शुक्रवार, 14 जुलाई 2017

मलेरिया की जानकारी और विभिन्न चिकित्सा पद्धतियों से इलाज



    Malaria एक तरह का बुखार है – जिसे ‘प्लाज्मोडियम संक्रमण (Plasmodium Infection)’ और दुर्वात भी कहते है,आयुर्वेद में इसे विषम ज्वर कहते है । यह भी Dengue and Chikungunya की तरह संक्रमित मच्छरों के काटने से होने वाला बुखार है । लेकिन यह डेंगू और चिकनगुनिया के अपेक्षा कम प्रभावशाली होता है । लेकिन लोगो के उचित जानकारी के अभाव और लापरवाही के कारण यह जानलेवा भी साबित हो रहा है । विश्व स्वास्थ्य संगठन WHO के एक सर्वे के अनुसार विश्व भर में करीब 50 करोड़ लोग मलेरिया से प्रभवित होते है जिनमे से लगभग 27 लाख लोगो को अपने जान से हाथ धोना पड़ जाता है , जिनमें से आधे पाँच साल से कम के बच्चे होते हैं। , हालाँकि वास्तविक संख्या इससे भी कहीं अधिक हो सकती है । Malaria के प्रति सचेत रहने और आम लोगों में इसके प्रति जागरुकता फैलाने के लिए विश्व भर में प्रतिवर्ष ’25 अप्रैल’ को ‘विश्व मलेरिया दिवस’ मनाये जाता है
डॉक्टर की सलाह, समय पर रोकथाम और उचित देखरेख से, Malaria का इलाज पूर्णतयः सम्भव है. इसलिए किसी भी तरह के दहशत और अफवाहों में न आए और हमारे द्वारा सुझाए गए निर्देशो को पालन करे —
Malaria fever से बचने के तरीके
Malaria fever के लक्षण
Malaria fever से जुड़े परीक्षण
Malaria fever के घरेलू उपचार
Malaria fever की दवा
Malaria Fever एक विशेष प्रकार की 5 Plasmodium परजीवी / parasite के प्रजाति के कारण होता हैं।
Plasmodium Vivax
Plasmodium Falciparum
Plasmodium Malarie
Plasmodium Ovale
Plasmodium Knowlesi
भारत में ज्यादातर मलेरिया के संक्रमण Plasmodium Vivax और Plasmodium Falciparum के कारण ही होता हैं। इनमे से Plasmodium Falciparum ज्यादा खतरनाक होता है, यहाँ तक की इसमें रोगी की मृत्यु भी हो सकती है ।
जब किसी व्यक्ति को मलेरिया संक्रमित मच्छर कांटता हैं , तो उसमे मौजूद Plasmodim परजीवी अपना Sporozoite infection Blood में लार के रूप में छोड़कर व्यक्ति को infected कर देता हैं। शरीर में प्रवेश करने के आधे घंटे के अंदर यह परजीवी व्यक्ति के लिवर को संक्रमित कर देता हैं। लिवर के भीतर मलेरिया को फैलाने वाले छोटे जीव Merozoites बनने लगते हैं। यह Merozoites लिवर से रक्त में फैलकर लाल रक्त कोशिकाओ को प्रभावित कर तेज गति से बढ़ जाते हैं जिससे लाल रक्त कण टूटने लगते हैं और व्यक्ति को Malaria हो जाता हैं।
मलेरिया बुखार कैसे होता है 
मलेरिया परजीवी का संवाहक मुख्यत: संक्रमित मादा एनाफ़िलीज और मादा एनोलीज मच्‍छर होते है
मलेरिया बुखार का संक्रमण निम्नलिखित तरीको से होता है ___



1. सक्रमित मादा मच्‍छर से किसी भी स्‍वस्‍थ मनुष्‍य को :-

जब सक्रमित मादा एनोलीज और एनाफ़िलीज मच्‍छर किसी स्‍व‍स्‍थ्‍य व्‍यक्ति को काटता है तो वह अपने लार के साथ उस व्यक्ति के रक्‍त मे मलेरिया के जीवाणु को पहूंचा देता है।
2 . किसी मलेरिया रोगी से अन्‍य स्‍वस्‍थ व्‍यक्तियो को :-
जब कोई असंक्रमित मादा एनोलीज और एनाफ़िलीज मच्‍छर किसी मलेरिया संक्रमित व्यक्ति को काटता है तो, वह खून के साथ मलेरिया परजीवी को भी चूंस लेते हैं । 12-14 दिनो के बाद यह साधारण मच्छर संक्रमित होकर मलेरिया फेलाने मे सक्षम हो जाता है । इस तरह मलेरिया का संक्रमण मच्छरों से इंसानों में और इंसान से मच्छरों में होता हैं।
3. रक्त के आदान-प्रदान :-संक्रमित रक्त से Organ Transplant या Blood transplant के समय हो सकता है और मलेरिया से संक्रमित रक्त की सुई या इंजेक्शन के दोबारा उपयोग से भी सम्भवना होता हैं।
4 . मलेरिया संक्रमित गर्भिणी माता से शिशु को भी होने की सम्भवना हो सकती है ।
Malaria Sign and Symptoms in Hindi | मलेरिया बुखार के लक्षण
मलेरिया रोग के लक्षण साधरणतयः संक्रमित मच्‍छर के काटने के 10-12 दिनो के बाद रोगी में दिखना प्रारम्भ हो जाता हैं। जरुरी नहीं है की एक मलेरिया के रोगी में दिए गए सभी लक्षण नजर आए। मलेरिया के परजीवी की प्रजाति और मलेरिया के संक्रमण की तीव्रता के हिसाब से लक्षण में विषमताएं देखा जा सकते हैं। सामान्यत: मलेरिया बुखार के लक्षण कुछ ऐसे होते हैं —
* अचानक सर्दी लगना (कॅंपकॅंपी लगना ,ठण्ड लगने पर रजाई कम्‍बल ओढना)।
* फिर गर्मी लगकर तेज बुखार होना।
* पसीना आकर बुखार कम होना व कमजोर महसूस करना।
* तेज बुखार (104-105 F) जो की 2-7 दिन तक लगातार रहना
* साँस लेने में तकलीफ महसूस होना ।
* हाथ-पैर में ऐठन
*रोगी के सिर के अगले हिस्से , आंख के पिछले भाग में रहना , कमर, मांसपेशियों तथा जोड़ों में दर्द होना।
* मिचली nausea, उल्टी vomiting आना या महसूस होना



* शरीर पर लाल-गुलाबी चकत्ते red rashes होना

* आँखों लाल रहना ,आँखों में दर्द रहना
* हमेशा थका-थका और कमजोरी महसूश करना
* भूख न लगना, खाने की इच्छा में कमी, मुँह का स्वाद ख़राब होना, पेट ख़राब हो जाना
मलेरिया के स्टेज | Stages of Malaria
मलेरिया बुखार को तीन स्टेज में medical science में देखा जाता है:
कोल्ड स्टेज (Cold Stage): इस दौरान रोगी को तेज ठंड के साथ कपकपी होती है।
हॉट स्टेज (Hot Stage): इस दौरान रोगी को तेज बुखार, पसीने और उलटी आदि की शिकायत हो सकती है।
स्वेट स्टेज (Sweat Stage): बुखार के साथ-साथ मरीज को काफी पसीना आता है।
Malaria Checkup and Test in Hindi | मलेरिया बुखार से जुड़े जाँच
रक्त की माइक्रोस्कोप जांच (Peripheral Smear for Malarial Parasite) : इस जाँच में संक्रमित व्यक्ति का Blood slide पर लेकर Microscope से malaria virus के positive and negative होने का जाँच किया जाता है । अगर कोई व्यक्ति मलेरिया से संक्रमित हो तो उसका blood test result positive आता है । लेकिन कभी-कभी मलेरिया के परजीवी रक्त लेते समय रक्त में न रहकर लीवर में रहने के कारण मलेरिया होते हुए भी यह जांच Negative आ सकती हैं ।
कार्ड टेस्ट (Rapid Test) : इस जाँच के अन्तर्गत मलेरिया संक्रमित व्यक्ति के रक्त से serum अलग कर कार्ड पर डाला जाता हैं। अगर serum में Plasmodium परजीवी के antigen मौजूद रहते है तो यह सुनिशचित हो जाता है की आप मलेरिया से मलेरिया बुखार से संक्रमित हो ।
PCR Test : PCR का मतलब Polymerase Chain Reaction Test होता है ,इस जाँच से भी मलेरिया का संक्रमण है या नहीं यह सुनिश्चित किया जाता है ।
CBC Test : Complete Blood Count test में अगर Platelets अगर 1.5 लाख से कम रहता है और रोगी व्यक्ति में मलेरिया के लक्षण नजर दिखते है तो एहतियात के तौर पर मरीज को मलेरिया की दवा दिया जाता है ।
RREAD Test : Enhanced detection of enzyme activity in the rolling circle, डेनमार्क स्थित आरहस विश्वविद्यालय अनुसंधाकर्ताओं की ओर से विकसित यह प्रणाली प्लाजमोडियम पैरासाइट में टोपोआईसोमरेज नाम के एनजाइम की गतिविधियों को दर्ज करेगी । जिससे सिर्फ एक बूंद खून या लार के जरिए मलेरिया का पता लगाया जा सकेगा
मलेरिया से बचाव के तरीके 
चूँकि चिकनगुनिया बुखार, मच्छरों के काटने से होता है । सम्भवतः जितना हो सके मच्छरों से बचा जाए
* घर में सोते समय मच्छर दानी का प्रयोग करें ।
*घर में मच्छर भगाने वाले कॉयल , लिक्विड,इलेक्ट्रॉनिक बैट आदि का प्रयोग करें।
* घरो के अन्‍दर डी. डी .टी. जैसी कीटनाशकों का छिडकाव कराया जावे, जिससे मच्‍छरो का नष्‍ट किया जा सके।
* बाहर जाने से पहले मोस्कीटो रेप्लेंट क्रीम का प्रयोग करें ।
*आपके घर के आसपास जलजमाव वाली जगह के सफाई का खासा ख्याल रखे । जहां पानी एकत्रित होने से रोका नही जा सके वहां पानी पर मिटटी का तेल या जला हुआ तेल (मोबिल ऑयल ) छिडकें
* चूकि आमतौर पर यह मच्‍छर साफ पानी मे जल्‍दी पनपता है। इसलिए सप्‍ताह मे एक बार पानी से भरी टंकियो मटके, कूलर आदि खाली करके सुखा दे।
* टांके आदि पेयजल स्‍त्रोतो मे स्‍वास्‍थ्‍य कार्यकर्ता से टेमोफोस नामक दवाई समय समय पर डलवाते रहे।
* घर के दरवाजे , खिड़कियों और रोशनदानों पर जालियां लगाकर रखे ।
* टायर, डब्बे ,कूलर, A/C, पशुओ के लिए रखे पानी, गमले में रुके पानी को बदलते रहे और 2-3 दिन में साफ़ करते रहे
* खाली बर्तनों को खुले में न रखे और उसे ढक कर रखे ।
*अगर आस-पास में किसी को यह संक्रमण है तो विशेष सावधानी बरते।
*अगर 2-3 दिन से अधिक समय तक बुखार हो तो तुरन्त चिकत्सक से मिले और रक्तजाच जरूर करा लें ।
उपरोक्त लक्षण दिखने पर चिकित्सक के पास जाकर मलेरिया बुखार के लक्षण का संदेह व्यक्त करे । डॉक्टर की सलाह, समय पर रोकथाम और उचित देखरेख से किसी भी अनहोनी से बचा जा सकता है
मलेरिया से बचने के प्राकृतिक एवं घरेलू तरीके
*पिसी हुई काली मिर्च और नमक को नींबू में लगाकर मलेरिया के रोगी को चूसने को दें। एैसा करने स बुखार की गर्मी उतर जाती है।
*सुबह-सुबह खाली पेट तुलसी के 4 से 5 पत्तों को अच्छि तरह से चबाकर खाएं । 10 ग्राम तुलसी के पत्तों और 7 काली मिर्चों को पानी में पीसकर सुबह और शाम पीने से मलेरिया बुखार ठीक होता है ।
*सौंठ और पिसा धनिया को चूर्ण बराबर मात्रा में पानी के साथ लेने से भी मलेरिया बुखार में आराम मिलता है ।
*10 ग्राम गरम पानी और उसमें 2 ग्राम हींग डालकर उसका लेप बनाएं। अब इस लेप को हाथ और पैरों के नाखूनों पर लगाएं। 4 दिनों तक एैसा करने से रोगी जल्दी ठीक हो जाता है।
*गिलोय के काढ़े या रस में शहद मिलाकर 40-80 मिलीलीटर की मात्रा में रोज सेवन करने से मलेरिया में लाभ होता है ! यह मेटाबॉलिक रेट बढ़ाने, इम्युनिटी और प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत रखने और बॉडी को इंफेक्शन से बचाने में मदद करती है।
*मलेरिया के बुखार होने पर प्याज का रस बेहद फायदेमंद होता है। 4 काली मिर्च का पाउडर, 4 मिली प्याज का रस मिलाकर दिन में 3 बारी पीएं।
*चिरायते का काढ़ा 1 कप दिन में 3 बार कुछ दिनों तक नियमित पीने से मलेरिया रोग के सारे कष्टों में शीघ्र आराम मिलता है।
*लहसुन की 4 कलियों को छीलकर घी में मिला लें और इसका सेवन करें। एैसा करने से मलेरिया की ठंड उतर जाती है।
*मलेरिया बुखार के लिए गिलोय, पपीता पत्ते, एलोवेरा/मुसब्बर वेरा का रस और बकरी का दूध देना लाभप्रद होता है।
*प्याज के रस में एक चुटकी कालीमिर्च का चूर्ण मिलाकर सुबह-शाम पीते रहने से भी मलेरिया के बुखार में आराम मिलता है।

*हरड़ का चूर्ण (10 ग्राम) को 100 मिलीलीटर पानी में पकाकर काढ़ा बना ले। यह काढ़ा दिन में 3 बार पीने से मलेरिया रोग में फायदा होता है।
फलों का रस, दूधश् दही, लाइट जल्दी पचने वाली चीजें सेवन करें । विटामिन-सी युक्त, आयरन, इलेक्टक्रेलाइट, ओआररस लेते रहें जो कि शरीर को बुखार से थ्रोमबोसाटोपनिया होने से बचाने में सहायक है।
*ढाक : ढाक के बीजों की गिरी (10 ग्राम) और करंजवा के बीजों के गिरी (10 ग्राम) को पानी में घिसकर छोटी-छोटी गोलियां बनाकर सुखा लें। बुखार आने के 4 घण्टे पहले यह 1 गोली पानी के साथ लेने से मलेरिया के बुखार में आराम मिलता है।
| मलेरिया का होमियोपैथिक इलाज
मलेरिया के होमियोपैथिक दवाओ में निम्नलिखित दवाएं शामिल है —
#Cinchona.[Cinch]
#Arsenicum.[Ars]
#Nux vomica. [Nux-v]
#Natrum muriaticum. [Nat-m]
#Eupatorium perfoliatum. [Eup-per]
#Ipecac. [Ip]
#Chininum sulphuricum. [Chin-s]
#Gelsemium. [Gels]

  मलेरिया की आयुर्वेदिक दवा
*सप्त पर्ण घन सत्व से बनी सप्त पर्ण बटी



*महा सुदरशन चूर्ण के घन्सत्व से बनी गोलॊ का उपयोग दिन में चार बार करें

*विषमज्वरातंक लौह, आनंद भैरव रस, आरोग्यवर्धनी वटी, अपमंगल रस, चंद्रप्रभा गोल्डन। इन पांचों गोलियों को सुबह-शाम खाने के बाद खाएं।
*परवल, कुटकी, पाठा, नागरमोथा, गिलोय, लाल चंदन, सौंठ, तुलसी, मुलैठी व पीपल आदि का चूर्ण या पाउडर बनाकर सुबह और शाम 3 ग्राम की मात्रा में पानी से लेना रोगी के लिए लाभदायक होता है।
*नीम या सप्तपर्ण पेड़ की छाल का काढ़ा बनाकर भी पीया जा सकता है। इसके लिए 10 ग्राम छाल को आधा गिलास पानी में 1/4 होने तक उबालें और छानकर गुनगुना पिएं।
*आयुष-चौंसठ : आयुष-चौंसठ दवा विशेषकर मलेरिया के उपचार के लिए प्रयोग में ली जाती है। यह कैप्सूल के रूप में होती है जिसे मरीज को इलाज और बचाव दोनों के लिए देते हैं।
 मलेरिया की आधुनिक औषधि
मलेरिया के दवाओ में निम्नलिखित दवाएं शामिल है —
Chloroquine
Mefloquine
Mepacrine
Proguanil
Artemether
Artesunate
Bulaquine
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