शुक्रवार, 7 जुलाई 2017

एक्‍जिमा (खाज)के घरेलू आयुर्वेदिक उपाय उपचार





     एक्जिम एक प्रकार का चर्म रोग है। त्वचा के उत्तेजक, दीर्घकालीन विकार को एक्जिमा के नाम से जाना जाता है। इस रोग में त्वचा शुष्क हो जाती है और बार-बार खुजली करने का मन करता है क्योंकि त्वचा की ऊपरी सतह पर नमी की कमी हो जाती है, जिसके परिणामस्वरूप त्वचा को कोई सुरक्षा नहीं रहती, और जीवाणुओं और कोशाणुओं के लिए हमला करने और त्वचा के भीतर घुसने के लिए आसान हो जाता है। एक्जिमा के गंभीर मामलों में त्वचा के ग्रसित जगहों से में पस और रक्त का स्राव भी होने लगता है। यह रोग डर्माटाईटिस के नाम से भी जाना जाता है।
    मुख्य रूप से यह रोग खून की खराबी के कारण होता है और चिकित्सा न कराने पर तेजी से शरीर में फैलता है। एक्जिमा का रोग अपने रोगियों को उम्र और लिंग के आधार पर नहीं चुनता। एक्जिमा के रोग से ग्रस्त रोगी अन्य विकारों के भी शिकार होते हैं। यह किसी भी उम्र के पुरुष या महिलाओं को प्रभावित कर सकता है। लेकिन कुछ आयुर्वेदिक उपचारों को अपनाकर इस समस्‍या के लक्षणों को कम किया जा सकता है।
खदिरारिष्ट
२० मिलीलीटर खदिरारिष्ट को २० मिलीलीटर पानी में मिलाकर खाना खाने के बाद दिन में दो बार लेने से फायदा होता है।
गुदुच्याड़ी तेल
एक औषधियुक्त तेल जिसे ग्रसित जगह पर लगाने से लाभ मिलता है।
पञ्चनिम्बडी चूर्ण
खाना खाने के बाद आधे से एक चमच पानी के साथ लेने से भी लाभ होता है।





नीम 
नीम रक्त विकारों में बहुत ही लाभकारी है | पाव भर सरसों के तेल में नीम की 50 ग्राम के लगभग कोंपलें पकाएं | कोंपले काली होते ही तेल नीचे उतार लें | छानकर बोतल में रखें और दिन में थोड़ा-थोड़ा एग्जिमा प्रभावित स्थान पर लगाएं | नीम की कोंपलों का रस 10 ग्राम की मात्रा में नित्य सेवन करते रहने से भी एक्जीमा ठीक हो जाता है |
आटे का लेप :
गेहूं के आटे का लेप करने से शरीर के सारे चर्म रोग दूर हो जाते हैं और खुजली में आराम मिलता है।
*तुलसी के पत्तों का रस पीने और लगाते रहने से लाभ होता है |
शुद्ध गुग्गूल-
आयुर्वेद की बहुत ही प्रचलित जड़ी बूटी, गुग्गूल में शुद्धि और तरोताजा करने के लिए अत्यधिक ओजस्वी शक्तियों का समावेश होता है।

एलोविरा 
एलोविरा के पौधे की पत्‍ती को काट लें और उसमें से निकलने वाले जेल को खुजली वाली जगह पर लगा लें। दिन में कम से कम चार से पांच बार ऐसा करने पर आपको आराम मिलेगा। साथ ही ठीक होने तक लगाने पर बाद में कभी खुजली नहीं होगी।
नींबू :
नींबू हर घर में आराम से मिल जाता है। इसलिए बॉडी में जहां पर भी खुजली हो रही हो उस जगह पर नींबू और गरी का तेल मिलाकर लगा लें। लगाने के तुरंत बाद खुजलाएं नहीं। थोड़ी देर में आराम मिल जाएगा।



छाछ -

. छाछ में एक साफ कपड़े का टुकड़ा भिगोकर त्वचा पर जलन, खुजली और बेचैनी वाले स्थान पर रखें | जितनी अधिक देर रख सकें, रखें | फिर उस स्थान को भली प्रकार साफ कर दें |

*खुबानी के पत्तों के रस का दाद-खाज पर प्रयोग करना भी लाभदायक है |
खीरे का रस:
खीरे को बारीक स्‍लाइस में काटकर दो घंटे के लिए रख दें। पूरा रस निकल जाने के बाद उसे छान लें और खुजली वाली जगह पर लगा लें। जरूर आराम होगा।
चन्दन
एक चम्मच कपूर के साथ एक चम्मच चन्दन की लई मिलाकर एक्जिमा से ग्रसित जगह पर लगाने से भी बहुत फायदा होता है।
नीम
नीम के कोमल पत्तों का रस निकालकर उसमें थोड़ी सी मिश्री मिला लें। इसे प्रतिदिन सुबह पीने से खून की खराबी दूर होकर एक्जिमा ठीक होने लगता है।

*चने के आटे में पानी मिलाकर पेस्ट सा बनाकर त्वचा के विकारग्रस्त स्थान पर लगाने से लाभ होता है | चने के आटे का उबटनके रूप में प्रयोग से मेकअप से होने वाला एक्जीमा भी ठीक हो जाता है |
*शुद्ध हल्दी भी एक्जिमा की चिकित्सा में लाभ  करती है। इसे एक्जिमा के चकतों पर लगाया जा सकता है और दूध में मिलाकर भी पीया जा सकता है।
हरड़-
4 हरड़ को गौमूत्र में पीसकर लेप बना लें। यह लेप प्रतिदिन दो से तीन बार एक्जिमा पर लगाने से लाभ होता है।




आहार और खान पान
दही और अचार जैसे खट्टी चीज़ों का सेवन बिलकुल ना करें।
करेले और नीम के फूलों का सेवन भी लाभकारी होता है।
क्या करें क्या ना करें
डिटरजेंट (कपडे धोने का पाउडर) को बिलकुल भी ना छुएं, पर अगर मजबूरी से छूना भी पड़े तो सूती दस्तानों का प्रयोग करें।
एक्जिमा से ग्रसित जगह पर तंग कपडे ना पहनें।
सिंथेटिक कपड़ों का भी बिलकुल प्रयोग ना करे, क्योंकि इससे पसीने के निष्काशन में कठिनाई होती है।
तरबूज जैसे फलों का नियमित रूप से सेवन करें।
गाजर और पालक के रस का मिश्रण पीने से भी एक्जिमा के ठीक होने में लाभ मिलता है।
पानी का भरपूर मात्रा में सेवन करें और चाहें तो संतरे का रस भी पी सकते हैं।
अध्ययनों से पता चला है कि टमाटर का रस भी एक्जिमा को चंद दिनों में ठीक करने में सहायक सिद्ध होता है।
एक टिप्पणी भेजें