मुख्य रूप से मसालों, सरसों के तेल, नमक और सिरके से ही तैयार होता है.


अचार का सेवन

सिर्फ भारत ही नहीं दुनियाभर में खाने के साथ अचार का सेवन किया जाता है। अगर भारत की बात की जाये तो यह खाने का अहम हिस्‍सा है। भारत में विभिन्‍न प्रकार के फलों और सब्जियों में तेल और मसाले मिलाकर अचार बनाया जाता है। चीन, जापान, कोरिया में सब्जियों के साथ अंडे में मसाले और सोया सॉस मिलाकर अचार बनाया जाता है। जबकि पश्चिमी देशों में सब्जियों और फलों को सिरके में डुबोकर अचार बनाया जाता है। यानी दुनियाभर में खाने के साथ इसका सेवन किया जाता है। फलों और सब्जियों के साथ मसाले और तेलयुक्‍त अचार के सेवन बहुत सारे स्‍वास्‍थ्‍यवर्धक फायदे हैं, लेकिन इससे होने वाले नुकसान को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।
पाचन क्रिया सुधारे
अचार खाने से पाचन क्रिया दुरुस्‍त होती है। दरअसल पेट में अच्‍छे और बुरे दोनों तरह के कीटाणु होते हैं, जब आप किसी भी प्रकार की एंटीबॉयटिक दवा का सेवन करते हैं, तब अच्‍छे कीटाणु समाप्‍त हो जाते हैं। इससे पाचन क्रिया प्रभावित होती है और खाना आसानी से नहीं पचता है। जबकि अचार में नमक होता है जो प्रोबॉयोटिक्‍स के विकास में सहायक है। इससे पाचन क्रिया में सुधार होता है।
*गर्भावस्था के दौरान अचार खाने की क्रेविंग होती है. आम का अचार और नींबू का अचार खाने से सुबह के वक्त गर्भवती को होने वाली कमजोरी में राहत मिलती है.
लीवर को मजबूत बनाये
आंवला से बने अचार लीवर के लिए फायदेमंद हैं, आंवला में पाये जाने वाले गुणों के कारण लीवर मजबूत होता है। आंवला अल्‍सर जैसी बीमारी से बचाव करता है। साथ ही यह पाचन क्रिया को भी सुधारता है। इसलिए आंवला के अचार का सेवन करना फायदेमंद है।
*अगर आप वजन घटाने का हर तरीका आजमाते हैं तो एकबार ये तरीका भी आजमाकर देखिए. अचार खाने से वजन कम होता है. दरअसल, इसमें बहुत कम मात्रा में कैलोरी होती है. साथ ही इसमें मौजूद मसाले फैट को बहुत जल्दी टुकड़ों में बांट देते हैं
अधिक नमक होता है
अचार फायदे के साथ नुकसानदायक भी है। आचार में नमक की मात्रा काफी अधिक होती है। जिसके कारण यह स्‍वास्थ्‍य पर बुरा असर भी डालता है। बाजार में मिलने वाले आचार तो और अधिक नुकसानदेह हैं, क्‍योंकि उनमें सोडियम के साथ केमिकल भी होता है। इसमें पाया जाने वाला सोडियम बेंजोएट को ज्यादा खाने से कैंसर तक की समस्‍या हो सकती है।
दिमाग के लिए फायदेमंद
अचार पेट के साथ-साथ दिमाग के लिए भी फायदेमंद है। अचार में पाये जाने वाले प्रोबॉयोटिक्‍स बैक्‍टीरिया दिमाग के लिए भी फायदेमंद होते हैं। कुछ शोधों में यह बात साबित हो चुकी है कि केंद्रीय तंत्रिका प्रणाली और दिमाग के बीच में गहरा संबंध होता है, अगर पेट सही रहे तो दिमाग भी सही तरह से काम करता है।
अधिक तेल
अचार बनाते वक्‍त अधिक तेल और मसालों का प्रयोग किया जाता है। तेल के अधिक इस्‍तेमाल करने के कारण शरीर में कोलेस्‍ट्रॉल की मात्रा बढ़ती है, इसके कारण वजन बढ़ने की समस्‍या हो सकती है। इसके कारण हृदय संबंधी बीमारियां भी हो सकती हैं।
मुक्‍त कणों से बचाये
अचार को बनाने के लिए फलों और सब्जियों का प्रयोग होता है, इसके लिए सब्जियों और फलों को बिना पकाये प्रयोग करते हैं। जिससे सब्जियों और फलों में मौजूद एंटी-ऑक्‍सीडेंट्स समाप्‍त नहीं होते हैं। यही एंटी-ऑक्‍सीडेंट अचार के जरिये शरीर में पहुंचते हैं और मुक्‍त कणों यानी फ्री रैडिकल्‍स से शरीर को बचाते हैं। जो विभिन्‍न प्रकार की बीमारियों का कारण बनता है।अचार में एंटी-ऑक्सीडेंट भरपूर होता है. जो शरीर को फ्री-रेडिकल्स से सुरक्षित रखने का काम करता है. ऐसे में अगर आप नियंत्रित मात्रा में इसका सेवन करते हैं तो ये काफी फायदेमंद है.
*कुछ शोधों की मानें तो मधुमेह में अचार खाना फायदेमंद होता है. सप्ताह में एकबार अचार खाना फायदेमंद रहेगा. मधुमेह के मरीजों को आंवले के अचार का सेवन करना चाहिए.
कैंसर का खतरा
अचार के अधिक सेवन कैंसर जैसी खतरनाक और जानलेवा बीमारी भी हो सकती है। एक अध्ययन में यह सामने आया है कि जो लोग आचार का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं उन्हें गैस्ट्रिक कैंसर की समस्‍या अधिक होती है। इसके अलावा इसके सेवन से गले में खराश और दर्द की भी शिकायत रहती है। यह ईसाफेगल कैंसर का भी कारण बन सकता है।
*बता दें कि आचार को रोजाना अपने भोजन में लेना किसी बड़े खतरे से कम नहीं है। इस बात से हम इंकार नहीं कर रहे हैं कि आजार का हमारे भोजन में शामिल हो जाने से भोजन का स्वामद ही बदल जाता है। आचार कई तरह के बनते हैं जैसे- नींबू, आम, आंवला, गाजर आदि। भारत में खासकर आचार को बहुत महत्तव दिया जाता है, इसे आमतौर पर बहुत अधिक तेल, मसाले और नमक के साथ बनाया जाता है।


डायबिटीज का खतरा

बता दें कि आचार खासकर उन लोगों के बहुत बुरी चीज़ है जिन्हें डायबिटीज की शिकायत हो। बता दें कि आचार, संरक्षक के रूप में चीनी के साथ बनाया जाता है। इसलिए यह डायबिटीज से ग्रस्त लोगों के लिए किसी जहर से कम नहीं है। ऐसे रोगियों को चीनी वाले आचार के सेवन से बचना चाहिए।
ट्राइग्लिसराइड की समस्या
यूं तो आचार में मौजूद सभी प्रकार के संरक्षक के कारण स्वाटस्य् ा के लिए बुरा होता है। संरक्षक में आमतौर पर तेल की मात्रा बहुत ज्यादा होती है। यही नहीं इसकी मौजूदगी से शरीर में ट्राइग्लिसराइड के स्तर में वृद्धि हो जाती है।
अल्सर की समस्या
यूं तो आचार में बहुत अधिक मसालों के कारण आंतों के अल्सर की समस्या होना बहुत कॉमन बात है। रोजाना आचार का सेवन करने वाले लोगों में यह समस्या ज्यादा देखने को मिलती है, इसलिए जितना हो सके कम आचार खाना चाहिए, घर में बना आचार खाना चाहिए और आचार को बनाते समय उसमें बहुत ज्यादा मसाले मिलाने से बचना चाहिए।
शरीर में सूजन होना
जान लें कि आचार में संरक्षण के कारण, नमक की अधिक मात्रा का इस्तेमाल होता है, जिसमें सोडियम बहुत अधिक मात्रा में होता है। सोडियम के कारण शरीर पानी की बड़ी राशि को बनाए रखने के प्रतिक्रिया करता है जो शरीर के संतुलन के लिए आवश्यक होती है, जिससे शरीर में सूजन की समस्याी होती है।


पाचन समस्या में शिकायत

यह बहुत कम लोग जानते होंगे कि बहुत अधिक मात्रा में आचार को खाने से, आचार का रस आपकी पाचन समस्याकओं का कारण बन सकती है। पेट की परेशानी, दर्द और पेट फूलना बहुत अधिक खाने से होने वाले दुष्प्राभाव हैं। यही नहीं, इससे डायरिया के कारण पाचन तंत्र की परत को प्रभावित करता है।










एक टिप्पणी भेजें